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शनिवार, 24 मार्च 2018

संगीत और तनाव मुक्ति - 2000वीं ब्लॉग बुलेटिन

अब त हमरे पास आपलोग से माफी माँगने का भी मुँह नहीं रह गया है. बाकी देस का कानून के हिसाब से बिना सफाई सुने हुए सजा सुनाना भी गैरकानूनी बात है. एही से कम से कम हमरे दिल का व्यथा त सुनिये लीजिये. नया साल का सुरुआत के साथ नवरात्रि का भी पूर्नाहुति का समय आ गया है. लेकिन हमरे लिये त अभी साल का आखिरी हफ्ता सुरु होने वाला है... नहीं बुझाया. अरे भाई बित्त बरिस यानि फाइनेंसियल ईयर का समाप्ति. साल भर का लेखा-जोखानफा-नोकसानबिजनेस अऊर टारगेट. ई पूरा महीना एतना भाग-दौड़ का होता है कि का बताएँ. न घर से निकलने का टाइमन लौटने का टाइमन सोने का समयन आराम का नाम.



दू दिन पहिले दोस्त लोग के साथ बैठे थेत गुप्ता जी पूछ लिये – वर्मा जी आँख सूजी हुई हैसोये नहीं क्या ठीक सेअब हम का बतातेबोले – नींद नहीं आती है इन दिनों. अब तो बस मरने के बाद ही चैन मिलेगा. घर के लोगों को तो मैंने कह दिया है कि मरने के बाद दस-पंदरह दिनों तक यूँ ही सोने देनाफिर ले जाकर दफ़न कर देना मिट्टी में.
गुप्ता जी बोले – दफ़न क्यों करना?
“मुझे आग से डर लगता है.”
पास में हमरे चैतन्य आलोक जी भी थे. ऊ कहाँ चुप रहने वाले थे – सुनिये बॉसजब तक पूरा शरीर नहीं समाप्त होगाआत्मा भटकती रहेगी. फिर दूसरा शरीर कैसे मिलेगा आपको. दफ़न कर दिया तो बहुत समय लग जाएगा.
हम भी सायरी में जवाब दिये – हम इंतज़ार करेंगे तेरा क़यामत तक.

बात हँसी-हँसी में खतम हो गया. लेकिन रात भार नींद नहीं आनाकाम का दबावअसम्भव टारगेट के पीछे भागनाएतना थका देने वाला हो गया है कि कल बाथरूम में ब्रस करते समय गलती से आँख खुला रह गया त अपना चेहरा देखकर लगा कि हे भगवान हमरे साथ बाथरूम में कऊन आदमी घुसा हुआ है. पढाई लिखाई सब बंद. अजीब तरह का घुटन भरा समय. एही नहींई त भगवान का लाख लाख धन्यबाद है कि हम अपना बैंक के क्वाटर में रहते हैं. नहीं त जो रेपुटेसन बना है सोसाइटी मेंलोग बाग समाज में रहना मोस्किल कर देता. सरकार भले आराम से तरक्की का क्रेडिट ले लेलोन लेकर भागने वाले का दोस बैंक वाला के माथा पर कारिख जैसा पोता गया है.



खैरऊ सब बात त चलता रहेगा. बदनामी-नेकनामी भी कपार पर लिखा होता हैजब जेतना मिलना है ऊ त मिलबे करना है. मगर ई तनाव का माहौल में हमको एक ठो बहुत बढिया तनाव भंजक रास्ता मिल गया. लिखना पढना बंद होने के बावजूद भीहमरे मन में संगीत को लेकर हमेसा एगो रिग्रेट रहता था कि हमको गाना नहीं आता है. फिर याद आया संजीव कुमार जी का जो बता गये थे कि गाना आए या न आएगाना चाहिये. त इधर आकर हम गाना सुरू किये.

हमरे स्वर्गीय पिता जी को गाना का बहुत सौक था. ऊ गाते भी अच्छा थे. फिल्मी गाना का बारीकी हम उन्हीं से सीखे थे. अऊर ई महीना में उनका जनमदिन भी हैसो सोचे कि उनके पसंद का गाना अपने आवाज में रिकॉर्ड करना सुरू किया जाए. बेसुरा गला के बावजूद भी जो हमको अपना गाना का खासियत देखाई दिया ऊ बस एही था कि हम सब गाना एक बार में रिकॉर्ड कियेसब गाना का बोल हमको पूरा याद था अऊर धुन कण्ठस्थ था. रहा बात आवाज कात ऊ त भगवान का दिया हुआ है. जब भगवान बिगाड़ के भेज दिये हैं त हम केतना बना लेंगे.



बेसुरा गला से गाते-गाते लगभग सत्तर गाना हम गा दिये. ऑफिस का सारा थकान अऊर परेसानी दू गो गाना गाकर हम भगा देते थे. तब जाकर अनुभव हुआ कि संगीत से बड़ा कोनो मेडिटेसन नहीं है. एगो छोटा सा मोबाइल का ऐप्प सारा दिन का तकलीफ भुला देता है अऊर हमको हमरे पिता जी का याद से जोड़े रखता है, एही का कम है. आज 24 मार्च है अऊर आज ही के दिन महान कर्नाटक संगीतकार श्री मुत्तुस्वामी दिक्षितार का जन्म हुआ था. इसका मतलब का ई महीना के साथ हमारा कोनो न कोनो म्युज़िकल कनेक्सन जरूर है.

आज सबलोग छुट्टी मना रहा हैमगर हमरे खातिर आज अऊर कल एतवार को भी काम है. प्रधानमंत्री जी का घोसना पूरा करने का दायित्व भी त हम ही लोग के ऊपर है. लेकिन हमलोग त मजूर आदमी हैंवैसे भी इतिहास त ईमारत बनवाने वाले को इयाद करता हैबनाने वाले का त कोनो गिनतिये नहीं है. ऊ लोग के किसमत में त हाथ कटवाना लिखा होता है.



जाने दीजियेहम भी कहाँ का बात कहाँ ले बैठे. आज जब चारो तरफ बैंक वाले के नाम पर का मालूम केतना हज़ार करोड़ का घपला का बात चल रहा हैओहाँ ई बिहारी बैंकर आपके लिये लाया है मात्र 2000वाँ ब्लॉग बुलेटिन. आज का बुलेटिन में हमरा बेसुरा गाना सुनकर साबासी भी दिये त समझेंगे कि हमारा तकलीफ का रेगिस्तान में कोनो झरना फूट गया है.
धन्यवाद!!

-                                                                                                                                                                                       - सलिल वर्मा


गुरुवार, 3 अप्रैल 2014

जीवन में संगीत का महत्त्व

आदरणीय ब्लॉगर मित्रों सादर प्रणाम,

प्रस्तुत है आज का बुलेटिन : 

मनुष्य में संगीत प्रेम एक सहज बोध है | संगीत विद्या, सुस्वर, कंठ संगीत, गाना, ताल, तालैक्य, राग, लय, संगीत, सुर, म्यूजिक, तान, अवरोहण, राग, और भी ना जाने कौन कौन से नामों से यह जाना जाता है | हालांकि यह इसके परंपरागत पुकारे जाने वाले नाम हैं परन्तु आजकल की नई पीढ़ी को सिर्फ और सिर्फ 'म्यूजिक' शब्द ही समझ आता है | इस संसार में, कायनात में कितनी ही ऐसी चीजें हैं जो इंसान के लिए प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से बहुत उपयोगी हैं और उनके जीवन को सकारात्मक दिशा प्रदान करने में कारगार साबित हुई हैं | उनमें से एक ऐसी ही बेहतरीन अभिव्यक्ति संगीत की है | जिस प्रकार प्रकृति मनुष्य को सजीव और व्यवस्थित रखने हेतु ज्ञान-अज्ञान, पाप-पुण्य, घर्म-संस्कार का अनुगमन कराती है उसी प्रकार इंसानी मस्तिष्क और जीवन को शांत, अव्याकुल, स्थिर, तनाव मुक्त रखने के लिए यही संगीत भी सुनाती है | 

संगीत से सुन्दर इस दुनिया में कुछ भी और नहीं है और ना हो सकता है और ना ही कभी होगा क्योंकि संगीत हर तरह से बंधन मुक्त है | संगीत किसी एक धर्म का नहीं इसका कोई मज़हब नहीं यह किसी का भी ग़ुलाम नहीं | इसका कोई रंग नहीं रूप नहीं आकार नहीं प्रकार नहीं और ना ही कोई इसको बंधन में बाँध सकता है | संगीत ना हिन्दू का है ना मुसलमान का, ना सिख का, ना ईसाई का | यह सबका प्यारा है सबका दुलारा है | इस विश्व में संगीत का कोई सानी नहीं | जिस तरह इन्द्रधनुष के सात रंग होते हैं, इंसान के जीवन में सात वचन होते हैं, उसी तरह इसके साथ सुर होते हैं और इंसानी जीवन में उनका महत्त्व और नाता उतना ही गहरा और पुराना है | 

ज़िन्दगी में संगीत का एक अलग ही महत्त्व है | एक तरह से देखा जाये तो एक आम इंसान के जीवन में संगीत का एक अलग ही मुक़ाम है | संगीत दिल-ओ-दिमाग को ही नहीं बल्कि आत्मा को भी सुकून देता है | मिसाल के तौर पर यदि मैं अपने बारे में कहूँ तो मैं एक बहुत ही साधारण सा प्राकृतिक जीव हूँ | देश, काल, पात्र, माहौल, व्यवस्था, परिवेश, परिस्थिति, वातावरण, अवस्था के अनुरूप मेरी चित्त वृत्ति में परिवर्तन अनिवार्य होता है | कभी मनोदशा जड़ तो कभी मिजाज़ चेतन | कभी प्रसन्न कभी अप्रसन्न | कभी ख़ुशी कभी उदास | कभी खिन्न और ना जाने कितने ही भिन्न प्रकार के वेग मन का अभिन्न अंग आवर्तशः होते रहते हैं | इन सभी मुद्राओं को अपने वश में करने और उनके उग्र, हर्षित, उत्तेजित, कुपित, कष्टप्रद, आतंकित, अवनत मनोभावी आवेग को नियंत्रित और वशीभूत करने के लिए संगीत का सुनना बेहद ज़रूरी है | 

मेरे जैसा एक औसत मध्यम वर्गीय प्राणी हो, ऊँचे वर्ग का व्यक्ति हो या कोई निम्न वर्ग का व्यक्ति हो, नर-नारी, बड़ा-बूढ़ा, लड़का-लड़की, बच्चा-बच्ची यहाँ तक किन्नर और जानवर आदि तक हर कोई संगीत को अपने जीवन में सर्वोच्तम स्थान देते हैं | ताल पर झूमना और थिरकना तो बिलकुल सभी को लुभाता है | रोज़मर्रा के जीवन की आपाधापी में आज सभी अपने तनाव को कम करने के लिए संगीत सुनते नज़र आते हैं | 

आज ज़िन्दगी में संगीत का सिलसिला सुबह की चाय की प्याली से शुरू होकर रात को सनम से बातचीत करते-करते सो जाने तक चलता रहता है | सुबह पौ फटी नहीं के घर में रेडियो पर घार्मिक कार्यक्रम, भजन, मन्त्र, आरती आदि सुनना आरम्भ हो जाता है | कुछ लोग अपने कंप्यूटर, डीवीडी प्लेयर, टीवी, डिश, टाटास्काई आदि उपकरणों पर भी सुनना पसंद करते हैं | वहीं पर कहीं पर उठते ही रॉक एंड रोल सुना जाता है तो कहीं नए-पुराने फ़िल्मी गीत बजाये जाते हैं | आशिकों के मकबरों में सुबह से आपको रोमांटिक संगीत की छनक सुनने को मिल जाएगी | वहीं बाल बच्चेदार परिवारों में छोटे बच्चों के लिए बालवाड़ी और उनके बालविहार से जुड़े कार्यक्रम सुनने को मिल जायेंगे | 

जिनके पास यह सब सुविधाएँ नहीं होती तो आज की टेक्नोलॉजी जिंदाबाद है जिसने मोबाइल फ़ोन में संगीत सुनने और चुनने दोनों का अधिकार दिया है | मोबाइल आज हर छोटे बड़े की ज़िन्दगी का एक अहम् हिस्सा है और उसी के साथ संगीत भी सहज रूप से जीवन में जज़्ब होता जा रहा है | घर से काम पर निकलते पैदल, गाड़ी में, मेट्रो में, बस में, रिक्शा में, स्कूटर पर, बाईक पर या कैसे भी हो हर जगह आपको लोगों के कानों में उनके हैडफ़ोन और ईअरप्लग लगे नज़र आ जायेंगे | 

संगीत की ताक़त ऐसी है की यदि एक दफ़ा बज जाये तो क्या अच्छा और क्या बुरा सभी नाचने और थिरकने को उतारू हो जाते हैं | संगीत एक है रूप अनेक हैं कभी माँ की लोरी में तो कभी पिता की थपकी में, कभी प्रभु के भजन में, कभी अल्लाह की अज़ान में, कभी सबद-गुरबानी में, कभी चर्च के कैरोल्स में | संगीत रोते हुओं को हंसाता है तो हँसते हुओं को रुलाता भी है | संगीत व्यक्ति की खुशियों में शामिल होता है तो ग़म में भी साथ निभाता है | संगीत की पैठ हर जगह में है | इसकी दीवानगी अपनों में भी होती है और परायों में भी | यह दोस्तों की भी चाहत है और दुश्मनों की भी | कभी लैला का इनकार है तो कभी मंजनू का इज़हार | कहीं सोहनी का रश्क़ है तो कहीं महिवाल का इश्क और कभी हीर रांझा का संगीत है | 

हमारे रोज़ की दिनचर्या में, ऑफिस में, केबिन में, कैंटीन में, कंप्यूटर पर, घर में, रसोई में, टॉयलेट में, बाथरूम में, बेडरूम में, टीवी रूम में, नौकरी लगने पर, शादी तय होने पर, गर्ल फ्रेंड-बॉयफ्रेंड मिलने पर, इन्क्रीमेंट होने पर, बालक होने पर, बीवी-प्रेमी-प्रेमिका से अनबन होने पर, यारी दोस्ती में, वैलेंटाइन डे पर, ख़ुशी में, त्योहारों पर, जन्मदिन पर, क्लास में पास होने पर, बॉस के लताड़ने पर, नौकरी छूटने पर, रिश्तों के टूटने पर, अपनों के रूठने-मानाने पर, डांट खाने पर, ख़ुशी जताने पर, ग़म छुपाने पर, टेंशन रिलीज़ करने पर, ग़म गलत करने पर, बार में नशा चढ़ने पर, दिलरुबा के भड़कने पर, हनीमून में तड़पने पर, बेडरूम में फड़कने पर और भी ना जाने कहाँ, कैसे, किधर गाना सुनना तो बनता है गुरु | जब भी कान लगाकर सुनोगे तब हमेशा हर कहीं संगीत बजता नज़र आएगा | जब बजेगा गाना जभी तो तरोताज़ा होगा दीवाना और तयार हो जायेगा ज़िन्दगी का एक नया फ़साना और लड़ेगा एक नई जंग के लिए, एक नए उत्साह के साथ नए दिन को जीने के लिए | 

कुछ कम्पनियों में तो बाकायदा म्यूजिक रूम भी बनाये जाते हैं जिससे उनके कर्मचारियों का मनोबल संगीत सुनाकर बढ़ाया जा सके और कार्यक्षमता में और ज्यादा बढ़ोतरी हो सके | अब तो हर कोई अपनी पसंद के गाने, विडिओज़ आदि सब यू-ट्यूब पर भी देख सकते हैं और सुन सकते हैं | इन्टरनेट सेवा ने सभी को आपस में इतना ज्यादा जोड़ दिया है की अब संगीत का आदान-प्रदान व्हाट्सऐप, वाईबर, लाईन, वीचैट, फेसबुक आदि जैसे स्रोतों के मध्यम से भी हो सकता है | आप अपनी मनोदशा को किसी से भी कभीं भी कहीं भी अपने चुनिन्दा संगीत के रूप में इन माध्यमों से व्यक्त कर सकते हैं | 

संगीत की महिमा ऐसी है कि निर्जीव में प्राण फूँक दे | अब आप निर्णय कीजिये संगीत इस दुनिया में सबसे बेहतर है या नहीं ........ क्या और कुछ है इससे बेहतर ! 

आज की कड़ियाँ 












अब इजाज़त | आज के लिए बस यहीं तक | फिर मुलाक़ात होगी | आभार
जय श्री राम | हर हर महादेव शंभू | जय बजरंगबली महाराज 

लेखागार