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मंगलवार, 27 अक्तूबर 2015

भूले रास्तों का पता - 6




ज़िन्दगी की कतरनें
एक फूल एक पन्ना एक चूड़ी एक पत्ता 
कुछ इश्क़ कुछ समझौते 
कुछ टूटा सा दिल 
… 
हरी चूड़ियों का शौक आसमान में खनकता था 
अब अच्छी चूड़ियाँ नहीं मिलती 
हरी-पीली  की क्या बात !

चाय से करते हैं रास्ता तय - वहाँ तक जाने का, जहाँ भावनाओं के बीच बहुत कुछ अपना लगता था  … 




3 टिप्पणियाँ:

सदा ने कहा…

Behad saraahneey prayaaas.... Sadae

Kavita Rawat ने कहा…

बहुत बढ़िया बुलेटिन प्रस्तुति
आभार!

सुशील कुमार जोशी ने कहा…

बहुत सुंदर प्रस्तुति ।

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