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गुरुवार, 14 दिसंबर 2017

2017 का अवलोकन 29




सपने होने चाहिए हकीकत के लिए 
और एक दिन हकीकत ही उदाहरण बनाता है उन सपनों को 
....... और सपनों के लिए कोई उम्र निर्धारित नहीं, वे कभी भी हक़ीकति ताक़त बन जाते हैं 


62 वर्षीय घुटनों से पहला मैराथन दौड़ना -सतीश सक्सेना



दिसम्बर 2014 में केंद्रीय सरकार से एक राजपत्रित अधिकारी पद से रिटायर होते समय मैं अपने कमजोर होते स्वास्थ्य के प्रति चिंतित था ! बढ़िया भोजन से एसिडिटी, मोटापा, बढ़ा हुआ बीपी , एबनॉर्मल हार्ट रेट , कब के जाम हुए खांसते फेफड़े , कब्ज़ और चलते हुए हांफना सामान्य था ! विद्यार्थी जीवन से लेकर शानदार नौकरी से रिटायर होते समय तक शायद ही कभी पसीना बहाया होगा ! एक किलोमीटर दूर जाने के लिए रिक्शा के बिना जाना असम्भव था यहाँ तक कि मॉल में घूमते हुए भी थोड़ी देर में थक जाता था !

ऎसी स्थिति में विधि ने मुझे सुझाव दिया कि पापा ढाई महीने बाद मिलेनियम हाफ मैराथन हो रही है क्यों न आप और मैं उसमें भाग लें , तैयारी के लिए आप 45 मिनट वाक् करते हुए अंत में थोड़ा दौड़ा करिये और आपको धीरे धीरे दौड़ना आ जाएगा और मेरी झिझक के बावजूद उसने अपने साथ मेरा रजिस्ट्रेशन करा दिया !

1नवंबर २०१५ को होने वाली हाफ मैराथन जिसे मशहूर धावक एवं उस समय के आयरन मैन अभिषेक मिश्रा करा रहे थे , की तैयारी शुरू करने से पहले, मैंने अपने ब्लॉग और फेसबुक मित्रों में घोषणा कर दी थी कि मैं हाफ मैराथन दौड़ने जा रहा हूँ ! इससे मैंने अपने आपको मानसिक तौर पर प्रतिबद्ध कर लिया ताकि कमजोर मन आदि कारणों के होते मैं इससे बाहर न निकल पाऊं !

1 नवंबर 2015 को आखिर वह दिन आ गया जब मैं अपने जीवन की पहली दौड़ में भाग रहा था ,मेरा बेटा गौरव मेरी और विधि की हिम्मत बांधने के लिए साइकिल से पूरे रुट पर साथ साथ था जो लगातार हमारी हिम्मत बंधा रहा था !आधा दूरी पार करने में मैंने लगभग 82 मिनट लिए थे , यू टर्न लेते समय मैं अपने आप से कह रहा था यहाँ तक आ तो गए हो अब बापस कैसे जाओगे मगर रास्ते में अपने से कमजोर महिलाओं और पुरुषों को भी दौड़ते देख, हिम्मत आ गयी और जैसे तैसे दौड़ता रहां, आखिरी 5 किलोमीटर मेरे लिए पहाड़ जैसे लग रहे थे , पैर बुरी तरह थक कर ठोस हो रहे थे आखिरी दो किलोमीटर में बेटा बार बार मुझे दौड़ने के लिए कह रहा था जब भी वह मुझे पैदल चलता देखता तो कहता कि बस थोड़ा ही और बचा है ! आखिरी किलोमीटर पर बज रहे नगाड़े मुझे मीलों दूर लग रहे थे मगर बेटे का वहां होना मुझे दौड़ने को लगातार प्रेरित कर रहा था !और आखिर में जब मैंने दौड़ते हुए फिनिश लाइन को पार किया उस समय गौरव साइकिल पर मेरा वीडियो बना रहे थे कि उसके पिता ने 61 वर्ष की उम्र में ३ घंटे से कम समय में हाफ मैराथन पूरी कर ली और उस समय तक मुझे यकीन नहीं हो रहा था कि एक किलोमीटर भी न चलने वाला मैं वाकई ३ घंटे तक लगातार दौड़ चुका हूँ !

जब थके हुए पैरों से लड़खड़ाते हुए घर की सीढिया चढ़ रहा था तो मन एक जबरदस्त आत्म विश्वास से भरा हुआ था कि मैं इस उम्र में भी जवानों के साथ लम्बी दौड़ें, दौड़ सकता हूँ !

6 टिप्पणियाँ:

सुशील कुमार जोशी ने कहा…

गजब के आदमी हैं सतीश जी। बहुत खूब । जय हो इनकी बना रहे ये आत्म्विश्वास और कुछ हमे भी मिले हिम्मत ।

Kavita Rawat ने कहा…

कमाल का आत्मविश्वाश और दृढ निश्चय के मालिक हैं सतीश जी
सबके के लिए प्रेरणा के श्रोत
बहुत अच्छी प्रेरक अवलोकन प्रस्तुति हेतु धन्यवाद

राकेश कुमार श्रीवास्तव राही ने कहा…

कथनी और करनी में अंतर नहीं रखने वाले सतीश जी को सलाम।

चला बिहारी ब्लॉगर बनने ने कहा…

सतीश जी दूसरी इनिंग बहुतों की प्रेरणा है!!

Meena Sharma ने कहा…

आदरणीय सतीश सर के इन कार्यों से कइयों को प्रेरणा मिलेगी। सतीश सर के ब्लॉग पर मैंने बहुत कुछ पढ़ा है। उनकी ईमानदार, साफ सुथरी अभिव्यक्ति मन को गहरे तक प्रभावित कर जाती है ।

गगन शर्मा, कुछ अलग सा ने कहा…

हर्षवर्द्धन जी नहीं दिख रहे आजकल ?

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