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शुक्रवार, 12 अगस्त 2016

बस काम तमाम हो गया - ब्लॉग बुलेटिन

प्रिय ब्लॉगर मित्रों,
प्रणाम |

चित्र गूगल से साभार
एक तानाशाहा के देश में एक पादरी, वकील और इंजीनियर को विद्रोह के कारण मौत की सजा मिली। जब सजा देने का वक़्त आया तो अपराधियों को आखिरी ख्वाहिश की प्रथा बताई तो उन्हें गर्दन ऊपर और नीचे रखने के विकल्प मिले।

पादरी ने ऊपर देखना स्वीकारा ताकि भगवान को देख सके और जैसे ही बटन दबाया गया तो आरी, गर्दन से सिर्फ दो इंच ऊपर रुक गई। अधिकारियों ने इसे ईश्वर की मर्जी समझ के उसे छोड़ दिया।

वकील ने भी ऊपर देखा और जब आरी रुकी तो वह बोला कानूनन एक व्यक्ति को दो बार सजा नहीं दी जा सकती और वह भी छूट गया।

इंजीनियर ने भी ऊपर ही देखने का फैंसला किया। जब बटन दबाया जा रहा था तो वो चिल्लाया, "एक मिनट रुको, अगर आप उस हरे और लाल तार को आपस में बदल देंगे तो काम हो जायेगा।"

बस काम तमाम हो गया।
 
सादर आपका

5 टिप्पणियाँ:

सुशील कुमार जोशी ने कहा…

वाह बहुत सुन्दर ।

जयकृष्ण राय तुषार ने कहा…

बहुत बहुत आभार आपका

राकेश कुमार श्रीवास्तव राही ने कहा…

बेहतरीन लिंकों से सजी बुलेटिन !

Kavita Rawat ने कहा…

बहुत सुन्दर बुलेटिन प्रस्तुति हेतु आभार!

शिवम् मिश्रा ने कहा…

आप सब का बहुत बहुत आभार |

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