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गुरुवार, 12 जून 2014

ब्लॉग बुलेटिन - थोड़ी हँसी, थोड़ी गुदगुदी

सभी ब्लॉगर मित्रों को सादर नमस्कार।।


दो गप्पे बाज हांक रहे थे 
पहला - वह देखो एक अमरीकन चाँद पर उतर रहा है। 
दूसरा - क्या खाक देखूं , चश्मा तो मैं चाँद पर ही छोड़ आया हूँ !!

एक साइकिल सवार लॉरी से टकराने के बावजूद बच गया 
फिर भी मुकदमा चला और जज ने लॉरी ड्राइवर से जुर्माना वसूल करते हुए साइकिल सवार से पूछा - " आप हादसे से किस तरह बच गये ? "
साइकिल सवार ने उत्तर दिया - " मेरा भगवान मेरे साथ था। "
जज ने कहा - " साइकिल पर डबल सवारी कानून के खिलाफ है, इसलिये आपको भी जुर्माना भरना पड़ेगा। "


टीचर - राजू समुद्र के बीच एक नींबू का पेड़ लगा है, उस पर कुछ नींबू लगे हैं, उन्हें तुम कैसे तोड़कर लाओगे ?
राजू - चिड़िया बनकर !!
टीचर - बेवकूफ क्या कभी आदमी भी चिड़िया बन सकता है। 
राजू - सर,,, तो क्या समुद्र में भी नींबू का पेड़ लगता है भला !!!

संता - यार,,, मुझे अपनी बीवी से तलाक चाहिए। 
बंता - लेकिन क्यों आखिर ऐसा क्या हुआ ?
संता - वो छह महीने से मुझसे बात ही नहीं कर रही है। 
बंता - एक बार सोच लो, ऐसी बीवी सिर्फ किस्मत वालों को ही मिलती है। 


 अबचलते हैं आज कि बुलेटिन की ओर  …………















आज कि बुलेटिन में बस इतना ही कल फिर मिलेंगे।। शुभरात्रि।।

10 टिप्पणियाँ:

आशीष भाई ने कहा…

बढ़िया प्रस्तुति व लिंक्स , हर्ष भाई व बुलेटिन को धन्यवाद !
I.A.S.I.H - ब्लॉग ( हिंदी में प्रकार की जानकारियाँ )



सुशील कुमार जोशी ने कहा…

सुंदर बुलेटिन हर्ष । 'उलूक' के सूत्र 'हद नहीं होती जब हदों के साथ उसे पार किया जाता है' को स्थान देने के लिये आभार ।

Point ने कहा…

अच्छा मनोरंजन , अच्छे लिंक्स |

आशा जोगळेकर ने कहा…

हंसी से दिन बन जाता है सो आपने बना दिया। अब जाते हैं कडियों पर।

Satish Saxena ने कहा…

उलूक के सूत्र ने "पिता" की याद दिला दी , इन दो शब्दों में कितना वज़न है ! आभार बढ़िया चर्चा के लिए, हर्षवर्धन का !

Dwarika Prasad Agrawal ने कहा…

बढ़िया।

गगन शर्मा, कुछ अलग सा ने कहा…

Sundar Prstuti

Astrologer Sidharth Jagannath Joshi ने कहा…

सुकून देने वाला है यह बुलेटिन, वरना कभी कभी घबराहट होने लगती है कि पता नहीं लोग क्‍या लिख रहे हैं, क्‍या चल रहा है ब्‍लॉग की दुनिया में...

हमें जोड़े रखने के लिए हृदय से आभार

शिवम् मिश्रा ने कहा…

वाह ... बहुत खूब ... रोचक बुलेटिन लगाई हर्ष ... आभार भाई |

Absarul Haque ने कहा…

बहुत खूब :)
वैसे आखरी वाला ज्यादा अच्छा है :)

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