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रविवार, 4 नवंबर 2018

दादा जी, फेसबुक और मंदाकिनी

प्रिय ब्लॉगर मित्रों,
प्रणाम |

चित्र गूगल से साभार
दादा जी: सारा दिन मोबाइल! फेसबुक...बोर नहीं होता क्या तू? ऐसा क्या है उसमें?

पोता: अरे दादा जी आप एक काम करो, आप इसमें अपने पुराने मित्रों को ढूँढो! इसे एक बार इस्तेमाल करके देखो! फिर कहना!

दादा जी: मुझे नहीं करना ये सब!

पोता: एक बार करके तो देखिये!

दादाजी: अरे, वो सब तो मेरे साथ तीसरी, चौथी तक पढ़े... उन सबको ये पता होगा क्या?

पोता: अरे, आप एक बार, ट्राय तो करो दादा जी!

और फिर 88 साल के सदानंद जी का फेसबुक अकाउंट बनाया गया! 


और आधे घंटे के भीतर, चन्द्रकान्त पाटिल, यशवंत राव और झामलू यादव, इत्यादि की फ्रेंड रिक्वेस्ट भी आ गई!

यह सब फ्रेंड रिक्वेस्ट देखते ही दादा जी की आँखें चमक उठीं और वे पोते से बोले, 


"अरे, बेटा जरा देख तो... इसमें लीलावती चौरसिया या फिर मंदाकिनी चौहान, इनका कहीं पता लगता है क्या?"


😉

सादर आपका
 शिवम् मिश्रा
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~

हम देखते ही रह गए दिल का मकां जलता हुआ

मैं, सोच रहा हूँ

विज्ञान संचार में पाठ्यक्रम

दीपावली का त्यौहार

स्वतंत्रता और आवश्यकता - १

468.माटी

पन्ने अतीत के

राधा रमन रेती, बलदेव जी मंदिर, रसखान समाधी, 84 खम्बा

***...और तुम चले गए ***

अपनी queen मान लोगे..!!!

भारतीय गणितज्ञ स्व॰ शकुंतला देवी जी की ८९ वीं जयंती

~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
अब आज्ञा दीजिए ... 

जय हिन्द !!!

9 टिप्पणियाँ:

सुशील कुमार जोशी ने कहा…

बहुत बढ़िया व्यंग। सुन्दर बुलेटीन प्रस्तुति।

Meena Sharma ने कहा…

वाह !!! मजेदार भूमिका और सुंदर प्रस्तुति

Abhilasha ने कहा…

बहुत ही सुन्दर संकलन

anuradha chauhan ने कहा…

बहुत सुंदर बुलेटिन प्रस्तुति बहुत बहुत आभार शिवम् जी मेरी रचना को बुलेटिन प्रस्तुति का हिस्सा बनाने के लिए

विकास नैनवाल ने कहा…

हा हा बन्दर गुलाटी मारना कभी नहीं भूलता। रोचक संकलन।

Kavita Rawat ने कहा…

बहुत अच्छी बुलेटिन प्रस्तुति
सबको धनतेरस की हार्दिक शुभकामनाएं!

Digvijay Agrawal ने कहा…

हा हा हा हा
पता चल जाएगा..
कोशिश तो कीजिए...
बेहतरीन बुलेटिन...
धनतेरस की शुभकामनाएँ...
सादर...

शिवम् मिश्रा ने कहा…

आप सब का बहुत बहुत आभार |

अर्चना तिवारी ने कहा…

रोचक प्रस्तुति।

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