प्रिय ब्लॉगर मित्रों ,
प्रणाम !
हाँ तो भई, जिन जिन ने आज व्रत रखा है उनको ... और जिन जिन के लिए व्रत रखा गया है उनको ... 'करवाचौथ' की बहुत बहुत हार्दिक बधाइयाँ और शुभकामनाएं ... बस एक विनती है ... रात को जब आप व्रत खोले / खुलवाए बस एक बार सरहद पर मुस्तैद बैठे अपने उन भाइयों को जरूर याद करें जिन के लिए भी किसी न किसी ने आज व्रत रखा होगा और वो उसका व्रत खुलवाने इसलिए घर नहीं आ सकते ... ताकि उनके करोड़ों भाई - बहनें आज अमन ओ चैन से अपना व्रत खुलवा / खोल सकें !
सादर आपका
शिवम मिश्रा
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कविता: हे करवा चौथ के चाँद
सुमित प्रताप सिंह Sumit Pratap Singh at सादर ब्लॉगस्ते!
हे करवा चौथ के चाँद तू तो चमकता है बस एक रोज़ तुझसे कहीं लाख बेहतर है चाँद मेरा जो हर पल रहता है मेरे दिल के करीब शीतलता देता है मेरे मन को एक रूहानी एहसास जो दिला जाता है तेरा क्या तू तो भँवरा है जो हर घर के आँगन में मँडराता है मेरा चाँद तो बहुत जुदा है तुझसे हर रोज़ सिर्फ मेरी रातें चमकाता है मेरे तन को अपनी दूधिया रौशनी से और खूबसूरत बनाता है हे करवा चौथ के चाँद मैं भला क्यूँ चाहूँ तुझे मेरी चाहत तो मेरे पिया हैं मेरी हर रात मेरे पी के साथ एक करवा चौथ की तरह है हर रोज़ मेरा समर्पण है मेरे पी के लिए ये तन मन तो क्या जीवन का अर्पण है मेरे पी के लिए मैं... more »
एक चुटकी सिंदूर की कीमत……………
वन्दना at ज़ख्म…जो फूलों ने दिये
एक चुटकी सिंदूर की कीमत……………करवाचौथ का व्रत कुछ ज्यादा तो नहीं जो पतिदेव ने दोहराया सुन पत्नी रानी ने फ़रमाया प्यारे पिया मुझे एक डायमंड नेकलैस हाथों में सोने की चूडियाँ एक डिज़ाइनर साडी किसी फ़ाइव स्टार मे भोजन करवा देना कौन सा कुछ अपने लिये करती हूँ तुम्हारी लंबी उम्र की कामना करती हूँ तुम्हारे लिये ही तो व्रत रखती हूँ अब इतना सब करने पर ये सब पाना तो एक सुहागिन का अधिकार बनता है इसमें कौन सा तुम्हारा बजट बिगडता है तुम ही तो फ़लोगे फ़ूलोगे खुशियों के फ़ूल चुनोगे लंबा जीवन जीयोगे और मुझे दुआयें दोगे सुनो पतिदेव मौके का फ़ायदा उठाओ ऐसा पैकेज़ ना रोज-रो्ज मिलता है गर इतना कर सको तो ब... more »
करवाचौथ पर ....
पी.सी.गोदियाल "परचेत" at अंधड़ !
*बिन अन्न-जल, * *भूखी-प्यासी, * *सोलह श्रृंगार कर , * *सांझ को छत पर खडी * *छन्नी से तक के चाँद को * *दुआ मांगती थी इक सुहागन ; * *ऐ चाँद ! नहीं कोई और * *मेरा ऐसा हमदर्द तुम्हारे सिवाए, * *मन-व्यथा जिसको दूं मै सुनाए ! * *बस इतनी सी है * *इल्तजा तुमसे कि * *तुम **रखना **ख्याल , * *किसी सैंडी, * *किसी नीलम का विक्षोभ, * *चक्रवात बनकर * *मेरे वाले चाँद की सतह पर * *न कभी कोई कहर बरपाए !! *
करवा चौथ
शाहिद मिर्ज़ा ''शाहिद'' at जज़्बात جذبات Jazbaatहज़रात, फ़िलहाल काफ़ी कुछ ऐसा है, जो नियमित रूप से नहीं चल रहा है... बहरहाल.... करवा चौथ के मौके पर कही गई एक नज़्म हाज़िर है... उम्मीद है पसंद फ़रमाएंगे-नज़्ममेरे सपनों का जहां तुझमें बसा है प्रियतमतेरी खुशियां ही तो सिंगार मेरा है प्रियतमतुमको पाया तो लगा पाया ज़माना जैसेमेरे दामन में हो खुशियों का ख़ज़ाना जैसेअब्र उठता है मुहब्बत का तेरी आंखों सेऔर बारिश में नहा के मैं निखर जाती हूंतेरे चेहरे पे नज़र
रिश्ता एक चुटकी का ,सम्बन्ध जन्म जन्मान्तर का .....
निवेदिता श्रीवास्तव at झरोख़ा
* * *जब भी किसी रिश्ते अथवा बंधन की बातें होती हैं ,उसमें कई बड़े - छोटे कारण और कारण दीखते हैं और बन भी जाते हैं | कुछ रिश्ते जन्म से मिलते हैं ,तो कुछ विवाहोपरांत बनते हैं | विवाह के बाद बनने वाले रिश्तों के बारे में जब भी सोचती हूँ तो उसकी आत्मा सिर्फ एक चुटकी होती है , जो अपने धर्म के अनुसार कभी अंगूठी पहना देती है ,तो कभी सिन्दूर से मांग सजा देती है ! एक पल में ही सर्वथा अनजाने व्यक्ति अटूट डोर में बँध जाते हैं | ये बंधन भी अजीब सा है कभी - कभी विचारों में भिन्नता होने पर और एकमत न होने पर भी उसी बात पर किसी अन्य के कुछ कहने पर अभेद्य कवच बन औरों के लिए बहुत तीखा प्रतिउत्त... more »
करवा चौथ-हाइगा
ऋता शेखर मधु at हिन्दी-हाइगा
!! करवा चौथ की हार्दिक मंगलकामनाएँ !!
एक चाय का कप !
Mukesh Kumar Sinha at जिंदगी की राहें
पहली बार मैं गया था उसके घर रौबदार आवाज.. चाय लाना.. वो सामने चाय के साथ मिले दो हाथ, हुआ स्पर्श, प्लेट के नीचे क्षण भर को तरंगित कारण एक चाय का कप! . कॉलेज केन्टीन ऑर्डर पे आ गयी एक चाय, उफ़! तुम भी आ गए भैया! एक खाली कप देना. बाँट गयी दो दोस्त में .. स्नेह से भरी एक चाय का कप! . रोड साइड दुकान बेरोजगारी के दिन.. चाय पिलाएगा..? एक दोस्त ने कहा... भैया देना चाय दो बटा तीन कटिंग हम तीनो के सामने थी.. दोस्ती से लबालब एक चाय का कप! . सुनो! उठ रहे हो. जग जाओ न... अलसाई सुबह में कानो में घोलती श्रीमती जी की आवाज इन्तजार कर रही थी एक चाय का कप! . ट्रिन ट्रिन !! पुराने मि... more »
मजेदार त्योंहार ...हेलोवीन
Chaitanya Sharma at चैतन्य का कोना
दुनिया भर में कई सारे त्योंहार मनाये जाते हैं | कुछ त्योंहार थोड़े हटकर होते हैं | ऐसा एक फेस्टिवल हेलोवीन भी है | जिसमें सभी लोग कुछ हटकर कॉस्टयूम पहनते हैं | अधिकतर लोग डरावने कॉस्टयूम पहनकर ट्रीट मांगते नज़र आते हैं | मैंने इस बार अपना फेवरेट पावर रेंज़र कॉस्टयूम पहना | मैं ही हूँ .... स्कूल में फ्रेंड्स के साथ सभी कुछ स्पेशल बनकर आये स्कूल हेलोवीन गुडी बैग पावर रेंजर पोज
" इस बार करवा चौथ पे ....."
Amit Srivastava at "बस यूँ ही " .......अमित
सुनो, उस दिन बिंदी वो वाली लगाना , गीली वाली , अरे, जिसमें खुशबू होती है | मैं हर बार नाम भूल जाता हूँ , पर तुम समझ तो जाती हो न | हाँ ! वो कुमकुम वाली , जो पतली तीली से लगाती हो न माथे पे , वही | अच्छा, मंदिर के लिए गेंदे के फूलों की लड़ी लाऊँगा तब बेले के फूल भी लेता आऊंगा तुम्हारे बालों के लिए | अच्छे लगते हैं | "आपको तो पूजा / व्रत में आस्था है नहीं , फिर इस बार इतना क्यों याद रख रहे हैं ", पूछा निवेदिता ने | मैंने कहा ," मुझे वो सारे उपक्रम बहुत अच्छे लगते हैं जो तुम पूजा / व्रत की तैयारी में करती हो | पूरा घर सुगन्धित हो उठता है और पूजा के बाद मन भी | रही बात 'करवा चौथ' के ... more »
मौसम, बधाइयों और दिखावे का -सतीश सक्सेना
सतीश सक्सेना at मेरे गीत !
दिवाली, जन्मदिन और वर्षगांठों पर तोहफों की सौगात, अधिकतर लोगों के चेहरों पर, रौनक लाने में कामयाब रहती है ! मगर इन चमकीले बंद डिब्बों में मुझे, स्नेह और प्यार की जगह सिर्फ मजबूरी में खर्च किये गए श्रम और पैसे , की कडवाहट नज़र आती है ! पूरे वर्ष आपस में स्नेह और प्यार से न मिल पाने की कमी, त्योहारों पर बेमन खर्च किये गए, इन डिब्बों से, पूरी करने की कोशिश की जाती है ! भारतीय समाज की यह घटिया, मगर ताकतवर रस्में, हमारे समाज के चेहरे पर एक कोढ़ हैं जो बाहर से नज़र नहीं आता मगर अन्दर ही अन्दर प्यार और स्नेह को खा जाता है ! एक समय था जब त्योहारों पर, अपने प्यारों के घर, हाथ के बने पकवान... more »
फ़िल्मी दुनिया का 'बब्बर शेर' - सोहराब मोदी
शिवम् मिश्रा at बुरा भला
*सोहराब मोदी* [image: सोहराब मोदी] *पूरा नाम* सोहराब मोदी *जन्म* 2 नवम्बर, 1897 *जन्म भूमि* बम्बई *मृत्यु* 28 जनवरी, 1984 *कर्म भूमि* मुम्बई *कर्म-क्षेत्र* अभिनेता, निर्माता व निर्देशक *मुख्य फ़िल्में* रज़िया सुल्तान, घर की लाज, कुंदन आदि *पुरस्कार-उपाधि* दादा साहब फाल्के पुरस्कार *सोहराब मोदी* ( जन्म: 2 नवम्बर 1897 - मृत्यु: 28 जनवरी 1984) अभिनेता, फ़िल्म निर्माता व निर्देशक थे, जिन्होंने हिन्दी की प्रथम रंगीन फ़िल्म 'झाँसी की रानी' बनाई थी। इनको सन 1980 में दादा साहब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। जीवन परिचयसोहराब मोदी का जन्म 2 नवम्बर 1897 में बम्बई में हुआ था। सोहराब... more »
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अब आज्ञा दीजिये ...
जय हिन्द !!!






