प्रिय ब्लॉगर मित्रों ,
प्रणाम !
छत्तीसगढ़ में शनिवार को कांग्रेस पार्टी के काफिले पर हुये नक्सली हमले की खबरों मे बड़े बड़े नेताओ के मारे जाने ... घायल होने ... सुरक्षा मे हुई चूक ... केंद्र और राज्य सरकारों के बीच के मतभेद ... आगे की प्लानिंग जैसी खबरों के बीच एक बहुत बड़ी खबर अपनी जगह बनाए रखने मे नाकामयाब साबित हुई ... कारण वही हम सब का जाना माना हुआ ... यह खबर एक जाँबाज सिपाही से जुड़ी थी ... उसके बलिदान से जुड़ी थी !!
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| अमर शहीद स्व॰ श्री प्रफुल्ल शुक्ला जी |
अब सिपाही था तो जाँबाज होना ही चाहिए ... और जो जाँबाज था तो बलिदान करना ही था ... इस मे नया क्या ... यह तो फर्ज़ होता है हर सिपाही का ... है ना !? कितना आसान होता है न एक सिपाही को उसका फर्ज़ याद दिलाना ... काश हम इतनी आसानी से अपने फर्ज़ भी याद रखें और उनको पूरी निष्ठा से निबहें ... जैसा कि श्री प्रफुल्ल शुक्ला ने किया !
नक्सली हमले मे जब पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल की गाड़ी पर फायरिंग हुई तो उन के पीएसओ प्रफुल्ल शुक्ला बाहर निकल आए थे । जवाबी फायरिंग करने के लिए वह गाड़ी के नीचे घुस गए, लेकिन नक्सलियों ने गाड़ी के पहियों में गोली मार दी। इससे गाड़ी नीचे बैठ गई। पीएसओ को फायरिंग करने में मुश्किल पेश आने लगी पर उन्होने फायरिंग जारी रखी लेकिन थोड़ी ही देर में उन की गोलियां खत्म हो गई। जब उन्होने देखा कि उन के पास अंतिम गोली बची है और अब वह अपना फर्ज निभाने के लिए और कुछ नहीं कर सकते तो विद्याचरण शुक्ल से उनकी सुरक्षा नहीं कर पाने कि लिए पैर छूकर माफी मांगी और अपने पास बची आखिरी गोली खुद को मार ली।
गुढ़ियारी अशोक नगर में शहीद प्रफुल्ल का भरा-पूरा कुनबा है। रविवार की सुबह समाचार पत्रों और टीवी चैनलों में प्रफुल्ल के शहीद होने की सूचना मिलने के बाद पूरे परिवार में मातम छा गया। परिवार में पत्नी, दो छोटे बच्चे, मां, छोटे भाई और चार बहनें हैं। परिवार के अनुसार वे अक्सर दोस्त और घर वालों से कहते थे कि मैं दुश्मनों को कभी जिंदा नहीं छोडूंगा और न ही कभी ज़िंदा दुश्मन के हाथ आयुंगा किसी लड़ाई या मुठभेड़ में अगर ऐसा लगा कि मैं पकड़ा जाऊंगा तो खुद को गोली मार लूंगा पर जिंदा कभी उनके हाथ नहीं आऊंगा।
नक्सली हमले मे जब पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल की गाड़ी पर फायरिंग हुई तो उन के पीएसओ प्रफुल्ल शुक्ला बाहर निकल आए थे । जवाबी फायरिंग करने के लिए वह गाड़ी के नीचे घुस गए, लेकिन नक्सलियों ने गाड़ी के पहियों में गोली मार दी। इससे गाड़ी नीचे बैठ गई। पीएसओ को फायरिंग करने में मुश्किल पेश आने लगी पर उन्होने फायरिंग जारी रखी लेकिन थोड़ी ही देर में उन की गोलियां खत्म हो गई। जब उन्होने देखा कि उन के पास अंतिम गोली बची है और अब वह अपना फर्ज निभाने के लिए और कुछ नहीं कर सकते तो विद्याचरण शुक्ल से उनकी सुरक्षा नहीं कर पाने कि लिए पैर छूकर माफी मांगी और अपने पास बची आखिरी गोली खुद को मार ली।
गुढ़ियारी अशोक नगर में शहीद प्रफुल्ल का भरा-पूरा कुनबा है। रविवार की सुबह समाचार पत्रों और टीवी चैनलों में प्रफुल्ल के शहीद होने की सूचना मिलने के बाद पूरे परिवार में मातम छा गया। परिवार में पत्नी, दो छोटे बच्चे, मां, छोटे भाई और चार बहनें हैं। परिवार के अनुसार वे अक्सर दोस्त और घर वालों से कहते थे कि मैं दुश्मनों को कभी जिंदा नहीं छोडूंगा और न ही कभी ज़िंदा दुश्मन के हाथ आयुंगा किसी लड़ाई या मुठभेड़ में अगर ऐसा लगा कि मैं पकड़ा जाऊंगा तो खुद को गोली मार लूंगा पर जिंदा कभी उनके हाथ नहीं आऊंगा।
आज के दौर का एक बेहद कड़वा सत्य है यह कि अपने फर्ज़ के प्रति इतनी वफादारी आज के दौर मे बहुत कम ही देखने को मिलती है !
ब्लॉग बुलेटिन की पूरी टीम और पूरे ब्लॉग जगत की ओर से हम अमर शहीद स्व॰ श्री प्रफुल्ल शुक्ला जी की इस शहादत को शत शत नमन करते है और उनको अपनी हार्दिक श्रद्धांजलि अर्पित करते है !!
सादर आपका
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अब लाल आंतक की दहशत को मिटाना मुख्य ध्येय होना चाहिए !!
आठ साल की ‘यूट्यूब’ के बीच
नक्सलवाद या आतंकवाद
ब्लॉग की दुनिया से सीधा साक्षात्कार
रत्नगर्भा रक्तरंजित
चंद शेर
विकराल बस्तर हिंसा
बात सम्मान और पुरस्कारों की ....
स्व॰ वीर सावरकर जी की १३० वीं जयंती पर विशेष
मजहब नहीं सिखाता ....
धाराओं का सरकारी स्टाक ख़त्म हो गया है !
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अब आज्ञा दीजिये ...
जय हिन्द !!!



