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बुधवार, 28 सितंबर 2016

भूली-बिसरी सी गलियाँ - 10




आँसुओं का बह निकलना 
मन की कमज़ोरी नहीं 
मन की दृढ़ता है 
जो दर्द को गहराई से जीता है 
सोचता है 
करवटें लेता है 
छत निहारता है 
कब आँखें भरीं 
कब दर्द छलका - पता भी नहीं चलता !


An Indian in Pittsburgh - पिट्सबर्ग में एक भारतीय

समालोचन





मंगलवार, 27 सितंबर 2016

भूली-बिसरी सी गलियाँ - 9




मेरी आवाज़ ब्लॉग की गलियों से है 
संभव है कि किसी ब्लॉग को दुबारे लिख दूँ  ... उम्र का तकाज़ा है 
भूलने की आदत सी है 
तो आप भी भूल जाइयेगा :)
मकसद है 
छोड़ आये हम जो गलियाँ 
वहाँ लौट चलें 
कोई तो कहे,
"तुम आ गए हो, नूर आ गया है  ... "



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