प्रिय ब्लॉगर मित्रों,
प्रणाम !
ब्रिटेन और अमेरिका में कोई भी समस्या हो, एक ही यूनिवर्सल इमरजेंसी
हेल्पलाइन नंबर पर मदद ली जा सकती है। दिल्ली में दामिनी प्रकरण के बाद हमारे
देश में भी एकल हेल्पलाइन की जरूरत महसूस की जाने लगी फिर बात आई गई हो गई पर उत्तराखंड आपदा के समय भी इस तरह के नंबर की एक बार फिर जरूरत महसूस की गई ।
आइए
जानें देश और दुनिया में मौजूद हेल्पलाइन के बारे में....
भारत में
-हमारे देश में इस समय सरकारी आपातकालीन हेल्पलाइन के कई नंबर चल रहे हैं। जैसे यदि आपको पुलिस से तात्कालिक
सहायता लेनी हो, तो इसके लिए 100 नंबर डायल करना होता है, आग लग जाए तो
फायरब्रिगेड को बुलाने के लिए 101 नंबर है, वहीं दुर्घटना हो जाने पर
एंबुलेंस बुलाने के लिए 102 और 108 नंबर उपलब्ध हैं। इसी प्रकार हर समस्या
के लिए अलग-अलग नंबर मौजूद हैं।
-दामिनी प्रकरण के बाद दिल्ली सरकार ने महिलाओं को सुरक्षा देने के लिहाज से हेल्पलाइन के रूप में 181 नंबर आरंभ किया है।
- इस प्रकरण के बाद से भारत में भी चर्चा चल निकली है कि अमेरिका और
ब्रिटेन की तर्ज पर यहा भी एकल आपातकालीन हेल्पलाइन नंबर होना चाहिए। देश
में इसकी जरूरत शिद्दत से महसूस की जा रही है।
- अधिक नंबर होने से अचानक किसी मुसीबत में फंसने पर संबंधित हेल्पलाइन
नंबर याद रह पाने की समस्या बनी रहती है। इसलिए भारत में ऐसी हेल्पलाइन के
बारे में विचार किया जा रहा है, जिस पर किसी भी समस्या के लिए कभी भी फोन
किया जा सके।
विदेशों में
- पहला आपातकालीन नंबर ब्रिटेन में शुरू हुआ। 1 जुलाई, 1937 को लंदन
में 999 नंबर की सेवा शुरू की गई, जिस पर पूरे देश में कहीं से भी कॉल किया
जा सकता है।
- पहले अमेरिका में भी हमारे देश की तरह ही हर आपातकालीन समस्या के लिए अलग नंबर हुआ करता था।
-1957 में यूएस नेशनल एसोसिएशन ऑफ फायर के प्रमुख के मन में यह खयाल
आया कि एक ऐसा नंबर होना चाहिए, जिस पर किसी भी आपात स्थिति में और किसी भी
समस्या पर देश भर के लोग मदद के लिए कॉॅल कर सकें।
-एक दशक तक विचार-विमर्श के बाद 911 नंबर पर सहमति बनी।
-16 फरवरी, 1968 को पहली बार अलबामा के सीनेटर रैनकिन फाइट ने इस नंबर पर पहली कॉल की थी।
- पहली कॉल के बाद ही पूरे अमेरिका में इसका इस्तेमाल आम हो गया। इसे यूनिवर्सल इमरजेंसी नंबर कहा गया।
-अमेरिका के अलावा कनाडा, कोस्टारिका, जॉर्डन, लाइबेरिया, पराग्वे आदि में भी 911 ही यूनिवर्सल इमरजेंसी नंबर है।
-यूरोप, रूस, यूक्त्रेन, स्विट्जरलैंड आदि में 112 को यूनिवर्सल इमरजेंसी नंबर के रूप में 1990 में आरंभ किया गया।
मेरी राय मे भारत मे भी जल्द से जल्द एक ही यूनिवर्सल इमरजेंसी
हेल्पलाइन नंबर शुरू हो जाना चाहिए ... आप क्या कहते है ???
सादर आपका
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एक चिट्ठी अपने प्रिय के नाम
मेरा पता..?
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अब आज्ञा दीजिये ...
जय हिन्द !!!



