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रविवार, 21 जून 2015

क्यों न रोज़ हो पितृ दिवस - ब्लॉग बुलेटिन

प्रिय ब्लॉगर मित्रों,
प्रणाम !

आज जून महीने का तीसरा रविवार है ... हर साल की तरह इस साल भी जून का यह तीसरा रविवार फदर्स डे के रूप मे मनाया गया ... पर अंतराष्ट्रीय योग दिवस की धूम मे कहीं दब सा गया ... पर सिर्फ एक दिन पिता को समर्पित कर क्या हम सब उस के कर्ज़ से मुक्त हो सकते है ... यही है क्या वास्तव मे हमारा संतान धर्म ??? 

कहने को तो हमारे देश में बुजुर्गो की बड़ी इज्जत है, मगर हकीकत यह है कि वे घर की चारदीवारियों के अंदर भी बेहद असुरक्षित हैं। 23 फीसदी मामलों में उन्हें अपने परिजनों के अत्याचार का शिकार होना पड़ रहा है। आठ फीसदी तो ऐसे हैं, जिन्हें परिवार वालों की पिटाई का रोज शिकार होना पड़ता है।

बुजुर्गो पर अत्याचार के लिहाज से देश के 24 शहरों में तमिलनाडु का मदुरई सबसे ऊपर पाया गया है, जबकि उत्तर प्रदेश का कानपुर दूसरे नंबर पर है। गैर सरकारी संगठन हेल्प एज इंडिया की ओर से कराए गए इस अध्ययन में 23 फीसदी बुजुर्गो को अत्याचार का शिकार पाया गया। सबसे ज्यादा मामलों में बुजुर्गो को उनकी बहू सताती है। 39 फीसद मामलों में बुजुर्गो ने अपनी बदहाली के लिए बहुओं को जिम्मेदार माना है।

बूढ़े मां-बाप पर अत्याचार के मामले में बेटे भी ज्यादा पीछे नहीं। 38 फीसदी मामलों में उन्हें दोषी पाया गया। मदुरई में 63 फीसदी और कानपुर के 60 फीसदी बुजुर्ग अत्याचार का शिकार हो रहे हैं। अत्याचार का शिकार होने वालों में से 79 फीसदी के मुताबिक, उन्हें लगातार अपमानित किया जाता है। 76 फीसदी को अक्सर बिना बात के गालियां सुनने को मिलती हैं।

69 फीसदी की जरूरतों पर ध्यान नहीं दिया जाता। यहां तक कि 39 फीसदी बुजुर्ग पिटाई का शिकार होते हैं। अत्याचार का शिकार होने वाले बुजुर्गो में 35 फीसदी ऐसे हैं, जिन्हें लगभग रोजाना परिजनों की पिटाई का शिकार होना पड़ता है। हेल्प एज इंडिया के अनुसार इसके लिए बचपन से ही बुजुर्गो के प्रति संवेदनशील बनाए जाने की जरूरत है। साथ ही बुजुर्गो को आर्थिक रूप से सबल बनाने के विकल्पों पर भी ध्यान देना होगा।

दु:ख इस बात का है कि इस विषय पर जितनी जागरूकता समाज मे होनी चाहिए ... उतनी है नहीं ... आइये हम सब अपने अपने स्तर प्रयास करें और अपने आस पास रहने वाले बुजुर्गों को वो मान सम्मान दिलवाएँ जिस के वो हकदार हैं |

आप सभी को पितृ दिवस की हार्दिक शुभकामनाऎँ !!
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सादर आपका 
शिवम मिश्रा
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शीर्षकविहीन...!

पिता के लिए एक दिन ....दुनिया के हर पिता को समर्पित

~** पिता... हार्डबाउंड कवर में... बंद जैसे इतिहास मिले ! **~

पिता होने का मतलब-----

पिता महान

तुम मुझमें जिंदा हो ...

पिता माँ से नहीं होते...

पिता

पितृ दिवस पर -- मेरे पापा !

मैं हूँ ना मेरे बच्चो

हैप्पी फादर्स डे ---

पापा ही प्रेरक-शक्ति हैं ...

Happy father's day

पिता

HAPPY FATHER'S DAY !

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अब आज्ञा दीजिये ...

जय हिन्द !!! 

9 टिप्पणियाँ:

सुशील कुमार जोशी ने कहा…

पितृ दिवस पर शुभकामनाऐं । सुंदर पितृ दिवस बुलेटिन ।

sadhana vaid ने कहा…

पितृदिवस की सभी पाठकों को हार्दिक शुभकामनायें ! मेरी रचना को आज के बुलेटिन में सम्मिलित करने के लिये आपका बहुत-बहुत धन्यवाद एवं आभार शिवम जी !

Jitendra tayal ने कहा…

बहुत शुभकामनाए

डा0 हेमंत कुमार ♠ Dr Hemant Kumar ने कहा…

बहुत ही अच्छा लगा ब्लाग बुलेटिन पर आ कर…मुझे भी यहां स्थान देने के लिये आभार।शुभकामनाओं के साथ।
हेमन्त कुमार

हिमकर श्याम ने कहा…

पितृ दिवस पर बहुत सुंदर और सार्थक बुलेटिन... मेरी रचना को शामिल करने के लिये आभार

.

shikha varshney ने कहा…

बुजुर्गों का सम्मान एक दिन नहीं, सच है. पर पिता के नाम एक दिन और ...इसमें भी बुरा कुछ नहीं.
शुभकामनाएं , आभार ..

शिवम् मिश्रा ने कहा…

आप सब का बहुत बहुत आभार |

Anil Mishra ने कहा…

शिवम् तुम एक लायक पुत्र , शानदार लेखक और मेरे गुणी भतीजे हो ।
हम सब और लेखक वर्ग तुम्हारे लेखन से बहुत प्रभावित है ।
तुमको बहुत बहुत हार्दिक शुभकामनाएँ ।
अनिल मिश्रा

रजनी मल्होत्रा नैय्यर ने कहा…

अच्छा लगा ब्लाग बुलेटिन पर आ कर पितृ दिवस पर बहुत सुंदर और सार्थक रचना. मेरी रचना को शामिल करने के लिये हार्दिक आभार शिवम् ..

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