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शनिवार, 3 फ़रवरी 2018

वो जब याद आए, बहुत याद आए




यह उन दिनों की बात है, जब ब्लॉग का सूर्योदय काल था, दिग्गज ब्लॉगर और उनके बेहतरीन पोस्ट दिनचर्या का अहम हिस्सा थे !
हर दिन एक ख़ास रचना पढ़ने को मिलती, मुझे तो जो भी पसंद आता, उसे मैं औरों को भी सुनाती थी  ... सुनाना मेरी हॉबी मान लीजिये। 
आज उन दिनों की ख़ास दहलीज़ों तक ले चलती हूँ  
और दहलीज़ों को आप तक लेकर आती हूँ  ... 


5 टिप्पणियाँ:

कविता रावत ने कहा…

वक्त-वक्त की बात है, समय एक सा कहाँ रहता, बस यादें रह जाती है
बहुत अच्छी बुलेटिन प्रस्तुति

केवल राम ने कहा…

शीर्षक, सटीक है

चला बिहारी ब्लॉगर बनने ने कहा…

मेरे शुरूआती दौर की पोस्ट है दीदी! आपने तो मेरे दिल के किसी बन्द कमरे का दरवाज़ा खोल दिया! चरण वन्दन!!

गगन शर्मा, कुछ अलग सा ने कहा…

यादें !

ना होतीं तो !!

Sadhana Vaid ने कहा…

अरे वाह ! अचानक ही नज़र पड़ गयी ! मेरे ब्लॉग से बहुत पुरानी पोस्ट आपने आज यहाँ ली है जिसे शायद न तब किसीने पढ़ा न ही अब ! आभार आपका याद रखने के लिए रश्मि प्रभा जी !

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बुलेटिन में हम ब्लॉग जगत की तमाम गतिविधियों ,लिखा पढी , कहा सुनी , कही अनकही , बहस -विमर्श , सब लेकर आए हैं , ये एक सूत्र भर है उन पोस्टों तक आपको पहुंचाने का जो बुलेटिन लगाने वाले की नज़र में आए , यदि ये आपको कमाल की पोस्टों तक ले जाता है तो हमारा श्रम सफ़ल हुआ । आने का शुक्रिया ... एक और बात आजकल गूगल पर कुछ समस्या के चलते आप की टिप्पणीयां कभी कभी तुरंत न छप कर स्पैम मे जा रही है ... तो चिंतित न हो थोड़ी देर से सही पर आप की टिप्पणी छपेगी जरूर!

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