Subscribe:

Ads 468x60px

कुल पेज दृश्य

रविवार, 23 अगस्त 2015

'छोटे' से 'बड़े' - ब्लॉग बुलेटिन

प्रिय ब्लॉगर मित्रों,
प्रणाम |

आज कोई बात नहीं ... सिर्फ़ एक चित्र ...

"यह जो 'छोटू' होते हैं न, दुकानों, होटलों और वर्कशॉपों में; दरअसल अपने घर के 'बड़े' होते हैं !!"

जब भी इन से मिलें ... कृपया इन के प्रति उचित सम्मान का प्रदर्शन करें ... बस इतना सा अनुरोध है !!

सादर आपका
शिवम् मिश्रा 
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~

"भैंसीयास्टिक technology"...व्यंग्य बाण

जिसको जैसी आंच मिली...

कुछ रोज नहीं जलता है चूल्हा जिसके घर ...

मिलन

‘हम-परवाज़’

खिलेंगे फूल

उफा के बाद उफ!!

पाओलो कोएलो को पढ़ते हुए

सेल्फ़ी लेते समय शिष्टाचार एवं सभ्यता का रखे ध्यान !

बेटी छूट जाती तो ---

सावन का कजरी गीत --आज मेरा भैया आएगा

~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
अब आज्ञा दीजिये ...

जय हिन्द !!!

12 टिप्पणियाँ:

सुशील कुमार जोशी ने कहा…

चित्र अपने आप में ही बहुत कुछ बोल रहा है । सुंदर सूत्रों के साथ सुंदर रविवारीय बुलेटिन ।

राजीव कुमार झा ने कहा…

चित्र के माध्यम से बहुत गहरी बात कह दी है आपने.सुंदर सूत्रों से सजी बुलेटिन.
मुझे स्थान देने के लिए आभार.

Vikram Pratap Singh Sachan ने कहा…

शिवम् जी आपकी बात ,तस्वीर और उसके नीचे उसका संक्षिप्त परिचय दिल को छू गया। बहु बड़ी और बेहद मूलभूत बात लिखी है आपने। आपको बधाई।

Vikram Pratap Singh Sachan ने कहा…

शिवम् जी आपकी बात ,तस्वीर और उसके नीचे उसका संक्षिप्त परिचय दिल को छू गया। बहु बड़ी और बेहद मूलभूत बात लिखी है आपने। आपको बधाई।

rajendra sharma ने कहा…

कह जाते है चित्र के भाव
जो शब्द नहीं कह पाते है
रह जाती है स्मृतियाँ चित्त में
जब अपने सामने नहीं रह जाते है

Jyoti Dehliwal ने कहा…

शिवम जी, बिल्कुल सही कहा आपने... जब बचपन में सर पर परिवार का बोझ आ जाता है, तब बचपन में ही बच्चे बडे हो जाते है. और बचपन कहीं खो जाता है.
मेरी रचना शामिल करने के लिए धन्यवाद.

Rajput ने कहा…

बाल मजदूरी को दर्शाता मार्मिक चित्रण।

Unknown ने कहा…

चित्र के माध्यम से बहुत गहरी बात कह दी है
Ebook Publisher

अन्तर सोहिल ने कहा…

ये जो छोटू होते हैं ना घर के बडे होते हैं...................सत्य और बहुत गंभीर बात कही आपने....... प्रणाम स्वीकार कीजियेगा

Kavita Rawat ने कहा…

बहुत सही बात सबकी अपनी-अपनी इज़्ज़त होती हैं हमें सबका सम्मान करना चाहिए
बहुत बढ़िया बुलेटिन प्रस्तुति हेतु आभार!

शिवम् मिश्रा ने कहा…

आप सब का बहुत बहुत आभार |

Rajesh Kumari ने कहा…

बहुत सार्थक गहन भाव से समृद्ध चित्र हेतु आप बधाई के पात्र हैं |मेरी रचना को स्थान देने का दिल से शुक्रिया .पोस्ट पर देर से पँहुचने का खेद है

एक टिप्पणी भेजें

बुलेटिन में हम ब्लॉग जगत की तमाम गतिविधियों ,लिखा पढी , कहा सुनी , कही अनकही , बहस -विमर्श , सब लेकर आए हैं , ये एक सूत्र भर है उन पोस्टों तक आपको पहुंचाने का जो बुलेटिन लगाने वाले की नज़र में आए , यदि ये आपको कमाल की पोस्टों तक ले जाता है तो हमारा श्रम सफ़ल हुआ । आने का शुक्रिया ... एक और बात आजकल गूगल पर कुछ समस्या के चलते आप की टिप्पणीयां कभी कभी तुरंत न छप कर स्पैम मे जा रही है ... तो चिंतित न हो थोड़ी देर से सही पर आप की टिप्पणी छपेगी जरूर!

लेखागार