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बुधवार, 22 मई 2013

खुद को बचाएँ हीट स्ट्रोक से - ब्लॉग बुलेटिन

प्रिय ब्लॉगर मित्रों,
प्रणाम !

मई का महीना चल रहा है। अभी जून ने दस्तक दी भी नहीं और सूरज की तपिश,जलती लू ने लोगों का जीना बेहाल कर दिया है। जिस तरह से पारा बढ़ता जा रहा है और धूप सिर चढ़कर बोल रही है, ऐसे में हीट स्ट्रोक का शिकार होना बिल्कुल स्वाभाविक है। आप गर्मी को तो रोक नहीं सकते लेकिन इससे बचने के लिए कुछ उपाय जरुर अपना सकते हैं।
 
हीट स्ट्रोक से बचने के उपाय :

-धूप में ज्यादा देर काम न करें।

-सिर पर हुड वाली टोपी पहने।

-चश्में का इस्तेमाल करें।

-धूप में निकलने से पहले संसक्रिम का इस्तेमाल किया जा सकता।

-खूब ठंडा पानी पीयें।

तपती गर्मी और गर्म हवाओं का सीधा असर हमारे स्वास्थ पर पड़ता है। वैसे तो हीट स्ट्रोक किसी को भी हो सकता है परंतु बुजुर्गो, नवजात शिशु व बच्चों तथा फेफड़ा व किडनी के मरीजों को इसका ज्यादा डर रहता है।

किसको होता है हीट स्ट्रोक

पूरा उत्तर भारत भीषण गर्मी के चपेट में है। शरीर की त्वचा को झुलसा देने वाली सूर्य की अल्ट्रावायलेट किरणों से बरसते आग से लोग बीमार हो रहे हैं। अस्पतालों में भी गर्मी से होने वाली बीमारियों के मरीजों की संख्या बढ़ने लगी है। जिसमें सन बर्न (त्वचा झुलसना) तो आम बात है। स्वास्थ्य के प्रति थोड़ी सी लापरवाही होने पर यह भीषण गर्मी हीट स्ट्रोक का शिकार भी बना सकती है। ऐसे में तेज धूप में काम करना खतरनाक साबित हो सकता है।

फिलहाल पूरे उत्तर भारत का तापमान 45 डिग्री के करीब पहुंच गया है। डॉक्टरों के अनुसार मौसम का तापमान बढ़ने पर शरीर से पसीना निकलता है ताकि शरीर का तापमान सामान्य बना रहे। परंतु, जब मौसम का तापमान अधिक बढ़ जाता है और तेज धूप में अधिक देर तक काम किया जाए तो पसीना बनना बंद होने का खतरा रहता है। इस स्थिति में शरीर का तापमान बढ़ने लगता है। शरीर जब बाहरी तापमान से तालमेल नहीं बैठा पाता है तो उसका तापमान बढ़ने लगता है।
शरीर का तापमान 40 डिग्री (104 डिग्री फारेनहाइट) होने की स्थिति में दिल व दिमाग पर असर पड़ता है और रक्तचाप घटने लगता है जो हीट स्ट्रोक का कारण बनता है। अभी जिस तरह की गर्मी पड़ रही है, उसमें हीट स्ट्रोक का खतरा सबसे ज्यादा है। हीट स्ट्रोक में कई बार मरीज की मौत भी हो जाती है।
तेज धूप में अल्ट्रावायलेट किरणों ज्यादा निकलती है। जिससे त्वचा जलने तथा चेहरा व आंखों में सूजन होने की समस्या होती है। इसलिए सूर्य की गर्मी से खुद को बचाना जरूरी है।

सादर आपका 


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मैं की तलाश ............

जारी है 

माँ और बेटियाँ

जैसे सहेलियाँ 

दगाबाज तोरी बतियाँ कह दूंगी..हाय राम कह दूंगी !

किस से 

मीत के गुण्डा की गुण्डई के किस्से

सुने है आपने  

चार वर्षीय असफल यात्रा की बधाई

आप को भी 

महान और सर्वश्रेष्ठ व्यक्ति

आज कल कहाँ 

नेता जी के प्रवचन !

या बोलवचन 

परबत की पीर बहे ।

जग दरिया लाख कहे

ब्रेस्ट कैंसर के खतरे, पेटेंट के झगड़े, एंजलीना जॅाली और हम

हम्म 

जैसे वह मुझसे कुछ कहना चाहता है ...

पता कीजिये क्या 

इश्क-ए-हक़ीकी और उसकी नाराजगी

गज़ब 

नीलेश रघुवंशी की कवितायें

वाह

घर बैठे वेद की शिक्षा

जय हो 

क्षणिकाएं

बहुत खूब 

बैठे बैठे सूझा कुछ नया ....

सही सूझा 

स्वयं से भागते, हम लोग

आखिर कब तक 

कश्मीर : रुसी पोपलर वृक्ष का कहर...

किस पर 

मैं खोज रहा हूँ भाषा

मिले तो बताइएगा 

सीना चौड़ा कर रहे .......

चल मरदाने सीना ताने 

श्रीसंतों का कैसा हो बसंत ?

पिटाई होवे तुरंत

मन

मानता नहीं 

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अब आज्ञा दीजिये ...

 जय हिन्द !!!

मंगलवार, 21 मई 2013

ब्लॉग बुलेटिन के मंगलवारीय लिंक्स!!

सभी ब्लॉगर मित्रों को 
प्रणाम,,

आज थोड़ा जल्दी मैं हूँ क्योंकि शहर से बाहर जाना है, इसलिए आज सिर्फ लिंक्स ।  धन्यवाद।


                                      जल संकट ने आंखों  में  उतारा  पानी 

                                 hindi.indiawaterportal.org/node/45446

                                      क्या आप नहीं जाना चाहेंगे काठमांडू ?

                         www.parikalpnaa.com/2013/05/blog-post_21.html
                                  
                                                   नाम के नाम पर 

                       naisadak.blogspot.in/2013/05/blog-post_7836.html
                      
                                                 अवसर की पहचान                      

                                         ग्रीष्म   (गर्मी ) ऋतु  पर निबंध 
                                     
                          kalptaru.blogspot.in/2013/05/blog-post_21.html   

                                              नवगीत / रात  घनेरी  

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                                                  कविता : नीम 

                           www.saadarblogaste.in/2013/05/neem.html

                                            जनता सबक सिखायेगी .... 

                                             श्री और संत का खेल 

                                               बवाल है बवाल है  !

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