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शुक्रवार, 24 मई 2013

अरुणिमा सिन्हा को सलाम - ब्लॉग बुलेटिन

प्रिय ब्लॉगर मित्रों ,
प्रणाम !

अरुणिमा सिन्हा ... यह नाम याद है आपको ... शायद नहीं होगा ... पर आज जो मैं आपको बताने जा रहा हूँ उसके बाद यह नाम आप कभी नहीं भूलेंगे !

माहिर वॉलीबॉल खिलाड़ी अरुणिमा सिन्हा की ज़िन्दगी तब बिलकुल अंधेरे मे डूब गई जब 12 अप्रैल 2011 को  लखनऊ से दिल्ली आते हुये किसी ने उसे चलती ट्रेन से नीचे फेंक दिया था और इस हादसे में उसने अपना बांया पैर गवां दिया था। बाद में उसे कृतिम पैर लगाया गया। पर हादसे से उसके हौसले कमजोर नहीं हुए। 

जब वह 4 महीने एम्स में बिस्तर पर थी तभी उसने फैसला किया था कि वह एक दिन एवेस्ट फतह करेगी। अपने पैरों पर खड़े होने के बाद उसने टाटा स्टील एडवेंचर फाउंडेशन में एवरेस्ट फतह करने वाली बिछेंद्री पाल से ट्रेनिंग ली। और फिर लद्दाख की एक 21 हजार फीट ऊंची चोटी पर अपने हौसले के दम पर विजय प्राप्त कर तिरंगा फहरा दिया |
अरुणिमा सिन्हा की एवरेस्ट पर तिरंगा लहराते हुए फोटो
और अब अरुणिमा ने आखिरकार दुनिया की सबसे ऊंची चोटी एवरेस्ट को फतह कर ही लिया है और इसी के साथ कृतिम पैर के साथ एवरेस्ट पर पहुंचने वाली पहली भारतीय बन गई हैं।

इस मे कोई दो राय नहीं कि अरुणिमा सिन्हा ने आज देश का सर शान से ऊंचा कर दिया हैं और देश की सभी महिलाओ के लिए प्रेरणास्रोत बनी है ! ब्लॉग बुलेटिन की पूरी टीम की ओर से हम अरुणिमा के इस जज़्बे और हौसले को सलाम करते है !

सादर आपका 


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मजरुह सुल्तानपुरी

Randhir Singh Suman at लो क सं घ र्ष !
आज पुण्य तिथि है इनकी --------- मजरुह सुल्तानपुरी चाक-ए-जिगर मुहताज-ए-रफ़ू है आज तो दामन सिर्फ़ लहू है एक मौसम था हम को रहा है शौक़-ए-बहाराँ तुमसे ज़ियादा || * ''एक दिन बिक जाएगा माटी के मोल , जग में रह जाएगा प्यारे तेरे बोल ''* एक ऐसा हकीम जो आगे चलाकर अपनी कलम के जरिये पूरी दुनिया में अपना एक मुकाम हासिल किया | वो अजीमो शक्सियत थे मजरुह सुल्तानपुरी पूरी साहब | उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर शहर में एक अक्तूबर 1919 को इसरार हसन खा उर्फ़ मजरुह सुल्तानपुरी के पिता सिराजुल हक़ खा साहब के यहाँ ऐसी अजीमो शक्सियत ने जन्म लिया जो आगे चलकर पूरी दुनिया की आवाज बना | मजरुह के पि... more »

लिखते रहना हमेशा...

ये शब्दों से खेलने की जगह नहीं है, बस तुम्हारे सपने, तुम्हारी खुशियाँ, तुम्हारी उलझन को तुम्हारे अन्दर से बाहर निकालने की कोशिश है... सच कहूं, तो तुम कैसा लिखती हो इसकी परवाह कभी मत करना... बस लिखते रहना... किसी और के लिए नहीं तो बस सिर्फ अपने लिए, अपनी ख़ुशी के लिए.... खुद को पढने के लिए... पता नहीं मैं और मेरे शब्द ज़िन्दगी के किस मोड़ तक तुम्हारे साथ रह पायेंगे, लेकिन तुम्हारे अपने शब्दों में बुने ये अनमोल पल हमेशा तुम्हारे साथ रहेंगे, जिन्हें खुद तुम अपनी सोच के साथ आज़ाद कर दोगी... इन सादे पन्नो पर अपनी हर उस ख़ामोशी को शोर करने देना जो तुम्हें परेशान करती है... हर वो ... more »

आज भारत है लज्जित.....

महान कविगुरु रविन्द्र नाथ ठाकुर द्वारा रचित ये कविता कितना सटीक प्रतीत हो ता है .......... आज भारत है लज्जित हीनता से सुसज्जित न वो पौरुष न विचार न वो तप न सदाचार अंतर -बाह्य ,धर्मं -कर्म सभी ब्रह्म विवर्जित हे रूद्र !!!! धिक्कृत लांछित इस पृथ्वी पर सहसा करो बज्राघात हो जाये सब धूलिसात पर्वत-प्रांतर- नगर-गाँव जागे लेकर आपका नाम पुण्य-वीर्य-अभय-अमृत से धरा पल में हो सुसज्जित ॥ আজি এ ভারত লজ্জিত হে, হীনতাপঙ্কে মজ্জিত হে নাহি পৌরুষ, নাহি বিচারণা, কঠিন তপস্যা, সত্যসাধনা- অন্তরে বাহিরে ধর্মে কর্মে সকলই ব্রহ্মবিবর্জিত হে ।। ধিককৃত লাঞ্ছিত পৃথ্বী'পরে,  more »

मित्र नीम-

मित्र नीम- तुम्हें कड़वा क्योंकहा जाता है.... तुम्हें तो सदामीठी यादों सेही जुड़ा पाया... बचपन के वेदिन जब गर्मियों की छुट्टियोंमें कच्ची मिटटी की गोदमें - तुम्हारी ममता बरसातीछाँव में , कभी कोयल कीकुहुक से कुहुकमिला उसे चिढ़ाते- कभी खटिया की अर्द्वाइनढीली कर बारी बारी सेझूला झुलाते और रोज़ सज़ापाते कच्ची अमिया की फाँकोंमें नमक मिर्चलगा इंतज़ार में गिट्टेखेलते - और रिसती खटास कोचटखारे ले खाते.... भूतों की कहानियाँ...हमेशा तुमसे जुड़ी रहतीं एक डर..एककौतुहल ..एक रोमांच- हमेशा तुम्हारे इर्द गिर्दमंडराता और हम... अँधेरे में आँखेंगढ़ा कुछ डरे... कुछ सहमे तुम्हारे आसपास घुंघरुओ... more »

शौर्य क्या है ???

शौर्य क्या है? थरथराती इस धरती को रौंदती फ़ौजियों की एक पलटन का शोर, या सहमे से आसमान को चीरता हुआ बंदूकों की सलामी का शोर। शौर्य क्या है? हरी वर्दी पर चमकते हुए चंद पीतल के सितारे, या सरहद का नाम देकर अनदेखी कुछ लकीरों की नुमाइश। शौर्य क्या है? दूर उड़ते खामोश परिंदे को गोलियों से भून देने का एहसास, या शोलों की बरसात से पल भर में एक शहर को शमशान बना देने का एहसास। शौर्य, बहती बियास में किसी के गर्म खून का हौले से सुर्ख हो जाना, या अनजानी किसी जन्नत की फ़िराक में पल पल का दोज़ख बनते जाना, बारूदों से धुंधलाए इस आसमान में शौर्य क्या है? वादियों में गूंजते किसी गाँव के मा... more »

बादल तू जल्दी आना रे!

कालीपद प्रसाद at मेरे विचार मेरी अनुभूति
ऐ ! पावस का पहला बादलतू जल्दी आना रे ,आग में झुलसती धरती कोतू शीतल कर जा रे। धधकती आग रवि का तू अपना आब से बुझा जा रे ,प्यासी धरती की प्यास कोशीतल जल से बुझा जा रे। रिमझिम रिमझिम बरसना तुमटूटकर ना बरसना रे ,जाग उठेगा सुप्त-मुमूर्ष तृणमूलतेरा अमृत पय पीकर वे ,त्राहि त्राहि पुकारते प्राणी को तुमरक्षा करो रवि के प्रहार से ,बना दो एक बार फिर दुल्हन धरती को श्रृंगार करो हरे गहनों से। स्वागत में तुम्हारे पीक नाचेंगे वन उपवन मेंबच्चे नाचेंगे खेत खलियानों में,खेतिहर झूम उठेंगे असीमित ख़ुशी में हल जोतेंगे खेतो में।जीव जगत की जान हो तुमसबकी जान बसी है तुम में,प्यासी धरती  more »

सच्चे फांसी चढ़दे वेक्खे - कहानी

दुकानदार - इस राजनेता की आत्मकथा में 25% सच है और 25% झूठ ... ग्राहक - और बाकी 50 प्रतिशत? दुकानदार - जी, 50% की छूट बैंक में हड़बड़ी मची हुई थी। संसद में सवाल उठ गए थे। मामा-भांजावाद के जमाने में नेताओं पर आरोप लगाना तो कोई नई बात नहीं है लेकिन इस बार आरोप ऐसे वित्तमंत्री पर लगा था जो अपनी शफ़्फाक वेषभूषा के कारण मिस्टर "आलमोस्ट" क्लीन कहलाता था। आलमोस्ट शब्द कुछ मतकटे पत्रकारों ने जोड़ा था जिनकी छुट्टी के निर्देश उनके अखबार के मालिकों को पहुँच चुके थे। बाकी सारा देश मिस्टर शफ़्फाक की सुपर रिन सफेदी की चमकार बचाने में जुट गया था। सरकारी बैंक था सो सामाजिक  more »

क्रोध में इन बातों का रखें ख्याल

क्रोध में इन बातों का रखें ख्याल,क्रोध को नकारात्मक भाव समझा जाता है। क्रोध के समय नकारात्मक भावनाएं उत्पन्न होकर कई बार महत्वपूर्ण रिश्तों में भी जीवन भर के लिए दरार डाल देती हैं। क्रोध मूर्खता से शुरू होता है और पश्चाताप पर खत्म होता है। फिर भी कई लोग क्रोध से खुद को दूर नहीं रख पाते। यदि वे क्रोध को नियंत्रित नहीं कर सकते, तो उसे रचनात्मक बनाकर इससे होने वाली बीमारियों और नुकसान से अवश्य बच सकते हैं। जब किसी व्यक्ति पर क्रोध आने लगे, तो उसी क्षण अपनी आंखें बंद करके उस व्यक्ति की हास्यास्पद तस्वीर मन में बना लें या किसी चुटकुले का पात्र उस व्यक्ति को बना दें। इसी तरह अपने साथ ह... more »

...बस संजो लिया ...................."

*कहीं पर लिखा हुआ पड़ा था । पढ़ा , सच सा लगा , संजोने का मन किया तो ब्लॉग पोस्ट बना दिया । *

गौत्र प्रणाली :आनुवंशिक विज्ञान | Hindu Gotra System: Genetics Science

प्राचीन समृद्ध भारत at ॥ भारत-भारती वैभवं ॥
*इस लेख के माध्यम से हम उन लोगों के मुख पर तमाचे जड़ेंगे जो **गौत्र प्रणाली को बकवास कहते है । * *गौत्र शब्द का अर्थ होता है वंश/कुल (lineage)। * ** गोत्र प्रणाली का मुख्या उद्देश्य किसी व्यक्ति को उसके मूल प्राचीनतम व्यक्ति से जोड़ना है उदहारण के लिए यदि को व्यक्ति कहे की उसका गोत्र भरद्वाज है तो इसका अभिप्राय यह है की उसकी पीडी वैदिक ऋषि भरद्वाज से प्रारंभ होती है या ऐसा समझ लीजिये की वह व्यक्ति ऋषि भरद्वाज की पीढ़ी में जन्मा है । इस प्रकार गोत्र एक व्यक्ति के पुरुष वंश में मूल प्राचीनतम व्यक्ति को दर्शाता है. *The Gotra is a system which associates a person with his most ancient ... more »

अनमोल पल ~~~~~ अनमोल रत्न

vibha rani Shrivastava at " सोच का सृजन "
Mrigank Nandan जन्मदिन की बहुत बहुत बधाई जुग-जुग जियो कयामत तक कामयाब रहो हार्दिक शुभकामनायें तुम्हें मिलें इतनी मुश्किलें कि जो तुम्हें बेहद मजबूत बना दें तुम्हें मिलें इतने दुख कि तुम इंसान बने रहो तुम्हें मिलें इतने सपने कि तुम्हारी उम्मीदें बनी रहें तुम्हें मिलें इतनी खुशियां कि तुममें मिठास बनी रहे तुम्हें मिले कमजोर याददाश्त कि तुम बीते बुरे वक्त को भुला सको और तुम्हें मिलें इतने जोश ओ जुनून कि भविष्य में आगे बढ़ते जाओ तुम्हारे हाथ हमेशा आगे बढ़े किसी से दोस्ती के लिए किसी की मदद के लिए किसी को  more »

अपनी गलती कब मानत है|

दुर्मिल सवैया लिखने का प्रथम प्रयास ..... हर बार लरै तकरार करै अपनी गलती कब मानत है| छिन में छिन जात जिया छलिया छलके सगरे गुर जानत है| नहिं लाज हया उनको तनि नैन कटारि हिया पर मारत है| सखि ऐसन ढीठ पिया पर क्यों तन मुग्ध हुआ हिय हारत है|

क्यूँ

आशा बिष्ट at शब्द अनवरत...!!!
आगाज़ खामोश अंजाम खामोश सफ़र खामोश साथ खामोश फिर शोर क्यूँ??? दफ्न होने में

दोस्ती

*कभी गर्दिशों से दोस्ती कभी गम से याराना हुआ चार पल की जिन्दगी का ऐसे कट जाना हुआ.. इस आस में बीती उम्र कोई हमे अपना कहे . अब आज के इस दौर में ये दिल भी बेगाना हुआ जिस रोज से देखा उन्हें मिलने लगी मेरी नजर आखो से मय पीने लगे मानो की मयखाना हुआ इस कदर अन्जान हैं हम आज अपने हाल से हमसे मिलकरके बोला आइना ये शख्श बेगाना हुआ ढल नहीं जाते हैं लब्ज यूँ ही रचना में कभी कभी ग़ज़ल उनसे मिल गयी कभी गीत का पाना हुआ प्रस्तुति: मदन मोहन सक्सेना*

प्रमुख यौगिक एवं उनके रासायनिक नाम

घनश्याम मौर्य at सामान्‍य ज्ञान कोश
*यौगिक*** *रासायनिक नाम*** *सूत्र** *** बेकिंग पाउडर सोडियम बाइकार्बोनेट NaHCO3 ब्‍लीचिंग पाउडर कैल्शियम हाइपोक्‍लोराइट Ca(OCL)2 कास्टिक सोडा सोडियम हाइड्राक्‍साइड NaOH क्लोरोफार्म ट्राइक्‍लोरोमीथेन CHCl3 साधारण नमक सोडियम क्‍लोराइड NaCl जिप्‍सम कैल्शियम सल्‍फेट CaSO4.2H2O हाइड्रोजन परआक्‍साइड हाइड्रोजन परआक्‍साइड H2O2 हाइपो सोडियम थायोसल्‍फेट NaS2O3.5H2O लाफिंग गैस नाइट्रस ऑक्‍साइड N2O लाइम वाटर (चूने का पानी) कैल्शियम हाइड्राक्‍साइड Ca(OH)2 बुझा हुआ चूना (क्विक लाइम) कैल्शियम ऑक्‍साइड CaO चूना पत्‍थर (लाइम स्‍टोन) कैल्शियम कार्बोनेट CaCO3 प्‍लास्‍टर ऑफ पेरिस कैल्शियम सल्‍फेट 2CaSO4.H2O ... more »

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अब आज्ञा दीजिये ...

जय हिन्द !!!

गुरुवार, 23 मई 2013

अच्छा - बुरा - ब्लॉग बुलेटिन

प्रिय ब्लॉगर मित्रों ,
प्रणाम !

आज का ज्ञान:
 अगर कोई हमें अच्छा लगता है - तो अच्छा वो नहीं हम हैं।
 और अगर कोई हमें बुरा लगता है - तो बुरा वही है क्योंकि हम तो अच्छे ही हैं न !!!


सादर आपका 

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15वीं राष्‍ट्रीय जनगणना वर्ष 2011 - अंतिम आंकड़े

घनश्याम मौर्य at सामान्‍य ज्ञान कोश
- 15वीं राष्‍ट्रीय जनगणना के जनगणना आयुक्‍त्‍ा- श्री चन्‍द्रमौलि - भारत की कुल जनसंख्‍या - 1,21,07, 26,932 - कुल शहरी जनसंख्‍या - 37.7 करोड़ (31.2 प्रतिशत) - कुल ग्रामीण जनसंख्‍या - 83.3 करोड़ (68.8 प्रतिशत) - लिंगानुपात - 843 - जनसंख्‍या घनत्‍व - 384 व्‍यक्ति प्रति वर्ग किमी0 - साक्षरता प्रतिशत - 73 प्रतिशत - पु0 साक्षरता प्रतिशत - 80.9 प्रतिशत - महिला साक्षरता प्रतिशत - 64.6 प्रतिशत - सर्वाधिक लिंगानुपात वाला राज्‍य/संघीय क्षेत्र - केरल (1084) - न्‍यूनतम लिंगानुपात वाला राज्‍य/संघीय क्षेत्र - हरियाणा (879) - सर्वाधिक साक्षर प्रथम तीन राज्‍य/संघीय क... more »

परदेस का एक रेस्टोरंट का टेबल ....

प्रीति टेलर at जिंदगी : जियो हर पल
एहसान या क़र्ज़ कहाँ होता है इस दुनिया में ??? ये तो रिश्तोंको जोड़े रखने का बहानाभर होता है .... बस मिट्टी के टीले पर बैठे हुए नापते है रिश्तेको ??? माजरा फकत ये है की बस फर्क बैठनेभर का है ... तुम्हारी वाली मिटटी थोड़ी सी ऊपर है , मेरे वाली थोड़े नीचे पर बिछी हुई है .... आज भी किवाड़े खटकने एक एहसास होता है आधी रात , आज भी लगता है शायद दरवज्जे पर हमवतन है खड़ा .... चूल्हे की खुशबु चिपकी मिलती है राखके लिबास में रोटी पर , महक वो सौंधी मिटटीकी हर निवालेमें निगली जाती है ख्यालोंमें .... पित्ज़ा के टोपीन्गज़ पर पिघला हुआ चीज़ का टुकड़ा मेरी रोटी पर लगे मक्खनकी याद दिलाता है अक्सर , जो चोला ब... more »

स्वयं ही स्वयं को लिखता पाती

स्वयं ही स्वयं को लिखता पाती जीवन है सौगात अनोखी माँ का आंचल, पिता का सम्बल, प्रियतम का सुदृढ़ आश्रय वात्सल्य का निर्मल सा जल ! गीत भी है, संगीत जहाँ में दृश्य सुहाने मोहक मंजर, वर्षा की सोंधी सी खुशबू   भोर हुए पंछी के मृदु स्वर ! झोली भर-भर मिले खजाने कुदरत का अनन्य कोष है, तृप्त हुआ बस डोले इत-उत अंतर जिसके जगा तोष है ! श्वास-श्वास है नेमत उसकी अमृत सा जल,

टिकट फिक्स है !!!


चटाईयां पेड़ पर नहीं उगती .................अरशद अली

Arshad Ali at Arshad ke man se........
कल एक बुढिया को चटाई बुनते देखा तब लगा चटाईयां बुनी जाती हैं पेड़ पर नहीं उगती पैसों के जोर पर वो खुशियाँ खरीदने निकल जाता है उसे ज्ञान नहीं खुशियाँ बाज़ार में नहीं मिलती सतह पर टिकने के लिए कुछ प्रयास सतही हो सकते हैं पर ग्रुत्वाकर्षण के सिद्धांत के बगैर कोई चीज सतह पर नहीं टिकती जन्म से मृत्यु तक सुख और दुःख के काल खंड पलटते रहतें हैं पूरा जीवन सुख या सिर्फ दुःख में नहीं गुजरती मै बुढिया से मूल्य कम करा लेता हूँ चटाई की वो मेरे चले जाने से डरती है और किसी नुकसान से नहीं डरती -----अरशद अली-----

ताज और मुमताज

Rajeev Sharma at Do Took
राग ताज का मत छेड़ो मुमताज महल रो देती है तुम अपनी प्रेम निशानी में एक फूल गुलाबी दे देना पत्थर को हीरे में जड़कर मत खड़ी इमारत तुम करना बस अपनी प्रेम कहानी में किरदार नवाबी दे देना।। ऊंची मीनारों पर मुझको मुमताज दिखाई देती है सूनापन उसको डंसता है इक चीख सुनाई देती है जब मैं तन्हा महसूस करूं तुम इतना करना प्राणप्रिये साकी बन जाना तुम मेरे इक जाम शराबी दे देना।। कब कहती थी ताज चाहिए मुमताज प्यार के बदले में कहती थी बस प्यार चाहिए मुमताज प्यार के बदले में आंगन की छोटी बगिया में तुम प्रेम पल्लवित कर देना मैं पुष्प बनूं, तुम भंवरा बनकर प्यार जवाबी दे देना।।

टू -ईन -वन

Amod Srivastava at अभिव्यक्ति
आज मेरी नज़र ऊपर तांड पर पड़ी वहां धुल में सना उसकी आगोश में समाया हमारा जो कभी आँखों का तारा , हमारा प्यारा हुआ करता था टू -ईन -वन महोदय पर जब पड़ी और उनकी यह दुर्दशा हमसे न देखी गयी और आँखों के सामने न जाने कितनी तस्वीर चलने लगी .... बात उस समय की है जब हमारे घर में एक बड़ा सा रेडिओ जो लकड़ी के एक बॉक्स में हुआ करता था। सामने की आलमारी में रखा हुआ जिसपर क्रोशिये से बनाई गई सुन्दर सी चादर पड़ी रहती थी। और हम सभी बड़े ही शौक से उसका आनन्द लिया करते थे। सबका अपना अपना समय बंधा होता था, सुबह सुबह के समय उसी चिर परिचित आवाज में रामायण की चौपाई कुछ देर बाद सात बजे एक मोटी स... more »

क्या यूपी में चल पाएगा मोदी का करिश्मा?

pramod joshi at जिज्ञासा
कर्नाटक चुनाव में धक्का खाने के बाद भाजपा तेजी से चुनाव के मोड में आ गई है. अगले महीने 8-9 जून को गोवा में पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक होने जा रही है, जिसमें लगता है गिले-शिकवे होंगे और कुछ दृढ़ निश्चय. मंगलवार को नरेन्द्र मोदी का संसदीय बोर्ड की बैठक में शामिल होना और उसके पहले लालकृष्ण आडवाणी के साथ मुलाकात करना काफी महत्वपूर्ण है. मोदी ने अपने ट्वीट में इस मुलाकात को ‘अद्भुत’ बताया है. भारतीय जनता पार्टी किसी नेता को आगे करके चुनाव लड़ेगी भी या नहीं, यह अभी स्पष्ट नहीं है. क्लिक करेंकर्नाटक के अनुभव ने इतना ज़रूर साफ किया है कि ऊपर के स्तर पर भ्रम की स्थिति पार्टी के ... more »

जिस-जिस गली से गुज़रे ...

Suresh Swapnil at साझा आसमान
ये: शौक़-ए-ख़राबां है इस इश्क़ से भर पाए हंस-हंस के न जी पाए रो-रो के न मर पाए हाथों की लकीरों में कोहरे-सी इबारत थी उम्मीद के धोखों में संभले न बिखर पाए सूखे हुए पत्तों की तरह शाख़ से बिछड़े हैं अब अपना मुक़द्दर तो शायद ही संवर पाए ख़्वाबों के सफ़र अक्सर तनहा ही गुज़रते हैं इस राह पे साथी की उम्मीद न कर पाए कहते थे जिसे जन्नत उसकी ये: हक़ीक़त है जिस-जिस गली से गुज़रे जलते हुए घर पाए ! ( 2013 ) * ** ... more »

अपना आकलन करना सिखाती है परीक्षा

Harminder Singh at vradhgram
रिजल्ट की बारी आती है तो बच्चे थोड़ी घबराहट महसूस करने लगते हैं। यह ठीक उसी तरह होता है जैसा परीक्षाओं के दौरान हमें देखने को मिलता है। ऐसा नहीं है कि घबराहट स्थायी होती है, लेकिन इसका असर तो पड़ता है। मुझे आज भी एक्ज़ाम के नाम पर कहीं न कहीं घबराहट महसूस होती है। मैं हर साल कोई न कोई इम्तहान देता हूं। किसी ने मुझसे पूछा कि आप पढ़ाई कब छोड़ने वाले हैं? मेरा जबाव था-‘जब जिंदगी मुझसे रुठ जायेगी।’ सच ही तो है इंसान जीवन भर पढ़ता रहता है। जीवन की एक पाठशाला होती है जिसमें हम जिंदगी के ’क’,’ख’ सीखते हैं। किताबी पढ़ाई से अलग होती है जीवन की पढ़ाई। यहां अक्षर यूं ही नहीं तैर  more »

अपने एक एक आंसू का हिसाब रखना ......!!!

sunil..... at different stroks
चेहरो पे ठंडक दिलो में आग रखना , अपने ज़ज्बातो पे नकाब रखना . फिरेगे दिन अपने भी तो देखेगे , अपने एक एक आंसू का हिसाब रखना ......!!!
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अब आज्ञा दीजिये ...

जय हिन्द !!!

लेखागार