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मंगलवार, 29 नवंबर 2011

बुलेटिन नहीं बुलेट है ..अरे माने फ़टफ़टिया समाचार जी






आज के बुलेटिन वाचक हम हैं ,ई आपको एक लईना पढके भी पता चलिए जाएगा । इसलिए आधिकारिक उदघोषणा के तहत हम आपको ई भी बताते हुए चलते हैं कि , ई हमारे कैप्सनवा का पोस्ट से कोनो रिलेसन हो , ई कतई जरूरी नहीं है , काहे से कि हम सेंटीमेंटली सेट हो के मेंटली लिख डाले हैं , झेला जाए प्रेमपूर्वक 






दुखी हैं ? तो ब्लॉगिंग क्यूं नहीं करते:- हां , दुखी रहने से अच्छा है दूसरे को दुखी किया जाए


काश मैं तुम्हारा पति होता : - उंह्ह इत्ती हसरत से न बुला भईए ,भगवान सुन भी लेता है कई बार बे


अब मन बृज में लागत नाहीं : राधा रात भर सीरीयल देखे , भोर भए फ़िर जागत नाहीं


सोनिया का प्रभावी लोकपाल का वादा :- आगे के बोल हैं ..तू वादा न तोड , तू वादा न तोड , पूरा न तोड , आधा न तोड



कौए की निजि जिंदगी :- में मिसर जी की गहन ताक झांक


दिल और दिमाग की द्वंद में किसे चुनें : - अरे ई बताइए पिरतियोगिता का उत्तर एस एम एस से भेजना है कि मिस काल मारना है जी । अच्छा माने अगर नय चुनने का मन करे कुछो , द्वंद के बीच डोलने का मन हो तो ..


राबर्ट ब्लॉय : हम क्यों नहीं मरते : ए राबर्टवा , अबे पूछ रहे हो कि डिकलेरेसन है बे ....कौन हो बाबू ,मरबे नय करते हो , इहां तो रोजिन्ना लोग कै कै बार मर जाता है ।


एक गीत खुली किताबों में : आउर एक ठो लेसन , टी सीरीज का केसिट में । अरे जब गीतवा किताब में धरिएगा तो लेसन तो केसिट में भरईबे करेगा न


आखिर कहां जा रहे हैं हम ? : जी भाड में जा रहे हैं , और कहां ?


उन्होंने मुझे हज़ार दफ़ा फ़ांसी पर लटकाया : अरे कऊन थे जी , भेजिए तो उनको , एक दू ठो को लटकवाना है जी , सरकारो नय लटका रही है , मामला को लटका के रख दिहिस है सब ..ओह हाऊ मच लटका लटकी ..


सत्य का स्वरूप : सर्दी की धूप ..



नीम हकीम और नीम पागल : दुन्नो का कनेकसन नीम से ही है ई जान जाईए



गूगल आजकल पता नहीं किया कहना चाहता है : हमको तो लगता है ससुरा चुप रहना चाहता है



स्वभावों के भेद : जानने के लिए इहे मेन गेट है , किलिकियाइए और जान जाइए



बहस आजकल कुछ खट्टी मीठी :  वो कोयले का इंजन वो रेल की सीटी



जिंदगी रिवाईंड : करके समुंदर के लहरों पर हेलिए



छा रहा इस देश पर कोहरा घना है : श्श्श , इस कोहरे को चीर कर देखना मना है



अनामिका की उलझन है कि वो क्या करे : इन मुद्दों पर जमके बहस हुआ करे ।



जहां बाड खुद खेत को है खाती : 



मटर दिलों में प्रेम बढाता : तुम्हारा प्रेम पनीर प्रिये , मिलके तैयार मटर पनीर हो जाता



जिंदगी का कुंआं : - कहीं कोहरा , कहीं धुआं



कुछ उलझे हुए विचार : अक्सर एक  कमाल की पोस्ट का बायस बन जाते हैं



बदनाम रहे बटमार : और हो गया बंटाधार



क्या जमानत पर छूट जाने पर भी जमानत निरस्त हो सकती है : - ठीक से जान लीजीए , वर्ना खस्ता हालत पस्त हो सकती है



स्वीकार सको तो स्वीकार लेना : जीत सको तो जीत लेना , हार सको तो हार लेना




उलटफ़ेर : फ़ौरन सीखें , बिना देर




जन्मदिन : बधाई हो बधाई ,खूब खुशी आई



दल उभरता नहीं संगठन के बिना : आ बनाएं , फ़िर सरकार को कराएं ताक धिना



आपके गले की तो वाट लग गई है : कार्टून वाली ये  पोस्ट झन्नाट लग गई है




देश के 48 प्रतिशत से अधिक किसान परिवार ऋणग्रस्त : यही विडंबना बडी , कोई मस्त ,कोई पस्त



सर्दियों में बालों और त्वचा की देखभाल : फ़ौरन इस पोस्ट का करें इस्तेमाल



मैं भूल गया : सोचिए , याद रहता तो का का लिख देते जी



नेता है तो समझो देशभक्त है : लेकिन पब्लिक समझने में बहुत सख्त है



बिठूर के बारे में कुछ जानकारी : यहां से पाएं हे माऊसधारी



उस्ताद सुलतान खान का निधन : हमारी श्रद्धांजलि , हमारा नमन

8 टिप्पणियाँ:

शिवम् मिश्रा ने कहा…

चली चली रे ट्रेन झा जी की चली रे ... ले कर लिंक्स की भरमार ... नए नए पोस्टो की बहार ...

अब इस से ज्यादा तुकबंदी नहीं होती ... ;-)

गजब पोस्ट लगाई महाराज ... काफी सारे लिंक्स मिल गए पढने को ... वैसे भी आजकल ब्लॉग की दुनिया में आना जाना कम है ... अब इस बुलेटिन से काफी जानकारी मिल जाएगी !

मनोज कुमार ने कहा…

लाजवाब वन लाइनर।

"जाटदेवता" संदीप पवाँर ने कहा…

काफ़ी लम्बी बुलेटिन।

ब्लॉग बुलेटिन ने कहा…

"जाटदेवता" संदीप पवाँर ने आपकी पोस्ट " बुलेटिन नहीं बुलेट है ..अरे माने फ़टफ़टिया समाचार जी... " पर एक टिप्पणी छोड़ी है:

काफ़ी लम्बी बुलेटिन।



"जाटदेवता" संदीप पवाँर द्वारा ब्लॉग बुलेटिन के लिए २९ नवम्बर २०११ ११:०३ अपराह्न को पोस्ट किया गया

डॉ॰ मोनिका शर्मा ने कहा…

Bahut Badhiya .....

काजल कुमार Kajal Kumar ने कहा…

रेल चली

veerubhai ने कहा…

भैये कम खाने मतलब कम केलोरी वाला भोजन लगातार चार माह तक खाने से जीवन शैली से पैदा मधु मेह टाइप -२ रोग ठीक हो सकता है सो भैया खा ज़रूर पर सोच समझ के ख़ा,कम ख़ा खुश रह , .नीरोग रह .

देव कुमार झा ने कहा…

एकदम फ़ंटास्टिक बुलेटिन है अजय भईया..... एक लईना जबरदस्त...

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बुलेटिन में हम ब्लॉग जगत की तमाम गतिविधियों ,लिखा पढी , कहा सुनी , कही अनकही , बहस -विमर्श , सब लेकर आए हैं , ये एक सूत्र भर है उन पोस्टों तक आपको पहुंचाने का जो बुलेटिन लगाने वाले की नज़र में आए , यदि ये आपको कमाल की पोस्टों तक ले जाता है तो हमारा श्रम सफ़ल हुआ । आने का शुक्रिया ... एक और बात आजकल गूगल पर कुछ समस्या के चलते आप की टिप्पणीयां कभी कभी तुरंत न छप कर स्पैम मे जा रही है ... तो चिंतित न हो थोड़ी देर से सही पर आप की टिप्पणी छपेगी जरूर!

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