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रविवार, 20 जुलाई 2014

४५ साल का हुआ वो 'छोटा' सा 'बड़ा' कदम - ब्लॉग बुलेटिन

प्रिय ब्लॉगर मित्रों,
प्रणाम |

"One small step for [a] man, one giant leap for mankind."

आज से 45 साल पहले कहे गए थे यह अमर शब्द जब नील् आर्मस्ट्रांग ने पहली बार चाँद की धरती पर कदम रखा था |
अपोलो ११  वह अंतरिक्ष उड़ान थी जिसने चंद्रमा पर पहले इंसान, नील् आर्मस्ट्रांग और ऐडविन "बज़" ऐल्ड्रिन. जुनियर को 20 जुलाई, 1969 को अंतराष्ट्रीय समय अनुसार 20:17:39 बजे उतारा था। संयुक्त राज्य अमेरिका का यह मिशन मानव इतिहास व अंतरिक्ष अनुसंधान के इतिहास में एक बडी कामयाबी के रुप में देखा जाता है।
ऐल्ड्रिन इगल से औज़ार निकालते हुए
16 जुलाई 1969 को मेरिट आइलैंड में स्थित कैनेडी स्पेस सेंटर लाँच काम्प्लेक्स 39 (Kennedy Space Center Launch Complex 39) से उड़ान भरने वाला अपोलो ११ नासा के अपोलो अभियान का पाँचवा मानवी मिशन व तीसरा चंद्र अभियान था। इसके कर्मीदल् के रुप में आर्मस्ट्रांग कमांडर व ऐल्ड्रिन लुनार माड्यूल पायलट और माइकल कॉलिन्स कमांड मॉड्युल पायलट थे। आर्मस्ट्रांग और ऐल्ड्रिन चंद्रमा पर ट्रैंक्विलिटी के सागर (Sea of Tranquillity) में उतरे और चाँद पर 21 जुलाई को कदम रखने वाले पहले इंसान बन गए। उनका लुनार मॉड्युल इगल 21 घंटे व 31 मिनट चाँद की प्रष्ठभूमी पर रहा और कॉलिन्स कमांड सर्विस मॉड्युल कोलंबिया में चाँद के उपर बने रहे। 24 जुलाई को तीनो अंतरिक्ष यात्री पृथ्वी पर प्रशांत महासागर में उतरे और अपने साथ 21.5 किलोग्राम के चाँद के नमूने लाए।
 
अपोलो ११ का कर्मीदल्, बायीं ओर से, आर्मस्ट्रांग, कॉलिन्स और ऐल्ड्रिन


 नील् आर्मस्ट्रांग का चाँद की धरती पर उतारने का वीडियो

नील् आर्मस्ट्रांग यान  से नीचे आते हुये

अपोलो ११ ने अमेरिकी राष्ट्रपति जॉन एफ़. केनेडी का चाँद पर सोवियत संघ से पहले उतरने का सपना साकार कर दिया जिसकी उन्होने 1961 में गुज़ारिश की थी।
इसके बाद 1969 से 1972 के दरमियां छः अपोलो  मिशन चाँद पर भेजे गए जिसमें से पाँच चाँद पर उतरे में सक्षम रहे।

आज के इस महान दिन को याद करते हुये ... हम सब उन लोगो के जज़्बे को सलाम करते है और यह उम्मीद करते है कि एक दिन एक भारतीय भी चाँद की धरती पर तिरंगा लगाएगा |

सादर आपका
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मुनिया की मौत

एक गीत -इस रक्तरंजित सुब्ह का मौसम बदलना

विज्ञान प्रदर्शनी पार्थवी के स्कूल मे

भीड़.....

किशोर व वयस्क अपराधियों के लिए समान दण्ड

हवा के हाथ से बदली गिरी है ...

नवजीवन से भेंट

कज़िन के बहाने ……

ठेठ गर्मी और गुलाबी नगरी ----जयपुर यात्रा (संस्मरण I )

अमर क्रांतिकारी स्व॰ श्री बटुकेश्वर दत्त जी की 49 वीं पुण्यतिथि

पुर्जा

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अब आज्ञा दीजिये ...

जय हिन्द !!!

12 टिप्पणियाँ:

सुशील कुमार जोशी ने कहा…

सुंदर सूत्रों के साथ आज का सुंदर बुलेटिन :)

Amit Kumar Nema ने कहा…

हिल शिवम जी , बहुत सुंदर व सार्थक संकलन आज के ब्लॉग-बुलेटिन में , उम्दा ! "नवजीवन से भेंट" इस पोस्ट को आज के ब्लॉग बुलेटिन में सम्मिलित करने हेतु आपका हृदय से आभारी हूँ ! कृपया मेरे अभिवादन स्वीकार करें .. बहुत बहुत धन्यवाद !!

आशीष भाई ने कहा…

बढ़िया प्रस्तुति व बुलेटिन , शिवम् भाई व बुलेटिन को धन्यवाद !
Information and solutions in Hindi ( हिंदी में समस्त प्रकार की जानकारियाँ )

Smita Singh ने कहा…

बहुत बढ़िया।

Smita Singh ने कहा…

मेरी प्रविष्टी को शामिल करने के लिए आभारी हू

Preeti 'Agyaat' ने कहा…

'छोटा' सा 'बड़ा' कदम.... बहुत बढ़िया ! सभी प्रविष्टियाँ रोचक लगीं, मेरी पोस्ट को शामिल करने का शुक्रिया !

शेफाली पाण्डे ने कहा…

मेरी पोस्ट को शामिल करने का शुक्रिया

सुशील कुमार जोशी ने कहा…

मुनिया की मौत को क्लिक करने पर Blog has been removed आ रहा है ।

शिवम् मिश्रा ने कहा…

@ सुशील कुमार जोशी जी,
आप बिलकुल ठीक कह रहे है पर ऐसा क्यों है यह तो केवल स्मिता सिंह जी ही बता सकती हैं ... उन्होने इसी बुलेटिन पर अपनी पोस्ट को शामिल किए जाने का आभार भी जताया है, फिर ब्लॉग बंद कर दिया यह बात मेरी समझ के परे है |

शिवम् मिश्रा ने कहा…

आप सब का बहुत बहुत आभार |

जयकृष्ण राय तुषार ने कहा…

शुक्रिया भाई शिवम जी |

आशा जोगळेकर ने कहा…

चांद पर मानव का पहला कदम....इसकी याद ताजा कर दी आपने। सूत्र भी बढिया।

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