Subscribe:

Ads 468x60px

कुल पेज दृश्य

ज़ौक़ लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
ज़ौक़ लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

शनिवार, 20 अप्रैल 2013

क्यों न जाए 'ज़ौक़' अब दिल्ली की गलियाँ छोड़ कर - ब्लॉग बुलेटिन

प्रिय ब्लॉगर मित्रों ,

प्रणाम !



जो 'ज़ौक़' साहब आज के दौर मे होते तो हरगिज न कहते कि,

"कौन जाए ज़ौक़ पर दिल्ली की गलियाँ छोड़ कर ..."
 
कार्टूनिस्ट :- सतीश आचार्य 

कार्टूनिस्ट :- सतीश आचार्य

कार्टूनिस्ट :- मनोज कुरील 

कार्टूनिस्ट :- सुधीर तैलंग 
सादर आपका 
 
============================

क्या पारम्परिक परिधान रूढ़ीवाद व पिछड़ेपन की निशानी है ?

अपना गाँव… पार्ट 3

बधशाला -7

..............अब और नहीं सहेंगे

क्या आज वर्जनाहीन समाज ही बच्चियों की सुरक्षा की शर्त है

ये तितलियाँ -क्यूँ बदल जाती हैं ?

स्त्री की प्रेम अभिव्यक्ति और हमारे सामाजिक नियम.

उज्जवल प्रकाश की ओर......

समाज भेड़िये पैदा कर रहा है और समाज के ठेकेदार जनता से सुरक्षा-कर वसूल रहे हैं

कब तक ?

अकेला

हे राम...बेटियों के वंदन और मानमर्दन का कैसा खेल

बदल रहा है

ऐ मेरे नादान दिल

आँखें

सप्पोर्ट सिस्टम

थोड़ा अपना सा,थोड़ा बेगाना सा ..

पुरस्कारों की चर्चा :गोलगप्पे वडा पाव की तरह

हंगामा है क्यूं बरपा? डोयिचे वेले पुरस्कारों पर दो टूक!

वीनू - तुम बहुत याद आओगे !

:):)

============================

अब आज्ञा दीजिये ...

जय हिन्द !!! 

लेखागार