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बुधवार, 21 मई 2014

'मैं' मेरा अहम नहीं स्वत्व है



सबकुछ लिखने की कोशिश में मैंने अपने मैं को जगाया है 
'मैं' मेरा अहम नहीं 
स्वत्व है 
जन्मगत संस्कारों की धुरी है 
संस्कारों के गुम्बदों पर मर्यादा के धागे बाँध 
अमर्यादित शब्दों को मर्यादा के घेरे में 
लोगों के दिलों में उतारती हूँ 
सहनशीलता के बाँध को तोड़ 
रोती और रुलाती हूँ 
आँसू कमज़ोरी नहीं 
कायरता नहीं 
संवेदना के स्वर हैं 
इसी स्वर से परिवर्तन हुआ है 
होगा  … 



11 टिप्पणियाँ:

सुशील कुमार जोशी ने कहा…

वाह सुंदर आगाज के साथ सुंदर सूत्रों से सजा एक सुंदर बुलेटिन :)

आशीष अवस्थी ने कहा…

बढ़िया प्रस्तुति व लिंक्स , रश्मि जी व बुलेटिन को धन्यवाद !
I.A.S.I.H - ब्लॉग ( हिंदी में समस्त प्रकार की जानकारियाँ )

कौशल लाल ने कहा…

सुंदर सूत्रों से सजा बुलेटिन.....

vandan gupta ने कहा…

मैं और संवेदना के स्वरों को नमन …………सुन्दर बुलेटिन ………आभार

sangita ने कहा…

मन की तरंगों का आशातीत परिणाम है ,बधाई खूबसूरत अंदाज़ के लिए

Kailash Sharma ने कहा…

बहुत सुन्दर सूत्र...आभार

सदा ने कहा…

हमेशा की तरह खूबसूरत अंदाज़ लिए ..... बुलेटिन
………आभार

Parmeshwari Choudhary ने कहा…

सहनशीलता के बाँध को तोड़
रोती और रुलाती हूँ
आँसू कमज़ोरी नहीं
कायरता नहीं
संवेदना के स्वर हैं
इसी स्वर से परिवर्तन हुआ है
होगा …
Simply beautiful

Asha Joglekar ने कहा…

आँसू कमज़ोरी नहीं
कायरता नहीं
संवेदना के स्वर हैं

सुंदर कविता से सजे सूत्र।

NIKI Kathiirya ने कहा…

nikikathiriya.blogspot.in

शिवम् मिश्रा ने कहा…

बेहद उम्दा बुलेटिन दीदी ... प्रणाम स्वीकारें |

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