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सोमवार, 30 अप्रैल 2018

दादा साहब फाल्के और ब्लॉग बुलेटिन

सभी हिन्दी ब्लॉगर्स को नमस्कार। 
दादा साहब फाल्के
दादा साहब फाल्के (अंग्रेज़ी: Dada Saheb Phalke, जन्म: 30 अप्रैल, 1870; मृत्यु: 16 फ़रवरी, 1944) प्रसिद्ध फ़िल्म निर्माता-निर्देशक एवं पटकथा लेखक थे जो भारतीय सिनेमा के पितामह की तरह माने जाते हैं। दादा साहब फाल्के की सौंवीं जयंती के अवसर पर दादा साहब फाल्के पुरस्कार की स्थापना वर्ष 1969 में की गई थी। दादा साहब फाल्के पुरस्कार भारतीय सिनेमा का सबसे बड़ा पुरस्कार है, जो आजीवन योगदान के लिए भारत की केंद्र सरकार की ओर से दिया जाता है।



आज सर्च इंजन गूगल ने दादा साहब फाल्के जी के 148वें जन्मदिन पर गूगल डूडल बनाकर याद किया।


आज भारतीय सिनेमा के पितामह दादा साहब फाल्के जी के 148वें जन्म दिवस पर हम सब उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। सादर।।

~ आज की बुलेटिन कड़ियाँ ~













आज की बुलेटिन में बस इतना ही कल फिर मिलेंगे तब तक के लिए शुभरात्रि। सादर ... अभिनन्दन।। 

रविवार, 29 अप्रैल 2018

पेन्सिल में समाहित सकारात्मक सोच : ब्लॉग बुलेटिन


नमस्कार दोस्तो,
पर्यावरण को बिगाड़ने के बाद अब हर तरफ से पर्यावरण संरक्षण की आवाजें सुनाई देने लगी हैं. यह हम इंसानों का स्वभाव बन गया है कि पहले किसी भी वस्तु, सामग्री को नष्ट होने की कगार तक ले जाते हैं फिर अचानक नींद से जागने जैसी स्थिति में आकर उसे बचाने की पहल शुरू कर देते हैं. हवा, पानी, धरती, वृक्ष, पक्षी, पशु यहाँ तक कि इंसानों के सम्बन्ध में यही स्थिति देखने को मिल रही है. प्रयास कितने रंग ला रहे हैं, कितने रंग लायेंगे ये तो भविष्य के गर्भ में है मगर इन प्रयासों के बीच एक प्रयास दिखाई दिया, जिसने व्यक्तिगत रूप से हमें प्रभावित किया.

Lacoptal टेबलेट बनाने वाली एक कंपनी की तरफ से पेंसिलों का गिफ्ट पैक हमारे घर आया. आम पेंसिलों की तरह दिखने वाली इन पेंसिलों की एक विशेषता ने प्रभावित किया. सभी पेंसिलों के अंतिम छोर पर हरे रंग का एक भाग बना हुआ है. इस भाग में किसी न किसी पौधे के बीज रखे गए हैं. कंपनी द्वारा दिए गए पैकेट पर स्पष्ट रूप से समझाया गया है कि इन पेंसिलों को उपयोग करने के बाद गमले में या मिट्टी में तिरछा लगा कर उनको कुछ दिन पानी दिया जाये. दो-चार दिन में हरा भाग गल जायेगा और उसमें रखे बीज मिट्टी, पानी आदि का साथ लेकर अंकुरित हो जायेंगे जो पौधे का रूप धारण करेंगे. कई-कई पौधों के बीज अलग-अलग पेंसिलों में रखे गए हैं. सूरजमुखी और टमाटर के बीज वाली पेन्सिल आपके सामने है.


निश्चित ही यह छोटा प्रयास है मगर इसके कई आयाम निकल रहे हैं. इससे बच्चों को पौधारोपण करने की प्रेरणा मिलेगी. उनमें अपने पर्यावरण के प्रति सकारात्मकता विकसित होगी. पेन्सिल से पौधों का निकलना देख बच्चों में ख़ुशी का संचार होगा और वे अपनी सक्रियता को सार्थक दिशा में ले जा सकेंगे. ऐसे छोटे-छोटे प्रयास हम सभी को करने चाहिए.

चलिए, इस प्रयास को साधुवाद देते हुए आज की बुलेटिन आपके समक्ष प्रेषित कर रहे हैं, आनंद लीजिये.

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शनिवार, 28 अप्रैल 2018

कश्मीर किसका !?

प्रिय ब्लॉगर मित्रों,
प्रणाम |

एक बार संयुक्त राष्ट्र में कश्मीर को ले कर चर्चा चल रही थी।

एक भारतीय प्रवक्ता बोलने के लिए खड़ा हुआ। अपना पक्ष रखने से पहले उसने ऋषि कश्यप की एक बहुत पुरानी कहानी सुनाने की अनुमति माँगी। अनुमति मिलने के बाद भारतीय प्रवक्ता ने अपनी बात शुरू की...

"एक बार महर्षि कश्यप, जिनके नाम पर आज कश्मीर का नाम पड़ा है, घूमते-घूमते कश्मीर पहुंच गए।

वहाँ उन्होंने एक सुन्दर झील देखी तो उस झील में उनका नहाने का मन हुआ।

उन्होंने अपने कपड़े उतारे और झील में नहाने चले गए।

जब वो नहा कर बाहर निकले, तो उनके कपड़े वहाँ से गायब मिले।

दरअसल, उनके कपड़े किसी पाकिस्तानी ने चुरा लिये थे..."

इतने में पाकिस्तानी प्रवक्ता चीख पड़ा और बोला:

"क्या बकवास कर रहे हो? उस समय तो 'पाकिस्तान' था ही नहीं!!!"


भारतीय प्रवक्ता मुस्कुराया और बोला:

"और ये पाकिस्तानी कहते हैं कि कश्मीर इनका है!!!" 
😜😂

इतना सुनते ही... पूरा संयुक्त राष्ट्र सभा ठहाकों की गूंज से भर उठा।।
😂😝😜👏👏👏

एक हिन्दुस्तानी होने के नाते यह वाकया मुझे तो बहुत पसंद आया ... और आपको !?

सादर आपका 

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मैं चीख रही












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अब आज्ञा दीजिये ...

जय हिन्द !!!

शुक्रवार, 27 अप्रैल 2018

जज साहब के बुरे हाल

प्रिय ब्लॉगर मित्रों,
प्रणाम|

एक बार एक व्यक्ति ने अदालत में तलाक की अर्जी दी ... तारीख़ आने पर जज ने सवाल किया ...

जज: तुम्हें तलाक़ क्यों चाहिए?

याचिका कर्ता: जज साहब, मेरी पत्नी मुझ से लहसुन छिलवाती है, प्याज़ कटवाती है, बर्तन मँजवाती है!

जज: इसमें दिक्कत क्या है? लहसुन को थोड़ा गर्म कर लिया करो आसानी से छीले जायेगें!
प्याज को काटने से पहले फ्रिज में रख दिया करो, काटने के समय आँखें नहीं जलेगी!
बर्तन मांजने से 10 मिनट पहले भरे टब में डाल दिया करो आसानी से साफ़ हो जायेगें!
कपडे सर्फ में डालने से आधा घंटा पहले सादे पानी में भिगो दो दाग आसानी से निकल जायेगें और हाथों को भी तकलीफ नहीं होगी!

याचिका कर्ता: समझ गया हज़ूर! अर्जी वापिस ही दे दो मेरी!

जज: क्या समझे?

याचिका कर्ता: यही कि, आपकी हालत मुझसे भी खराब है!

सादर आपका

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फाँस















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अब आज्ञा दीजिये ...

जय हिन्द !!!

गुरुवार, 26 अप्रैल 2018

मौसम से मुलाक़ात हो जाती है ...




खानाबदोश होना ही अच्छा है, बन्द घरों में अब कोई नहीं दिखता
यूँ तो चेहरे गाड़ियों में भी नज़र नहीं आते, लेकिन मौसम से मुलाक़ात हो जाती है  ... 


आर्टिस्ट
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चित्रकार लड़की ने कैनवास पर
ख्वाब का चित्र बनाया...
चूंकि मार्डन आर्ट थी पिता ने
शादी समझा!
उसने शादी को जब कैनवास पर
उकेरा....
एक आदमखोर शेर की तस्वीर उभर आई
जिसकी आंखें बेहद डरावनी थीं।
उसने आज़ादी का चित्र बनाया
लोगों ने उसे सबके लिए मौजूद समझा!
पितृसत्ता के झूठे महल में कैद राजकुमारी
की तस्वीर खंडित व्यवस्था का संस्मरण है
वे एक आवाज में बोले ये तो नारीवादी है!

बुधवार, 25 अप्रैल 2018

विश्व मलेरिया दिवस और ब्लॉग बुलेटिन

सभी हिन्दी ब्लॉगर्स को नमस्कार।

विश्व मलेरिया दिवस
विश्व मलेरिया दिवस (अंग्रेज़ी: World Malaria Day) सम्पूर्ण विश्व में '25 अप्रैल' को मनाया जाता है। 'मलेरिया' एक जानलेवा बीमारी है, जो मच्छर के काटने से फैलती है। इस बीमारी से पीड़ित व्यक्ति को यदि सही समय पर उचित इलाज तथा चिकित्सकीय सहायता न मिले तो यह जानलेवा सिद्ध होती है। मलेरिया एक ऐसी बीमारी है, जो हज़ारों वर्षों से मनुष्य को अपना शिकार बनाती आई है। विश्व की स्वास्थ्य समस्याओं में मलेरिया अभी भी एक गम्भीर चुनौती है। पिछले दो दशकों में हुए तीव्र वैज्ञानिक विकास और मलेरिया के उन्मूलन के लिए चलाए गए वैश्विक कार्यक्रमों के बावजूद इस जानलेवा बीमारी के आंकड़ों में कमी तो आई है, लेकिन अभी भी इस पर पूरी तरह नियंत्रण नहीं पाया जा सका है।



~ आज की बुलेटिन कड़ियाँ ~













आज की बुलेटिन में बस इतना ही कल फिर मिलेंगे तब तक के लिए शुभरात्रि। सादर ... अभिनन्दन।। 

मंगलवार, 24 अप्रैल 2018

भगवान से शिकायत

प्रिय ब्लॉगर मित्रों,
प्रणाम |

यूँ तो कोई भी शिकायत नहीं भगवान आपके किसी भी फैंसले से, पर ...
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अगर तरबूज़ के बीज भी खरबूजे की ही तरह इकट्ठे बीच में डालते तो आपका क्या बिगड़ता!?

सोमवार, 23 अप्रैल 2018

विश्व पुस्तक एवं कॉपीराइट दिवस और ब्लॉग बुलेटिन

सभी हिन्दी ब्लॉगर्स मित्रों को सादर नमस्कार। 
'विश्व पुस्तक दिवस' का लोगो
विश्व पुस्तक एवं कॉपीराइट दिवस (अंग्रेज़ी:World Book and Copyright Day) प्रत्येक वर्ष '23 अप्रैल' को मनाया जाता है। इसे 'विश्व पुस्तक दिवस' भी कहा जाता है। इंसान के बचपन से स्कूल से आरंभ हुई पढ़ाई जीवन के अंत तक चलती है। लेकिन अब कम्प्यूटर और इंटरनेट के प्रति बढ़ती दिलचस्पी के कारण पुस्तकों से लोगों की दूरी बढ़ती जा रही है। आज के युग में लोग नेट में फंसते जा रहे हैं। यही कारण है कि लोगों और किताबों के बीच की दूरी को पाटने के लिए यूनेस्को ने '23 अप्रैल' को 'विश्व पुस्तक दिवस' के रूप में मनाने का निर्णय लिया। यूनेस्को के निर्णय के बाद से पूरे विश्व में इस दिन 'विश्व पुस्तक दिवस' मनाया जाता है।



~ आज की बुलेटिन कड़ियाँ ~ 















आज की बुलेटिन में बस इतना ही कल फिर मिलेंगे तब तक के लिए शुभरात्रि। सादर ... अभिनन्दन।। 

रविवार, 22 अप्रैल 2018

प्लास्टिक प्रदूषण की समाप्ति कर बचाएं अपनी पृथ्वी : ब्लॉग बुलेटिन


नमस्कार साथियो,
पर्यावरण के प्रति गैर-संवेदनशीलता दिखाने के खामियाजे जब समाज में परिलक्षित होने लगे तो चारों तरफ से इसके संरक्षण की आवाजें उठने लगीं. इसी क्रम में आज, 22 अप्रैल को सम्पूर्ण दुनिया पृथ्वी दिवस मनाने में लगी है. यह एक वार्षिक आयोजन है, जिसे पर्यावरण संरक्षण, पृथ्वी को बचाने रखने के लिए काम करने और जागरूकता फैलाने के प्रतिवर्ष 22 अप्रैल को  आयोजित किया जाता है. पृथ्वी पर रहने वाले तमाम जीव-जंतुओं और पेड़-पौधों को बचाने के साथ-साथ पर्यावरण के प्रति जागरुकता बढ़ाने के उद्देश्य से पृथ्वी दिवस मना ये जाने का प्रस्ताव रखा गया. इस दिवस की स्थापना अमेरिकी सीनेटर जेराल्ड नेल्सन ने 1970 में एक पर्यावरण शिक्षा के रूप की थी. वर्तमान में इस दिवस को 192 से अधिक देशों में प्रति वर्ष मनाया जाता है. 22 अप्रैल 1970 में वाशिंगटन में एक सम्मलेन में अमेरिकी सीनेटर जेराल्ड नेल्सन ने पर्यावरण पर राष्ट्रव्यापी प्रदर्शन किया. इस दौरान अनेकानेक कार्यक्रम आयोजित किये गये और लोग पर्यावरण-सुरक्षा के समर्थन में सड़कों पर निकल आए. लगभग बीस लाख अमेरिकी नागरिकों ने स्वस्थ और स्थायी पर्यावरण के लक्ष्य के साथ भाग लिया. बड़े पैमाने पर रैली का आयोजन किया गया.


प्रतिवर्ष मनाये जाने वाले विश्व पृथ्वी दिवस को किसी न किसी थीम पर आधारित किया जाता है. इस साल यानी 2018 में पृथ्वी दिवस की थीम प्लास्टिक प्रदूषण की समाप्ति को बनाया गया है. इसके अनुसार पृथ्वी दिवस 2018 मूल रूप से प्लास्टिक को लेकर मानवीय रवैया और व्यवहार को बदलने के लिए आवश्यक जानकारी और प्रेरणा प्रदान करने के लिए समर्पित है. लोगों को प्लास्टिक की खपत पर कटौती करने के लिए प्रोत्साहित करना है. देखने में आ रहा है कि प्लास्टिक धरती के अन्दर जाकर अब भूमिगत जल में मिलने लगी है. इसके तथ्य भी मिले हैं कि प्लास्टिक कणों की उपस्थिति पेयजल में होने लगी है. यह भविष्य के लिए घातक संकेत है. यदि इसका निदान शीघ्र न खोजा गया तो आने वाली पीढ़ी पेयजल के साथ प्लास्टिक कणों को पीने को विवश होगी.  

पर्यावरण-संरक्षण के प्रति होने वाले तमाम सारे आयोजनों के बाद भी इससे इंकार नहीं किया जा सकता है अभी भी देश और दुनिया में इस तरफ जागरूकता की कमी है. सामाजिक, राजनैतिक स्तर से इस दिशा में कोई ठोस कदम उठाए जाते नहीं दिखते हैं. कतिपय पर्यावरण-प्रेमी अपने स्तर पर कार्य कर रहे हैं किंतु यह किसी एक व्यक्ति, संस्था तक सीमित नहीं होना चाहिए. सम्पूर्ण समाज को पर्यावरण-संरक्षण के प्रति सजग होना पड़ेगा तभी बात बनेगी. पृथ्वी के पर्यावरण को, पृथ्वी को बचाने के लिए हम ज्यादा कुछ नहीं कर सकते तो इतना तो कर ही सकते हैं कि पॉलिथीन के उपयोग को नकारें. रिसाइकल प्रक्रिया को प्रोत्साहित करें क्योंकि जितनी ज्यादा सामग्री रिसाइकल होगी, पृथ्वी का कचरा उतना ही कम होगा.

आइये हम सभी इस ओर सजगता के साथ कदम बढ़ाते हुए आज की बुलेटिन की तरफ चलें.

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शनिवार, 21 अप्रैल 2018

जोकर और उसका मुखौटा

प्रिय ब्लॉगर मित्रों,
प्रणाम |


एक सवाल जोकर से: "तुम मुखौटा क्यूँ लगाते हो ?"
जोकर: "लगाते सब है, बस दिखाई मेरा ही देता है !"

सादर आपका

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सोच












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अब आज्ञा दीजिये ...

जय हिन्द !!!