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शुक्रवार, 2 अगस्त 2019

जन्मदिवस - जिन्होंने राष्ट्र ध्वज तिरंगा बनाया - पिंगली वेंकैया - ब्लॉग बुलेटिन

सभी हिंदी ब्लॉगर्स को मेरा सादर नमस्कार।
पिंगलि वेंकय्या
पिंगली वेंकैया (अंग्रेज़ी: Pingali Venkayya, जन्म: 2 अगस्त, 1876, आन्ध्र प्रदेश; मृत्यु: 4 जुलाई, 1963) भारत के राष्ट्रीय ध्वज 'तिरंगा' के अभिकल्पक थे। वे भारत के सच्चे देशभक्त, महान् स्वतंत्रता सेनानी एवं कृषि वैज्ञानिक भी थे।

सन 1916 में पिंगली वेंकैया ने एक ऐसे ध्वज की कल्पना की जो सभी भारतवासियों को एक सूत्र में बाँध दे। उनकी इस पहल को एस.बी. बोमान जी और उमर सोमानी जी का साथ मिला और इन तीनों ने मिल कर नेशनल फ़्लैग मिशन का गठन किया। वेंकैया ने राष्ट्रीय ध्वज के लिए राष्ट्रपिता महात्मा गांधी से सलाह ली और गांधी जी ने उन्हें इस ध्वज के बीच में अशोक चक्र रखने की सलाह दी जो संपूर्ण भारत को एक सूत्र में बाँधने का संकेत बने। पिंगली वेंकैया लाल और हरे रंग के की पृष्ठभूमि पर अशोक चक्र बना कर लाए पर गांधी जी को यह ध्वज ऐसा नहीं लगा कि जो संपूर्ण भारत का प्रतिनिधित्व कर सकता है। राष्ट्रीय ध्वज में रंग को लेकर तरह-तरह के वाद-विवाद चलते रहे। अखिल भारतीय संस्कृत कांग्रेस ने सन् 1924 में ध्वज में केसरिया रंग और बीच में गदा डालने की सलाह इस तर्क के साथ दी कि यह हिंदुओं का प्रतीक है। फिर इसी क्रम में किसी ने गेरुआ रंग डालने का विचार इस तर्क के साथ दिया कि ये हिन्दू, मुसलमान और सिख तीनों धर्म को व्यक्त करता है। काफ़ी तर्क वितर्क के बाद भी जब सब एकमत नहीं हो पाए तो सन् 1931 में अखिल भारतीय कांग्रेस के ध्वज को मूर्त रूप देने के लिए 7 सदस्यों की एक कमेटी बनाई गई।


आज पिंगली वेंकैया जी के 143वें जन्म दिवस पर सब उनका स्मरण करते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं।

~ आज की बुलेटिन कड़ियाँ ~













आज की बुलेटिन में बस इतना ही कल फिर मिलेंगे तब तक के लिए शुभरात्रि। जय हिन्द। जय भारत।।

गुरुवार, 1 अगस्त 2019

जन्म दिवस - पुरुषोत्तम दास टंडन और ब्लॉग बुलेटिन

सभी हिंदी ब्लॉगर्स को मेरा सादर नमस्कार।
पुरुषोत्तम दास टंडन
पुरुषोत्तम दास टंडन (अंग्रेज़ी: Purushottam Das Tandon, जन्म- 1 अगस्त, 1882, इलाहाबाद, उत्तर प्रदेश; मृत्यु- 1 जुलाई, 1962) आधुनिक भारत के प्रमुख स्वाधीनता सेनानियों में से एक थे। वे 'राजर्षि' के नाम से भी विख्यात थे। उन्होंने अपना जीवन एक वकील के रूप में प्रारम्भ किया था। हिन्दी को आगे बढ़ाने और इसे राष्ट्रभाषा का स्थान दिलाने के लिए पुरुषोत्तम दास जी ने काफ़ी प्रयास किये थे। वे हिन्दी को देश की आज़ादी के पहले आज़ादी प्राप्त करने का साधन मानते रहे और आज़ादी मिल जाने के बाद आज़ादी को बनाये रखने का। वर्ष 1950 में वे 'भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष नियुक्त हुए थे। पुरुषोत्तम दास टंडन को भारत के राजनीतिक और सामाजिक जीवन में नयी चेतना, नयी लहर, नयी क्रान्ति पैदा करने वाला कर्मयोगी कहा गया है। वर्ष 1961 में उन्हें देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'भारत रत्न' से भी सम्मानित किया गया था।


आज पुरुषोत्तम दास टंडन जी के 137वें जन्म दिवस पर हम सब उनके अतुलनीय योगदान को याद करते हुए उन्हें शत शत नमन करते हैं।  

~ आज की बुलेटिन कड़ियाँ ~ 




सावधान हो जाओ

Pushpa Priya - The Lady with a Golden Pen


आज की बुलेटिन में बस इतना ही कल फिर मिलेंगे तब तक के लिए शुभरात्रि। सादर ... अभिनन्दन।। 

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