Subscribe:

Ads 468x60px

शनिवार, 13 सितंबर 2014

फिर भी …




घर क्यूँ छोड़ दिया ?

कहानी सच्ची होगी, कैसे मानोगे ?

फिर भी  … 

बस - इतना जानो कि यही सबके हित में था 
आदतें उसकी नहीं बदलती 
आदतें मेरी नहीं बदलती 
और समझौते के वर्ष 
कम नहीं थे 
बच्चों की आदतें न बिगड़ जाएँ 
बेहतर था दो किनारों में घर को बाँट देना 
लहरों की तरह बच्चों के विकास के लिए 
.... 
अब देखो सौंदर्य भी है 
सीप भी, मोती भी 

यदि उनकी प्रकृति से खिलवाड़ किया 
तो सुनामी भी 



कम ही सही, यात्रा जारी रहे 

7 टिप्पणियाँ:

vandana gupta ने कहा…

बहुत सुन्दर व सार्थक बुलेटिन ……आभार दी

Rohitas ghorela ने कहा…

लाजवाब और बेहतरीन बुलेटिन... :)

कविता रावत ने कहा…

बहुत बढ़िया लिंक्स-सह-बुलेटिन प्रस्तुति
आभार!

सुशील कुमार जोशी ने कहा…

बहुत सुंदर ।

Preeti 'Agyaat' ने कहा…

बेहतर था दो किनारों में घर को बाँट देना
लहरों की तरह बच्चों के विकास के लिए ...सच कहा !
सुंदर लिंक्स..उम्दा प्रस्तुति !

Sanju ने कहा…

बहुत ही शानदार और सराहनीय प्रस्तुति....
बधाई मेरी

नई पोस्ट
पर भी पधारेँ।

कविता रावत ने कहा…

हिन्दी दिवस की असीम शुभकामना!

एक टिप्पणी भेजें

बुलेटिन में हम ब्लॉग जगत की तमाम गतिविधियों ,लिखा पढी , कहा सुनी , कही अनकही , बहस -विमर्श , सब लेकर आए हैं , ये एक सूत्र भर है उन पोस्टों तक आपको पहुंचाने का जो बुलेटिन लगाने वाले की नज़र में आए , यदि ये आपको कमाल की पोस्टों तक ले जाता है तो हमारा श्रम सफ़ल हुआ । आने का शुक्रिया ... एक और बात आजकल गूगल पर कुछ समस्या के चलते आप की टिप्पणीयां कभी कभी तुरंत न छप कर स्पैम मे जा रही है ... तो चिंतित न हो थोड़ी देर से सही पर आप की टिप्पणी छपेगी जरूर!

लेखागार