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रविवार, 22 अप्रैल 2012

इमर्जेंसी बुलेटिन


नमस्कार मित्रों! मैं मनोज कुमार आज की इमर्जेंसी बुलेटिन ले कर हाज़िर हूं।

१.    एक लाजवाब चर्चा, पधारें - कोणार्क सम्पूर्ण चिकित्सा तंत्र -- भाग तीन
२.    रविकर जी कविता में ही टिप्पणी करते हैं, और टिप्पणी से बन जाती है पोस्ट, पढ़िए - मुखड़े पर मुस्कान, जनाजा निकले धांसू
३.    शहीद मीनार कोलकाता के बारे में जानकारी लेकर आए हैं गगन शर्मा, कुछ अलगा सा।
४.    वह मुज़रिम है, क्योंकि उसने रोटी माँगा ,कपड़ा माँगा , यहाँ तक की , मकान भी !
५.    न्याय न भी मिले, आशान्वित है धरा!, बता रही हैं, अनुपमा पाठक।
६.    गजल..... पढ़िए काव्यांजलि पर।
७.    मैं एक प्रेमगीत लिखना चाहता हूँ एम वर्मा की ख़्वाहिश है। लिख ही डालिए।
८.    मन पाए विश्राम जहां, गुज़ारिए कुछ पल बगीचे में...
१०.                       धूप-हवा-जल-धरती-अंबर सबके जी में यही बसा है, महेन्द्र वर्मा जी की ग़ज़ल।
११.                       डॉ. जे.पी. तिवारी जी की  कविता यादें पढ़िए।
१२.                       शांति की खोज ज़ारी है, तो मनोज भारती की रचना पढिए स्व का मालिक या शव का मालिक
१३.                       वन्दना जी कह रही हैं, न तलाश मुकम्मल हुई न मैं
१४.                       भारतीय शादियों के कुछ रोचक पहलू लेकर आए हैं बतकुचनी।
१५.                       अब यह जान लीजिए कि चमत्कारिक औषधि है एस्प्रीन
१६.                       बेचैन आत्मा तेरे आगे सब नंगे
१७.                       एक साथ पढिए चार ग़ज़लें, बैठे-ठाले।
१८.                       और अब वक़्त आ गया है जुदाई का।

फिर मिलेंगे। नमस्कार!

10 टिप्पणियाँ:

shikha varshney ने कहा…

ओह हो आज तो इमरजेंसी के बहाने ट्रीट हो गई ...जमाना हो गया मनोज जी की चर्चा पढ़े.उनका वो फ्लेवर न सही पर ये भी बढ़िया है.

veerubhai ने कहा…

इमरजेंसी बुलेटिन लाज़वाब रही पढने की नीयत है सभी लिंक बिला शक रात के बारह बज रहें हैं तारीख बदलने को है अरे भाई ये बदलाव ही तो शाश्वत है केलेंडर की तरह एक दिन हमारा चोला भी बदल जाएगा -

दीवार पर टंगा हूँ पुराने केलेंडर की मानिंद ,नै तारीखें बतलाने में असमर्थ .ज्ञान वर्धक ब्लॉग बुलेटिन .

dheerendra ने कहा…

मनोज जी,..इमरजेंसी ब्लॉग बुलेटिन के सभी लिंक्स अच्छे लगे,

MY RECENT POST...काव्यान्जलि ...:गजल...

रविकर फैजाबादी ने कहा…

आभार,
आपातकाल।
मस्त देखभाल ।।
बधाई -
हो बुलेटिन हरहाल ।।

शिवम् मिश्रा ने कहा…

इमरजेंसी बुलेटिन लाज़वाब रही ... बहुत बहुत आभार मनोज दादा !

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

बड़े सुकून से बैठकर पढ़ने वाला बुलेटिन।

रश्मि प्रभा... ने कहा…

इमरजेंसी में इतने ख़ास लिंक्स... ICU में सही देखरेख

चला बिहारी ब्लॉगर बनने ने कहा…

रविवार को ओपीडी बंद होता है इसलिए इमरजेंसी बुलेटिन ही होनी थी.. दवा तो आपने ठीक-ठाक लिख दी है.. आहिस्ता आहिस्ता डोज़ लेते हैं..!!

expression ने कहा…

वाह.................

"जुदाई" का सेहरा हमारे सर............
प्रसन्न हूँ!!
:-)

आभार मनोज जी
अनु

मनोज कुमार ने कहा…

पाठकों की प्रतिक्रिया में जो आत्मीयता है, वह उत्साहित करती है कि ... !

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