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गुरुवार, 26 जुलाई 2018

विजय दिवस और ब्लॉग बुलेटिन


जयहिन्द दोस्तो,
हम, आप सभी कारगिल से भली-भांति परिचित हैं और कारगिल युद्ध से सम्बंधित आज के दिन से भी. जी हाँ, आज, 26 जुलाई को विजय दिवस है. विजय दिवस प्रत्येक वर्ष आज ही के दिन मनाया जाता है. भारतीय सेना ने 26 जुलाई 1999 को नियंत्रण रेखा से लगी कारगिल की पहाड़ियों पर कब्ज़ा जमाए आतंकियों और उनके वेश में घुस आए पाकिस्तानी सैनिकों को मार भगाया था. पाकिस्तान के ख़िलाफ़ यह पूरा युद्ध ही था, जिसमें पांच सौ से ज़्यादा भारतीय जवान शहीद हुए थे. पूरा देश 26 जुलाई को विजय दिवस के रूप में मना कर सभी वीर, जांबाज़ जवानों को याद करते हुए श्रद्धापूर्वक नमन करता है. 






कारगिल युद्ध के सभी जांबाज़ सैनिकों को बुलेटिन परिवार की ओर से नमन.
भारत माता की जय.
















मंगलवार, 26 जुलाई 2016

सैनिकों के सम्मान में विजय दिवस - ब्लॉग बुलेटिन

हतो वा प्राप्स्यसि स्वर्गं जित्वा वा भोक्ष्यसे महीम्‌ अर्थात या तो तू युद्ध में बलिदान देकर स्वर्ग को प्राप्त करेगा अथवा विजयश्री प्राप्त कर पृथ्वी का राज्य भोगेगा. गीता के इस श्लोक से प्रेरित होकर देश के शूरवीरों ने कारगिल युद्ध में दुश्मन को खदेड़ कर सीमापार कर दिया था. आज से 17 वर्ष पहले भारतीय सेना ने कारगिल पहाड़ियों पर कब्ज़ा जमाए पाकिस्तानी सैनिकों को मार भगाया था. इस विजय की याद में और शहीद जांबाजों को श्रद्धांजलि देने के उद्देश्य से प्रतिवर्ष 26 जुलाई को कारगिल दिवस के रूप में मनाया जाता है. भारतीय सेना के विभिन्न रैंकों के लगभग 30000 अधिकारियों और जवानों ने ऑपरेशन विजय में भाग लिया. इस युद्ध में भारतीय आधिकारिक आँकड़ों के अनुसार 527 जांबाज़ शहीद हुए और 1363 घायल हुए.


एक तरह हम विजय दिवस मना रहे हैं वहीं दूसरी तरफ हमारे सैनिक एक आतंकी की मौत पर अलगाववादियों के पत्थरों का शिकार हो रहे हैं. आखिर ऐसा विरोधाभास क्यों? यहाँ इस तथ्य का स्मरण करना होगा कि विगत कुछ वर्षों से भारतीय सेना के कार्यों-दायित्वों में अप्रत्याशित रूप से वृद्धि हुई है. अब नागरिक प्रशासन में भी उनकी भूमिका अहम् होती जा रही है. देश में किसी भी तरह की प्राकृतिक आपदा आने पर सेना को याद किया जाता है. दंगों की स्थिति, वर्ग-संघर्ष, धरना प्रदर्शन, बच्चों के बोरवेल में गिरने की घटनाएँ या फिर निर्वाचन, सभी में स्थानीय प्रशासन के स्थान पर सेना की भूमिका को सराहनीय, विश्वसनीय माना जाने लगा है. आज ये अत्यंत महत्त्वपूर्ण हो जाता है कि अपनी जान पर खेलकर देश के लिए अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने वाले सैनिकों के लिए हम किस तरह का माहौल बना रहे हैं? सैनिकों को यदि पर्याप्त सम्मान न मिले, अधिकार होने के बाद भी अधिकारों का उपयोग करने की आज़ादी न मिले, सशक्त होने के बाद भी भीड़ से पत्थरों की मार सहनी पड़े, कर्तव्य की राह में मानवाधिकार आकर धमकाए तो ये खतरे का सूचक है. ये बिन्दु कहीं न कहीं सैनिकों के, सेना के मनोबल को कम करते हैं, उनमें अलगाव की भावना को जन्म देते हैं.

सत्ता प्रतिष्ठानों के साथ-साथ आम नागरिकों का प्रयास हो कि सेना का मनोबल कम न होने पाए. सत्ता प्रतिष्ठानों को सेना सम्बन्धी मामलों में अनावश्यक हस्तक्षेप करने से बचना चाहिए. समय-समय पर सेना के सामने आती असहज स्थितियों पर उनके साथ खड़े होने का एहसास कराना चाहिए. इससे सेना का मनोबल बढ़ेगा. इसी तरह आम नागरिकों को भी अपने स्तर पर सेना का, सैनिकों का सम्मान करने की भावना को विकसित करना चाहिए. हमारे जवानों द्वारा किये गए वलिदानों को, उनकी जांबाजी को न केवल याद किया जाये वरन उसे समाज में प्रचारित-प्रसारित किया जाये. निस्वार्थ भाव से देश के लिए कार्य कर रहे सैनिकों के लिए हम सभी को जागना होगा. कारगिल विजय दिवस के सहारे ही हमें उन सभी सैनिकों का स्मरण करना होगा जो हमारी रक्षा के लिए अपनी जान को जोखिम में डालते हैं. देश की एकता, अखंडता, स्वतंत्रता के लिए और नागरिकों के सुखमय जीवनयापन करने, सुरक्षित रहने के लिए ऐसा करना अनिवार्य भी है.

अपने जांबाज़ सैनिकों को याद करते हुए विजय दिवस को समर्पित आज की बुलेटिन. 
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शुक्रवार, 25 जुलाई 2014

कुछ याद उन्हें भी कर लें - विजय दिवस - ब्लॉग बुलेटिन

नमस्कार मित्रो,
विजय दिवस के इस गौरवशाली क्षण पर शहीदों को नमन करते हुए आप सभी का स्वागत है।
आज से 15 वर्ष पहले भारतीय सेना ने आज के ही दिन नियंत्रण रेखा से लगी कारगिल की पहाड़ियों पर कब्ज़ा जमाए आतंकियों और उनके वेश में घुस आए पाकिस्तानी सैनिकों को मार भगाया था। पाकिस्तान के ख़िलाफ़ यह पूरा युद्ध ही था, जिसमें पांच सौ से ज़्यादा भारतीय जवान शहीद हुए थे। इन वीर और जाबांज जवानों को पूरा देश ‘विजय दिवस’ के नाम से मनाकर याद करता है और श्रद्धापूर्वक नमन करता है। देश की इस जीत में कारगिल के स्थानीय नागरिकों ने भी बड़ी भूमिका निभाई थी। 

कारगिल युद्ध  भारत और पाकिस्तान के बीच 1999 में मई के महीने में कश्मीर के कारगिल ज़िले से शुरू हुआ था। इस युद्ध का महत्त्वपूर्ण कारण पाकिस्तानी सैनिकों व पाक समर्थित आतंकवादियों का बड़ी संख्या में 'लाइन ऑफ कंट्रोल' (LOC) यानी भारत-पाकिस्तान की वास्तविक नियंत्रण रेखा के भीतर घुस आना रहा था। इन लोगों का उद्देश्य कई महत्त्वपूर्ण पहाड़ी चोटियों पर कब्जा कर सियाचिन ग्लेशियर पर भारत की स्थिति को कमजोर करने के साथ-साथ हमारी राष्ट्रीय अस्मिता के लिए खतरा पैदा करना था। दो महीने से भी अधिक समय तक चले इस युद्ध में भारतीय थलसेना वायुसेना ने 'लाइन ऑफ कंट्रोल' पार न करने के आदेश के बावजूद अपनी मातृभूमि में घुसे आक्रमणकारियों को मार भगाया था। 

इस युद्ध में भारत के 500 से भी ज़्यादा वीर योद्धा शहीद हुए और 1300 से ज्यादा घायल हो गए। इनमें से अधिकांश जवान ऐसे युवा थे जिन्होंने अपने जीवन के 30 वसंत भी नहीं देखे थे। इन शहीदों ने भारतीय सेना की शौर्य तथा बलिदान की उस सर्वोच्च परम्परा का निर्वाह किया, जिसकी सौगन्ध हर भारतीय सिपाही तिरंगे के समक्ष लेता है। इन रणबाँकुरों ने अपने परिजनों से वापस लौटकर आने के वादे को निभाया मगर उनके आने का अन्दाज निराला था। वे लौटे मगर लकड़ी के ताबूत में, उस तिरंगे को लपेट कर, जिसकी रक्षा की सौगन्ध उन्होंने खाई थी। जिस राष्ट्र ध्वज के आगे कभी उनका माथा सम्मान से झुकता था, वही तिरंगा मातृभूमि के इन बलिदानी जाँबाजों से लिपटकर उनकी गौरव गाथा का बखान कर रहा था। 


आइये हम भी इन जांबाज़ रणबांकुरों के लिए सम्मान प्रकट करें। विजय के इस पर्व को पूरी श्रद्धा, ईमानदारी से मनाते हुए उन्हें याद करें जो लौट के घर न आये।
जय हिन्द....!!!
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शुक्रवार, 26 जुलाई 2013

१४ वें कारगिल विजय दिवस पर अमर शहीदों को नमन

प्रिय ब्लॉगर मित्रों,
प्रणाम !


कारगिल युद्ध को ख़त्म हुये आज  पूरे चौदह वर्ष हो गए। कारगिल के विजय अभियान को चलाए गए ऑपरेशन विजय में भारत ने अपने 527 वीर सपूतों को खो दिया था। वहीं इस युद्ध में पंद्रह सौ जवानों के करीब घायल भी हो गए थे। लेकिन इन जवानों के हौंसलों के आगे दुश्मन के नापाक इरादे पस्त हो गए।


इस युद्ध में करीब 250,000 गोले, बम और रॉकेट दागे गए। हर रोज लगभग 50000 तोप के गोले, मोर्टर बम और रॉकेट 300 बंदूक, मोर्टर और एमबीआरएस द्वारा दागे गए थे। इतनी भारी मात्रा में बम, गोलों का इस्तेमाल दूसरे विश्व युद्ध के बाद का पहली बार इसी युद्ध में किया गया था।


मई 1999 में पाकिस्तानी सेना ने कारगिल समेत कुछ अन्य हिस्सों में भारतीय सेना की गैर मौजूदगी का फायदा उठाकर अपनी चौकियां स्थापित कर ली थीं। इसकी खबर सबसे पहले केप्टन सौरभ कालिया की गश्ती टीम ने भारतीय चौकी को दी थी। हालांकि इस दौरान उन्हें और उनके साथी जवानों को पाक सेना ने अगवा कर लिया और बड़ी ही बेरहमी से कत्ल कर दिया था। 13 मई, 1999 को ही द्रास क्षेत्र के टोलोलिंग पहाड़ी को पाक फौज से मुक्त कराने के बाद भारतीय सेना को पाक सेना के मंसूबे और उनकी मजबूती का अंदाजा हो गया था। इसके बाद ही इस युद्ध में ऊंचाई को देखते हुए बोफोर्स तोप के इस्तेमाल करने का निर्णय लिया गया।

5 जुलाई, 1999 को भारतीय सेना टाइगर हिल फतह करने में कामयाब हुई। 7 जुलाई को भारतीय सेना ने मशकोह हिल पर कब्जा कर तिरंगा फहराने में सफलता हासिल की। पाक सैनिकों की ऊंची पहाडिय़ों पर मौजूदगी की बदौलत सियाचिन-ग्लेशियर पर भारत की स्थिति कमजारे हो रही थी। वहीं लेह-लद्दाख को भारत से जोडने वाली सड़क पर भी पाक सैनिकों की निगाह थी। बावजूद इसके 26 जुलाई, 1999 को भारतीय फौज ने इस पूरे इलाके से पाक सैनिकों को खदेड़ने में सफलता हासिल की और ऑपरेशन विजय की सफलता का बिगुल बजाया।
 
इस युद्ध में भारतीय सेना के साथ भारतीय वायुसेना के मिराज 2000 और जगुआर ने भी अहम भूमिका निभाई थी। वहीं भारतीय नौसेना ने पाकिस्तान के जहाजों को अपने खेमे में ही समेट कर रख दिया था। इन जांबांजों की वीरता को सलाम करने के मकसद से 26 जुलाई को हर वर्ष कारगिल दिवस के रूप में मनाने का फैसला किया गया।

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एक दिन न्यूटन का नियम सच होगा..

पैट डॉग का साथ दूर करे तनाव

सूचना का आरक्षण

कुमार अनुपम की ताज़ा कवितायें

धरतीपकड़ फ़िर मैदान में !

हमें अपने भारतीय होने पर गर्व है !

कार्टून :- 5 रूपये में बल्‍ले बल्‍ले

दक्षता-संवर्धन

एक मुलाकात कल परसों में प्रसिद्ध हुए नेता और बरसों से प्रसिद्ध अभिनेता खाज साहब से

'' यात्रा अमरनाथ धाम की''

चमत्कार पर चमत्कार
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अब आज्ञा दीजिये ...

जय हिन्द !!!

रविवार, 16 दिसंबर 2012

विजय दिवस की हार्दिक बधाइयाँ - ब्लॉग बुलेटिन

प्रिय ब्लॉगर मित्रों ,
प्रणाम !

ऊपर दी गई इस तस्वीर को देख कर कुछ याद आया आपको ?

आज १६ दिसम्बर है ... आज ही के दिन सन १९७१ में हमारी सेना ने पाकिस्तानी सेना को घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया था ... और बंगलादेश की आज़ादी का रास्ता साफ़ और पुख्ता किया था ! तब से हर साल १६ दिसम्बर विजय दिवस के रूप में मनाया जाता है !

आइये कुछ और तस्वीरो से उस महान दिन की यादें ताज़ा करें !













 आप सब को विजय दिवस की हार्दिक बधाइयाँ और शुभकामनाएं !
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साहब की कोठी
मनोज कुमार at विचार
साहब की कोठी आज सुबह की सैर से वापस आते समय पहले तो धीरे-धीरे फिर ज़ोर से वर्षा होने लगी। तेज हो चुकी बारिश से बचने के लिए मैं छाता ताने अपनी रफ्तार तेज करता घर की तरफ वापस जा रहा था। तभी काफी तेज रफ्तार से पुलिस की गाड़ी मेरे बगल से गुजरी। छपाक ...!!! ... और सड़क पर जम आए पानी से मेरा वह शरीर, जिसे अब तक मेरे छाते ने इंद्र देवता से बचाकर रखा था, भींग गया और साथ ही छोड़ गया कीचड़ से सना वस्‍त्र। अब तो मैं अपना छाता मोड़ने में ही सुख मान रहा था, बारिश की बौछार से कुछ तो कीचड़ धुल जाए! छाता मोड़ते हुए मैं बाई ओर अपनी गरदन घुमाता हूँ। जेल की ऊँची दीवारों पर उग आए पौधों पर मेरी  more »

सहन-शक्ति

सुज्ञ at सुज्ञ
बात महात्मा बुद्ध के पूर्व भव की है जब वे जंगली भैंसे की योनि भोग रहे थे। तब भी वे एकदम शान्त प्रकृति के थे। जंगल में एक नटखट बन्दर उनका हमजोली था। उसे महात्मा बुद्ध को तंग करने में बड़ा आनन्द आता। वह कभी उनकी पीठ पर सवार हो जाता तो कभी पूंछ से लटक कर झूलता, कभी कान में ऊंगली डाल देता तो कभी नथुने में। कई बार गर्दन पर बैठकर दोनों हाथों से सींग पकड़ कर झकझोरता। महात्मा बुद्ध उससे कुछ न कहते। उनकी सहनशक्ति और वानर की धृष्टता देखकर देवताओं ने उनसे निवेदन किया, "शान्ति के अग्रदूत, इस नटखट बंदर को दंड दीजिये। यह आपको बहुत सताता है और आप चुपचाप सह लेते हैं!" वह बोले, "मैं इसे  more »

हम पढ़ें, लिखें या करें ब्लॉगिंग...!

देवेन्द्र पाण्डेय at ब्लॉग और ब्लॉगर की टिप्पणी
(1) न दैन्यं न पलायनम्.... यह प्रवीण पाण्डेय जी का ब्लॉग है। जानता हूँ, इससे सभी परिचित हैं। मैं बस भूमिका के लिए बता रहा हूँ। पिछले दिनो इस ब्लॉग पर एक पोस्ट आई.. *पढ़ते-पढ़ते लिखना सीखो*। शीर्षक पढ़कर तो ऐसा लगा कि यह बच्चों को कोई उपदेश देने वाली पोस्ट है लेकिन पढ़ने के बाद एहसास हुआ कि यह हमारे जैसे बेचैन लोगों की व्यथा-कथा है। इस पोस्ट के माध्यम से जो विमर्श उठाया गया है वह यह.. प्रश्न बड़ा मौलिक उठता है, कि यदि इतना स्तरीय और गुणवत्तापूर्ण लिखा जा चुका है तो उसी को पढ़कर उसका आनन्द उठाया जाये, क्यों समय व्यर्थ कर लिखा जाये और औरों का समय व्यर्थ कर पढ़ाया जाये ? ब्लॉग और कमें... more »

बैंगलोर पासपोर्ट की ऑनलाइन सेवा याने कि भ्रष्टाचार 

noreply@blogger.com (Vivek Rastogi) at कल्पनाओं का वृक्ष
सरकार ने लगभग २ वर्ष पहले पासपोर्ट कार्यालय और पुलिस के भ्रष्टाचार से मुक्ति दिलवाते हुए, पासपोर्ट की प्रक्रिया ऑनलाइन की थी। मैंने खुद लगभग १.८ वर्ष पहले पासपोर्ट बनवाया था और इस प्रक्रिया का साक्षात अनुभव किया था। पासपोर्ट कार्यालय में केवल २ घंटे की अवधि में मेरा पूरा कार्य हो गया था, सरकार ने ऑनलाईन प्रक्रिया करते हुए प्रोसेसिंग का कार्य टीसीएस को ऑउटसोर्स कर दिया था। अभी मेरे ऑफ़िस के कुछ मित्रों को पासपोर्ट बनवाना था तब यह भ्रष्टाचार हमारे सामने आया । जनता समझती है कि अगर सरकार सुविधाएँ ऑनलाइन कर दे उसको सुविधाएँ मिलने लगेंगी। पहली बार जब IRCTC के द्वारा रेल्वे ने more »

शुक्र है अब भी बचा है रेडियो

रमेश शर्मा at यायावर
आवाज की दुनिया मे गुमसुम आलमआरा जैसी मूक फ़िल्मो पर झूमते उस जमाने के हमारे समाज मे एक स्वरीय क्रान्ति ले कर आया रेडियो अब भारत मे तकरीबन सौ साल पूरे करने के समीप है। तमाम कमियो के बावजूद आज भी रेडियो सुनना अच्छा लगता है । जैसे सफ़ारी और जीन्स के युग मे धोती अच्छी लगती है। जैसे विविध भारती पर पुराने नगमो की बरसात पुरानी यादों को जगा जाती है। दुनिया मे टीवी के तमाम जलवो के बावजूद रेडियो की आज भी क्या अहमियत है इसे बयान करने के लिए एक ताजा मामले की चर्चा। यह मामला रेडियो बनाम ऍफ़ एम् के दिग्भ्रमित काल का एक नायाब उदाहरण है। आरजे ने गर्भवती महारानी केट की तबीयत जानने के लिए ब्रिट... more »

एक सीली रात के बाद की सुबह......

नर्म लहज़े में शफ़क ने कहा उठो दिन तुम्हारे इंतज़ार में है और मोहब्बत है तुमसे इस नारंगी सूरज को.... इसका गुनगुना लम्स तुम्हें देगा जीने की एक वजह सिर्फ तुम्हारे अपने लिए... सुनो न ! किरणों की पाजेब कैसे खनक रही है तुम्हारे आँगन में. मानों मना रही हो कमल को खिल जाने के लिए सिर्फ तुम्हारे लिए..... चहक रहा है गुलमोहर बिखेर कर सुर्ख फूल तुम्हारे क़दमों के लिए.... जानती हो ये मोगरा भी महका है तुम्हारी साँसों में बस जाने को... सारी कायनात इंतज़ार में है तुम्हारी आँखें खुलने के... जिंदगी बाहें पसारे खड़ी है तुम्हें आलिंगन में भरने को.... उठो न तुम... और कहो कुछ, इंतज़ार करती इस सुबह से.... जवा... more »

प्रेम की कोई भाषा नहीं होती...

ZEAL at ZEAL
मेरा फ़्लैट दुसरे माले पर है ! सुबह बालकनी में धूप ले रही थी कि निगाह कार पार्किंग में गयी ! सुरेश जल्दी-जल्दी सभी कारें साफ़ करने में लगा था , पता नहीं एक दिन में कितनी कार साफ़ कर डालेगा ... उसे तो बस हर कार मालिक से 300 रूपए महीने पाने थे! अचानक मेरी निगाह नीचे खड़े काले कुत्ते पर गयी , मुंह उठाये दुसरे माले पर मुझे देख रहा था ! प्रेम के लिए अपनी गर्दन को बेवजह इतनी तकलीफ दे रहा था ! मुझे उसका अपनापन बहुत अच्छा लगा ! मैंने मुस्कुरा दिया तो उसने पूंछ और जोर से हिलानी शुरू कर दी ... फिर अपनी जगह बदलकर ठीक मेरी बालकनी की सिधान में आ गया और 180 डिग्री पर सर उठाकर निहारने लगा !more »

सोलह दिसम्बर.......... कहां गये वो लोग......

आज सोलह दिसम्बर है, आज का दिन विजय दिवस के रूप में मनाया जाता है... आज का दिन अपनी सेना पर गर्व करनें का दिन है... आज का दिन उस कीर्तिमान को याद करनें का दिन है जब ९५००० पाकिस्तानी सैनिकों नें घुटनें टेक कर आत्मसमर्पण किया और सम्पूर्ण विश्व नें हमारी शक्ति को जाना और पहचाना। आईए उस वाक्ये को थोडा विस्तार से पढें.... पूर्वी पाकिस्तान में पाकिस्तान एक सिलसिलेवार तरीके से लगभग अत्याचार, नरसंहार और दमन की योजना पर अमल कर रहा था, इसके कारण उस क्षेत्र से लगभग दस लाख लोगों नें भारत के पूर्वी राज्यों में शरणार्थी के रुप में आना शुरु कर दिया। पश्चिम बंगाल, बिहार, असम, त्रिपुरा, मेघालय में इ... more »

अमरीका :- बंदूक में भर के अमरीकी पि‍ज्ज़ा ...

श्रद्धांजलि

*बाल ठाकरे को श्रद्धांजलि * मुम्बई में ‘कार्टूनिस्ट्स’ कम्बाइन’ द्वारा देश के जानेमाने कार्टूनिस्ट बालासाहेब ठाकरे पर बनाये गये कार्टून और कैरीकेचरों की एक विशेष प्रदर्शनी का जल्दी ही आयोजन किया जा रहा है। कार्टूनिस्ट प्रभाकर वाइरकर के अनुसार* ' टाइगर' बालासाहेब ठाकरे के लिए एक श्रद्धांजलि '* प्रदर्शनी के स्थान, समय और दिनांक के बारे में जल्दी ही जानकारी दे दी जाएगी। इस प्रदर्शनी हेतु ‘टाइगर" बालासा्हेब ठाकरे को लेकर सभी कार्टूनिस्टों द्वारा बनाये गये प्रकाशित/अप्रकाशित ३-४ कर्टून और/या कैरीकेचर आमन्त्रित किये गये हैं। *आवश्यक विवरण:* • कागज का आकार आकार: ए३ (२९७X४२० मिमी.) more »

डी.टी.सी. के बस की सवारी

ये डी.टी.सी. के बस की सवारी इससे तो थी अपनी यारी हर सुबह कुछ किलोमीटर का सफर कट “जाता था” , नहीं थी फिकर जैसे सुबह 9 बजे का ऑफिस 11 बजे तक पहुँचने पर कहलाता नाइस तो बेशक घर से हर सुबह निकलते लेट पर बस स्टैंड पर भी थोड़ा करते वेट अरे! कुछ बालाओं को करना पड़ता था सी-ऑफ ताकि कोई “भगा” न ले, न हो जाए इनका थेफ्ट कुछ ऑटो से जाती, कुछ भरी हुई बस मे हो जाती सेट हम आहें भरते, करते रह जाते दिस-देट मेरी बोलती आंखे दूर से करती बाय-बाय मन मे हुक सी होती, आखिर कब 'वी मेट' लो जी आ ही गई हमारी भी बस ! जो एक और झुकी थी, क्योंकि थी ठसाठस तो भी “बहुत “ सारे यात्रीगण चढ़ रहे थे कुछ ही यात्री आगे, बढ़ रह... more »

नम मौसम, भीगी जमीं ..

Rohitas ghorela at Rohitas Ghorela
सर्दी की लम्बी काली रातें तन्हाइयां और घड़ी की टक..टक..टक सुबह तलक, क़हरे-हवा बबूल से टपकती शबनमी बूंदें टप..टप..टप नम मौसम, भीगी जमीं। By:- **रोहित** क़हरे-हवा=यादों का क़हर (कविता के अर्थ में) / हवा की विपदा (शाब्दिक अर्थ)

.....साँवली बिटिया .....

*रंग सांवला बिटिया का * *कैसे ब्याह रचाऊँगा * *बेटे जो होते सांवले...* *शिव और कृष्णा उन्हें बनाता * *बेटी को क्या उपमा दिलाऊंगा ....* * **पढ़ी लिखी संस्कारी है वो* *गुणों से सुसज्जित न्यारी है वो* *मेरी तो राजदुलारी है वो* *पर अपने रंग से थोड़ा सा लजाई है वो .......* * **गोरा तो गोरी ही चाहे* *काले को भी गोरी ही मनभाए* *सांवल किसी को क्यूँ ना सुहाए* *प्रेम का रंग क्यूँ कोई देख ना पाए ......* * **वो भी सृजन है देवों का* *करुणा , ममता उसमे भी है* *घर की लक्ष्मी भी बन दिखाएगी वो* *ग़र समझो उसे की वो अपनी है....* * **सांवली है पर संध्या है वो..* *भोर की पहली सांवली बदरिया है वो* *मेरी तो more »

माँ तुम्हारा चूल्हा

अरुण चन्द्र रॉय at सरोकार
2010 में एक कविता लिखी थी "माँ तुम्हारा चूल्हा" और आज चर्चा है सभी अख़बारों में कि देश के स्वस्थ्य को प्रभावित करने वाला कारक है - चूल्हा (हाउस होल्ड एयर पाल्यूशन). संयुक्त राष्ट्र संघ से डबल्यू एच ओ तक इसे साबित करने पर तुला है। आश्चर्य है कि विकसित देशो में ए सी, गाड़ियाँ, हवाई जहाज़ आदि आदि धरती को कितना नुकसान पहुचते हैं, इस पर कोई अध्यनन नहीं होता। वह दिन दूर नहीं जब लकड़ी को इंधन के रूप में इस्तेमाल पर पाबंदी होगी और सोचिये कि कौन प्रभावित होगा, साथ ही पढ़िए मेरी कविता भी। माँ बंद होने वाला है तुम्हारा चूल्हा जिसमे झोंक कर पेड़ की सूखी डालियाँ पकाती हो तुम खाना कहा जा रहा ... more »

विजय दिवस विशेष - जय हिन्द की सेना

शिवम् मिश्रा at बुरा भला
*ऊपर दी गई इस तस्वीर को देख कर कुछ याद आया आपको ?* *आज १६ दिसम्बर है ... आज ही के दिन सन १९७१ में हमारी सेना ने पाकिस्तानी सेना को घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया था ... और बंगलादेश की आज़ादी का रास्ता साफ़ और पुख्ता किया था ! तब से हर साल १६ दिसम्बर विजय दिवस के रूप में मनाया जाता है ! * *आइये कुछ और तस्वीरो से उस महान दिन की यादें ताज़ा करें !* *आप सब को विजय दिवस की हार्दिक बधाइयाँ और शुभकामनाएं !* * * *आज जब हम विजय दिवस का जश्न मना रहे है ... आइये साथ साथ याद करे उन सब वीरों और परमवीरों को जिन्होने अपना सब कुछ नौछावर कर दिया अपनी पलटन और अपने देश के मान सम्मान बनाए रखने क... more »
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आज जब हम विजय दिवस का जश्न मना रहे है ... आइये साथ साथ याद करें उन सब वीरों और परमवीरों को जिन्होने अपना सब कुछ नौछावर कर दिया अपनी पलटन और अपने देश के मान सम्मान बनाए रखने के लिए ...
जय हिंद  ... जय हिंद की सेना !!!

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