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शनिवार, 10 अगस्त 2019

मुद्रा स्फीति के बढ़ते रुझानों - दाल, चावल, दही, और सलाद

प्रिय ब्लॉगर मित्रों,
प्रणाम |

😀😀

"पत्नी ने पति को ऑफिस में फोन करके पूछा- आज लंच में क्या खाया ??

पति ने झल्ला कर कहा- तुम्हें बस इतना ही आता है !! क्या खाया, कौन-सा सीरियल देखा, कौन-सा गाना सुना ?

😀😀

पत्नी ने कहा- ओह माफ करना, तो यह बताइए कि मौद्रिक बाजारों में मुद्रा स्फीति के बढ़ते रुझानों को कम से कम हस्तक्षेप के द्वारा काबू में करने के लिए भारतीय रिज़र्व बैंक को क्या कदम उठाने चाहिए और वित्त मंत्रालय को विदेशी भुगतान के असुंतलन से निपटने के लिए क्या कदम उठाने चाहिए?

😀😀

थोड़ी देर मौन रहने के बाद पति ने कहा- दाल, चावल, दही, और सलाद खाया।"😀

सादर आपका
शिवम् मिश्रा

~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~

बरसों से इंतेज़ार था...

पारो भाग (9)

क़बूल नहीं मोहब्बत में शर्त

पारदर्शी वक्षस्थल - -

सावन और उद्गगीत

"मंथन"

३७४. उसका बोलना

हे वीर सैनिक तुमको नमन

केसर क्यारी में

शब्दों का जो अर्थ बना है

नमन है तुझको कवि!

~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
अब आज्ञा दीजिए ... 

जय हिन्द !!!

9 टिप्पणियाँ:

Meena Bhardwaj ने कहा…

ब्लॉग बुलेटिन की लाजवाब प्रस्तुति एक प्रभावी भूमिका के साथ .. इस संकलन मेंं मेरी रचना को सम्मिलित करने के लिए हार्दिक आभार शिवम् जी ।

Neeraj Kumar ने कहा…

हा हा हा ...बहुत बढ़िया व्यंग प्रस्तुति I मेरी रचना को इस अंक में शामिल करने के लिए बहुत धन्यवाद शिवम जी I

Anuradha chauhan ने कहा…

बहुत बढ़िया व्यंग्य सुंदर बुलेटिन प्रस्तुति मेरी रचना को स्थान देने के लिए आपका हार्दिक आभार शिवम् जी

Anita saini ने कहा…

बहुत ही सुन्दर ब्लॉग बुलेटिन प्रस्तुति
सभी रचनाकारों को हार्दिक शुभकामनाएँ,मेरी रचना को स्थान देने के लिए तहे दिल से आभार सर
सादर

Onkar ने कहा…

सुन्दर ब्लॉग बुलेटिन. मेरी रचना को शामिल करने के लिए शुक्रिया.

शिवम् मिश्रा ने कहा…

आप सब का बहुत बहुत आभार |

Anita ने कहा…

देर से आने के लिए खेद है, सुंदर भूमिका के साथ सूत्रों का सुंदर संयोजन..आभार

noopuram ने कहा…

बहुत रोचक प्रस्तुति. जय हिन्द.

Dr Kiran Mishra ने कहा…

बहुत शुक्रिया आपका ब्लॉग बुलेटिन

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