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शुक्रवार, 17 अगस्त 2018

विनम्र श्रद्धांजलि - श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी - ब्लॉग बुलेटिन परिवार

सभी भारत वासियों को नमस्कार।







महान पत्रकार, साहित्यकार, राजनीतिज्ञ तथा देश के पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी के देहावसान पर ब्लॉग बुलेटिन परिवार और समस्त हिन्दी ब्लॉग जगत उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करता है। 

जय जवान। जय किसान। जय विज्ञान


~  आज की बुलेटिन कड़ियाँ ~ 



















आज की बुलेटिन में सिर्फ इतना ही कल फिर मिलेंगे तब तक के लिए शुभरात्रि। जय हिन्द। जय भारत। 

गुरुवार, 16 अगस्त 2018

मौत से बेख़बर, ज़िन्दगी का सफ़र तय करने वाले सर्वप्रिय अटल जी को सादर नमन

नमस्कार साथियो,
आज की तारीख भारतीय इतिहास में अमर हो गई. एक दिन पहले 15 अगस्त को देशवासियों ने आज़ादी का जश्न मनाया और आज 16 अगस्त को सौम्य, सरल, सहृदय, संवेदनात्मक व्यक्तित्व भी मोह-माया की दुनिया से आज़ाद होकर अनंत यात्रा को चला गया. सभी के प्रिय अटल बिहारी वाजपेयी (25.12.1924 – 16.08.2018) के व्यवहार, उनकी कार्यशैली, वाकपटुता, वैचारिकी, भाषण शैली का अंदाज ही निराला था. विपक्ष के हमलों के बीच बड़ी साफगोई के साथ संसद में मैं अविवाहित जरूर हूं, लेकिन कुंवारा नहीं कहने वाले अटल जी का जीवन किसी खुली किताब की तरह था. उनकी सहजता, सरलता, मुस्कुराता चेहरा किसी को भी मोहित करने की क्षमता रखता था. यही कारण है कि राजनैतिक जगत में उनके साथी तो उनके कायल थे ही, उनके विपक्षी भी उनका सम्मान करते थे.  
उनके बारे में बहुत कुछ न कहते हुए, उन्हीं की एक कविता के द्वारा बुलेटिन परिवार की तरफ से विनम्र श्रद्धांजलि.
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ठन गई!
मौत से ठन गई!

जूझने का मेरा इरादा न था,
मोड़ पर मिलेंगे इसका वादा न था,

रास्ता रोक कर वह खड़ी हो गई,
यों लगा ज़िन्दगी से बड़ी हो गई।

मौत की उमर क्या है? दो पल भी नहीं,
ज़िन्दगी सिलसिला, आज कल की नहीं।

मैं जी भर जिया, मैं मन से मरूँ,
लौटकर आऊँगा, कूच से क्यों डरूँ?

तू दबे पाँव, चोरी-छिपे से न आ,
सामने वार कर फिर मुझे आज़मा।

मौत से बेख़बर, ज़िन्दगी का सफ़र,
शाम हर सुरमई, रात बंसी का स्वर।

बात ऐसी नहीं कि कोई ग़म ही नहीं,
दर्द अपने-पराए कुछ कम भी नहीं।

प्यार इतना परायों से मुझको मिला,
न अपनों से बाक़ी हैं कोई गिला।

हर चुनौती से दो हाथ मैंने किये,
आंधियों में जलाए हैं बुझते दिए।

आज झकझोरता तेज़ तूफ़ान है,
नाव भँवरों की बाँहों में मेहमान है।

पार पाने का क़ायम मगर हौसला,
देख तेवर तूफ़ाँ का, तेवरी तन गई।

मौत से ठन गई।

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