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रविवार, 17 मार्च 2013

ताकि आपको याद रहे - ब्लॉग बुलेटिन

प्रिय ब्लॉगर मित्रों,
प्रणाम !

फैजाबाद निवासी गुमनामी बाबा उर्फ भगवनजी कौन थे? क्या वही नेता जी सुभाष चंद्र बोस थे? इस संबंध में पिछले दिनों हाईकोर्ट द्वारा जांच आयोग बनाए जाने संबंधी दिए गए फैसले के क्रियान्वयन का मामला गुरुवार दिनांक १४/०३/२०१३ को उत्तर प्रदेश विधानसभा में गूंजा। विभिन्न दलों के सदस्यों ने सरकार से इस मामले में त्वरित कार्यवाही की अपेक्षा की। सदस्यों की मांग को देखते हुए अध्यक्ष ने प्रकरण पर सदन में एक घंटा चर्चा कराए जाने की मंजूरी दे दी।
शून्यकाल में कार्य स्थगन प्रस्ताव के माध्यम से पीस पार्टी के अखिलेश कुमार सिंह व अनीसुरर्हमान, भाजपा के सुरेश राणा, कांग्रेस के अनुग्रह नारायण सिंह, पंकज मलिक, अजय कुमार लल्लू, डा. मुहम्मद मुसलिम, राधे श्याम, माधुरी वर्मा, कौमी एकता दल के मुख्तार अंसारी, निर्दलीय रघुराज प्रताप सिंह आदि ने फैजाबाद के गुमनामी बाबा के संबंध में सदन में चर्चा कराए जाने के साथ ही 31 जनवरी को इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा दिए गए फैसले के क्रियान्वयन की मांग की। अखिलेश सिंह ने बताया कि नेता जी की भतीजी ललिता बोस द्वारा 26 वर्ष पहले दायर की गई याचिका पर कोर्ट ने तीन माह में हाईकोर्ट के अवकाश प्राप्त न्यायमूर्ति की अध्यक्षता में आयोग गठित कर गुमनामी बाबा के संबंध में जांच कराने तथा गुमनामी बाबा से संबंधित वस्तुओं को फैजाबाद कोषागार में तत्काल रखने और उसके लिए अयोध्या में एक संग्रहालय बनाने का फैसला सुनाया था।
सिंह ने कहा कि देश की आजादी में अहम भूमिका निभाने वाले नेता जी ही क्या गुमनामी बाबा थे, इस बारे में पता लगाने को आयोग के गठन संबंधी कोर्ट का फैसला आए डेढ़ माह गुजर गया है लेकिन सरकार ने अभी कुछ नहीं किया है। नेता प्रतिपक्ष स्वामी प्रसाद मौर्य, भाजपा के हुकुम सिंह, रालोद के प्रदीप माथुर आदि ने भी इस मामले में अपनी बात रखते हुए कहा कि सरकार इसे गंभीरता से ले। देश के एक महान नेता के प्रति उदासीनता न बरती जाए। सदस्यों ने कहा कि जिस पार्टी की सरकार है उसके मुखिया मुलायम सिंह यादव खुद नेता जी के प्रशंसक हैं। उनका नाम ही अब नेता जी है।
इस पर मंत्री अंबिका चौधरी ने कहा कि सरकार तो सदैव न्यायालय के फैसलों का पालन करती है। उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि विचार इस बात पर किया जाना चाहिए कि जिसकी देश व प्रदेश में लंबे समय तक सरकार रही है उसने नेता जी की मौत के रहस्य से क्यों नहीं पर्दा उठाया? इन्हें तो देश से नहीं बल्कि सत्ता प्यारी थी। जांच होती तो तमाम के चेहरे बेनकाब होते। चौधरी ने कहा कि बात निकलेगी तो बहुत दूर तक जाएगी। इस पर अपनी-अपनी बात रखने के लिए कांग्रेस सहित अन्य दलों के सदस्यों द्वारा अलग से चर्चा कराए जाने की मांग को देखते अध्यक्ष माता प्रसाद पाण्डेय ने कहा कि इस मामले में वह एक घंटे की चर्चा स्वीकारते हैं ताकि सभी सदस्य अपनी बात रख सकें।

इसी मुद्दे से जुड़ी हुई एक ऑनलाइन पेटीशन भी लॉंच की गई है ... जिस के विषय मे आप को पहले भी विभिन्न ब्लोगों मे बताया गया है ... आप सब से पुनः अनुरोध है कि अगर आप ने अभी तक उस पेटीशन को साइन नहीं किया है तो कृपया थोड़ा समय दें और उस ऑनलाइन पेटीशन को साइन करें ... और साथ साथ अपने मित्रों से भी अनुरोध करें उसे साइन करने का !

उस पेटीशन का लिंक यह रहा ...
Set up a multi-disciplinary inquiry to crack Bhagwanji/Netaji mystery

सादर आपका 

शिवम मिश्रा

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जीवन झांकता है...

नवम्बर की सर्दी कुछ ख़ास नहीं और यहाँ कोलकाता में तो बिलकुल भी नहीं... सुबह के ९ बज रहे हैं, यूँ ही भटकने निकल पड़ा हूँ, बाकी के साथी आगे निकल चुके हैं... मुझे तेज़ चलने का कोई मोह नहीं... सड़क के किनारे कई टूटी-फूटी झोपड़ियां जैसे एक-दूसरे के ऊपर गिरने वाली हों... एक तरफ जहाँ हम 2BHK-3BHK की दौड़ में लगे हैं वहीँ एक 10 बाय 8 के कपडे के टेंटनुमा मकान में एक पूरा परिवार खुद को समेटने की कोशिश कर रहा है... साथ ही कोने में रखी माँ दुर्गा की मूर्ति इस बात का भी एहसास दिलाती है कि उन्हें अब भी भरोसा है उस शक्ति पर... मेरे अन्दर काफी देर तक एक सन्नाटा छा जाता है.. इन स्लम के खंडहरों के नेपथ्य म... more »

वादा - कविता

*(अनुराग शर्मा) * तेरे मेरे आँसू की तासीर अलहदा है ये पानी नमक का है वो दर्द से पैदा है तन माटी है मन सोना इंसान है हीरे सा बेगार में दिल देना अनमोल ये सौदा है बदनाम सदा से थे पर नाम हुआ उनका औकात से यह उनकी तारीफ ज़ियादा है हिज़्र तेरा दोज़ख, जन्नत तेरे कदमों में झुकता हुआ ये सिर है मरने का इरादा है अब दूर है चश्मे-बद हैं बंद मेरी आँखें क्यूँ हुस्न पोशीदा है क्यूँ चाँद पे पर्दा है ये जान तेरे हाथों ये दिल भी तुम्हारा है क्यों मुझको हिलाते हो बेजान है मुर्दा है काफिर हुए जाते हम हयात ताज़ा होंगे आएंगे तुझे मिलने अपना भी ये वादा है

हकीकत : दिल्ली से भीख मांगते रहे नीतीश !

महेन्द्र श्रीवास्तव at आधा सच...
*बि*हार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार दिल्ली आए तो थे अधिकार मांगने लेकिन भीख मांगकर चले गए। उनके पूरे भाषण में एक बार भी ऐसा नहीं लगा जैसे वो अपने अधिकार की मांग कर रहे हों। उन्हें न ही केंद्र की सरकार से कोई शिकायत थी, न ही प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह या कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से। शिकायत करना तो दूर अलबत्ता वित्तमंत्री पी चिदंबरम की तो वो वाह-वाही करते रहे। उनके पूरे भाषण का लब्बोलुआब अगर कहें तो वो ये समझाने की कोशिश कर रहे थे कि अभी बिहार को विशेष राज्य का दर्जा दे दिया तो ये बिहार पर केंद्र सरकार का एहसान होगा, वरना 2014 यानि चुनाव के बाद तो वो ले ही लेंगे। मसलन वो दिल्ली को क... more »

वाह वाह ताऊ क्या लात है? में श्री दिगंबर नासवा

ताऊ रामपुरिया at ताऊ डाट इन
होली के रंग में रंगे हुये रामप्यारे और मिस रामप्यारी दोनों ने आज इतनी भांग डकार ली कि दोनों बेसुध पडे हुये हैं. "चैन से होली मनाना है तो ताऊ की भंग पी जाईये" कार्यक्रम वाला मैं * रमलू सियार *ताऊ टीवी के कार्यक्रम *वाह वाह ताऊ क्या लात है?* में आपका स्वागत करता हूं. मित्रों, अभी तक ताऊ टीवी की सभी सनसनी खेज खबरे और चमकाने धमकाने के काम करने वाला मैं रमलू सियार हूं. मुझे मनोरंजक कार्यक्रम पेश करने का ज्यादा अनुभव नही है अत: किसी भी गडबडी के लिये आपसे पहले ही क्षमा याचना कर लेता हूं. वैसे कुछ ज्यादा गडबड नही करूंगा...बस कुछ फ़ोटो इधर उधर लग जायें तो ध्यान मत दिजियेगा...राज की बात य... more »

अक्सर मैं -- संजय भास्कर

संजय कुमार भास्‍कर at शब्दों की मुस्कुराहट
आप सभी ब्लॉगर साथियों को मेरा सादर नमस्कार काफी दिनों से व्यस्त होने के कारण ब्लॉगजगत को समय नहीं दे पा रहा हूँ पर अब आप सभी के समक्ष पुन: उपस्थित हूँ अपनी नई कविता के साथ उम्मीद है आप सभी को पसंद आयेगी.......!! अक्सर मैं यह नहीं समझ पाता की लोग प्रायः गंदे व फटे हुए हुए कपड़ो में मासूम बचों का यही रूप क्यों देखते है कि वह भिखारी है वह उसके कपड़ो के पीछे की जर्जर व्यवस्था उसकी गरीबी ,लाचारी समाज की प्रताडना को क्यों नहीं देख पाते .............!!! चित्र - गूगल से साभार @ संजय भास्कर

हिंद स्‍वराज्‍य-3

मनोज कुमार at विचार
*गांधी और गांधीवाद-**14**8* *संदर्भ और पुराने पोस्टों के लिंक यहां पर* ** *1909*** *हिंद स्‍वराज्‍य-**3* *[image: 30092011(001)]* *उत्तर आधुनिक युग में** पुस्तक का महत्व*** ‘हिंद स्वराज’ मूलतः सभ्यता का विमर्श है। दरअसल यह पाश्चात्य आधुनिक सभ्यता की समीक्षा है। साथ ही उसको स्वीकार करने पर प्रश्नचिह्न भी है। इसमें भारतीय आत्मा को स्वराज, स्वदेशी, सत्याग्रह और सर्वोदय की सहायता से रेखांकित किया गया है। इस पुस्तक का प्रखर उपनिवेश-विरोधी तेवर सौ साल बाद आज और भी प्रासंगिक हो उठा है। नव उपनिवेशवाद से जूझने के संकल्प को लगातार दृढ़तर करती ऐसी दूसरी कृति दूर-दूर तक  more »

Golden Temple स्वर्ण मन्दिर परिसर

अमृतसर-अमरनाथ-श्रीनगर-वैष्णों देवी यात्रा-01 इस यात्रा की रुप रेखा भी अपने कार्यालय में ही खींची गयी थी सन 2007 के जुलाई माह की बात है मैं दिल्ली में शाहदरा में कड़कड़ डूमा कोर्ट/अदालत में कुछ काम से गया था। वहाँ से वापिस लौटते समय शाहदरा के बाबू राव स्कूल के सामने से होकर मैं शाहदरा बस टर्मिनल की ओर रहा था। जब मैं शाहदरा फ़्लाईओवर के नीचे पहुँचा तो मेरी नजर एक इश्तिहार पर पड़ी, मैं उस इश्तिहार/विज्ञापन को देखता ही चला गया। उस विज्ञापन पर लिखा हुआ था। मात्र 2500 रुपये में दोनों समय के भोजन सहित अमृतसर, जलियाँवाला, वाघा बार्ड़र, अमरनाथ श्रीनगर वैष्णों देवी यात्रा कराने के सम्बन्ध मे... more »

डायरी का एक और सीला पन्ना....

सफ़र में होंगे कांटें भी इस बात से बेखबर न थे मगर खबर न थी के चुभेंगे इस कदर कि तय न हो सकेंगी ये लम्बी दूरियां कभी..... (या कौन जाने ,कोई चुनता रहा हो कांटे मेरी राह के अब तक.... पैरों तले मखमली एहसास यूँ ही तो नहीं था अब तक....... यकायक मंजिल दूर चली गयी हो जैसे....) अनु

यहाँ पत्थर बहुत रोया वहां आंसू नहीं आते

ग़ज़ल १२२२, १२२२, १२२२, १२२२, बह्र : हजज मुसम्मन सालिम कभी सच्ची मुहब्बत को दिवाने दिल नहीं पाते, यहाँ पत्थर बहुत रोया वहां आंसू नहीं आते, रजा मेरी जुदा ठहरी रजा उसकी जुदा ठहरी, मुझे कलियाँ नहीं जँचती उसे कांटे नहीं भाते, डरा सहमा रहेगा उम्रभर ये दिल मेरा यूँ ही, तेरी फितरत से वाकिफ जबतलक हम हो नहीं जाते, चली है याद फिर मेरी उड़ाने नींद रातों की, जगे हैं नैन जबसे ख्वाब के बादल नहीं छाते, मुकम्मल इश्क की कोई कहानी कब हुई यारों, नहीं लैला नहीं मजनू नहीं रिश्ते नहीं नाते..

खूब मना मिलकर तू होली

तुषार राज रस्तोगी at तमाशा-ए-जिंदगी
होली के दिन आए आज खूब बजेंगे जमकर साज़ ला दिखलायें अपना दिल होली आकर हमसे मिल बढ़े अपनों का प्यार ज़रा चढ़े इश्क़ का खुमार ज़रा त्योहार गले मिलते अपने होत हैं सच दिल के सपने सबके दिल में रंग खिले गले लग करें दूर गिले लुत्फ़ बहुत ही आता है मुफ्त मज़ा दे जाता है छोड़-छाड़ हर शरम-वरम खूब निभाओ छुपे करम होली पर मस्ती में जीना भंग तो जमकर है पीना रंग चढ़ता हँसते हँसते भुला देता सारे रस्ते पास लाओ अपना कान मेरी बात पर दो ध्यान चबाओ एक बनारसी पान लगाके उसमें केसरी किमाम नशे की जब चढ़ती मस्ती दुनियादारी की क्या हस्ती अपनी धुन में डोलती है स्वछंद विचारों की कश्ती हल्ला गुल्ला शोर मचे सब देख सरीखे... more »

क्या यह आत्मघात नहीं है ?

Sadhana Vaid at Sudhinama
स्वप्न नींदों मे, अश्रु नयनों में, गुबार दिल में ही छिपे रहें तो मूल्यवान लगते हैं यह माना । भाव अंतर में, विचार मस्तिष्क में, शब्द लेखनी में ही अनभिव्यक्त रहें तो अर्थवान लगते हैं यह भी माना । पर इतनी ज्वाला, इतना विस्फोटक हृदय में दबाये खुद से बाहर निकलने के सारे रास्ते क्यों बन्द कर लिये हैं ? क्या यह आत्मघात नहीं है ? साधना वैद

क्या आप अपनी औलाद से प्यार करतें हैं ???

Ashok Saluja at यादें...
*ये कैसा बचकाना और बेहूदा सवाल है .....?* *यकीनन ,हर माँ-बाप अपनी औलाद को प्यार करते हैं .....* *बस,ये ही जानने के लिए आपको यहाँ खींच कर लाना पड़ा....ऐसा * *बचकाना और बेहूदा सवाल करके.....चलिए अब आ ही गये हैं... * *तो मेरी बात भी सुन लीजिये ..और मुझे भी कुछ ,समझाइये ,सिखाइए| * *मेरे अहसासों को मुझे महसूस कराइए कि मैं कहाँ गलत हूँ और कहाँ ठीक .....* *मैं आपसे वायदा करता हूँ कि मैं आप की हर बात मानुगा,अपने आप को * *समझाने की पूरी इमानदारी से कोशिश करूँगा ..,....!!!* *हर माँ-बाप अपनी औलाद से प्यार करतें हैं * *हर औलाद अपने माँ-बाप से प्यार क्यों नही करती .....* *ये दो लाइंस... more »

...कि दामिनी कुछ हमारी भी लगती थी"

मन्टू कुमार at मन के कोने से
कितना अजीब था ना, इंसान ही उसे उस हाल में पहुंचाकर इंसान को ही उसके लिए रोते देखा था खुद के इंसा होने का रंज देखा था | अगर दुनिया ऐसी ही है, तो अच्छा हुआ... उसे इस दुनिया से जाते हुए देखा था | उसे हमारी नाकामियों में कैद होते देखा था उसे ज़िंदगी से लड़ते देखा था उसे इंसानियत से हारते देखा था उसे सँभलते देखा था उसे फिसलते देखा था उसे अपनों से दूर जाते देखा था | इक याद बस बन के पन्नों में, दब सी गई है... दामिनी अब शायद मर सी गई है !!! - "मन"

अन्तर्जाल की सुविधा

*गाँव शहर एक **होने लगे* *दुनिया ग्लोबलाइज़ हो**ने **लगी* अन्तर्जाल की दुनिया ने हजा*रों मील दूर बैठे व्यक्ति के भी अन्तरंग पलों में झाँक लेने की सुविधा हमें दी है। गूगल सर्च तो जैसे हर मर्ज का इलाज हो। कैसा भी विषय हो हर सम्भव जानकारी और हल के सारे औप्शन्स बस एक क्लिक के साथ हाजिर हो जाते हैं। मोबाइल और कम्प्यूटर ने नेट के जरिये दुनिया को छोटा कर दिया है या यूँ कहिये हमारे दायरे को विस्तार दे दिया है।* *चिन्ता का विषय ये है कि हर हाथ में अन्तर्जाल की सुविधा ने जैसे हर किसी को नेट पर व्यक्तिगत डायरी लिखने का जन्म-सिद्ध अधिकार दे दिया हो। अश्लील विकृत मानसिकता दर्शाती हुई हर सम्भव जा... more »

आओ एक बात मैं कहूं तुमसे

Anu Singh Choudhary at मैं घुमन्तू
आद्या और आदित, आज आपने मम्मा को कई बार हैरान किया है। मैंने गाड़ी रोकी तब नो स्टॉपिंग, नो पार्किंग के बोर्ड को पढ़कर... सामने गुज़रते ऑटो की पीठ पर छपी शायरी को पढ़ने की कोशिश करके... बिना रुके जैक एंड द बीनस्टॉक की कहानी पढ़कर... और मेरे फेसबुक पर आते ही "आप काम नहीं, फेसबुक कर रही हैं मम्मा" कहकर! मुझे आज एक लंबे सफ़र के सबसे मुश्किल माईलस्टोन्स में से एक तक पहुंच जाने का गुमां हो रहा है। ये भी मुमकिन है कि आप दोनों जल्द ही ममा की डायरी और उनकी लिखी हुई असंख्य चिट्ठियां भी पढ़ने लगो। तब, ए और ए, मेरा लिखना - मेरा ये सारा आत्मालाप सार्थक हो जाएगा। आदू और आदि, इससे पहले कि तुम बाकी... more »
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अब आज्ञा दीजिये ...

जय हिन्द !!!

15 टिप्पणियाँ:

Shekhar Suman ने कहा…

ऐसा सुपरफास्ट बुलेटिन तो केवल ब्लॉग बुलेटिन ही निकाल सकता है.. जय हो... जिंदाबाद.... नेताजी के रहस्यों का खुलासा होना ही चाहिए... ये हमारा हक़ है....

महेन्द्र श्रीवास्तव ने कहा…

वाकई सुपरफास्ट
कुछ देर पहले ही पोस्ट किया हूं
मैं यहां दर्ज भी हो गया

बढिया
अच्छा बुलेटिन

vandana ने कहा…

बढ़िया लिंक्स

Asha Saxena ने कहा…

बढ़िया सूत्र हैं आज के |मन के कौने में अंतर जाल की सुविधा नहीं है नहीं तो और अधिक आत्म घाती नजर आता |
आशा

संजय कुमार भास्‍कर ने कहा…

ये हुई ना बात सुपरफास्ट बुलेटिन मजा आ गया आज के बुलेटिन पढ़कर .......आभार शिवम् जी
बहुत बहुत धन्यवाद शिवम् जी .... ब्लॉग बुलेटिन का हिस्सा बनाने के लिए ..!!!!

Sadhana Vaid ने कहा…

धन्यवाद शिवम जी ! आपके सुपरफास्ट बुलेटिन की सुपरफास्ट रफ़्तार में मेरी रचना को भी शामिल होने के लिए जगह मिल गयी ! आभारी हूँ !

ताऊ रामपुरिया ने कहा…

नेताजी के बारे मे आपकी अपील सराहनीय है, बेहतरीन लिंक्स, शुभकामनाएं.

रामराम.

HARSHVARDHAN ने कहा…

मेरे अनुसार "तथ्यों और सबूतों के आधार पर भगवान जी उर्फ़ गुमनामी बाबा ही नेताजी सुभाषचन्द्र बोस है।"

आपकी दी हुई ऑनलाइन पेटीशन पर साइन कर दिया है। :) धन्यवाद।

शारदा अरोरा ने कहा…

badhiya lage links...

शिवम् मिश्रा ने कहा…

आप सब का बहुत बहुत आभार !

कविता रावत ने कहा…

बढ़िया बुलेटिन प्रस्तुति ..

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

सुन्दर सूत्र..

expression ने कहा…

याद रहेगा ब्लॉग बुलेटिन.....
कोई भूल सकता है भला??
बेहतरीन लिंक्स के बीच अपनी भावनाओं को पाकर अच्छा लगा.

आपका आभार शिवम्
अनु

मन्टू कुमार ने कहा…

Badhiya links,mujhe shaamil karne ke lie dhanywad...

अरुन शर्मा 'अनन्त' ने कहा…

शिवम भाई ब्लॉग बुलेटिन को भूला नहीं जा सकता, सुपर फ़ास्ट बुलेटिन पर देर से आने हेतु क्षमा कुछ दिनों के लिए कहीं गया हुआ था. बहर हाल बहुत ही बढ़िया एवं पठनीय बुलेटिन में मेरी रचना को स्थान देने हेतु हार्दिक आभार.

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