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रविवार, 19 अगस्त 2012

कितने जागरूक हैं हम... ब्लॉग बुलेटिन

आज के बुलेटिन में देश दुनियां की समस्याओं से इतर कुछ और बात की जाए... आज अपनें देश के समॄद्ध ऐतेहासिक विरासत की बात करते हैं और हिन्दुस्तानियों की उनके प्रति उदासीनता की... एक से एक धरोहर हैं हमारे देश में लेकिन हम किसी का रखरखाव नहीं रख पाते। चलिए एक नज़र डाली जाए कुछ उदाहरणों पर..

(चित्र गूगल से साभार)
देखिए प्यार का इज़हार कीजिए लेकिन हमारी इमारतों को क्यों बरबाद कीजिए.... एक से एक किले और एक से एक सुन्दर जगह हैं लेकिन हमें किसी की कद्र नही है। आखिर इतने उदासीन क्यों हैं हम... मैं जब भी विदेश गया हूं मैनें देखा है की विदेशों में एक छोटा सा तालाब भी होगा तो इतनें कायदे से मेनटेन होगा की क्या कहें... उसकी फ़ीस होगी और उस फ़ीस का पूरा पैसा उस तालाब के रखरखाव में खर्च हो रहा होगा।  हिन्दुस्तान में तो ऐसे कितने तालाब होंगे और कितनें मेनटेन होंगे ? 

मुम्बई से नज़दीक एलीफ़ैंटा केव्स के बारे में आपने सुना होगा, विश्व प्रसिद्ध यह गुफ़ाएं पांचवी शताब्दी की एक बेहतरीन विरासत हैं... इसमें एक व्यक्ति का पांच रुपया और एक विदेशी के लिए ढाई सौ रुपये का शुल्क लिया जाता है... मैं पिछली बार मेरे एक विदेशी मित्र को लेकर गया था.. ढाई सौ रुपया देनें के बाद उसे अन्दर आने दिया गया और मुझे केवल पांच रुपये में... पहले तो यही भेद उसे अखर गया और फ़िर       अन्दर के टायलेट और आम आदमी के लिए तथा-कथित सुविधाएं देखकर उस फ़्रांसिसी नें प्रतिक्रिया में इतना ही कहा की तुम्हारी सरकार विदेशियों से बहुत पैसा लेती है लेकिन रखरखाव के लिए कुछ नहीं करती आखिर टायलेट इतना गन्दा क्यों है। मैं निरुत्तर था... वाकई कोई जवाब न था... वह बिल्कुल सही कह रहा था.. हर जगह बिखरे पालीथीन बैग्स, खाली बोतलें और गन्दगी का साम्राज्य को देख वाकई एक अपराधबोध हो रहा था। धन्य हैं हम हिन्दुस्तानी... कमोबेश यही स्थिति अजन्ता और एलोरा की गुफ़ाओं की भी हैं... 

बनारस के घाटों की स्थिति भी कमोबेश ऐसी ही है... देखिए.. 

(चित्र गूगल से साभार)
अपनी विरासत को जितना बरबाद हमनें किया है उतना शायद किसी ने न किया होगा... पैसा लेने में कोई पीछे न रहेगा लेकिन सुविधा देने और साफ़ सफ़ाई देनें में सबके बारह बज जाएंगे... आखिर क्यों... थोडा सोचिएगा और अगली बार जब किसी पर्यटक स्थल जाएं तो ध्यान रखें हिन्दुस्तान हम और आप से ही है और हिन्दुस्तान की क्षवि को बिगाडनें और गन्दगी बढानें से अपना ही नुकसान है....  

चलिए तो फ़िर इसी संदेश के साथ हम आज के बुलेटिन् को आगे बढाते हैं 

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साँझ के बादल। जी बिल्कुल बरसे या नहीं...
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दर्द की महक और हरकीरत...। भई वाह..
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हे भ्रष्टाचार ! तुम्हें नमन है .......... । आज के भारत का भगवान है भाई...
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स्त्रियाँ सावधान रहें ऐसों से--। एक सार्थक जानकारी..
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जिला अनुपपुर अपना। जी धीरेन्द्र जी कभी न कभी आपके अनूपपुर आएंगे...
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क्यों कहते,तुम अकेले हो। हम हैं ना...
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हर अदा पर निसार हो जाएँ...। वाह
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स्माइल प्लीज़..आज वर्ल्ड फोटोग्राफी डे है !!। ईशमाईल प्लीज़...
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वित्त मंत्री ने बैंकों से कर्ज सस्ता करने को कहा.। हो जाए तो अच्छा है.. उम्मीद तो न के बराबर ही है..
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एक बात जो कहनी है तुमसे ...। कहिए न फ़िर...
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तुम से प्यार करने की ऋत छा गई है ।। वाह..
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पीड़ा पर दुमदार दोहे। जै हो जै हो...
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जन्मदिन की मुबारकबाद गुलज़ार साहेब...। हैप्पी बड्डे गुलज़ार साहब...
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18 अगस्त पर कुछ चुभते सवाल। इन सवालों के ज़वाब हर हिन्दुस्तानी को चाहिए...
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नेताजी सुभाषचंद्र बोस : सच्चाई सिद्ध हो चुकी हैं| लेकिन बहुत कुछ जानना अभी भी बाकी है...
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मित्रों आज का बुलेटिन यहीं तक.. कल फ़िर मुलाकात होगी... तब तक के लिए देव बाबा को अनुमति दीजिए...

जय हिन्द

शनिवार, 18 अगस्त 2012

आज़ाद भारत के मुजरिम... ब्‍लॉग बुलेटिन

मित्रो... आइये आज के बुलेटिन में बात करते हैं समाज में फैले वैमनस्य और बैर भाव की ... अफवाहों से घिरे हिंदुस्तान में कहीं खो चुके हमारे सामाजिक ताने बने की ... और सरकारी तंत्र में विश्वास खो चुके उस आम इंसान की जो यह सोच कर ट्रेन पकड़ रहा है की अगर ट्रेन ना पकड़ी को ज़िन्दगी ही कहीं छुट जाएगी.. आखिर गड़बड़ हो कहाँ रही है... क्या हम अपने ही देश में अपने ही लोगों को सुरक्षित रखने में नाकामयाब हैं? आखिर क्या कारण है जो राज्य और केन्द्र दोनों मिलकर भी कुछ नहीं कर पा रहे... या निर्णय न ले पानें की कोई राजनीतिक मजबूरी है। आखिर हुआ क्या है जो असम से निकली आग मुम्बई और अब उत्तर प्रदेश के सात शहरों को अपनें लपेटे में ले चुकी है, आखिर समस्या की जड क्या है? चलिए जाननें की कोशिष करते हैं।भारत के गृह सचिव आरके सिंह ने आरोप लगाया है कि भारत में पूर्वोत्तर के लोगों के खिलाफ भारत में जो दहशत फैली है उसके पीछे पाकिस्तान का हाथ है। पिछले कुछ दिनों से बंगलौर, चेन्नई और मुंबई समेत भारत के कई बड़े शहरों से पूर्वोत्तर के रहने लोग पलायन कर रहे हैं. एसएमएस और एमएमएस के जरिए ऐसी अफवाहें उड़ रही हैं कि उन पर हमला किया जाएगा. इस आशंका के डर से हजारों लोग शहर छोड़ कर भाग गए हैं. हैदराबाद में असम और अन्य पूर्वोत्तर के राज्यों से आए लोगों के बीच भय का माहौल है।  जी बिल्कुल ऐसा हो सकता है, हमारे मुल्क के दुश्मनों को पता है की उन्हें केवल यहाँ के लोगों को बांटना है और बिखरी हुई हमारी जनता और बिना रीढ़ की हड्डी के हमारा प्रशासन कुछ नहीं कर पायेगा... हमारे देश में देश द्रोहियों की एक बहुत बड़ी फ़ौज है, जो खाते यहाँ की हैं और गाते वहां की हैं.. थाली में छेद करनें वाले यह लोग आखिर हमारे हिंदुस्तान में इतनी पैठ क्यों बनाये हुए है... मुम्बई में हुए हादसे के वक्त हमारे एक बड़े करीबी मित्र वहीँ मौजूद थे और उन्होंने जो देखा वह था की चौदह पंद्रह साल के बच्चे पुलिस की गाड़ी पर पत्थर फेक रहे थे और वहीँ कुछ और लोग भी थे जो यह भी कह रहे थे की कुछ लोगों की वजह से सबको पूरी कौम को गाली देने का मौका मिलता है... हम यह कतई नहीं कहते की पूरी कौम में समस्या है लेकिन वाकई एक बडे तबके में समस्या है.... आखिर अमर जवान जैसी जगह को ध्वस्त करने वाला अपना देशभक्त तो कतई नहीं हो सकता... क्या कार्यवाही होगी? या अब तक क्या हुई होगी ? आखिर चंद लोग पूरे देश पर हावी कैसे हो सकते हैं.. हमारे दुश्मन जानते हैं की वोट-बैंक से ग्रसित हमारी सरकार कोई निर्णय नहीं लेगी और मामला रफ़ा-दफ़ा हो जायेगा। मोदी को लेके दस साल के बाद भी चिल्लानें वाला हमारा सेकुलर मीडिया अमर-जवान पर तोड-फ़ोड करनें वाले और पाकिस्तानी झंडे लहरानें वाली की तस्वीर भी नहीं दिखाता? माइक्रो ब्लागिंग ना होती तो फिर यह तस्वीरें कभी बाहर भी ना आती.. आखिर देश भक्तों के इस देश में इस प्रकार की साजिश के लिए क्या जगह है... 
(गूगल से साभार)

(गूगल से साभार)

दर-असल आज़ाद भारत के बाद से ही भारत में बांटो और राज करो की राजनीति चमक रही है, वोट बैंक की राजनीति को चमकाते रहना और सम्प्रदाय विशेष के प्रति अनुराग बनाये रखना कहाँ तक न्याय और तर्क सांगत है.. कांग्रेस इस लिए कुछ नहीं करती क्योंकि उसे कुछ करना ही नहीं है और उसने ऐसे मुद्दों पर कुछ ना करने का निर्णय ले रखा है... कांग्रेस का आज तक का इतिहास यही कहता है की कभी मुद्दों के समाधान की तलाश ना करो हमेशा मुद्दों पर राजनीति करो और जनता को छलावे में रखो...  आज कल के नए भारत में जब बाज़ार-वाद और कारपोरेट-वाद ही सरकार की अर्थ-नीति का निर्धारण करते हैं, राजनैतिक फैसले हमेशा "बांटो और राज करो" को ध्यान में रखकर किये जाते हैं... और जनता को उसके दैनिक जीवन में ही इतना उलझा दिया जाता है की उसके पास कुछ और सोचने की फुरसत ही ना हो तो ऐसे में जनता का तो भगवान् ही मालिक है...  लेकिन जनता के सहन की भी एक सीमा है... कोई भी राजनीति देश से बढ़कर नहीं होगी... एक आतंकी केवल एक आतंकी है, वह किसी धर्म से जुडा व्यक्ति नहीं हो सकता..

चलते चलते एक कहानी पर ध्यान दिया जाए..... 

एक गरीब लड़के को एक जादुई चिराग मिला... उसने उस चिराग को उठाया और जोर से घिसा.. चिराग के घिसते ही जोर का धमाका हुआ और कई लोग मारे गए...
शिक्षा... : जादुई चीजे मिलने का अब ज़माना नहीं रहा... और आप किसी भी लावारिस वस्तु को हाथ न लगायें...

ब्लाग बुलेटिन की पूरी टीम विनती करती है की किसी भी अफ़वाह पर ध्यान न दें... सुरक्षित रहें और सतर्क रहें।  किसी भी संदिग्ध की सूचना दें... आपकी सतर्कता ही आपका बचाव हैं...

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LN स्टार में 'शब्द-सृजन की ओर' : कैप्टन लक्ष्मी सहगल । जै हो नेताजी की और नेताजी के सेनानियों की
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सीमा पर तनाव, लोगों ने गाँव खाली किये. । इस पाकिस्तान की तो...
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प्रेम और सुभाषचन्द्र बोस: An Indian Pilgrim ...Ich denke immer an Sie  । सटीक और सार्थक
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पथिक पवन बन जाता है : । कितनी सुन्दर कविता
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फव्वारा चौक का अन्ना ? । वाकई विचारणीय चिट्ठी
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१८ अगस्त १९४५ और नेताजी सुभाष चंद्र बोस । विचारोत्तेजक और आम आदमी को झकझोडती पोस्ट
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होनी होनी है सच सच है ...। जी बिल्कुल... 
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चलना तो तुम्‍हें ही होगा मुझे लेकर .... । नहीं तो फ़िर हम हैं न....
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परमानेंट मेमोरी इरेज़र से मुलाक़ात के पहले तक... । वाह जी वाह....
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बाबा फ़रीद - शैख़ फ़रीदउद्दीन मसूद गंज-ए-शकर । जै हो
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यह कैसी आतंक पिपासा । क्या कहें...
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*** मेरा प्यारा ख्वाब *** । आमीन... सच हो जाए यही कामना है...
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तो मित्रों कल फ़िर मिलेंगे... आज देव बाबा को इजाज़त दीजिए.. तब तक के लिए सुरक्षित रहिये, सतर्क रहिए और जाग्रत रहिए... एक सतर्क देशभक्त नागरिक सैकडों देशद्रोहियों पर भारी होगा.... 

जय हिन्द

लेखागार