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सोमवार, 19 दिसंबर 2016

2016 अवलोकन माह नए वर्ष के स्वागत में - 35




कुछ नाम बचपन के गुड़िया घर से बाहर नहीं आते 
कुछ नाम पूरी ज़िन्दगी "माँ" बनकर एक करवट में सो लेते हैं 
कुछ नाम हर दर्द को जीते हैं और ख़ुशी का नेमप्लेट लगाते हैं घर में 
उनके घर का हर कोना दुआओं के बोल बोलता है -

कीजिये अवलोकन - 


Shailja Pathak



'खूब बड़हन हो जा ' इस आशीर्वाद के सदके ( हुह )

पतंग की पूँछ
दूध का मूँछ
गाल गुब्बारा 
गिना हुआ तारा
भूला पहाड़ा
आलू सिंघाड़ा
कहाँ गया बचपन ?

कहानी का साधू
हाथो का जादू
कंघी का बाजा
बच्चों की गाडी
लम्बी से रेल
वो इंजिन सी लड़की
अम्मा की झिड़की
कहाँ गया।बचपन ?
कौवा उड़ाना
मेहमान बुलाना
पानी गिराना
पानी पे लिखना
आई एम अ गुड़ गर्ल
कहाँ है वो।बचपन
दादी के पीछे
आँचल के नीचे
बक्से के बाजू
पर्दे की ओट में
पिताजी के कोट में
अम्मा की साडी में
छुप गया क्या ?
कहाँ गया बचपन ?
चाँद खिलौना में
गदिया बिछौना में
दूध के भगोना में
मीठे में लाई में
गुड़ में खटाई में
घुल गया बचपन
तीखे के सी सी में
हलुवा में पूरी में
भाप की गाडी में
गठरी के सत्तू में
गुड़ियाँ की चोटी में
गूँथ दिया बचपन
घाट में हाट में
गंगा के छपछप में
बाबा के बकबक में
अस्सी के घाट पे
बनारस के चाट पर
पान में कथे में
कूट के गत्ते में
बन के जहाज
उड़ गया बचपन
नींद की मिठाई में
गहरी अंगड़ाई में
लंगड़ी कब्बडी में
जीत में हार में
मेला बजार में
हँसता सा खिलता सा
खो गया बचपन
ढक्कन में पानी पीने का सुख छोड़ ये कहाँ आ गए हम ....

2 टिप्पणियाँ:

sadhana vaid ने कहा…

वाह वाह ! बहुत ही बेहतरीन ! बचपन के ऐसे ही साये तो हमसे भी आँख मिचौली खेला करते हैं दिन रात ! बहुत ही बढ़िया चयन !

सुशील कुमार जोशी ने कहा…

वाह।

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