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बुधवार, 7 फ़रवरी 2018

मन्मथ नाथ गुप्त और ब्लॉग बुलेटिन

सभी हिन्दी ब्लॉगर्स को सादर नमस्कार।
मन्मथनाथ गुप्त (अंग्रेज़ी: Manmath Nath Gupta जन्म: 7 फरवरी 1908 - मृत्यु: 26 अक्टूबर 2000) भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम के एक प्रमुख क्रान्तिकारी तथा सिद्धहस्त लेखक थे। इन्होंने हिन्दी, अंग्रेज़ी तथा बांग्ला में आत्मकथात्मक, ऐतिहासिक एवं गल्प साहित्य की रचना की है। ये मात्र 13 वर्ष की आयु में ही स्वतन्त्रता संग्राम में कूद गये और जेल गये। बाद में वे हिन्दुस्तान रिपब्लिकन ऐसोसिएशन के सक्रिय सदस्य भी बने और 17 वर्ष की आयु में उन्होंने सन् 1925 में हुए काकोरी काण्ड में सक्रिय रूप से भाग लिया।

क्रांतिकारी और लेखक मन्मथनाथ गुप्त का जन्म 7 फरवरी 1908 को वाराणसी में हुआ था। उनके पिता वीरेश्वर विराटनगर (नेपाल) में एक स्कूल के हेडमास्टर थे। इसलिये मन्मथनाथ गुप्त ने भी दो वर्ष वहीं शिक्षा पाई। बाद में वे वाराणसी आ गए। उस समय के राजनीतिक वातावरण का प्रभाव उन पर भी पड़ा और 1921 में ब्रिटेन के युवराज के बहिष्कार का नोटिस बांटते हुए गिरफ्तार कर लिए गए और तीन महीने की सजा हो गई। जेल से छूटने पर उन्होंने काशी विद्यापीठ में प्रवेश लिया और वहाँ से विशारद की परीक्षा उत्तीर्ण की। तभी उनका संपर्क क्रांतिकारियों से हुआ और मन्मथ पूर्णरूप से क्रांतिकारी बन गए। 1925 के प्रसिद्ध काकोरी कांड में उन्होंने सक्रिय रूप से भाग लिया। ट्रेन रोककर ब्रिटिश सरकार का खजाना लूटने वाले 10 व्यक्तियों में वे भी सम्मिलित थे। इसके बाद गिरफ्तार हुए, मुकदमा चला और 14 वर्ष के कारावास की सजा हो गई।


आज मन्मथनाथ गुप्त जी की 110वें जन्म दिवस पर सारा देश उनको याद करते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करता है।


~ आज की बुलेटिन कड़ियाँ ~














आज की बुलेटिन में बस इतना ही कल फिर मिलेंगे तब तक के लिए शुभरात्रि। सादर ... अभिनन्दन।। 

4 टिप्पणियाँ:

Meena Sharma ने कहा…

मेरी रचना को शामिल करने हेतु सादर धन्यवाद।

sadhana vaid ने कहा…

सभी सूत्र बहुत सुन्दर ! मेरी रचना 'पहाड़ी नदी' को सम्मिलित करने के लिए आपका ह्रदय से धन्यवाद एवं आभार हर्षवर्धन जी !

Sriram Roy ने कहा…

मेरी रचना को स्थान देने खातिर शुक्रिया

Kavita Rawat ने कहा…

बहुत अच्छी बुलेटिन प्रस्तुति ..

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