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शुक्रवार, 11 मई 2018

बेटी के नाम खत




ओ लाडली,

कोई ताकीद नहीं है यह 
बस एक बात है 
इसे सुनो सिर्फ बात की तरफ 
मानने के लिए नहीं, सोचने के लिए 

जो लोग डरायें तुम्हें 
उनसे डरना नहीं, 
भिड़ने को तैयार रहना 
ताकत जुटाना 
मजबूती से लड़ना और जीतना 
लेकिन बचाए रखना एक कोना संवाद का भी
कोमलता का भी 
हो सकता है उनके भीतर कोई दोस्त मिल जाए 
वो भय जो तुम्हें दिखा रहे थे 
उनका ही कोई भय निकले वो 
और अब तक हिंसक दिखने वाले 
दिखने लगें निरीह और मासूम 

जो विनम्रता और स्नेह से आते हों पेश 
उनसे मिलना मुस्कराकर 
करना बात मधुरता से 
भरोसा करना उन पर 
उनके कहे का रखना मान भी 
कहना अपना मन भी 
लेकिन बचाकर रखना एक संशय का कोना भी 
कि न जाने विनम्रता की परत
कब उतर जाए 
और स्नेह का कटोरा फूटा निकले 
उनके कोमल स्पर्श में कांटे उगते महसूस होने लगें 
खुद को महफूज रखने के लिए 
जरूरी है बचाए जाने 
थोड़े संशय और बहुत सारा भरोसा 

बेटी के नाम खत | प्रतिभा की दुनिया ...


11 टिप्पणियाँ:

shalini rastogi ने कहा…

सार्थक रचनाओं का सुंदर संकलन , मुझे स्थान देंव के लिए हार्दिक आभार रश्मि जी

सुशील कुमार जोशी ने कहा…

सुन्दर बुलेटिन।

Naveen Mani Tripathi ने कहा…

हार्दिक आभार आ0 रश्मि प्रभा जी ।

Naveen Mani Tripathi ने कहा…

बेटी के नाम खत अत्यंत प्रभावशाली रचना । इसके अतिरिक्त अन्य प्रस्तुतियां भी अप्रतिम ।

yashoda Agrawal ने कहा…

शुभ प्रभी दीदी
सादर नमन
आनन्दित हुई आज की बुलेटिन देख कर
आभार...हम बेटियाों का
सादर

Rishabh Shukla ने कहा…

सुप्रभात,
सुन्दर लिंकों से सजा बुलेटिन,
आभार|

Anita ने कहा…

सुप्रभात, सुबह सुबह सुंदर सूत्रों का परिचय देता हुआ बुलेटिन मन को आशा से भर रहा है। आभार रश्मि जी !

कडुवासच ने कहा…

बहुत सुंदर ....

Meena sharma ने कहा…

बेहतरीन ब्लॉग बुलेटिन। सुंदर प्रस्तुति।

shashi purwar ने कहा…

hardik dhnyavad rashmi di , sundar charcha aur hamen shamil karne hetu dil se abhar

उषा किरण ने कहा…

बहुत खूब 👌👌

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