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बुधवार, 1 फ़रवरी 2012

थिस इज़ बेटर देन ओरिजिनल जी... - ब्लॉग बुलेटिन

प्रिय ब्लॉगर मित्रो,

प्रणाम !

एक बार मुझ को एक पुलिस वाले ने गाड़ी को ओवर स्पीड से चलाने के लिए सिग्नल पर रोका !

 मैंने उस पुलिस वाले को पहचान लिया ये वही था जिसने मुझ को एक बार मोटरसाईकिल से उतारा था और मेरे साथ झगड़ा किया था और बाद में मेरा चालान भी काट दिया था मैंने सोचा आज तो इसको मजा चखा कर ही रहूँगा!

 मैंने जैसे उसकी बात सुनी ही नहीं और वहां से गाड़ी बड़ी तेजी से आगे बड़ा दी!

 ये देख कर पुलिस वाले को गुस्सा आया और उसने अपनी मोटर साईकिल स्टार्ट की और मेरी गाड़ी का पीछा करने लगा मैंने थोड़ी दूर जाकर गाड़ी को रोक दिया मेरे पीछे पुलिसवाला भी वहां पहुँच गया !

अब मेरे और उस पुलिस वाले के बीच क्या क्या बात हुयी आपको सिलसिलेवार तरीके से बताता हूँ !

 पुलिसवाले ने रौब दिखाते हुए कहा चलो अपना लाइसेंस दिखाओ!

 मैं :-  नहीं है!

 पुलिसवाले ने कहा गाड़ी के कागज दिखाओ 

मैं :-  नहीं है! सर, मैं आपको ये सब कुछ दिखा देता पर आपको पता नहीं कि ये गाड़ी चोरी की है और पहले मैंने इसके मालिक को लूट लिया फिर उसको जान से मार दिया अगर आपको यकीन नहीं हो रहा तो ये ट्रंक देख लीजिये इसमें उसकी लाश पड़ी है!

 ये सब सुनकर पुलिस वाला चौंक गया और उसने अपने ऑफिसर को फोन पर सारी बात बता दी!

 कोई दस मिनट बाद वहां वह पुलिस ऑफिसर पहुँच गया और उसने मुझ से पूछताछ शुरू कर दी!

 ऑफिसर ने मुझ को कहा चलिए गाड़ी से बाहर उतरिये!

 मैं :-  सर कोई प्रॉब्लम है क्या?

 ऑफिसर जी हाँ हमे खबर मिली है कि ये गाड़ी चोरी की है और आपने इसके मालिक को मार दिया है!

 मैं :-  हैरान होकर गाड़ी के मालिक को मार दिया है!

 पुलिस ऑफिसर क्या आप इस ट्रंक को खोल कर दिखाएँगे, मैंने ट्रंक खोला पर वो बिल्कुल खाली था!

 ऑफिसर सर क्या ये आपकी गाड़ी है!

मैं :- जी हाँ, बिल्कुल ये देखिये गाड़ी के कागज और ये रहा मेरा लाइसेंस ऑफिसर ने गौर से देखा और कहा:

 ऑफिसर: सर हमें इस गुस्ताखी के लिए माफ़ कीजिये पर मुझे किसी मेरे साथी ने फोन करके बताया था कि आपके पास न लाइसेंस है न गाड़ी के कागज और गाड़ी चोरी की है गाड़ी के मालिक को लूटने के बाद  मार दिया है!



मैं : - उस कमीने ने आपको ये नहीं बताया कि मैं गाड़ी भी ओवर स्पीड से चला रहा था! 


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अब तक तो आप सब यह समझ ही गए होंगे कि मैंने यहाँ एक लतीफा अपने ऊपर सेट कर के चैप दिया है ... तो साहब जब आप यह जान ही गए है तो इस लतीफे को एक बार फिर से पढ़ लीजिये ... और जी भर कर मुस्कुराइए ... तब तक मैं आज की ब्लॉग बुलेटिन सजाता हूँ !


सादर आपका


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अब आज्ञा दीजिये ...
जय हिंद !!!

33 टिप्पणियाँ:

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

दमदार बुलेटिन..

Archana Chaoji ने कहा…

ओSSSSSSSSSइतने सारे लिन्क्स और वो भी एक से बढ़ कर एक( सबको नहीं पढ़ पाई हूं अभी, पर खोल चुकी हूं)दिन भर है पढ़ ही लूंगी)हा हा हा..मेरी बेटी को सबसे मिलवाने का शुक्रिया..

पी.सी.गोदियाल "परचेत" ने कहा…

बहुत शानदार ढंग से सजाये बुलेटिन के लिए आभार शिवम् जी !

मनोज कुमार ने कहा…

बहुत अच्छी चर्चा।

RITU BANSAL ने कहा…

मुझे जगह देने के लिए आभार व धन्यवाद ,सभी लेख पढेंगे ..
kalamdaan.blogspot.com

रुनझुन ने कहा…

इतनी सुन्दर चर्चा में मुझे शामिल करने के लिए बहुत-बहुत शुक्रिया!!!

Shah Nawaz ने कहा…

भाईसाब गजब का लतीफा था... हा हा हा...

लिंक भी सब के सब बढ़िया हैं...

Anamikaghatak ने कहा…

bahut badhiya

न्यू अब्ज़र्वर पोस्ट हिन्दी दैनिक ने कहा…

blog ki duniya men nai chamak .....bdhai

चला बिहारी ब्लॉगर बनने ने कहा…

मैं भी सोचूँ कि यह घटना तो मेरे साथ घटी थी, ये शिवम भाई कैसे बयाँ कर रहे हैं.. फिर लगा, छोटे भाई हैं जाने दो!! मज़ा आ गया सुबह सुबह!! दिन बन गया!!!

Sumit Pratap Singh ने कहा…

बिना खर्चा (???)
सुन्दर चर्चा...
शुक्रिया...

vandan gupta ने कहा…

वाह बहुत सुन्दर लिंक्स संजोये हैं………बढिया बुलेटिन्।

रश्मि प्रभा... ने कहा…

हाहाहा मजेदार कहानी ... मज़ा आ गया , लिंक्स की बहार है और मैं भी हूँ बासंती बयार में - शुक्रिया

Dr. Ravindra S. Mann ने कहा…

बहुत से अच्छे लिन्क देने के लिए शुक्रिया.

Smart Indian ने कहा…

आभार, किसी फ़िल्म में गोविन्दा के साथ भी यही हुआ था।

varsha ने कहा…

shukriya,kuch links to bahut achche hain.

Anupama Tripathi ने कहा…

शिवम् जी हसाने के लिए आभार ...
पढ़कर बहुत मज़ा आया ...
बुलेटिन भी बढ़िया है ...

सदा ने कहा…

बेहतरीन प्रस्‍तुति ।

shikha varshney ने कहा…

कहानी मजेदार है :).
और बुलेटिन सार्थक.

अविनाश वाचस्पति ने कहा…

प्रत्‍येक घटना और दुर्घटना संभव है
प्‍यार और यातायात में
क्‍यों सही कहा न शिवम् भाई।

Maheshwari kaneri ने कहा…

बहुत शानदार बहुत जानदार बुलेटिन..

विभा रानी श्रीवास्तव ने कहा…

सोचती रह गई ,और लिखना भूल ही गई , इसलिए थोड़ी देर हो गई.... !!
अपने पर मज़ाक-लतीफे , हौसले की दाद देनी पड़ेगी , और अच्छे लिंक्स की उत्तम प्रस्तुति..... !!

Dev K Jha ने कहा…

वाह जी वाह... खुद को शीर्षक रूप में पाकर मजा आया...
मुंबई में रहता हूँ, आये दिन ट्रैफिक के कांस्टेबल से पाला पड़ता रहता है....

अच्छी भूमिका और बहुत ही मेहनत से सजा बुलेटिन...

मुकेश कुमार सिन्हा ने कहा…

shaaandaar buletin..:)

डॉ टी एस दराल ने कहा…

गज़ब का लतीफ़ा था । हैरान कर गया ।
बढ़िया चर्चा ।

amit kumar srivastava ने कहा…

यह बुलेटिन नहीं बुलेट है ,शानदार |

मनोज पटेल ने कहा…

बेहतर लिंक्स, शुक्रिया शिवम् जी !!

मेरा मन पंछी सा ने कहा…

सुन्दर लिंक्स है
बढ़िया

अजय कुमार झा ने कहा…

बहुत सन्नाट धरे हैं मिसर जी ..एकदम कटिंगदार और पेना बुलेटिन जारी किए हैं ....लतीफ़ा तो वजीफ़ा सरीखा रहा जी । बेहतरीन पीस

शिवम् मिश्रा ने कहा…

आप सब का बहुत बहुत आभार !

विष्णु बैरागी ने कहा…

आपकी कल्‍पनाशीलता आपकी कहानी से झलकती है परिश्रम इस संयोजन से। सलाम।

धीरेन्द्र सिंह भदौरिया ने कहा…

शिवम भाई,...आपने इस खुशी के मौके पर मेरे पोस्ट में पहला कमेंट्स देकर मेरे सारे गिले शिकवे भुला दिये..आभार
लाजबाब प्रस्तुतीकरण...

NEW POST...40,वीं वैवाहिक वर्षगाँठ-पर...

avanti singh ने कहा…

आप के लेखन का तरीका बहुत ही अच्छा है ,पूरा बुलेटिन पढ़े बिना रहा ही नहीं गया

ऐसे ही लिखते रहें.....शुभकामनाये .......

आप ने जो चुटकला खुद पर फिट किया बहुत बढिया लगा ........

गौ माता के लिए कुछ करने की दृष्टि से एक मंच का निर्माण हुआ

आप भी सादर आमंत्रित है.....पधारियेगा....

गौ वंश रक्षा मंच



gauvanshrakshamanch.blogspot.com

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