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शनिवार, 24 अगस्त 2019

कृष्णाजन्माष्टमी के पावन अवसर पर हार्दिक शुभकामनाएं

प्रिय ब्लॉगर मित्रों,
प्रणाम |

वो मोर मुकुट, वो है नंद लाला;
वो मुरली मनोहर, बृज का ग्वाला;
वो माखन चोर, वो बंसी वाला;
खुशियां मनायें उसके जन्म की;
जो है इस जग का रखवाला।

ब्लॉग बुलेटिन टीम की ओर से आप सभी को सपरिवार #कृष्णाजन्माष्टमी के पावन अवसर पर हार्दिक शुभकामनाएं।


सादर आपका 

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विश्वेश्वर

तुम ही हो पतवार कान्हा !

लिप्सा के शूल मुझे नहीं चुभते

नँद नन्दन कित गये

चुप मत रह एक लप्पड़ मार के तो देख

व्यस्तताओं के जाल में...संजय भास्कर

कृष्ण का प्रेम

जन्माष्टमी की शुभकामनाएं

लघुकथा : किन्नर मन

आरक्षण और संघ के विरुद्ध दुष्प्रचार

हरिशंकर परसाई का व्यंग्य: एक मध्यमवर्गीय कुत्ता

अमर शहीद राजगुरु जी की १११ वीं जयंती

शब्दों की माला

अरूण जेटली का निधन : राजनीति का ‘अरुण’ अस्त-

दिल्ली से जयपुर ,उदयपुर ,माउंटआबू ....वाया रोड (तृतीय भाग )

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अब आज्ञा दीजिए ... 

जय हिन्द !!!

गुरुवार, 22 अगस्त 2019

बैंक वालों का फोन कॉल - ब्लॉग बुलेटिन

प्रिय ब्लॉगर मित्रों,
प्रणाम |

बैंक से फोन आया और मुझसे कहने लगे कि... 

"आप 6000/- रूपये प्रति महीना जमा करवाओगे तो रिटायरमेंट पे 1 करोड़ रुपये मिलेंगे!"

मैं बोला कि ... 

"प्लान उल्टा कर दो आप मुझे अभी 1 करोड़ रुपये दे दो और हर महीने 6000/- रुपये लेते रहना मेरे मरने तक!"

कमबख्तों  ने फोन ही काट दिया!

ऐसा मैंने क्या गलत कह दिया !?

सादर आपका 

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कुछ बात बेबात की

कविता : बूँदे भी कुछ कहना चाहती है

भागते रहो

हथकड़ी

माँ

कैंसर-दर-कैंसर(लघुकथा)

बाटला हाउस -------mangopeople

बैलीनो कार ड्राइव

बड़ी भूख है जिंदगी में !!!

उसकी याद

ऐ दोस्त...

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अब आज्ञा दीजिए ... 

जय हिन्द !!!

सोमवार, 19 अगस्त 2019

इनाम में घोड़ा लेंगे या सेव - ब्लॉग बुलेटिन

प्रिय ब्लॉगर मित्रों,
प्रणाम |

एक राजा था,,,उसने एक सर्वे करने का सोचा कि
मेरे राज्य के लोगों की घर गृहस्थी पति से चलती है या पत्नि से...??
🤷🏻‍♂🤷🏻‍♂

उसने एक ईनाम रखा कि "  जिसके घर में पति का हुक्म चलता हो, उसे मनपसंद घोडा़ ईनाम में मिलेगा और जिसके घर में पत्नि की सरकार हो वह एक सेब ले जाए.. ।
🐴🍎

एक के बाद एक सभी नगरजन सेब उठाकर जाने लगे ।
राजा को चिंता होने लगी.. क्या मेरे राज्य में सभी जगह पत्नी का हुक्म चलता है,,🤔🤔
इतने में एक लम्बी लम्बी मूछों वाला, मोटा तगडा़ और लाल लाल आखोंवाला जवान आया और बोला
" राजा जी मेरे घर में मेरा ही हुक्म चलता है .. घोडा़ मुझे दीजिए .."

राजा खुश हो गए और कहा जा अपना मनपसंद घोडा़ ले जा ..।😀😀
जवान काला घोडा़ लेकर रवाना हो गया ।

घर गया और फिर थोडी़ देर में दरबार में वापिस लौट आया।

राजा: " क्या हुआ जवामर्द ? वापिस क्यों आया..??"

जवान : " महाराज, घरवाली कहती है काला रंग अशुभ होता है, सफेद रंग शांति का प्रतिक होता है तो आप मुझे सफेद रंग का घोडा़ दीजिए।

राजा: " घोडा़ रख ..और सेब लेकर चलता बन,,,

इसी तरह रात हो गई ...दरबार खाली हो गया,, लोग सेब लेकर चले गए ।

आधी रात को महामंत्री ने दरवाजा खटखटाया,,,

राजा : " बोलो महामंत्री कैसे आना हुआ ?"

महामंत्री : " महाराज आपने सेब और घोडा़ ईनाम में रखा ,इसकी जगह एक मण अनाज या सोना वगेरह रखा होता तो लोग  कुछ दिन खा सकते या जेवर बना सकते थे,,,

राजा :" मुझे तो ईनाम में यही रखना था लेकिन महारानी ने कहा कि सेब और घोडा़ ही ठीक है इसलिए वही रखा,,,,

महामंत्री : " महाराज आपके लिए सेब काट दुँ..!!

राजा को हँसी आ गई और पुछा यह सवाल तुम दरबार में या कल सुबह भी पुछ सकते थे तो आधी रात को क्यों आये ??

महामंत्री : " मेरी धर्मपत्नी ने कहा अभी जाओ और पुछ के आओ,,,सच्ची घटना का पता चले।

राजा ( बात काटकर ) : " महामंत्री जी , सेब आप खुद ले लोगे या घर भेज दिया जाए ।"

सादर आपका
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लोहे का घर-56

३७६. इतवार

कभी तो चौंक के देखे कोई हमारी तरफ, क‍िसी की आंख में हमको भी इंतज़ार द‍िखे ….Gulzar

बलिदानी मदन लाल ढींगरा

डॉ शंकर दयाल शर्मा - सदैव श्रद्धेय व्यक्तित्व

विश्वास है

आने वाले कल के लिए

तस्वीर तेरी आँखों में बसाया.......

भाव जगेंं जब अनुपम भीतर

जाने क्यों आँखें रहती नम नम ...

उठ लखन लाल प्रिय भाई - राम की आकुलता पर आधारित सुन्दर गीत

कविता की रेसिपी

थेथर से होते थे न दोस्त

एक सफ़र स्त्री मन का खुद से बातें करते हुए ...

#विश्व_फोटोग्राफी_दिवस #लघुकथा #कैमरा

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अब आज्ञा दीजिए ...

जय हिन्द !!!

शुक्रवार, 16 अगस्त 2019

प्रथम पुण्यतिथि पर परम आदरणीय स्व॰ अटल बिहारी वाजपाई जी को नमन

प्रिय ब्लॉगर मित्रों,
प्रणाम |

"मैं ऐसे भारत का सपना देखता हूँ जो समृद्ध और मजबूत है। ऐसा भारत जो दुनिया के महान देशों की पंक्ति में खड़ा हो..."

- पूर्व प्रधानमंत्री स्व॰ अटल बिहारी वाजपेयी

भारत के एक नागरिक के तौर पर मेरा प्रयास रहेगा कि आप के सपनों के भारत की तरक़्क़ी में मेरा भी योगदान हो।

ब्लॉग बुलेटिन टीम और हिन्दी ब्लॉग जगत की ओर से प्रथम पुण्यतिथि पर परम आदरणीय स्व॰ अटल बिहारी वाजपाई जी को सादर नमन और हार्दिक श्रद्धांजलि।

🙏🙏

सादर आपका 

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अलख जगाते कलमकार ही

इन्द्रधनुष के रंग

अज़नबी

इच्छा

जरा याद उन्हें भी कर लो ...!

गांधीजी का पत्र वल्लभभाई पटेल को

अभिनय सम्राट

भाषा में जड़ा समाजशास्त्र

अब चीन के सामने खडी हो रही “वाल ऑफ़ इंडिया”

कहानी : उफान

फुहारें

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अब आज्ञा दीजिए ... 

जय हिन्द !!!

बुधवार, 14 अगस्त 2019

73 वें स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति कोविंद का राष्ट्र को संबोधन

प्रिय ब्लॉगर मित्रों,
प्रणाम |

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने 73 वें स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर आज राष्ट्र को संबोधित किया। राष्ट्रपति ने शाम लगभग सात बजे राष्ट्र के नाम संबोधन शुरू किया और इसे आकाशवाणी तथा दूरदर्शन के सभी केंद्रों से प्रसारित किया गया  सबसे पहले राष्ट्रपति कोविंद ने अपना संबोधन हिन्दी भाषा मेें किया, इसके तुरंत बाद इसका अंग्रेजी संस्करण प्रसारित किया गया। संबोधन का हिन्दी और अंग्रेजी में प्रसारण होने के बाद दूरदर्शन सभी क्षेत्रीय भाषाओं में भी इसका प्रसारण करेगा। 
आकाशवाणी से भी राष्ट्रपति के संबोधन का क्षेत्रीय भाषाओं में प्रसारण आज ही शाम आठ बजे से होगा।

संबोधन की मुख्य बातें -
  • हमारी संस्कृति की यह विशेषता है कि हम सब प्रकृति के लिए और सभी जीवों के लिए प्रेम और करुणा का भाव रखते हैं। पूरी दुनिया के जंगली बाघों की तीन-चौथाई आबादी को हमने सुरक्षित बसेरा दिया है — राष्ट्रपति कोविन्द
  • भारत युवाओं का देश है। हमारे युवाओं की ऊर्जा खेल से लेकर विज्ञान तक और ज्ञान की खोज से लेकर सॉफ्ट स्किल तक कई क्षेत्रों में अपनी प्रतिभा बिखेर रही है।- राष्ट्रपति कोविन्द
  • लोगों के जनादेश में उनकी आकांक्षाएं साफ दिखाई देती हैं। इन आकांक्षाओं को पूरा करने में सरकार अपनी भूमिका निभाती है। मेरा मानना है कि 130 करोड़ भारतवासी अपने कौशल, प्रतिभा, उद्यम तथा इनोवेशन के जरिए, बहुत बड़े पैमाने पर, विकास के और अधिक अवसर पैदा कर सकते हैं— राष्ट्रपति कोविन्द
  • मुझे इस बात की प्रसन्नता है कि संसद के हाल ही में संपन्न हुए सत्र में लोकसभा और राज्यसभा, दोनों ही सदनों की बैठकें बहुत सफल रही हैं — राष्ट्रपति कोविन्द
  • मुझे विश्वास है कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के लिए हाल ही में किए गए बदलावों से वहां के निवासी बहुत अधिक लाभान्वित होंगे — राष्ट्रपति कोविन्द
  • 2019 का यह साल, गुरु नानक देवजी का 550वां जयंती वर्ष भी है। वे भारत के सबसे महान संतों में से एक हैं। गुरु नानक देवजी के सभी अनुयायियों को मैं इस पावन जयंती वर्ष के लिए अपनी हार्दिक शुभकामनाएं देता हूं — राष्ट्रपति कोविन्द
  • 2 अक्टूबर को हम राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 150वीं जयंती मनाएंगे। गांधीजी, हमारे स्वतंत्रता संग्राम के महानायक थे। वे समाज को हर प्रकार के अन्याय से मुक्त कराने के प्रयासों में हमारे मार्गदर्शक भी थे — राष्ट्रपति कोविन्द
  • हम अपने उन असंख्य स्वतन्त्रता सेनानियों और क्रांतिकारियों को कृतज्ञता के साथ याद करते हैं, जिन्होंने हमें आज़ादी दिलाने के लिए संघर्ष, त्या‍ग और बलिदान के महान आदर्श प्रस्तुत किए — राष्ट्रपति कोविन्द
  • तिहत्तरवें स्वाधीनता दिवस की पूर्व संध्या पर आप सभी को मेरी हार्दिक बधाई! यह स्वाधीनता दिवस भारत-माता की सभी संतानों के लिए बेहद खुशी का दिन है, चाहे वे देश में हों या विदेश में। — राष्ट्रपति कोविन्द
संबोधन  का वीडियो - 

 
 सादर आपका

शनिवार, 10 अगस्त 2019

मुद्रा स्फीति के बढ़ते रुझानों - दाल, चावल, दही, और सलाद

प्रिय ब्लॉगर मित्रों,
प्रणाम |

😀😀

"पत्नी ने पति को ऑफिस में फोन करके पूछा- आज लंच में क्या खाया ??

पति ने झल्ला कर कहा- तुम्हें बस इतना ही आता है !! क्या खाया, कौन-सा सीरियल देखा, कौन-सा गाना सुना ?

😀😀

पत्नी ने कहा- ओह माफ करना, तो यह बताइए कि मौद्रिक बाजारों में मुद्रा स्फीति के बढ़ते रुझानों को कम से कम हस्तक्षेप के द्वारा काबू में करने के लिए भारतीय रिज़र्व बैंक को क्या कदम उठाने चाहिए और वित्त मंत्रालय को विदेशी भुगतान के असुंतलन से निपटने के लिए क्या कदम उठाने चाहिए?

😀😀

थोड़ी देर मौन रहने के बाद पति ने कहा- दाल, चावल, दही, और सलाद खाया।"😀

सादर आपका
शिवम् मिश्रा

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बरसों से इंतेज़ार था...

पारो भाग (9)

क़बूल नहीं मोहब्बत में शर्त

पारदर्शी वक्षस्थल - -

सावन और उद्गगीत

"मंथन"

३७४. उसका बोलना

हे वीर सैनिक तुमको नमन

केसर क्यारी में

शब्दों का जो अर्थ बना है

नमन है तुझको कवि!

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अब आज्ञा दीजिए ... 

जय हिन्द !!!

शुक्रवार, 9 अगस्त 2019

काकोरी कांड के सभी जांबाज क्रांतिकारियों को नमन

प्रिय ब्लॉगर मित्रों ,
प्रणाम |

भारतीय स्वाधीनता संग्राम में काकोरी कांड एक ऐसी घटना है जिसने अंग्रेजों की नींव झकझोर कर रख दी थी। अंग्रेजों ने आजादी के दीवानों द्वारा अंजाम दी गई इस घटना को काकोरी डकैती का नाम दिया और इसके लिए कई स्वतंत्रता सेनानियों को 19 दिसंबर 1927 को फांसी के फंदे पर लटका दिया।

फांसी की सजा से आजादी के दीवाने जरा भी विचलित नहीं हुए और वे हंसते-हंसते फांसी के फंदे पर झूल गए। बात 9 अगस्त 1925 की है जब चंद्रशेखर आजाद, राम प्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्ला खान, राजेंद्र लाहिड़ी और रोशन सिंह सहित 10 क्रांतिकारियों ने मिलकर लखनऊ से 14 मील दूर काकोरी और आलमनगर के बीच ट्रेन में ले जाए जा रहे सरकारी खजाने को लूट लिया।

दरअसल क्रांतिकारियों ने जो खजाना लूटा उसे जालिम अंग्रेजों ने हिंदुस्तान के लोगों से ही छीना था। लूटे गए धन का इस्तेमाल क्रांतिकारी हथियार खरीदने और आजादी के आंदोलन को जारी रखने में करना चाहते थे।
इतिहास में यह घटना काकोरी कांड के नाम से जानी गई, जिससे गोरी हुकूमत बुरी तरह तिलमिला उठी। उसने अपना दमन चक्र और भी तेज कर दिया।

अपनों की ही गद्दारी के चलते काकोरी की घटना में शामिल सभी क्रांतिकारी पकडे़ गए, सिर्फ चंद्रशेखर आजाद अंग्रेजों के हाथ नहीं आए। हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन आर्मी के 45 सदस्यों पर मुकदमा चलाया गया जिनमें से राम प्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्ला खान, राजेंद्र लाहिड़ी और रोशन सिंह को फांसी की सजा सुनाई गई।
ब्रिटिश हुकूमत ने पक्षपातपूर्ण ढंग से मुकदमा चलाया जिसकी बड़े पैमाने पर निंदा हुई क्योंकि डकैती जैसे मामले में फांसी की सजा सुनाना अपने आप में एक अनोखी घटना थी। फांसी की सजा के लिए 19 दिसंबर 1927 की तारीख मुकर्रर की गई लेकिन राजेंद्र लाहिड़ी को इससे दो दिन पहले 17 दिसंबर को ही गोंडा जेल में फांसी पर लटका दिया गया। राम प्रसाद बिस्मिल को 19 दिसंबर 1927 को गोरखपुर जेल और अशफाक उल्ला खान को इसी दिन फैजाबाद जेल में फांसी की सजा दी गई। फांसी पर चढ़ते समय इन क्रांतिकारियों के चेहरे पर डर की कोई लकीर तक मौजूद नहीं थी और वे हंसते-हंसते फांसी के फंदे पर चढ़ गए।
 
काकोरी की घटना को अंजाम देने वाले आजादी के सभी दीवाने उच्च शिक्षित थे। राम प्रसाद बिस्मिल प्रसिद्ध कवि होने के साथ ही भाषायी ज्ञान में भी निपुण थे। उन्हें अंग्रेजी, हिंदुस्तानी, उर्दू और बांग्ला भाषा का अच्छा ज्ञान था। अशफाक उल्ला खान इंजीनियर थे। काकोरी की घटना को क्रांतिकारियों ने काफी चतुराई से अंजाम दिया था। इसके लिए उन्होंने अपने नाम तक बदल लिए। राम प्रसाद बिस्मिल ने अपने चार अलग-अलग नाम रखे और अशफाक उल्ला ने अपना नाम कुमार जी रख लिया।
 
खजाने को लूटते समय क्रान्तिकारियों को ट्रेन में एक जान पहचान वाला रेलवे का भारतीय कर्मचारी मिल गया। क्रांतिकारी यदि चाहते तो सबूत मिटाने के लिए उसे मार सकते थे लेकिन उन्होंने किसी की हत्या करना उचित नहीं समझा। उस रेलवे कर्मचारी ने भी वायदा किया था कि वह किसी को कुछ नहीं बताएगा लेकिन बाद में इनाम के लालच में उसने ही पुलिस को सब कुछ बता दिया। इस तरह अपने ही देश के एक गद्दार की वजह से काकोरी की घटना में शामिल सभी जांबाज स्वतंत्रता सेनानी पकड़े गए लेकिन चंद्रशेखर आजाद जीते जी कभी अंग्रेजों के हाथ नहीं आए।

रविवार, 4 अगस्त 2019

भगवान को भेंट - ब्लॉग बुलेटिन

प्रिय ब्लॉगर मित्रों,
प्रणाम |

बहुत पुरानी बात है, एक सेठ के पास एक व्यक्ति काम करता था । सेठ उस व्यक्ति पर बहुत विश्वास करता था जो भी जरुरी काम हो वह सेठ हमेशा उसी व्यक्ति से कहता था।
वो व्यक्ति भगवान का बहुत बड़ा भक्त था । वह सदा भगवान के चिंतन, भजन, कीर्तन, स्मरण तथा सत्संग आदि का लाभ लेता रहता था ।
.
एक दिन उस भक्त ने सेठ से श्री तीर्थ यात्रा करने के लिए कुछ दिन की छुट्टी मांगी। सेठ ने उसे छुट्टी देते हुए कहा,  भाई मैं तो हूं संसारी आदमी । हमेशा व्यापार के काम में व्यस्त रहता हूं जिसके कारण कभी तीर्थ गमन का लाभ नहीं ले पाता ।

तुम जा ही रहे हो तो यह लो 100 रुपए। यह भेंट मेरी ओर से श्री प्रभुजी के चरणों में समर्पित कर देना। भक्त सेठ से सौ रुपए लेकर तीर्थ यात्रा पर निकल गया ।

कई दिन की यात्रा करने के बाद वह गन्तव्य तीर्थ पर पहुंचा । मंदिर की ओर प्रस्थान करते समय उसने रास्ते में देखा कि बहुत सारे संत, भक्त जन, संकीर्तन बड़ी मस्ती में कर रहे हैं ।

सभी की आंखों से अश्रु धारा बह रही है । जोर-जोर से प्रभु जी की जय, प्रभुजी की जय से गूंज रहा है। संकीर्तन में बहुत आनंद आ रहा था। भक्त भी वहीं रुक कर संकीर्तन का आनंद लेने लगा ।
.
फिर उसने देखा कि संकीर्तन करने वाले भक्तजनों के इतनी देर से संकीर्तन करने के कारण उनके होंठ सूखे हुए हैं वह दिखने में कुछ भूखे भी प्रतीत हो रहे हैं उसने सोचा कि क्यों ना सेठ के सौ रुपए से इन भक्तों को भोजन करा दूँ।

उसने उन सभी को उन सौ रुपए में से भोजन की व्यवस्था कर दी। सबको भोजन कराने में उसे कुल 98 रुपए खर्च करने पड़े ।

उसके पास दो रुपए बच गए तो  उसने सोचा कि  चलो अच्छा हुआ ,दो रुपए तीर्थ के मन्दिर जी के  प्रभु के चरणों में सेठ के नाम से चढ़ा दूंगा। जब सेठ पूछेगा तो मैं कहूंगा वह पैसे चढ़ा दिए। सेठ यह तो नहीं पूछेगा कि 100 रुपए चढ़ाए। सेठ अगर पूछेगा कि    पैसे चढ़ा दिये  तो मैं बोल दूंगा कि, पैसे चढ़ा दिए। झूठ भी नहीं होगा और काम भी हो जाएगा ।

उस भक्त ने प्रभु के दर्शनों के लिए मंदिर में प्रवेश किया। प्रभुजी की छवि को निहारते हुए उनको अपने हृदय में विराजमान किया। अंत में उसने सेठ के दो रुपए प्रभु जी के चरणो में चढ़ा दिए और बोला, यह दो रुपए सेठ ने भेजे हैं ।

उसी रात सेठ के पास स्वप्न मे प्रभु आए, सेठ को  आशीर्वाद दिया और बोले - सेठ तुम्हारे 98 रुपए मुझे मिल गए हैं। यह कहकर अंतर्ध्यान हो गए ।

सेठ जाग गया व सोचने लगा मेरा नौकर तो बड़ा ईमानदार है, पर अचानक उसे क्या जरुरत पड़ गई थी  कि उसने दो रुपए भगवान को कम चढ़ाए ? उसने दो रुपए का क्या खा लिया ? उसे ऐसी क्या जरूरत पड़ी ? ऐसा विचार सेठ करता रहा ।

काफी दिन बीतने के बाद भक्त वापस आया और सेठ के पास पहुंचा। सेठ ने कहा कि मेरे पैसे प्रभुजी को चढ़ा दिए थे ?

भक्त बोला - हां, मैंने पैसे चढ़ा दिए थे।

सेठ ने कहा पर तुमने 98 रुपए क्यों चढ़ाए  ? दो रुपए किस काम में प्रयोग किए। तब भक्त ने सारी बात बताई कि उसने 98 रुपए से संतो को भोजन करा दिया था। और प्रभु जी को सिर्फ दो रुपए चढ़ाये थे ।

सेठ सारी बात समझ गया व बड़ा खुश हुआ तथा भक्त के चरणों में गिर पड़ा और बोला आप धन्य हो। आपकी वजह से मुझे प्रभुजी के दर्शन यहीं बैठे-बैठे हो गए ।

सन्तमत विचार - भगवान को आपके धन की कोई आवश्यकता नहीं है। भगवान को वह 98 रुपए स्वीकार हैं जो जीव मात्र की सेवा में खर्च किए गए और उस दो रुपए का कोई महत्व नहीं जो उनके चरणों में नगद चढ़ाए गए।

सादर आपका

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बुढ़ी नानी का चश्मा

Blogger of the Year 2019 : डॉ. चंद्रेश कुमार छतलानी व‍िजेता, मुकेश कुमार सिन्हा रहे उप विजेता

'मन' खुशी मुबारक !

पारो भाग (1)

अच्छा क्या है गरम या ठंडे पानी से नहाना ?

मिलना ''मैं गाय जैसे'' (मैग्सेसे) पुरस्कार का

३७२. घर में प्रकृति

विचार बुनते है ज़िंदगी

हम भारत के वासी हैं

सफ़र

ढिंचैक पूजा को मिला चमन जैसेतैसे पुरस्कार

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 अब आज्ञा दीजिये ... 

जय हिन्द !!!

रविवार, 23 जून 2019

अमर शहीद राजेन्द्रनाथ लाहिड़ी जी की ११८ वीं जयंती - ब्लॉग बुलेटिन

प्रिय ब्लॉगर मित्रों,
प्रणाम |

राजेन्द्रनाथ लाहिड़ी
राजेन्द्रनाथ लाहिड़ी (अंग्रेजी:Rajendra Nath Lahiri, बाँग्ला:রাজেন্দ্র নাথ লাহিড়ী, जन्म:२३ जून १९०१ - मृत्यु:१७ दिसम्बर १९२७) भारत के स्वतंत्रता संग्राम के महत्वपूर्ण स्वतंत्रता सेनानी थे। युवा क्रान्तिकारी लाहिड़ी की प्रसिद्धि काकोरी काण्ड के एक प्रमुख अभियुक्त के रूप में हैं।
संक्षिप्त जीवनी
बंगाल (आज का बांग्लादेश) में पबना जिले के अन्तर्गत मड़याँ (मोहनपुर) गाँव में २३ जून १९०१ के दिन क्षिति मोहन लाहिड़ी के घर राजेन्द्रनाथ लाहिड़ी का जन्म हुआ। उनकी माता का नाम बसन्त कुमारी था। उनके जन्म के समय पिता क्रान्तिकारी क्षिति मोहन लाहिड़ी व बड़े भाई बंगाल में चल रही अनुशीलन दल की गुप्त गतिविधियों में योगदान देने के आरोप में कारावास की सलाखों के पीछे कैद थे। दिल में राष्ट्र-प्रेम की चिन्गारी लेकर मात्र नौ वर्ष की आयु में ही वे बंगाल से अपने मामा के घर वाराणसी पहुँचे। वाराणसी में ही उनकी शिक्षा दीक्षा सम्पन्न हुई। काकोरी काण्ड के दौरान लाहिड़ी काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में इतिहास विषय में एम० ए० (प्रथम वर्ष) के छात्र थे। १७ दिसम्बर १९२७ को गोण्डा के जिला कारागार में अपने साथियों से दो दिन पहले उन्हें फाँसी दे दी गयी। राजेन्द्रनाथ लाहिड़ी को देश-प्रेम और निर्भीकता की भावना विरासत में मिली थी। राजेन्द्रनाथ काशी की धार्मिक नगरी में पढाई करने गये थे किन्तु संयोगवश वहाँ पहले से ही निवास कर रहे सुप्रसिद्ध क्रान्तिकारी शचींद्रनाथ सान्याल के सम्पर्क में आ गये। राजेन्द्र की फौलादी दृढ़ता, देश-प्रेम और आजादी के प्रति दीवानगी के गुणों को पहचान कर शचीन दा ने उन्हें अपने साथ रखकर बनारस से निकलने वाली पत्रिका बंग वाणी के सम्पादन का दायित्व तो दिया ही, अनुशीलन समिति की वाराणसी शाखा के सशस्त्र विभाग का प्रभार भी सौंप दिया। उनकी कार्य कुशलता को देखते हुए उन्हें हिन्दुस्तान रिपब्लिकन ऐसोसिएशन की गुप्त बैठकों में आमन्त्रित भी किया जाने लगा।
काकोरी काण्ड
फाँसी की फन्दा और लाहिड़ी का अन्तिम सन्देश
क्रान्तिकारियों द्वारा चलाये जा रहे स्वतन्त्रता-आन्दोलन को गति देने के लिये धन की तत्काल व्यवस्था को देखते हुए शाहजहाँपुर में दल के सामरिक विभाग के प्रमुख पण्डित राम प्रसाद 'बिस्मिल' के निवास पर हुई बैठक में राजेन्द्रनाथ लाहिड़ी भी सम्मिलित हुए जिसमें सभी क्रान्तिकारियों ने एकमत से अंग्रेजी सरकार का खजाना लूटने की योजना को अन्तिम रूप दिया था। इस योजना में लाहिड़ी का अहम किरदार था क्योंकि उन्होंने ही अशफाक उल्ला खाँ के ट्रेन न लूटने के प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया था, जिसके परिणामस्वरूप अशफाक ने अपना प्रस्ताव वापस ले लिया था।
इस योजना को अंजाम देने के लिये लाहिड़ी ने काकोरी से ट्रेन छूटते ही जंज़ीर खींच कर उसे रोक लिया और ९ अगस्त १९२५ की शाम सहारनपुर से चलकर लखनऊ पहुँचने वाली आठ डाउन ट्रेन पर क्रान्तिकारी पण्डित राम प्रसाद 'बिस्मिल' ने अशफाक उल्ला खाँ और चन्द्रशेखर आजाद व ६ अन्य सहयोगियों की मदद से धावा बोल दिया। कुल १० नवयुवकों ने मिलकर ट्रेन में जा रहा सरकारी खजाना लूट लिया। मजे की बात यह कि उसी ट्रेन में सफर कर रहे अंग्रेज सैनिकों तक की हिम्मत न हुई कि वे मुकाबला करने को आगे आते।
काकोरी काण्ड के बाद बिस्मिल ने लाहिड़ी को बम बनाने का प्रशिक्षण लेने बंगाल भेज दिया। राजेन्द्र बाबू कलकत्ता गये और वहाँ से कुछ दूर स्थित दक्षिणेश्वर में उन्होंने बम बनाने का सामान इकट्ठा किया। अभी वे पूरी तरह से प्रशिक्षित भी न हो पाये थे कि किसी साथी की असावधानी से एक बम फट गया और बम का धमाका सुनकर पुलिस आ गयी। कुल ९ साथियों के साथ राजेन्द्र भी गिरफ्तार हो गये। उन पर मुकदमा दायर किया और१० वर्ष की सजा हुई जो अपील करने पर ५ वर्ष कर दी गयी। बाद में ब्रिटिश राज ने दल के सभी प्रमुख क्रान्तिकारियों पर काकोरी काण्ड के नाम से मुकदमा दायर करते हुए सभी पर सम्राट के विरुद्ध सशस्त्र युद्ध छेड़ने तथा खजाना लूटने का न केवल आरोप लगाया बल्कि झूठी गवाहियाँ व मनगढ़न्त प्रमाण पेश कर उसे सही साबित भी कर दिखाया। राजेन्द्र लाहिड़ी को काकोरी काण्ड में शामिल करने के लिये बंगाल से लखनऊ लाया गया।
तमाम अपीलों व दलीलों के बावजूद सरकार टस से मस न हुई और अन्तत: राजेन्द्रनाथ लाहिड़ी, पण्डित राम प्रसाद बिस्मिल,अशफाक उल्ला खाँ तथा ठाकुर रोशन सिंह- एक साथ चार व्यक्तियों को फाँसी की सजा सुना दी गयी। लाहिड़ी को अन्य क्रान्तिकारियों से दो दिन पूर्व १७ दिसम्बर को ही फाँसी दे दी गयी।
आजादी के इस दीवाने ने हँसते-हँसते फाँसी का फन्दा चूमने से पहले वंदे मातरम् की हुंकार भरते हुए कहा था- "मैं मर नहीं रहा हूँ, बल्कि स्वतन्त्र भारत में पुनर्जन्म लेने जा रहा हूँ।"
 
ब्लॉग बुलेटिन टीम और हिन्दी ब्लॉग जगत की ओर से अमर शहीद राजेन्द्रनाथ लाहिड़ी जी उनकी ११८ वीं जयंती पर शत शत नमन |
 
सादर आपका 
 
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"स्नेह का रुतबा"

मेरा पिया त्रिगुणातीत!

मैं एक विरोधाभास का पीछा कर रही हूँ, तुम भी एक कल्पना को गले लगाए हो !

कभी अलविदा ना कहना तुम

नीला आलोक

फ़िल्टर कॉफ़ी

584. चमकी मौत

प्रकृति सुर और संगीत

प्रगल्भता की ओर

दिल मेरा

मियाँ मुनक्का की जासूसी

३६४. इच्छाएँ

रिक्शे वाला

उजाला जीवन में तभी आएगा जब इंसानियत का उजाला दिल में जल जाएगा!

परंपरागत ज्ञान और आधुनिक विज्ञान

समर्पित है राष्ट्रभक्तों को २३ जून

जीवन में आ जाती बहार

क्रिकेट स्पोर्ट नहीं इंडस्ट्री है : गिरीश बिल्लोरे ''मुकुल"

लघुकथा- मेरा सपना

इस अकाल बेला में मुक्तिबोध

अमृता एक औषधि

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अब आज्ञा दीजिए ...

जय हिन्द !!!

शुक्रवार, 21 जून 2019

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2019 - ब्लॉग बुलेटिन


प्रिय ब्लॉगर मित्रों,
प्रणाम |

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस (अंग्रेज़ी: International Yoga Day) को प्रतिवर्ष '21 जून' को मनाने का निर्णय संयुक्त राष्ट्र द्वारा लिया गया है। भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अपील पर संयुक्त राष्ट्र ने '21 जून' को 'विश्व योग दिवस' घोषित किया है। योग हज़ारों साल से भारतीयों की जीवन शैली का हिस्सा रहा है। ये भारत की धरोहर है। विश्व के कई हिस्सों में इसका प्रचार-प्रसार हो चुका है, लेकिन संयुक्त राष्ट्र के इस निर्णय के बाद उम्मीद की जा रही है कि अब इसका विस्तार और भी तेज़ी से होगा।

'अंतरराष्ट्रीय योग दिवस' को मनाये जाने की पहल भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 27 सितम्बर, 2014 को 'संयुक्त राष्ट्र महासभा' में अपने भाषण में रखकर की थी, जिसके बाद '21 जून' को 'अंतरराष्ट्रीय योग दिवस' घोषित किया गया। 11 दिसम्बर, 2014 को संयुक्त राष्ट्र में 193 सदस्यों द्वारा 21 जून को 'अंतरराष्ट्रीय योग दिवस' को मनाने के प्रस्ताव को मंजूरी मिली। प्रधानमंत्री मोदी के इस प्रस्ताव को 90 दिन के अंदर पूर्ण बहुमत से पारित किया गया, जो संयुक्त राष्ट्र संघ में किसी दिवस प्रस्ताव के लिए सबसे कम समय है।

वैसे, आप योग करो न करो ... किसी को रत्ती भर भी फ़र्क़ नहीं पड़ता ... पर इतना तो मानोगे कि इस #योगदिवस के बहाने ही सही विश्व आज भारतीय आदर्शों का अनुसरण कर रहा है। 
सादर आपका
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बुधवार, 19 जून 2019

तजुर्बा - ए - ज़िन्दगी - ब्लॉग बुलेटिन

प्रिय ब्लॉगर मित्रों,
प्रणाम |


 "हर एक लकीर, एक तजुर्बा है जनाब,
झुर्रियां चेहरों पर, यूँ ही आया नही करती।"
- अज्ञात

सादर आपका
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कोशिश का मूल्यांकन

मैं भाग रही हूँ तुमसे दूर

संतुष्ट है भारत

कच्चे केले का चोखा

भजन-कीर्तन भी दिनचर्या की औपचारिकता भर रह गए हैं

चिकित्सक भी डर गया है ... सहम गया है

सिने-संगीत इंद्र का घोड़ा है : 'विविध भारती' के प्रधान नियोजक और कवि नरेंद्र शर्मा से इन प्रश्नों के उत्तर सुनिए

भारत के संविधान में बहुसंख्यकों की उपेक्षा, पुष्पेंद्र कुलश्रेष्ठ व बरुण...

एक सफर : कॉर्पोरेट से किसानी तक

गांव, मसान और गुड़गांव

बाहों में आपकी पापा !!

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अब आज्ञा दीजिए ...

 जय हिन्द !!!

सोमवार, 17 जून 2019

नाम में क्या रखा है - ब्लॉग बुलेटिन

प्रिय ब्लॉगर मित्रों,
प्रणाम |

जब ऑफिस की पुरानी मैडम ने चपरासी को "ओए" कह के बुलाया,
तो नई मैडम को उसपर तरस आया और बोली, "लोग जाने कहाँ से पढ कर आ जाते हैं, भला 'ओए' कहकर किसी को कभी बुलाते हैं?" "सुनो, मैं शिष्टाचार निभाऊंगी, तुम्हें तुम्हारे नाम से ही बुलाऊंगी।"

चपरासी गदगद हो गया, बोला, "आप सरीखे लोगों का ही हम गरीबों को साथ है, मैडम जी मेरा नाम 'प्राणनाथ' है।"

मैडम जी सकुचाई, पलभर कुछ ना बोल पाई, फिर कहा, "इस नाम से अच्छा न होगा तुम्हें बुलाना, अगर कोई पुकारने का नाम हो तो बताना!"

चपरासी बोला ,"मेरे घर में सब मुझे दुलारते हैं, बीवी से लेकर अब्बा तक सब 'बालम' कह कर पुकारते हैं।"

मैडम की समझ में कुछ न आया, एक नया आईडिया लगाया, बोली, "रहने दो, अब पहेलियां न बुझाओ, मोहल्ले वाले तुम्हें क्या कहते हैं ये बताओ!"

चपरासी बोला, "मैडम जी, सबका हम दिल बहलाते हैं, और मोहल्ले में 'साजन' कहलाते हैं।"

मैडम अब तक ऊब चुकी थी, ऊहापोह में डूब चुकी थी, कहा "मुए, ये सब नाम कहाँ से लिए जाएंगे, तू 'सरनेम' बता उसी से काम चलाएंगे।"

चपरासी बोला, "मैडम जी क्या करूं, दुनिया का सब 'गेम' है, आप 'सरनेम' से बुलाइए, 'स्वामी' मेरा 'सरनेम' है!"

अब मैडम झल्लाई, जोरों से चिल्लाई, " 'ओए' मेरा सिर मत खा, एक कप गरम चाय ले के आ!" 

सादर आपका

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पगडण्डियों के छलावे

सभी जानते हैं ..उजालों की फितरत

सफेद कोट वाले भगवान से...

मृत्यु दूत

आसमानी पंछियों को भूल जा ...

मेरी कविताएं अनाथ नहीं

जीवन आधारे - वृक्ष हमारे

"चक्रव्यूह"

अंसार क़म्बरी की ग़ज़लें

मुक्तक

आखिरी स्तम्भ

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 अब आज्ञा दीजिए ... 

जय हिन्द !!!

बुधवार, 12 जून 2019

१२ जून - विश्व बालश्रम दिवस और हम - ब्लॉग बुलेटिन

प्रिय ब्लॉगर मित्रों,
प्रणाम |




आज १२ जून है ... विश्व भर में बालश्रम दिवस 12 जून को मनाया जाता है।

भारत में भी बालश्रम की समस्या दशकों से प्रचलित है। भारत सरकार ने बालश्रम की समस्या को समाप्त कदम उठाए भी हैं। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 23 खतरनाक उद्योगों में बच्चों के रोजगार पर प्रतिबंध लगाता है।

भारत की केंद्र सरकार ने 1986 में बालश्रम निषेध और नियमन अधिनियम पारित कर दिया। इस अधिनियम के अनुसार बालश्रम तकनीकी सलाहकार समिति नियुक्त की गई। इस समिति की सिफारिश के अनुसार, खतरनाक उद्योगों में बच्चों की नियुक्ति निषिद्ध है। 1987 में, राष्ट्रीय बालश्रम नीति बनाई गई थी। पर क्या यह समितियाँ या इन में निर्धारित की गई नीतियाँ बाल श्रम को रोक पाए !?

सन २००८ में आई लगभग ४० मिनट की एक फिल्म इस्माइल पिंकी ने पिंकी को भले ही शोहरत की बुलंदियों पर पहुंचा दिया और फिर पिंकी की सहायता करने वालों की एक लंबी फेहरिस्त तैयार हो गई बावजूद इसके आज पिंकी का क्या हुआ वह क्या कर रही है, यह अब शायद ही कोई जानता हो । आज भी ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में पिंकी जैसी अनेकों बालक बालिकाएं हैं जिन्हे बचपन में ही स्कूल जाने की बजाय काम पर लगा दिया जाता है जबकि एक तरफ सरकार जहां बच्चों को कुपोषण से बचाने, उन्हे साक्षर करने के दावे कर रही है यहीं नहीं उसने बाल श्रम पर भी रोक लगाई है, बावजूद इसके बाल श्रम बदस्तूर जारी है। 
हमारे आस पास ही देख लीजिये आपको ऐसी न जाने कितनी पिंकी और छोटू मिल जाएंगे ! गली के नुक्कड़ की चाय की दुकान हो या हाइवे का ढ़ाबा यह छोटू आप को हर जगह मिल जाता है आप चाहे या न चाहे ... और तो और कभी कभी तो आपके घर तक आ जाता है जैन साहब की दुकान से आप के महीने के राशन की 'फ्री होम डिलिवरी' करने ... कैसे बचेंगे आप और हम इस से ... कभी सोचा है !!??

ऐसे में जब देश भर में विभिन्न संगठनों द्वारा हर १ मई को मजदूर दिवस मनाया जाता हो तो यह सवाल पैदा होता है कि क्या किसी के भी जहन में इन मासूमों का ख़्याल आया ... ये सारे संगठन मजदूरों को उनका हक़ दिलवाने की बात करते थकते नहीं हैं पर कोई भी इन बाल मजदूरों के हक़ की बात नहीं करता ... कोई ऐसा प्रयास होता नहीं दिखता कि देश में बाल मजदूरी बंद हो जाए ... पूछा जाए तो सब ज़िम्मेदारी सरकारों पर डाल कर हर कोई खुद को पाक साफ़ दिखाता है |


भारत से बाल मजदूरी तब तक बंद नहीं होगी जब तक हम सब मिल कर इस का विरोध नहीं करते | हम में से हर एक को हर स्तर पर बाल मजदूरी का विरोध करना चाहिए| जहाँ भी बाल मजदूरी होती दिखे यदि स्वंय विरोध न कर पावें तो तुरंत प्रशासन या ऐसा किसी संगठन को सूचित करें जो बाल मजदूरों को मुक्त करवा उन्हें समाज में पुनः स्थापित करने के लिए प्रयासरत हैं | 
सादर आपका

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लेखागार