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शुक्रवार, 1 मार्च 2019

अपने अभिनंदन के अभिनंदन की प्रतीक्षा में देश

प्रिय ब्लॉगर मित्रों,
प्रणाम |

कहा जाता है कि आम लोगों की स्मरणशक्ति कमजोर होती है। लेकिन कुछ भारतीय विश्लेषकों ने तो उनका भी रिकॉर्ड तोड़ दिया। वे पुलवामा, युद्ध विराम उल्लंघन और पाक वायुसेना के अतिक्रमण को भूल कर इमरान खान में मदर टेरेसा की छवि देखने लगे हैं। बस अब नोबेल शांति पुरस्कार की सिफारिश ही बची है, दरअसल कोशिशें तो वेटिकन से संत की उपाधि दिलवाने की थी, पर इमरान उतने योग्य न निकले। 

पाकिस्तान और भारत के बीच ये गतिरोध कोई नया नहीं है 1947 से अब तक रिश्ते कभी सामान्य नहीं रहे पर आजकल ऐसा दिखाया जा रहा है जैसे मौजूदा सरकार का आतंकवाद पर सख़्त रवैया ही पाकिस्तान और भारत के सारे विवादों की असल जड़ है |
भाजपा और नरेंद्र मोदी के विरोध के चक्कर में लोग इस हद तक गिर रहे हैं कि देश विरोधियों की हिमायत करने से भी नहीं चूक रहे | राजनीतिक मतभेद का ये मतलब तो नहीं कि हम देशहित को नज़र अंदाज़ कर दें | 

भारतीय सेना और उस के सैनिक हमेशा से ही रण भूमि में अपना लौहा मनवाते रहे हैं ...एक लोकतांत्रिक देश की सेना होना का क्या अर्थ होता है ये हमारे सैनिक भली भांति जानते हैं जब जब देश के राजनीतिक नेतृत्व ने उनको रणभूमि में भेजा है वे बिना कोई सवाल पूछे गए हैं और शत्रु के दाँत खट्टे किए हैं | देश में भले ही किसी भी दल की सरकार हो हमारे सैनिकों को इस से कोई फ़र्क पड़ता, वे बिना किसी भेदभाव के अपना फर्ज़ पूरी ईमानदारी से निभाते हैं |


कोई माने न माने मौजूदा सरकार की कूटनीति, युद्धनीति, मानसिक दबाव रणनीति सब काम आई,एक हताश, घिरे हुए और डरे हुए, पाकिस्तान को हमारे नायक विंग कमांडर अभिनन्दन को वापस करना पड़ा। यह है नया भारत! यह झुकना नही जानता, झुकाना जानता है। 

इस बुलेटिन के लिखे जाने तक विंग कमांडर अभिनंदन की स्वदेश वापसी नहीं हुई है...उधर खबरें आ रही हैं कि पाकिस्तानी सेना अपने अपने प्रधानमंत्री के इस उदार रवैये से बेहद असंतुष्ट है और सीमा पर गोलाबारी जारी रखे है ... ऐसे में एक आशंका ये भी है कि अभिनंदन कहीं दूसरे सरबजीत न बन जाएँ |

दिल में शुभकामनाएं लिए आइये चलते हैं बुलेटिन की ओर ... 

सादर आपका 
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अभिनंदन

हमारी मातृभूमि

आपस में दोऊ लड़ मूए

मोदी है तो मुमकिन है

दंगों में महिलाओं की स्थिति

फहरादो झंडा हिंदुस्तान का

उन्हें देखकर

क्या छींक आने से अपशकुन होता हैं?

अंतिम पाती......

''गुपि गायेन बाघा बायेन'' बनाम ''गोपी गवैया बाघा वजइया''

राजा दशरथ का अंत्येष्टि संस्कार

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अब आज्ञा दीजिए ... 

जय हिन्द !!!

जय हिन्द की सेना !!!

6 टिप्पणियाँ:

ब्रजकिशोर सिंह ने कहा…

धन्यवाद मित्र

Gopesh Jaswal ने कहा…

वीर अभिनन्दन की स्वदेश वापसी हम सबको मुबारक हो. निश्चित रूप से पाकिस्तान की सरकार को भारतीय वायुसेना के पराक्रम के सामने घुटने टेकने पड़े और अभिनन्दन को वापस करना पड़ा. लेकिन न तो अभी ख़तरा टला है और न चुनौतियाँ ख़त्म हुई हैं.
मौजूदा सरकार को अभी किसी बात का श्रेय लेने में जल्दबाज़ी नहीं करनी चाहिए और उसके समर्थकों को भी सरकार की नीतियों की आलोचना करने वालों को देशद्रोही घोषित नहीं करना चाहिए.
संयम, धैर्य और मर्यादा का पालन करते हुए हमको आतंकवाद को भारत से उखाड़ फेंकने में तन-मन-धन से जुट जाना चाहिए.

Jyoti Dehliwal ने कहा…

सही कहा शिवम जी कि यह है नया भारत! यह झुकना नही जानता, झुकाना जानता है।
मेरी रचना को शामिल करने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद।

शिवम् मिश्रा ने कहा…

आप सब का बहुत बहुत आभार |

सुशील कुमार जोशी ने कहा…

सुन्दर बुलेटिन

Anuradha chauhan ने कहा…

बहुत सुंदर बुलेटिन प्रस्तुति शानदार रचनाएं सभी रचनाकारों को बहुत बहुत बधाई मेरी रचना को स्थान देने के लिए आपका बहुत बहुत आभार शिवम् जी

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