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मंगलवार, 17 नवंबर 2015

कम पढ़ो, ध्यान से पढ़ो




अपनी समीक्षा आसान नहीं 
पहचानने,
समझने,
बताने की प्रक्रिया 
कई रातों से गुजरती है !
सूर्य की प्रखर किरणों की क्षमता 
पक्षियों के पंखों को सुगबुगाहट देने का आधार 
उड़ान की थकान के आगे उड़ान 
आकाश को पाने के लिए 
शून्य से मित्रता 
आसान नहीं !
मैं हूँ -
बस यही मान लो 
खोजबीन बन मत करो 
भूलभुलैया में पड़ जाओगे 
हर बार एक नया दरवाज़ा खुलेगा 
अंततः यही प्रश्न होगा 
सत्य क्या है !!!
समझने की कोशिश करो 
असत्य सत्य है 
सत्य असत्य है 
सौ प्रतिशत न सत्य है 
न असत्य !


8 टिप्पणियाँ:

देवेन्द्र पाण्डेय ने कहा…

ध्यान से पढ़ा ...अच्छे लिंक हैं।

कविता रावत ने कहा…

बहुत सुन्दर रचना-सह सार्थक बुलेटिन प्रस्तुति हेतु आभार!

Dr. Kumarendra Singh Sengar ने कहा…

शीर्षक ने मन मोह लिया.. और लिंक भी सुन्दर...

Rishabh Shukla ने कहा…

सुन्दर बुलेटिन, बधाई ...........

आप सभी का स्वागत है मेरे इस #हिन्दी #ब्लॉग #मेरे #मन #की के नये #पोस्ट #मेरा #घर पर | ब्लॉग पर आये और अपनी प्रतिक्रिया जरूर दें |

http://meremankee.blogspot.in/2015/11/mera-ghar.html

सुशील कुमार जोशी ने कहा…

सुंदर प्रस्तुति ।

विभा रानी श्रीवास्तव ने कहा…

हमेशा की तरह बेजोड़ चयन

शिवम् मिश्रा ने कहा…

बात सही है ... भले ही कम पढ़े पर ध्यान से पढ़ें |

SKT ने कहा…

जी! ...इसका पूरक वाक्य:
थोडा लिखें, अच्छा लिखें.

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