Subscribe:

Ads 468x60px

सोमवार, 22 अगस्त 2016

दिखावे से छवि नहीं बनती


प्रेम करते हुए 
न राधा को सोचो, न मीरा को 
न पारो को 
... न कृष्ण को, 
न देवदास को 
किसी के जैसा होने का कोई अर्थ नहीं !
प्रेम है 
तो तुम्हारा 'अपना' होना ही महत्वपूर्ण है 

यदि तुम्हें पढ़ना नहीं आता 
तो ज़रूरी नहीं 
कि तुम मन्त्रों का उच्चारण करो 
तुम्हारे भीतर आस्था है 
तो 108 बार माला जपने की भी ज़रूरत नहीं 
क्षमता से अधिक कुछ भी करना 
ना ही सही पूजा है 
न सुकून  
तुम्हारी अपनी शान्ति महत्वपूर्ण है !

याद रखो,
दिखावे से छवि नहीं बनती 
बल्कि सबकुछ तितर बितर हो जाता है 

4 टिप्पणियाँ:

सुशील कुमार जोशी ने कहा…

सुन्दर प्रस्तुति ।

yashoda Agrawal ने कहा…

शुभ प्रभात
सांध्य दैनिक कल नहीं देख पाई
सुन्दर प्रस्तुति
सादर

Kavita Rawat ने कहा…

बहुत सुन्दर बुलेटिन प्रस्तुति
आभार!

सदा ने कहा…

Apna hona hi mahtvpurn hai .... Hmesha ki tarah utkrisht lekhan .... Sadae

एक टिप्पणी भेजें

बुलेटिन में हम ब्लॉग जगत की तमाम गतिविधियों ,लिखा पढी , कहा सुनी , कही अनकही , बहस -विमर्श , सब लेकर आए हैं , ये एक सूत्र भर है उन पोस्टों तक आपको पहुंचाने का जो बुलेटिन लगाने वाले की नज़र में आए , यदि ये आपको कमाल की पोस्टों तक ले जाता है तो हमारा श्रम सफ़ल हुआ । आने का शुक्रिया ... एक और बात आजकल गूगल पर कुछ समस्या के चलते आप की टिप्पणीयां कभी कभी तुरंत न छप कर स्पैम मे जा रही है ... तो चिंतित न हो थोड़ी देर से सही पर आप की टिप्पणी छपेगी जरूर!

लेखागार