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सोमवार, 1 अप्रैल 2019

मूर्ख दिवस विशेष - आप मूर्ख हैं या समझदार !?

प्रिय ब्लॉगर मित्रों,
प्रणाम |

यदि आप पहली अप्रैल को मूर्ख बने तो एक ही दिन के लिए मूर्ख बनोगे।

परन्तु यदि आप चुनाव वाले दिन को मूर्ख बने तो अगले पांच साल मूर्ख बने रहोगे।

आगामी लोकसभा चुनावों में अपना कीमती वोट दे कर समझदार बनें।

10 टिप्पणियाँ:

सुशील कुमार जोशी ने कहा…

बधाई 'उलूक' दिवस की केवल अपने जैसे मूर्ख मित्रों को मूर्खो की ओर से। आभार शिवम जी 'उलूक' के मूर्ख दिवस पन्ने को आज की विशेष बुलेटिन में जगह देने के लिये। बहुत सुन्दर प्रस्तुति।

मन की वीणा ने कहा…

शानदार प्रस्तुति सभी रचनाकारों को बधाई।
सभी रचनाएं पठनीय अप्रतिम।

अरुण कुमार निगम (mitanigoth2.blogspot.com) ने कहा…

सामयिक लिंक्स। मुझे सम्मिलित करने के लिए आपका आभार

दिगम्बर नासवा ने कहा…

कितना खजाना है आज ...
आभार मेरी ग़ज़ल को जगह देने के लिए ...

Asha Lata Saxena ने कहा…

सुप्रभात
उम्दा संकलन आज का |मेरी रचना शामिल करने के लिए धन्यवाद सर |

Saras ने कहा…

आपका हार्दिक आभार शिवम जी

Anita ने कहा…

रोचक भूमिका के साथ आज के बुलेटिन की सुंदर प्रस्तुति ! आभार

शिवम् मिश्रा ने कहा…

आप सब का बहुत बहुत आभार |

जगदानन्द झा ने कहा…

भारतीय परम्परा में किसी को मुर्ख नहीं बनाया जाता है। मूर्ख दिवस का औचित्य समझ के परे है। हम होली में हँसी ठिठोली कर लेते हैं। इधर साहित्यिक यात्राओं में भी सांस्कृतिक प्रदूषण बढ़ता जा रहा है। प्रतिदिन हम समारोह का नाम सुनते हैं। यह सर्वज्ञात है कि आरोह करने के बाद अवरोह भी किया जाता है। फिर भी हम तमाम समारोह मानते हैं। आरोह के स्थान पर उत्सव शब्द का प्रयोग अच्छा होता है। इसी प्रकार का एक शब्द सौजन्य है। लोग सौजन्य से काम करते हैं। विचार कर देखें।

Jyoti khare ने कहा…

वाह
रोचकता के साथ प्रस्तुत आज की बुलेटिन
सभी रचनाकारो को बधाई
मुझे सम्मलित करने का आभार
सादर

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