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शुक्रवार, 11 मार्च 2016

मिट जायेंगे मिटाने वाले, ये हिन्दुस्तान है - ब्लॉग बुलेटिन

नमस्कार मित्रो,
एक और बुलेटिन के साथ आपका मित्र उपस्थित है. आसपास की घटनाओं को देखकर लग रहा है जैसे ये दौर सदी का सबसे अधिक उथल-पुथल भरा दौर है. छोटी से छोटी घटना से लेकर बड़ी से बड़ी घटना तक, घर के कमरे से लेकर सुदूर अंतरिक्ष के ग्रह-नक्षत्रों तक सबकुछ बस विवादित हुआ जाता है. आज़ाद भारत में भी सब अपनी-अपनी आज़ादी की माँग करने में लगे हुए हैं. जिन्हें सकारात्मक मुद्दों पर आज़ादी मिल गई है वे प्रसन्न हैं और उनकी देखादेखी नकारात्मक मुद्दों पर आज़ादी चाहने वाले अप्रसन्नता दिखाते हुए अपनी आज़ादी स्वयं निर्मित करने लगे हैं. इसके लिए चाहे समाज के बने-बनाये नियम-कायदों को ध्वस्त ही क्यों न कर देना पड़े. सामाजिक गोपन को अगोपन बनाने की आज़ादी के चलते जहाँ समाज में ‘किस ऑफ़ लव’ जैसे आयोजनों को संपन्न किया गया वहीं ‘हैप्पी तो ब्लीड’ जैसी संकल्पना को स्थापित करने का प्रयास किया गया. इसी कड़ी में आज़ादी प्रेमी लोग दैहिक संबंधों की वकालत करते नजर आने लगे हैं. इनका विरोध करना समाज को, देश को भगवाकरण करना बताया जा रहा है. आज़ादी के ऐसे दीवानों के एक मठ से मिले कंडोम ने आज़ादी-प्रेमियों के स्वर को मुखर किया तो उन्हीं में से एक दीवाना खुलेआम लघुशंका की आज़ादी में दण्डित होते देखा गया. इसे भी एक तरह का भगवाकरण किया जाना बताया जाने लगा. समझ नहीं आता कि आज़ादी की चाह में इन प्रेमियों द्वारा कौन सा कार्य कब, कहाँ, किसके सामने किया जाने लगे? यदि आज़ादी की ऐसी माँग लगातार बढ़ती रही तो ये कपोल-कल्पना नहीं कि ऐसी आज़ादी के दीवाने सड़कों पर खुलेआम दैहिक सम्बन्ध बनाते दिखाई दें.

आज़ादी की इसी चाह के बाद भी इनको देश के विरोध में बोलने की आज़ादी मिली हुई है; देश के प्रधानमंत्री के विरुद्ध अशालीन वक्तव्य देने की आज़ादी मिली है; देश को बर्बाद करने के नारे लगाये जाने की आज़ादी है; महिलाओं के शोषण के नाम पर धर्म-विशेष को जलील करने की छूट है; अभिव्यक्ति के नाम पर सेना को बलात्कारी बताने की आज़ादी सुलभ है; हिन्दू धर्म के देवी-देवताओं को हत्यारा, सेक्स-सिम्बल घोषित करने की आज़ादी है, तो सवाल ये कि इतनी घनघोर आज़ादी के बाद अब आज़ादी किससे? खुद से? अपने परिवार से? इस समाज से? भारत देश से? आखिर कैसी आज़ादी और किससे? सोचियेगा और जवाब देकर कथित आज़ादी के इन कथित प्रेमियों को भी करारा जवाब दीजियेगा. हो सकता है कि देश-हित में दिए गए अनेकानेक जवाबों से देश-विरोधी ताकतों के हौसले पस्त हों और देश को विखंडित करने के, देश को अस्थिर करने के, देश को आतंकी साए में ले जाने के इनके मंसूबे भी ध्वस्त हों. 



जवाब सोचिये और उसी के साथ दृष्टि डालिए वर्तमान समाज से निकल कर आते कुछ विचारों पर, कुछ ब्लॉग-पोस्ट पर.

आभार सहित आज की बुलेटिन पर पोस्ट-लिंक्स

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शुक्रवार, 11 जनवरी 2013

जय जवान जय किसान जय हिन्द - ब्लॉग बुलेटिन

प्रिय ब्लॉगर मित्रों ,
प्रणाम !



ब्लॉग बुलेटिन टीम और पूरे ब्लॉग जगत की ओर से हम उनको शत शत नमन करते है ! 
मौजूदा दौर मे देश को इन जैसे प्रधानमंत्री की सख़्त जरूरत है !

सादर आपका 

शिवम मिश्रा

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सर्दी देखूँ या सर्दी का बाज़ार देखूँ .......

शेफाली पाण्डे at कुमाउँनी चेली
*सर्दी देखूँ या सर्दी का बाज़ार देखूँ ....... रंग - बिरंगे स्वेटर टोपी, जैकेट, मफलर शाल, मोज़े, दस्ताने गरम इनर, पायजामे जूते और कोट से जगह जगह पटा हुआ बाज़ार देखूं । सर्दी देखूं या सर्दी का बाज़ार देखूं ? बकरे की जान * * मुर्गे की टांग मछली के पकौड़े अण्डों की बिक्री ने पिछले सारे रिकॉर्ड तोड़े सब्जी - फल गर्मी के हवाले फल - फूल रहा सर्वत्र मांसाहार देखूं । सर्दी देखूं या सर्दी का बाज़ार देखूं ? गजक, रेवड़ी, लड्डू * * मूंगफली, पकौड़ी, हलवा जिसकी जेब में माल भरा हो मौसम भी देखे उसका जलवा दो दिन के इस मेहमान का शाही स्वागत -सत्कार देखूं । सर्दी देखूं या सर्दी का बाज़ार देखूं ? कॉ... more »

प्रेमी प्रेमिका, दूध और शक्कर, डायबिटीज

ताऊ रामपुरिया at ताऊ डाट इन
*1.* *प्रेमी प्रेमिका* *दूध और शक्कर* *डायबिटीज* * * * * *2.* *पति व पत्नि* *होते ही बच्चे चार* *लठ्ठमलठ्ठा* * * * * *3.* *धणी लुगाई* *गाडी के दो पहिये* *पूर्व पश्चिम* * * * * *4.* *ब्लाग जगत* *सच जीवन जैसा* *क्षण भंगुर* * * * * *5.* *जिंदगी सौदा* *कुछ लिया ना दिया* *विदा हो गये* * * * * * *

भाई खुशदीप के सुझाव पर मेरे ,दिल्ली बलात्कार' पर बनाए कुछ कार्टून।

IRFAN at ITNI SI BAAT

हम ताजमहल वाले हैं

शिवम् मिश्रा at मेरे पसंदीदा अश्आर
"लूटने वाले उसे क़त्ल न करते लेकिन, उसने पहचान लिया था कि बग़ल वाले हैं; बेकफ़न लाशों के अम्बार लगे हैं लेकिन, फ़ख्र से कहते हैं हम ताजमहल वाले हैं !!" - मुनव्वर राना

आ कुछ दूर चलें,फिर सोचें........

vikram7 at vikram7
आ कुछ दूर चलें,फिर सोचें अमराई की घनी छाँव में नदी किनारे बधीं नाव में बैठ निशा के इस दो पल में,बीते लम्हों की हम सोचें आ कुछ दूर चलें,फिर सोचें मन आंगन उपवन जैसा था प्रणय स्वप्न से भरा हुआ था तरुणाई के उन गीतों से,आ अपने तन मन को सीचें आ कुछ दूर चलें,फिर सोचें स्वप्नों की मादक मदिरा ले मलय पवन से शीतलता ले फिर अतीत में आज मिला के,जीवन मरण प्रश्न क्यूँ सोचें आ कुछ दूर चलें,फिर सोचें विक्रम

उद्वेलित आंदोलनकारी और आंदोलन

noreply@blogger.com (Ratan singh shekhawat) at ज्ञान दर्पण
पिछला वर्ष आन्दोलनों व बड़े बड़े घोटालों के उजागर होने वाला वर्ष रहा| एक के बाद उजागर हुए घोटाले और अन्ना, बाबा रामदेव व केजरीवाल आदि लोगों द्वारा काले धन, लोकपाल व भ्रष्टाचार के मुद्दे पर आंदोलन हुए| केजरीवाल और अन्ना को भ्रष्टाचार से त्रस्त व उद्वेलित युवाओं ने पुरा समर्थन दिया व उनके आन्दोलनों को सफल बनाया जो युवाओं का कर्तव्य भी था और संवेदनशीलता भी| देश की किसी भी व्यवस्था में यदि कोई गडबड़ी आती है तो उसका दुष्परिणाम युवाओं को भी ताजिंदगी भुगतना पड़ता है और इस तरह व्यवस्था में आई गडबड़ी को दुरस्त करने के लिए युवाओं द्वारा आंदोलित होना और आन्दोलनों में बढ़ चढ़  more »

"शब्द"

आशा बिष्ट at शब्द अनवरत...!!!
मूक वार्तालाप हाँ ....ना .. इन दो में ही तमाम ...बातें शून्य ....! रुदन ह्रदय का तुम्हारे कटाक्ष से ... more »

हरे मटर की घुघरी

सामग्री 1. हरी मटर –आधा किलो 2. आलू –दो बड़ी (चौकोर टुकडो में कटी ) 3. लहसुन –एक गांठ या दस पन्द्रह कलियाँ (बारीक कटी हुई) 4. नमक –स्वादानुसार 5. तेल –एक छोटा चम्मच 6. हरी धनिया –गार्निश के लिए 7. हरी मिर्च –चार पांच विधि [...]

शादी क्यूं करूं?

Fauziya Reyaz at अल्फ़ाज़
मैं शादी क्यूं करूं? क्या इसलिये कि सब कर रहे हैं? अगर ऐसा है तो सब धोखेबाज़ियां, जालसाज़ियां भी कर रहे हैं. तो आज से ही शुरु कर देती हूं. बड़ी खाला पिछले दिनों घर आई तो कह रही थीं “दुनिया की ज़रूरत है शादी.” मैंने कहा “दुनिया की ज़रूरत तो पट्रोल भी है, अब क्या कूंआ खोदने लगूं.” खाला चिढ़कर बड़बड़ाने लगीं “अरे, भई…कोई साथी तो होना चाहिये ना, पूरी पच्चीस की हो गयी हो” मैंने इतराते हुए खाला के कंधे में हाथ डाला “साथी की फ़िक्र क्युं करती हैं, बिटिया आपकी इतनी बुरी भी नहीं“ ये खाला के सब्र की इन्तेहा थी “सारा दिमाग पढ़ाई ने खराब किया है, अब तक मैं मैदान में उतर चुकी थी “लो, मानो जब आदम-हौआ ज़म... more

हुन धीयां दी लोहड़ी मनाइए

Anju (Anu) Chaudhary at अपनों का साथ
लोहड़ी मनाने के साथ कोई पौराणिक परंपरा नहीं जुड़ी हुई है,पर इस से जुड़ी प्रमुख लोककथा दुल्ला भट्टी की है जो मुगलों के समय का बहादुर योद्धा था |कहा जाता हा कि एक ब्राह्मण की दो लड़कियों सुंदरी और मुंदरी के साथ इलाके का मुग़ल शासक जबरन शादी करना चाहता था,पर उन दोनों की सगाई कहीं ओर हुई थी लेकिन उस मुग़ल शासक के डर से उनके भावी ससुराल वाले शादी के लिए तैयार नहीं थे | इस मुसीबत की घड़ी में दुल्ला भट्टी ने ब्राह्मण की मदद की और लड़के वालो को मना कर एक जंगल में आग जला कर सुंदरी और मुंदरी का ब्याह करवाया, दुल्ले ने खुद ही उन दोनों का कन्यादान किया और शगुन के रूप में उनको शक्कर दी थी और इसी कथ... more »

पिछले 10 दिनों की मेरी सभी पोस्ट

आप कहेंगे कि यहाँ लिखने की क्या जरूरत थी सभी पोस्ट तो ब्लॉग पर दिख ही रहीं हैं। आपकी बात अपनी जगह पर सही है पर अब मैं सिर्फ एक जगह पर नहीं लिखता बल्कि कई जगह पर लिखता हूँ इसलिए अपनी इस ब्लॉग पोस्ट में आपके लिए लाया हूँ सभी पोस्ट के लिंक। 1 जनवरी को मैंने लिखा शिक्षकों के लिए खास वेब २.० तथा शिक्षक नाम से एक लेख जिसमे बताया कि वेब २.० क्या है और शिक्षक पढाने के लिए कैसे इसका प्रयोग कर सकते
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कल आप ने जिस कविता को बुलेटिन मे पढ़ा था आज उसे यहाँ सुनिए अर्चना चावजी की आवाज़ मे 

जय जवान ... जय किसान !!

जय हिन्द ... जय हिन्द की सेना !!

लेखागार