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मंगलवार, 15 नवंबर 2011

कितनी जरूरी उधार की खुशी - ब्लॉग बुलेटिन

प्रिय ब्लॉगर मित्रो ,
प्रणाम !

आज एक छोटे से किस्से से इस ब्लॉग बुलेटिन की शुरुआत कर रहा हूँ ... इस किस्से की जरुरत इस लिए पड़ी कि शायद हम में से काफी लोग इस किस्से से खुद को जोड़ पायेंगे ... 

तो जनाब हुआ यु कि ...

रीना पिछले दो साल से एक जाने-माने बैंक का क्रेडिट कार्ड यूज कर रही थीं। एक दिन उनके पास बैंक की कॉल आई और 2 लाख रुपए पेमेंट करने को कहा गया। परेशान रीना ने जब कंज्यूमर सेल में कॉल की तो पता चला कि उनका ओरिजनल कार्ड कैंसल करके उसकी जगह दूसरा कार्ड इश्यू किया गया है। यह काम फोन के जरिए किया गया था। यह पूछने पर कि पते का वेरीफिकेशन करने के लिए किसी को क्यों नहीं भेजा, तो बैंक के पास कोई जवाब नहीं था। आखिरकार बैंक ने अपना क्लेम वापस ले लिया, लेकिन इससे रीना का समय तो बर्बाद हुआ ही, टेंशन मिली सो अलग। पर हर केस रीना की तरह नहीं होता।

आप सब जानते है कि आज क्रेडिट कार्ड हासिल करना कोई मुश्किल काम नहीं। इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि जेब में जरूरी अमाउंट न होने के बावजूद आप अपनी मनपसंद चीजें तुरंत खरीद सकते हैं। इमरजेंसी में यह सबसे बड़ा दोस्त होता है, लेकिन अधिकतर मौकों पर हम पता ही नहीं कर पाते कि क्या हम सच में कार्ड का इस्तेमाल जरूरत का सामान खरीदने के लिए ही कर रहे हैं ?  मसलन जब आप 5 हजार रुपए लेकर बाजार जाते हैं तो अपने बजट के हिसाब से सबसे जरूरी सामान पहले खरीदते है और बाकी बाद में, लेकिन क्रेडिट कार्ड पास होने पर बहुत सारा ऐसा सामान भी खरीद लेते हैं, जिनकी शायद जरूरत ही नहीं होती।

आसानी से मिल जाने के कारण ज्यादातर लोगों के लिए एक से ज्यादा कार्ड रखना आसान हो गया है, किंतु इसके भी अपने नुकसान हैं। अगर गलती से किसी कार्ड का बिल समय से भरना भूल गए तो पेनाल्टी भरनी पड़ती है। अगर डिफाल्टर हो जाते हैं तो आपका सामना सीधे बैंक के आदमियों से होगा, जो परेशान करने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे। कार्ड चोरी हो जाने पर अगर आप उसे समय पर ब्लॉक नहीं करा पाए तो कोई भी इसका नाजायज फायदा उठा सकता है। पश्चिमी देशों की तरह भारत में अभी भी खरीददारी करने पर चार अंकों का पिन डालने की सुविधा पूरी तरह से लागू  नहीं है। इंटरनेट पर कार्ड के इस्तेमाल में जरा सी लापरवाही इसके गलत इस्तेमाल का रास्ता खोल देती है।

अब सवाल यह पैदा होता है कि हमें क्रेडिट कार्ड रखना चाहिए या नहीं ... तो साहब नीचे दिए जा रहे चंद सवालो का जवाब दीजिये और आप खुद ही जान जायेंगे अपने असली सवाल का जवाब ...

1. क्या क्रेडिट कार्ड की जरूरत है या फिर सिर्फ फैशन के नाम पर कार्ड लेने जा रहे हैं?
2. कितना इंट्रेस्ट रेट देना होगा, क्या आपकी पॉकेट इसकी परमीशन दे रही है?
3. क्या एक से ज्यादा कार्ड की जरूरत है?
4. क्या आपको सामान उधार यानी क्रेडिट में लेने की जरूरत है?

अगर इन सवालों में से ज्यादातर जवाब हां में हैं तो क्रेडिट कार्ड आपके लिए उपयोगी है, वरना इसको बाय-बाय कहना ही बेहतर होगा ... आगे आप खुद समझदार है ... है कि नहीं ???

आइये अब फटाफट आज के ब्लॉग बुलेटिन पर भी नज़र डाल लें ... 

सादर आपका 


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 क्या अब भी मिला करते है ??

क्या ??

 खिचड़ी , पापड़ , दही , आचार

हम्म

कब नहीं थी जी ...

 मतलब ज़िन्दगी ने सिखाया बहुत 

 होता तो क्या यहाँ होते ...

 मेरा नाम है क्या ??

क्यों इनकी समझदानी में छेड़ है क्या ??

 पहले बताओ इनाम में क्या है ???

 आओ मिल कर प्रयास करें

 बस आँखें खोल कर पढने की जरुरत है

सरकार से आज्ञा मिल गयी क्या ???

 नहीं सहेंगे ... नहीं सहेंगे ...

 आप बताएं ...

 सत्य वचन ...

 राधे राधे

 वाह ...

 अरे वाह ...

 तो क्या इन की भी तलाश ११ मुल्को की पुलिस को है ??

 फिर भी ... 'हो रहा भारत निर्माण' ...
   
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आज का बुलेटिन बस यहीं तक ... कल फिर मिलते है ... जय हिंद !


20 टिप्पणियाँ:

Archana Chaoji ने कहा…

बाप रे !!!! ये बुलेटिन तो हर जगह पहुँचा कर ही दम लेगा या पता नहीं दम भी लेने देग य नहीं..:-)

Archana Chaoji ने कहा…

...लेने देगा या नहीं...(हो गई थी गड़बड़..)

संगीता पुरी ने कहा…

बहुत बढिया ..
मेरी पोस्‍ट पर ध्‍यान देने का शुक्रिया !!

अविनाश वाचस्पति ने कहा…

इनाम में पीएम की कुर्सी खाली करवाकर विजेता को स्‍थापित करवाने की गारंटी दी जाती है। तो हथिया लीजिए पीएम की वह कुर्सी जो लक्‍कड़ नहीं, लोहे की है परंतु उसे हथौड़ी से ठोंकने पर भीं आवाज नही आती है। ब्‍लॉग वही आपका नुक्‍कड़।

ब्लॉ.ललित शर्मा ने कहा…

खास खबर के लिए खास आभार

कुमार राधारमण ने कहा…

संभवतः,पहली बार आया हूं। आपकी नयी पहल का स्वागत है।

दीपक बाबा ने कहा…

अच्छा प्रयास है, नए लिंक मिले


साधुवाद.

Dev K Jha ने कहा…

सच कहें तो क्रेडिट कार्ड बहुत अच्छा माध्यम है अगर उसे कायदे से इस्तेमाल में लाया जाए तो.... लेकिन उसके फ़ायदे और नुकसान का आंकलन करना बहुत ज़रूरी है....

ई-स्टेटमेंट से, मोबाईल बैंकिंग से सब्स्क्राईब करके हम ट्रांसैक्शन का डिटेल और बिलिंग साईकिल की ज़ानकारी रखकर यदि सावधानी से इस्तेमाल किया जाए तो फ़िर क्या बात है.....

shikha varshney ने कहा…

बढ़िया लिंक्स पर बढ़िया टिप्पणी.अच्छा रहा बुलेटिन.

मनोज कुमार ने कहा…

आज के बुलेटिन में बहुत कुछ है बांचने के लिए।

रश्मि प्रभा... ने कहा…

तेज रफ़्तार, सूक्ष्म दृष्टि, विस्तृत आकलन

monali ने कहा…

Thanx for sharing such interesting links... appreciable effort.. keep da gud works up :)

SACCHAI ने कहा…

कमाल का बुलेटिन ..गज़ब ..इसका टी आर पी बढ़ता ही रहेगा ..एक अच्छी शानदार पहेल मै कहे सकता हु जिसके जरिये पाठको को नए नए लिंक पढने को मिल रहे है ...शुक्रिया बुलेटिन टीम ..शुक्रिया शिवम् भाई :)

चला बिहारी ब्लॉगर बनने ने कहा…

रीना से सहानुभूति... मेरे विचार से तो ये पूरा सिस्टम बंधुआ मजदूर बनाने की नवीन पद्धति है... कार, मकान, टीवी, फ्रिज सब के लिए कार्ड/क़र्ज़.. और अदा करते रहो क़र्ज़ ई.एम्.आई के रूप में.. बहुत अच्छी प्रस्तुति!!

ब्लॉग बुलेटिन ने कहा…

गूगल बाबा पता नहीं क्यों अचानक रूठ गए :- २ कमेन्ट आये और गायब हो गए ... पेश है वो दोनों कमेंट्स ...

रश्मि प्रभा...

ने आपकी पोस्ट " कितनी जरूरी उधार की खुशी - ब्लॉग बुलेटिन

" पर एक टिप्पणी छोड़ी है:

तेज रफ़्तार, सूक्ष्म दृष्टि, विस्तृत आकलन


और


shikha varshney

ने आपकी पोस्ट " कितनी जरूरी उधार की खुशी - ब्लॉग बुलेटिन

" पर एक टिप्पणी छोड़ी है:

बढ़िया लिंक्स पर बढ़िया टिप्पणी.अच्छा रहा बुलेटिन.

Smart Indian ने कहा…

क्रेडिट कार्डों के प्रचलन में आने से काले धन का कारोबार खुदरा क्षेत्र में तो मिट ही जायेगा। बर्ग वार्ता के लिंक के लिये आभार!

Pawan Kumar ने कहा…

great Work Great job

SANDEEP PANWAR ने कहा…

आपका कार्य सराहनीय है.

Human ने कहा…

सुन्दर प्रस्तुति !

लोकतंत्र के चौथे खम्बे पर अपने महत्त्वपूर्ण विचारों से अवगत कराएँ ।
औचित्यहीन होती मीडिया और दिशाहीन होती पत्रकारिता

शिवम् मिश्रा ने कहा…

आप सब का बहुत बहुत आभार !

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