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रविवार, 29 जुलाई 2018

ईश्वर चन्द्र विद्यासागर जी की १२७ वीं पुण्यतिथि

प्रिय ब्लॉगर मित्रों,
प्रणाम |

ईश्वर चन्द्र विद्यासागर (बांग्ला में, ঈশ্বর চন্দ্র বিদ্যাসাগর), के बचपन का नाम ईश्वर चन्द्र बन्दोपाध्याय था। वे बंगाल के पुनर्जागरण के स्तम्भों में से एक थे। इनका जन्म बंगाली ब्राह्मण परिवार में २६ सितम्बर १८२० और इनका निधन २९ जुलाई १८९१ को हुआ। इनका जन्म पश्चीम बंगाल में हुआ था, करमाटांड़ इनकी कर्मभूमी थी। वे उच्चकोटि के विद्वान थे। उनकी विद्वता के कारण ही उन्हें विद्दासागर की उपाधि दी गई थी।

इन्हें सुधारक के रूप में राजा राममोहन राय का उत्तराधिकारी माना जाता है। इन्होंने विधवा पुनर्विवाह के लिए आंदोलन किया और सन 1856 में इस आशय का अधिनियम पारित कराया। 1856-60 के मध्य इन्होने 25 विधवाओ का पुनर्विवाह कराया। इन्होने नारी शिक्षा के लिए भी प्रयास किए और इसी क्रम में Baithun स्कूल की स्थापना की तथा कुल 35 स्कूल खुलवाए। वे नारी शिक्षा के समर्थक थे। उनके प्रयास से ही कलकत्ता में एवं अन्य स्थानों में बहुत अधिक बालिका विद्दालयों की स्थापना हुई। 

उस समय हिन्दु समाज में विधवाओं की स्थिति बहुत ही सोचनीय थी। उन्होनें विधवा पुनर्विवाह के लिए लोगमत तैयार किया। उन्हीं के प्रयासों से 1856 ई. में विधवा-पुनर्विवाह कानून पारित हुआ। उन्होंने अपने इकलौते पुत्र का विवाह एक विधवा से ही किया। उन्होंने बाल विवाह का भी विरोध किया। 

विद्यासागर शैक्षणीक जीवन में बहूत ही बुध्दीमान विद्यार्थी थे। वे एक दार्शनिक, शिक्षाशास्त्री, लेखक, अनुवादक, मुद्रक, प्रकाशक, उद्यमी, सुधारक एवं मानवतावादी व्यक्ति थे। उन्होने बांग्ला भाषा के गद्य को सरल एवं आधुनिक बनाने का उनका कार्य सदा याद किया जायेगा। उन्होने बांग्ला लिपि के वर्णमाला को भी सरल एवं तर्कसम्मत बनाया। बँगला पढ़ाने के लिए उन्होंने सैकड़ों विद्दालय स्थापित किए तथा रात्रि पाठशालाओं की भी व्यवस्था की। उन्होंने संस्कृत भाषा के प्रचार-प्रसार के लिए प्रयास किया। उन्होंने संस्कृत कॉलेज में पाश्चात्य चिंतन का अध्ययन भी आरंभ किया। 

ब्लॉग बुलेटिन टीम और हिन्दी ब्लॉग जगत की ओर से ईश्वर चन्द्र विद्यासागर जी की १२७ वीं पुण्यतिथि पर उनको शत शत नमन |

सादर आपका

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 अब आज्ञा दीजिये ...

जय हिन्द !!!

7 टिप्पणियाँ:

सुशील कुमार जोशी ने कहा…

ईश्वर चन्द्र विद्यासागर जी को नमन। आभार शिवम जी आज की बुलेटिनमें 'उलूक' की बकवास को जगह देने के लिये।

विश्वमोहन ने कहा…

नमन उस महान आत्मा को !!!

कविता रावत ने कहा…

बहुत अच्छी बुलेटिन प्रस्तुति

HARSHVARDHAN ने कहा…

महान शिक्षाविद ईश्वर चन्द्र विद्यासागर जी की 127वीं पुण्यतिथि पर शत शत नमन।

शिवम् मिश्रा ने कहा…

आप सब का बहुत बहुत आभार |

dr.sunil k. "Zafar " ने कहा…

बहुत ही जानकारी से भरपूर पोस्ट .धन्यवाद् सर.

संध्या आर्य ने कहा…

तहे दिल से शुक्रिया मुझे अपने ब्लोग बुलेटिन मे जगह देने के लिये ! आभार !

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