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सोमवार, 25 मार्च 2013

१ अप्रैल से रेल प्रशासन बनाएगा सब को फूल - ब्लॉग बुलेटिन

प्रिय ब्लॉगर मित्रों ,
प्रणाम !
इस बार के रेल बजट में रेलमंत्री द्वारा पिछले दरवाजे से बढ़ाया गया रेल यात्रा किराया एक अप्रैल से लागू होने जा रहा है। ऐसे में यदि आप अगले महीने की पहली तारीख से रेल यात्रा टिकट बुक या रद्द कराने जा रहे हैं तो पहले के मुकाबले ज्यादा पैसे खर्च करने के लिए तैयार रहें।
जारी हुई अधिसूचना : टिकट बुकिंग और रद्द कराने पर लगने वाले नए शुल्क के लिए रेल प्रशासन की ओर से सभी रेल मंडलों को अधिसूचना जारी कर दी गई है। इसके मुताबिक रेल यात्रा के लिए सभी श्रेणी के टिकटों की बुकिंग और रद्द कराने के शुल्क में पांच रुपये से लेकर 50 रुपये तक की वृद्धि की गई है। यानी, अबतक स्लीपर श्रेणी के जिस टिकट की बुकिंग शुल्क के रूप में यात्रियों को 20 रुपये देने होते थे, एक अप्रैल से उन्हें 30 रुपये देने होंगे। वहीं, यदि यात्री इसी श्रेणी के कंफर्म टिकट को रद्द कराने जाएंगे तो उन्हें 40 रुपये की जगह 60 रुपये चुकाने होंगे।

टिकट की बुकिंग पर बढ़ा शुल्क:-
श्रेणी पहले अब
अनारक्षित 10 15
स्लीपर 20 30
एसी चेयरकार 20 30
एसी थ्री इकोनोमी 20 30
एसी थ्री 20 30
एसी सेंकेंड 20 30
एसी फ‌र्स्ट 20 30
एग्जिक्यूटिव 20 30
फ‌र्स्ट क्लास 20 30
टिकट रद्द कराने पर बढ़ा शुल्क:-
श्रेणी पहले अब
अनारक्षित 20 30
स्लीपर 40 60
एसी चेयरकार 60 90
एसी थ्री इकोनोमी 60 90
एसी थ्री 60 90
फ‌र्स्ट क्लास 60 100
एसी सेंकेंड 60 100
एसी फ‌र्स्ट 70 120
एग्जिक्यूटिव 70 120
तो साहब तैयारी कर लीजिये १ अप्रैल के बाद से हर बार टिकिट बूक या रद्द करने पर "फूल" बनने के लिए !

सादर आपका 
===============

मन पखेरू उड़ चला है फिर (सुनीता शानू )

*मन पखेरू उड़ चला है फिर (सुनीता शानू ) शब्द को मिलती गयीं नव अर्थ की उंचाइयाँ भाव पुष्पित हो गए मिटने लगी तन्हाईयाँ गीत में स्वर भर दिए हैं प्यार के अलाप ने मन पखेरू उड़ चला फिर आसमाँ को नापने ... *सुनीता शानू का यह काव्य संग्रह अपनी पहली उड़ान में लिखे शब्दों के माध्यम से दिल के हर गहराई में उतरना की कोशिश में है ....प्रेम से रची इन रचनाओं में अधिकतर प्रेम भाव ही उपजा दिखाई देता है ..जो ज़िन्दगी से मिलने पर कविता बन जाता है ..* तुमसे मिल कर ज़िन्दगी बन गयी मैं एक कविता और मैं एक कलम जो हर वक़्त तुम्हारे प्यार की स्याही में बनाती है तस्वीर तुम्हारी ..........*.दिल जब यूँ ही प्यार में पगा होत... more »

पं. पोंगादीन लप्पाचार्य से विस्फोटक बातचीत

देवांशु निगम at अगड़म बगड़म स्वाहा....
कल भारत ने ऑस्ट्रेलिया को जम के धोया | ४ मैचों की सीरीज ४-० से हरा डाली | जगह जगह विश्लेषक अपनी राय दे रहे हैं | पर तहलका मचाया हुआ है *पं. पोंगादीन लप्पाचार्य* ने, उन्होंने कहा की इसकी भविष्यवाणी उन्होंने पहले ही कर दी थी | सो हम आज सुबह-सुबह उनका साक्षात्कार करने चले गए | प्रस्तुत है उनसे बातचीत के मुख्य अंश : *मैं* : नमस्कार पांडी जी | *पंपोल* (पं. पोंगादीन लप्पचार्य ) : नमस्ते बालक, कैसे हो | *मैं* : जी बस बढ़िया, आप सुनाएँ | *पंपोल* : बस सब प्रभु की किरपा है , कहो कैसे आना हुआ | *मैं* : पांडी जी , बस अभी बाहर सुना की आपने भारत के ४-० से जीतने की भविष्यवाणी की थी, तो सोचा जरा आ... more »

एक सादा सी सोच ....

कल "राम जी लंदन वाले" फिल्म का अंत देखा और उस अंत का एक संवाद दिल को छू गया यूं तो यह फिल्म कई बार देख चुकी हूँ मैं ,मगर पहले कभी शायद इस संवाद पर ध्यान ही नहीं गया कि इंसान का "असली सुख और अस्तित्व उसके अपनों के बीच ही है" उसके अपनों के बिना उसका जीवन बिलकुल खाली है, सूना है, हर खुशी बेगानी है। वैसे तो हम लंदन वाले यहाँ आकर अपनी नयी दुनिया बना ही लेते हैं आज पहली बार खुद को लंदन वाला कह रही हूँ दोस्तों क्यूँ...यह फिर कभी.... खैर मैं लंदन में बहुत कम और यहाँ के अन्य शहरों में ज्यादा रही हूँ जहां हिंदुस्तानियों की संख्या लंदन की तुलना में बहुत कम रही है। शायद इसलिए मैंने उस संवाद को... more »

बुरा न मानो होली है

............. बुरा न मानो होली है ............ रंगों की बदरी छाई है, होली की बारिश आई है, मस्ती ने मस्ती घोली है, रंगीन रची रंगोली है, शास्त्री सर की कविता रंगू, रविकर सर की कुण्डलियाँ, निगम सर के गीत भिगाऊं, धीरेन्द्र सर जी की गलियाँ, जरा हँसी मजाक ठिठोली है, यह गुरु शिष्य की होली है, मस्ती ने मस्ती घोली है, रंगीन रची रंगोली है, प्रिय संदीप मनोज सखा की ग़ज़लों को भंग पिलाऊं मैं शालिनी जी की अनुभूति को लाल गुलाल लगाऊं मैं, भरी रंगों से ही झोली है, यह मित्र सखा की होली है, मस्ती ने मस्ती घोली है, रंगीन रची रंगोली है, तरह तरह के रंग रंगीले, कुछ नीले हैं कुछ पीले हैं, एक जैसी सबकी सूरत है, स... more »

इस होली में

Anju (Anu) Chaudhary at अपनों का साथ
(जीवन की सोच के हर रंग का मिला जुला सा असर ) इस होली में रंगों की टोली रोशनी का उमड़ता हुआ सैलाब बनी फिर भी रुकावट के लिए खेद है क्यों कि देश को बचाने की मुहीम भी तेज़ है | होली के रंगों की तरह राजनीति भी रंगी है सच्चे-झूठे वादों के घेरे में कहीं ... श्वान कूटनीति कहीं धमकी का धमाका कहीं कोई ढूँढ रहा है एक नया बहाना.... काले शीशे वाली कारों पर बेअसर हो रहा है हर रंग मतवाला | कहीं मुलायम की सरकार तो कहीं चली मोदी के भाषण की तलवार सात रंगों के संग सब खेल रहें होली पर देश के नेता और राजनीति की उतनी ही बदरंग हो-ली मासूम बेटियों पर अत्याचार से ना कोई रंग बचा,ना ही कोई उत्... more

कलम का क्रांतिकारी : गणेश शंकर विद्यार्थी !

रेखा श्रीवास्तव at मेरा सरोकार
कानपुर शहर को अपनी कर्मभूमि बनाने वाले क्रन्तिकारी पत्रकार गणेश शंकर विद्यार्थी ने अखबार "प्रताप " से अंग्रेजों के साथ अपनी बगावत को एक अलग दिशा दी . जिसने कलम को ही अपनी बन्दूक और बम बना कर उस शासन की चूलें ही नहीं हिलायीं बल्कि उसके दम पर ही देश को एक नए जोश और देशभक्ति से भरने का काम किया . वे पत्रकारिता में रूचि रखते थे, अन्याय और अत्याचार के खिलाफ उमड़ते विचारों ने उन्हें कलम का सिपाही बना दिया. उन्होंने हिंदी और उर्दू - दोनों के प्रतिनिधि पत्रों 'कर्मयोगी और स्वराज्य ' के लिए कार्य करना आरम्भ किया. उस समय ... more »

ना खेलूं होली

Rajeev Sharma at कलम कवि की
गोपियों सुनलो मोरी के अब के न खेरूं होरी बीते बरसों प्रेम में बीते उनको देखत रहे हम जीते कैसे सोचूं खेलन की बिछड़ गई संगनी मोरी गोपियों सुनलो मोरी के अब के न खेरूं होरी खूब ही खेरा फाग था हमने लाल गुलाबी अबीर के संग में खुशबू रह गई तन में चंदन की खोई हमने पोरी गोपियों सुनलो मोरी के अब के न खेरूं होरी चाहूँ मै भी रंगों रंग जाऊं गोपियों संग सब सखा बुलाऊं खूब ही खेरुं तब होरी जो ढूंड दो मोरी गोरी गोपियों सुनलो मोरी के अब के न खेरूं होरी कान्हा आवे उसे बत्तियो मोपे बीती उसे सुन्नियो सब कहें उसको काम फिर क्यों डोर तोरी गोपियों सुनलो मोरी के अब के न खेरूं होरी

गोदियाल ढाबा !

पी.सी.गोदियाल "परचेत" at अंधड़ !
* ** **हुए प्यार में तेरे दिवाने ऐसे,* *सड़क पर ही आ गए हम,अरे बाबा,* *उधार का खिलाते कब तक तुमको,* *इसलिए खुद ही खोल दिया ढाबा !* *अब बना-बनाके पकवान अनेकों, * *इतना खिलाएंगे तुमको, * *जो तूम भी बोल उठो; * *तेरे ढाबे का खा के, मैं बदरंग हो गई, * *कल चोली सिलाई आज तंग हो गई, * *और हम बोलेंगे;,* *कुड़ी के नखरे, ओए शाबा, ओए शाबा !! * * *

MP3 से वीडियो बिना ज्यादा मेहनत किये

कल जो पोस्ट मैंने की थी उसमें पोडकास्ट बनाने वाले ब्लोगरों को टेढ़ा मेढ़ा हल सुझाया था, पर उस सुलझन में एक उलझन भी थी। वह उलझन रवि रतलामी जी ने कमेन्ट में लिख भी दी। तो पेश है उस उलझन की सुलझन :) उलझन क्या है? हमारे पास एक MP3 फ़ाइल है, इस MP३ फ़ाइल को यू-ट्यूब पर अपलोड करना है पर यू-ट्यूब तो MP३ फ़ाइल अपलोड करने ही नहीं देता। सुलझन: किसी तरह से इस MP३ फ़ाइल को वीडियो में बदल दीजिये, इसके लिए

यार फागुन------

यार फागुन सालभर में एक बार दबे पांव आते हो खोलकर प्रेम के रहस्यों को चले जाते हो------ यार फागुन तुम तो केवल रंगों की बात करते हो प्यार के मनुहार की बात करते हो शहर की संकरी गलियों में झांकों मासूमों का कतरा कतरा बहता मिलेगा झोपड़ पट्टी में कुछ दिन गुजारो बच्चों के फटे कपड़ों का टुकड़ा ही मिलेगा----- यार फागुन जहां रोटियां की कमी है वहां रोटियां परोसो गुझिया के चक्कर में रोटियां न छीनों एक चुटकी गुलाल मजदूर के गाल पर मलो अपनों को रंगों------- यार फागुन गुस्सा मत होना अपना समझता हूं अपना ही समझना--------- "ज्योति खरे"

हैप्पी बर्थड़े ... मेरे प्यारे कार्तिक

शिवम् मिश्रा at बुरा भला
 ===============
अब आज्ञा दीजिये ...

जय हिन्द !!!

11 टिप्पणियाँ:

पी.सी.गोदियाल "परचेत" ने कहा…

सर्वप्रथम आपका आभार व्यक्त करता हूँ शिवम् जी एक आपको तथा इस बुलेटिन के समस्त परिवार एवं ब्लॉग मित्रों को होली की हार्दिक शुभकामनाये प्रेषित करता हूँ ! रही बात इस सर्कार के जनता को बेवकूफ बनाने की बात तो पिछले ६ सालों में इन्होने इसके सिवाए किया क्या ? अभी एक पोर्टल पर समाचार पढ़ रहा था कि जिस सब इंस्पेक्टर को लोकतंत्र का लाइसेंस प्राप्त गुंडों ने विधान सभा में बुलाकर पीटा था, अब उसे नौकरी से भी निलंबित कर दिया, क्योंकि उसने इनकी शान में गुस्ताखी की हिम्मत जो की थी।

पी.सी.गोदियाल "परचेत" ने कहा…

एक की जगह कृपया एवं पढ़े

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

सुन्दर सूत्र

expression ने कहा…

बढ़िया बुलेटिन....
लिंक्स भी सभी अच्छे.....

आभार
अनु

jyoti khare ने कहा…

कमाल का संयोजन-- सुंदर संग्रह-
ब्लॉग बुलेटिन परिवार और सभी रचनाकारों को होली की शुभकामनायें
मुझे सम्मलित करने का आभार




YASHVARDHAN SRIVASTAV ने कहा…

सुन्दर प्रस्तुति। आभार।
होली की हार्दिक शुभकामनाएँ।

मेरी नयी कविता :- रंगों की दिवाली

सुज्ञ ने कहा…

रंगमय सलग्न सूत्र!!
.
होली की हार्दिक शुभकामनाएँ।

Rajendra Kumar ने कहा…

सरकार तो जनता को हमेशा फूल (मुर्ख)ही तो बना रही है.सामने से न सही पीछे के दरवाजे से सही.होली की हार्दिक शुभकामनाएँ।

शिवम् मिश्रा ने कहा…

आप सब का बहुत बहुत आभार !

चला बिहारी ब्लॉगर बनने ने कहा…

आपकी यह बुलेटिन विविधता का वो विस्तार लेकर आती है कि क्या कहें.. बहुत ही साधारण सी लगने वाली सूचनाएं भी यहाँ आकर असाधारण बन जाती हैं.. बहुत ही सुन्दर लिंक्स.. होली की शुभकामनाएँ सभी के लिए!!

अरुन शर्मा 'अनन्त' ने कहा…

ब्लॉग बुलेटिन परिवार सभी मित्रों एवं पाठकों को होलिकोत्सव की अनन्त शुभकामनाएं, शिवम् भाई मेरी रचना को स्थान देने हेतु हार्दिक आभार .

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