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शनिवार, 14 जुलाई 2018

लीला चिटनिस और ब्लॉग बुलेटिन

सभी हिन्दी ब्लॉगर्स को नमस्कार।
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लीला चिटनिस (अंग्रेज़ी: Leela Chitnis, जन्म: 9 सितंबर, 1909; मृत्यु: 14 जुलाई, 2003) हिन्दी फ़िल्मों की प्रसिद्ध अभिनेत्री थीं। लीला चिटनिस ने 52 वर्ष तक अभिनय किया और अशोक कुमार की नायिका रहीं, तो बाद में अनेक फ़िल्मों में वे दिलीप कुमार, राजकपूर और देव आनंद की माँ की भूमिकाओं में आईं। लीला चिटनिस ने अभिनय करने के अलावा एक फ़िल्म 'आज की बात' (1955) का निर्माण और निर्देशन भी किया।


  • हिंदुस्तानी सिनेमा में आने वाली स्नातक अभिनेत्रियों में दुर्गा खोटे के बाद लीला चिटनिस का नाम शिखर पर है। अपने जीवन में भी पति गजानन यशवंत चिटनिस से तलाक के बाद चार बच्चों की परवरिश उन्होंने बड़े जतन से की और 93 वर्ष की आयु में उनकी मृत्यु भी अमेरिका में उनके ज्येष्ठ पुत्र के घर हुई।
  • लीला चिटनिस ने अपने पति के साथ स्वतंत्रता संग्राम में इस तरह सहयोग किया कि क्रांतिकारी मानवेंद्र नाथ राय को अपने घर में ब्रिटिश पुलिस की निगाह से बचाकर रखा।
  • वे पहली भारतीय अभिनेत्री थीं, जिन्होंने 1941 में 'लक्स' साबुन के लिए विज्ञापन फ़िल्म में काम किया। उनके पूर्व केवल हॉलीवुड नायिकाओं को लिया जाता था। परंतु 1930 वाले दौर में पारंपरिक समाज स्त्री को किसी तरह आज़ादी और सुविधा नहीं देता था, तब इन महिलाओं ने रंगमंच पर अभिनय किया है, फ़िल्में की हैं और स्वतंत्रता संग्राम में भी सहयोग किया है।
  • लीला चिटनिस को देविका रानी जैसी विरल सुंदर महिला के स्टूडियो में उनके प्रिय नायक अशोक कुमार के साथ अपनी काबिलियत सिद्ध करनी थी। देविका रानी कठोर प्रशासक थीं। प्रेमिका की भूमिकाओं से नए लोगों द्वारा विस्थापित होने के बाद कभी अपने नायक रहे कलाकारों की माँ की भूमिका करना आसान यात्रा नहीं थी। लीला चिटनिस अपनी लंबी पारी में कभी भी किसी विवाद में नहीं उलझीं।



आज लीला चिटनिस जी के 109वें जन्म दिवस पर हम सब उन्हें अभिनय और मनोरंजन जगत में योगदान के लिए भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। सादर ... अभिनन्दन।।


~ आज की बुलेटिन कड़ियाँ ~


एक कीड़े ने पुराना समय याद दिलाया।

सोना पाने वाले प्रदर्शन से अधिक महत्वपूर्ण अंग्रेजी?

जितना चाहो ,देखो और दिखाओ

.....सूचना मन्त्री को सूचना नहीं मिली

वो हो सकता है जो आपने सोचा ही नहीं!

क्या हमें टेलीस्कोप से चांद पर लगे झंडे दिख सकते हैं?

मैक्सिकन वेव

अपना काम स्वयं करो

जल्द ही मैं भी अपना लक पहनकर चल सकूंगा

लकीरों मे कैद गौरैया

इसलिए मेरे अवसाद से डरता है


आज की बुलेटिन में बस इतना ही कल फिर मिलेंगे तब तक के लिए शुभरात्रि। सादर  ... अभिनन्दन।। 

2 टिप्पणियाँ:

सुशील कुमार जोशी ने कहा…

सुन्दर बुलेटिन प्रस्तुति।

शिवम् मिश्रा ने कहा…

लीला चिटनिस जी को सादर नमन |

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