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बुधवार, 12 दिसंबर 2018

2018 ब्लॉग बुलेटिन अवलोकन - 11





अभिव्यक्ति | Abhivyakti - WordPress.com

  मंजु मिश्रा जी का ब्लॉग है, जहाँ उनकी अभिव्यक्तियाँ अपने परचम लहराती है।  



आज हमारा समाज बुरी तरह से दरिंदगी के पंजों में जकड़ा हुआ है।  छोटी छोटी बच्चियों पर, औरतों पर होने वाले रोज रोज के इन पाशविक अत्याचारों से सब आहत हैं।  सोशल मीडिया, मीडिया सब जगह उफनता गुस्सा, बात-चीत, बहस लेकिन सब बेनतीजा 
सच तो यही है कि ज्यादातर लोग इन हालात में सुधार चाहते हैं लेकिन कुछ लोग ऐसे भी हैं जो इसको धर्म और राजनीति का रंग देने की कोशिश करते हैं और असल समस्या को कहीं पीछे धकेल देते हैं।  ऐसा वो जानबूझ कर करते हैं या अनजाने में, ये तो वो ही जानें, उनका ज़मीर जाने लेकिन उनकी इस हरकत से अपराधी अधिकतर बच कर निकल जाते हैं।  इस सन्दर्भ में उन सब से निवेदन है कि समस्या से उसके मूल रूप में ही सीधे सीधे निपटने की नीति अपनाइये, उसमे और मुद्दे जोड़ कर उसको भटकाइए मत 
सरकार और न्याय व्यस्था को अपना काम करने दीजिये लेकिन यदि आप समाज में फैली इस विकृत मानसिकता के खिलाफ सचमुच कुछ करना चाहते हैं, बलात्कारियों को सजा देना चाहते हैं तो एक तरीका यह भी हो सकता है
पीड़िता की नहीं बल्कि अपराधी की तस्वीर और परिचय सार्वजनिक कीजिये 
अपराधी का पूर्ण रूप से सामाजिक बहिष्कार कीजिये
अपराधी को बेटा, भाई, पति दोस्त या रिश्तेदार नहीं सिर्फ अपराधी समझिये। अपनी जवाबदेही नैतिकता और इंसानियत के प्रति रखिये 
घर-परिवार, मित्र, नातेदार-रिश्तेदार, दुकानदार, वकील, डॉक्टर, अर्थात सम्पूर्ण समाज, सब  मिलकर  अपराधी का बहिष्कार कीजिये 
अपने आस पास अपनी नजर के दायरे में उनको खड़ा मत होने दीजिये उनसे बात मत कीजिये, किसी प्रकार का कोई संबंध मत रखिये 
उनको किसी भी कीमत पर, किसी भी प्रकार की सेवाएं मुहैय्या मत करवाइये 
उपरोक्त किसी भी बात को करने के लिए आपको किसी सरकारी सहयोग की आवश्यकता नहीं है, बस अपनी अंतरआत्मा को जगाइए इतना ही काफी है   
सामाजिक बहिष्कार सदियों पुरानी दंड व्यस्था है और पूर्णतया मानवीय होते हुए भी अत्यंत प्रभावशाली है, शर्त यही है कि सम्पूर्ण समाज एक साथ मिल कर एक जुट हो कर करे। 
यदि आप उपरोक्त में से कुछ भी नहीं कर सकते तो अपनी निष्क्रियता के चलते स्वयं को भी अप्रत्यक्ष रूप से अपराध में शामिल समझिये।  

5 टिप्पणियाँ:

सुशील कुमार जोशी ने कहा…

बहुत सारे नगीने बिखरे हुए हैं यहां बस पारखी चाहिए | एक और लाजवाब चिट्ठा |

Manju Mishra ने कहा…

धन्यवाद सुशील जी !

Meena Sharma ने कहा…

मंजू मिश्रा जी के ब्लॉग तक पहुँचाने के लिए बहुत शुक्रिया।

Unknown ने कहा…

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