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शनिवार, 29 मार्च 2014

मैं भी नेता बन जाऊं - ब्लॉग बुलेटिन

प्रिय ब्लॉगर मित्रों,
प्रणाम |

आज एक कविता पढ़ी ... मौजूदा परिवेश का बड़ा सटीक चित्रण किया गया है उस कविता मे ... पर कवि का कोई उल्लेख नहीं था ... उस कविता को मैं यहाँ आप सब के साथ सांझा कर रहा हूँ ... इस उम्मीद से कि शायद आप मे से कोई कवि का नाम जानता हो |
मैं भी नेता बन जाऊं
2G, 3g, CWG, सब कुछ चट कर जाऊं,

 एक चुनाव मुझे जीता दे बस संसद में चढ़ जाऊं,

 देश का सारा रूपया-पैसा लूट कर घर ले आऊं,

 गांधी का फ़ोटो लटका कर दफ्तर बड़ा बनाऊं,

 काले धन से फिर चंदन की माला उस पर चढ़ाऊँ,
मोबाइल की घण्टी में फिर देश भक्ति गीत सुनाऊं,

 रिश्वत की बहती गंगा में डुबकी रोज़ लगाऊं,

 गाड़ी बड़ी सी ले आऊं, सैर विदेश की कर आऊं,

 बस एक मुझे तू मौका दे दे, पीढ़ी तक तर जाऊं,

 माँ एक खादी की चादर दे दे, मैं भी नेता बन जाऊं !
सादर आपका 
शिवम मिश्रा
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अब तो अपने नेता जी.....

Rajeev Sharma at Do Took
अब तो अपने नेता जी, बन बैठे अभिनेता जी। डायलॉग पर बजती ताली, पीछे देती जनता गाली। शीश नवाते, छूते पैर, जनता फिर भी माने बैर। वादा एक भी झूठा निकला, अगली बार नहीं है खैर। मन में खिचड़ी पकती काली, हरसत कैसी-कैसी पाली। जिससे लड़ा रहे थे नैना, उससे कहते प्यारी बहना, भैया तेरा रहा पुकार, कर चुनाव में नैया पार। पीकर टॉनिक ताकत वाले, जेब छुआरे-पिस्ते डाले....गांव-गांव में करते शोर, सांझ ढले या तड़के भोर, वोट चाहिए मुझको मोर, जनता कहती आ गए चोर। नेता जी के चेला जी, लेकर चलते थैला जी। वोट के बदले देते नोट। सूरत भोली मन में खोट, चरणों में जाते हैं लोट। लगा रहे जय-जय के नारे, छुटभय्ये बने रखवार... more » 

शपथ पत्र

महेश कुशवंश at अनुभूतियों का आकाश
चुनाव के माहौल मे जारी कर रहे है सभी घोषणा पत्र मुझसे भी कहा गया मगर मै कैसे जारी कर सकता हू कोई घोषणा पत्र और जारी भी कर दिया तो क्या और पार्टियों की तरह नही होगा कभी न पूरा होने वाला इसलिए मै जारी करता हू शपथ पत्र शपथ ....! किसी महिला पर न व्यंग करूंगा न हो रहे व्यंग पर हसूंगा क्योंकि वो चुटकुलों की वस्तु नही शपथ ये भी कि वो मात्र विज्ञापन की वस्तु भी नही जो इत्र की महक पर चरित्र न्योछावर कर दे मै उसकी मजबूरी पर भी कोई सवाल नही करूंगा और न ही उसे महसूस कर कोई वस्तु ख़रीदूँगा शपथ ये भी कि बलात्क्रत स्त्री ही नही होगी पूरा समाज होगा और त्रासदी उसको ही नही हमे भी झेलनी होगी शपथ ये भी क... more » 

ओखा और बेयत द्वारका

parmeshwari choudhary at यात्रानामा
ओखा पोर्ट द्वारका शहर से लगभग तीस किलोमीटर की दूरी पर स्थित ओखा बंदरगाह कच्छ की खाड़ी के मुहाने पर स्थित है।यहाँ से पाकिस्तान की दूरी सिर्फ दो सौ किलोमीटर है। ओखा तट रक्षा और विदेश व्यापर के लिए देश के लिए बहुत महत्व-पूर्ण है। ओखा हिन्दू धर्मावलम्बियों के लिए भी बहुत महत्वपूर्ण है क्यों कि शास्त्रों के अनुसार भगवान श्री कृष्ण के ग्रीष्म आवास बेयत द्वारका जाने के लिए नौका(ferry) यहीं से जाती है। ऊँटो का टोला -द्वारका गुजराती भाषा में बेयत टापू को कहते हैं।कच्छ की खाड़ी के जाम नगर तटीय भाग पर छोटे बड़े बयालीस द्वीप स्थित हैं।इन्हीं में से एक द्वीप बेयत द्वारका... more »

गेस्ट हाउस , करेरी गांव , हिमाचल

[image: Guest house , Kareri village , himachal]Guest house , Kareri village , himachal इन खेतो से निकलकर उन लडकियों ने हमें हमारा रास्ता दिखा दिया कि आपको जहां जाना है वो गेस्ट हाउस गांव के जरा उपर की ओर है । वहां तक भी एक पगडंडी जा रही थी । हम करेरी गेस्ट हाउस पहुंचे । गेस्ट हाउस बंद था । कमरो पर ताला लगा था पर गेस्ट हाउस का बरामदा काफी बडा था । यहां पर एक कुत्ते के सिवाय कोई नजर नही आ रहा था । हमारा एक मित्र यहां पर कुछ दिनो पहले होकर गया था । उसने बताया था कि यहां का केयरटेकर करेरी गांव का ही निवासी है । जाट देवता ने अपने मित्र विपिन को फोन मिलाया और उससे केयरटेकर का नम्बर लिय... more »

टूथ पेस्ट

Misra Raahul at KNOWLEDGE FACTORY
क्या आपने टूथ पेस्ट खरीदने से पहले कभी ध्यान दिया है.....? हर टूथ पेस्ट के निचले सिरे पर किसी न किसी रंग की पट्टी होती है. क्या आप इन रंगों का अर्थ जानते हैं..?? Green : Natural. Blue : Natural + Medicine. Red : Natural + Chemical composition. Black : pure chemical. If u like this please share.... - Misra Raahul 

बेटी भी बहू होती है !

दिल की आवाज़ at दिल की आवाज
*अजय रोज ही शराब पीकर आता और आते ही सुधा पर हाथ छोड़ने लगता किसी न किसी बहाने से ! सुधा रोज रोज के इस अत्याचार से तंग आकर मायके चली गई लेक्न सास ससुर ने कोई आवश्यक कदम नहीं उठाया इस विषय पर ! सुधा के पिता जी ने उसके सास ससुर को समझाया भी कि आप अपने बेटे को समझाएं वरना हमों समझाना होगा ... बेहतर यही होगा कि आप बात करें ! सास ससुर ने सुधा के पिता जी को चटक से कह दिया कि कहासुनी किसके घर नहीं होती और गुस्से में अजय ने हाथ उठा भी दिया तो कौन सा पहाड़ टूट पड़ा .. सुधा को भी तो समझना चाहिए ! सुधा के पिताजी तुनक कर रह गये पर बेटी के ससुराल का मामला था तो ज्यादा कुछ न कहते हुये बोले कि अ... more »

आज सिसकते हुए, एक कहानी लिखी.......

आज सिसकते हुए, एक कहानी लिखी ! पीड अपनी थी, अपनी जुबानी लिखी !! उसकी यादों के सिवा, था ना कुछ भी बचा ! मैंने फिर भी, वो उसकी निशानी लिखी !! घूंट अश्क़ो का मैं भी, अब पीने लगा हूँ ! गम के आशियाने में, अब यूँ जीने लगा हूँ !! कुछ यादें जो उसकी, आयी आज लौटकर ! मैंने दास्ताँ वो उसकी, फिर पुरानी लिखी !! पी के ''तनहा''

जीवन और मृत्यु का संघर्ष

Kailash Sharma at Kashish - My Poetry
* रश्मि प्रभा जी और किशोर खोरेन्द्र जी द्वारा संपादित काव्य-संग्रह 'बालार्क' में शामिल मेरी रचनाओं में से एक रचना * जीवन और मृत्यु का संघर्ष देखा है मैंने खुली आंखों से. केंसर अस्पताल का प्रतीक्षालय आशा निराशा की झलक शून्य में ताकते चेहरे, मृत्यु की उंगली छोड़ ज़िंदगी का हाथ पकड़ने की कोशिश, गोल मोल मासूम बच्चा माँ की गोद में खेलता खिलखिलाता अनजान हालात से अपनी और आस पास की, पर माँ की आँखें नम गोद सूनी न हो जाये इसका था गम. हाँ मैंने सुनी है मौत के कदमों की आहट, रात के सन्नाटे में हिला देती अंतस को एक चीख जिसे दबा देते नर्स और स्टाफ कुछ पल में, पाता सुबह बराबर के कमरे म... more »

ज्ञातव्य

रश्मि प्रभा... at मेरी नज़र से
*वन्दना अवस्थी दुबे, जो कहती हैं अपने बारे में * *कुछ खास नहीं....वक्त के साथ चलने की कोशिश कर रही हूं.........वक़्त के साथ चलने का ही एक अनुभव है कहानी - ज्ञातव्य .... * "अरे वाह साहब! ऐसा कैसे हो सकता है भला!! इतनी रात तो आपको यहीं हो गई, और अब आप घर जाके खाना क्यों खायेंगे?" ’देखिये शर्मा जी, खाना तो घर में बना ही होगा। फिर वो बरबाद होगा।’ ’लेकिन यहां भी तो खाना तैयार ही है। खाना तो अब आप यहीं खायेंगे।’ पापा पुरोहित जी को आग्रह्पूर्वक रोक रहे थे। हद करते हैं पापा! रात के दस बज रहे हैं, और अब यदि पुरोहित जी खाना खायेंगे तो नये सिरे से तैयारी नहीं करनी होगी? और फिर इतनी ठंड!! पता ... more »

उत्तम भवन

[image: Khair-ul-Manazil building, Delhi, India - images by Sunil Deepak, 2010] [image: Khair-ul-Manazil building, Delhi, India - images by Sunil Deepak, 2010] [image: Khair-ul-Manazil building, Delhi, India - images by Sunil Deepak, 2010] Delhi, India: Near the old fort, this building built in 1561 by emperor Akbar was called "Khair-ul-Manazil" (Best among the buildings). It was made for emperor's wet nurse Maham Anga. It shows the mixture of Persian and Indian architectural styles like the row of flowers under the arch. दिल्ली, भारतः पुराने किले के पास 1561 में बादशाह अकबर द्वारा ... more » 

पांच महिलाएं...

शिवम् मिश्रा at हर तस्वीर कुछ कहती है ...
 
 
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अब आज्ञा दीजिये ...
 
जय हिन्द !!!

10 टिप्पणियाँ:

सुशील कुमार जोशी ने कहा…

बहुत सुंदर प्रस्तुति ।

Aparna Sah ने कहा…

mai bhi neta ban jaun...jisne bhi likha,satik likha....bahut sundar aapki prastuti rahti hai...

sunil deepak ने कहा…

धन्यवाद शिवम

parmeshwari choudhary ने कहा…

यात्रानामा शामिल करने के लिए धन्यवाद ब्लॉग बुलेटिन। आभारी हूँ।

Kailash Sharma ने कहा…

बहुत रोचक बुलेटिन...आभार

आशीष भाई ने कहा…

बढ़िया बुलेटिन , लिंक्स भी बढ़िया , शिवम भाई व बुलेटिन को धन्यवाद !
Information and solutions in Hindi ( हिन्दी में जानकारियाँ )

कविता रावत ने कहा…

बहुत बढ़िया सधी बुलेटिन प्रस्तुति ..

शिवम् मिश्रा ने कहा…

आप सब का बहुत बहुत आभार |

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

सुन्दर सूत्रों से सजा बुलेटिन।

PK SHARMA ने कहा…

Dhanayawaad Shab Ji, Aapne meri chhoti si rachna ko itna samman diya

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