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मंगलवार, 27 नवंबर 2012

'आम आदमी' की दस्‍तक से मुलाकतों की जगह तक

'आम आदमी' की दस्‍तक, मीडिया को दस्‍त
अन्‍ना हजारे के साथ लोकपाल बिल पारित करवाने के लिए संघर्षरत रहे अरविंद केजरीवाल ने जैसे 'आम आदमी' से राजनीति में दस्‍तक दी, तो मीडिया को दस्‍त लग गए। कल तक अरविंद केजरीवाल को जननेता बताने वाला मीडिया नकारात्‍मक उल्‍टियां करने लगा। उसको अरविंद केजरीवाल से दुर्गंध आने लगी। अब उसके लिए अरविंद केजरीवाल नकारात्‍मक ख़बर बन चुका है। More >>>

 अजहर एक क्रिकेटर, एक नेता
पूर्व भारतीय कप्तान और कलाई से बॉल को ट्विस्ट कर गेंदबाजों की हवाईयां उड़ाने वाले मोहम्मद अजहरुद्दीन ने एक तरह से रिटायरमेंट की घोषणा कर दी. बेशक गुरुवार के पहले वो अगर ऐसा कहते भी कि अब वो क्रिकेट नहीं खेलना चाहते तो इसका कोई मतलब नहीं होता क्योंकि वो भारतीय क्रिकेट बोर्ड (बीसीसीआई) की तरफ ही आजीवन प्रतिबंधित कर दिए गए थे. लेकिन, गुरुवार को जैसे सारा कलंक धुल गया. एक खिलाड़ी फिर से सिर उठा कर चल सकता था. 12 वर्षों तक अपमान का दंश झेलना कम नहीं होता है लेकिन फिर भी अजहरुद्दीन ने इस पर कोई टिप्पणी करने से मना कर दिया. उन्होंने हैंसी क्रोनिए को भी एक तरह से माफ कर दिया. बकौल अजहरुद्दीन "अब वो रहे नहीं तो उसपर किसी तरह की बातचीत ठीक नहीं रहेगी." 
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ईमानदारी का एक दीया
शादी शादी बोल बोल के शादी करवा दी। ऐसा हो रहा था जैसे मै शादी नहीं करती तो कयामत आ जाती। यार कोई  मैं दुनिया की पहली लड़की तो  होती नही बस सात फेरे  लेलो और जि़न्दगी भर सर फोड़ते रहो। शान्त  गुडिया क्या शान्त  जि़न्दगी तो मेरी बरबाद हो गयी आप लोगों के चक्कर में, मै बता रही हूं अब मैं उस भिखारी को और नहीं झेल सकती। मुझे डाईवोर्स चाहिए एट एनी कॉस्ट। हां गुडिया हम डाईवोर्स लेंगे। More>>>


वक़्त वक़्त की बात
पुरानी सदी के डाइलोग:
शशि कपूर: मेरे पास माँ है!
इस सदी के डाइलोग:
रॉबर्ट वाड्रा: मेरे पास सासू माँ है! More>>>





 

 मुलाकातों की जगह
आज फिर कदम उस ओर मुड़ चले हैं कई दिनों के बाद । मुलाकातों की उस जगह में जहाँ हर नए दिन नया अनुभव बांटा जाता है । वह जगह जो हर वक़्त जीवंत नज़र आती है और जीने के लिए साधन को जीवन से जोड़ना सिखाती है। इस गली से गुज़रते हुए क्लास में क्या चल रहा है अक्सर पता चल जाता है गली के माहौल में एक गूँज रहती है। गली में एक घर से बाहर आती हुई एक महिला के कहे शब्दों से पता चल ही रहा है। वो झाड़ू लगाते हुए साथ में बैठी पड़ोसन से कहती-"अब देखो शुरु हो गया स्कूल, आज दूसरा ही दिन है और आवाज़ें सुनों, इन आवाज़ों में अपने घर की आवाज़ें ही खो जाती है। More >>>


पर अब जो आओ बापू.....
देश में जो हाहाकार मची है
मारकाट चीखपुकार मची है
टुकड़े टुकड़े हो जाए ना
आर्यावर्त कहीं खो जाए ना

जाति पांति की हाट सजी है
मजहब की दीवार चुनी है
स्वतंत्रता कहीं बिक जाए ना
देश मेरा खो जाए ना More>>>

 

5 टिप्पणियाँ:

Shah Nawaz ने कहा…

बहुत बढ़िया रिपोर्ट!

वन्दना ने कहा…

्बहुत बढिया बुलेटिन

शिवम् मिश्रा ने कहा…

छोटी पर सार्थक बुलेटिन ... आभार कुलवंत भाई !

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

सुन्दर बुलेटिन..

Kulwant Happy "Unique Man" ने कहा…

कुछ समस्‍या आ रही थी नेट में, काफी रोचक पोस्‍ट थे,

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