Pages

शनिवार, 30 सितंबर 2017

विजयदशमी की हार्दिक शुभकामनायें

नवरात्री मे अष्टमी का सर्वाधिक महत्व है| इसी दिन काली, महाकाली, भद्रकाली, दक्षिणकाली तथा बिजासन माता का पूजन किया जाता है| वास्तव मे इन्हे कुल की देवी माना जाता है|
ऐसा भी माना जाता है कि अष्टमी और नवमी के बदलाव वाले समय मे माँ दुर्गा अपनी शक्तियों को प्रगट करती है  जिसके लिए एक विशेष प्रकार की पूजा की जाती है| जिसे चामुंडा की सांध्य पूजा के नाम से जाना जाता है| 
“या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता |
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम: “||  मंत्र के साथ आइये हम भी गौरी की आराधना करें, उनका श्रृंगार करें ताकि हमारे जीवन में सौंदर्य रहे, सुख रहे, शक्ति का संचार होता रहे  ... 

एक बात स्मरण रहे, शक्ति हताशा से ही उभरती है 

Search Results

कविता "जीवन कलश": किंकर्तव्यविमूढ


शब्दों के
कोलाहल से
भरी हुई
मेरी चुप्पी ने
एक दिन ..
अपना सारा कुछ
ऊँगलियों को
बाँट दिया..
और..ऊँगलियों ने
धीरे-धीरे
सब कुछ
निकालकर
डायरी के पन्नों में
डाल दिया..
अब बाँटने जैसा
कुछ भी नहीं है
मेरे पास
तुम्हें दे सकूँ
ऐसा कुछ भी
नहीं है मेरे पास ..

ऋता शेखर 'मधु'
लघुकथा
कन्या भोजन के लिए नौ कन्याएं आ चुकी थीं। नवमी के दिन प्रेमा ने कन्या पूजन का इंतेजाम किया था। जिस प्राथमिक विद्यालय में वह पढ़ाती थी वहीं की बच्चियाँ थीं।
प्रेमा ने प्रेम से सबके पांव धोये। चुनरी ओढाई। भोजन दिया। दक्षिणा में उसने सभी को पैसे के साथ एक कलम और लोहे का बना एक एक छोटा सा त्रिशूल दिया।
"माम्, सभी सिर्फ पैसे देते हैं" जो सबसे बड़ी थी उसने कहा।
"जानती हूँ बेटा। चुनरी से मैंने तुम्हारा सम्मान किया। कलम से तुम विद्या ग्रहण करोगी। "
"और ये त्रिशूल "
"और इस त्रिशूल से उनको सबक सिखाना जो तुम्हारे साथ बदतमीजी करते हैं। जानती हो, महिषासुर राक्षस का वध माता सरस्वती ने ही किया था।"
"हाँ, अवश्य मारूँगी उन्हें..." एक दृढ़ शक्ति झाँक रही थी उसकी आँखों में 

जयन्ती मङ्गला काली भद्रकाली कपालिनी ।
दुर्गा शिवा क्षमा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तु ते
जय त्वं देवि चामुण्डे जय भूतापहारिणि ।
जय सर्वगते देवि कालरात्रि नमोऽस्तु ते
महिषासुरनिर्नाशि भक्तानां सुखदे नमः ।
रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि



विजयदशमी की आप सभी को हार्दिक शुभकामनायें।
प्रभु श्रीराम और माँ दुर्गा से राष्ट्र कल्याण की कामना है।

शुक्रवार, 29 सितंबर 2017

हास्य अभिनेता महमूद अली और विश्व हृदय दिवस - ब्लॉग बुलेटिन

सभी हिन्दी ब्लॉगर्स को मेरा सादर नमस्कार। 

महमूद
महमूद (अंग्रेज़ी: Mahmood, जन्म- 29 सितंबर, 1932, मुम्बई; मृत्यु- 23 जुलाई, 2004, अमेरिका) फ़िल्म जगत् के प्रसिद्ध हास्य अभिनेता थे। उनका पूरा नाम महमूद अली था। तीन दशक लम्बे चले उनके कैरियर में उन्होंने 300 से ज़्यादा हिन्दी फ़िल्मों में काम किया। अपने बहुरंगीय किरदारों से दर्शकों को हँसाने और गंभीर भूमिका कर रुलाने वाले महमूद अभिनय के प्रति समर्पित थे। अपने बहुमुखी अभिनय और कला के प्रति समर्पण ने उन्हें बुलंदियाँ दी और उनको फ़िल्मफ़ेयर सहित कई पुरस्कारों का सम्मान मिला। उन्होंने कई फ़िल्मों में गीत ही नहीं गाये बल्कि फ़िल्मों का निर्माण और निर्देशन भी किया।



आज महमूद अली जी के 85वें जन्म दिवस पर हम सब उन्हें शत शत नमन करते हैं। 



विश्व हृदय दिवस
विश्व हृदय दिवस (अंग्रेज़ी: World Heart Day) प्रत्येक वर्ष '29 सितम्बर' को मनाया जाता है। अव्यवस्थित जीवन शैली और असंतुलित खानपान के चलते दुनिया भर में हृदय रोग के पीड़ितों की संख्या तेजी से बढ़ी है। भागती-दौड़ती जिंदगी में लोगों को अपने स्वास्थ्य की ओर ध्यान देने का मौका नहीं मिलता, जिसका उन्हें भारी खामियाजा चुकाना पड़ता है। हृदय रोग विशेषज्ञों के अनुसार दिल की बीमारी किसी भी उम्र में किसी को भी हो सकती है, इसके लिए कोई निर्धारित उम्र नहीं होती। महिलाओं में हृदय रोग की संभावनाएं ज्यादा होती हैं, बावजूद इसके वे इस बीमारी के जोखिमों को नजरअंदाज कर देती हैं। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में एक दिल ही है, जिस पर सबसे अधिक बोझ पड़ता है। तनाव, थकान, प्रदूषण आदि कई वजहों से रक्त का आदान-प्रदान करने वाले इस अति महत्वपूर्ण अंग को अपना काम करने में मुश्किल होती है, इसीलिए 'विश्व हृदय दिवस' लोगों में यह भावना जागृत करता है कि वे हृदय की बीमारियों के प्रति सचेत रहें।





~ आज की बुलेटिन कड़ियाँ ~












एक दशक के सर्वोच्च स्तर पर नैनी झील, बावजूद ‘रिफ्रेश’ होने पर संशय


आज की बुलेटिन में बस इतना ही कल फिर मिलेंगे तब तक के लिए शुभरात्रि। सादर ... अभिनन्दन।। 

गुरुवार, 28 सितंबर 2017

दो विभूतियों का जन्मदिन मनाता देश - ब्लॉग बुलेटिन

नमस्कार साथियो,
देश भर में रोज ही हजारों लोग जन्म लेते हैं, आज भी लेते हैं, पहले भी जन्मते रहे हैं. उनमें से बहुत से लोग तो इतिहास के पन्नों में गुमनाम होकर चले गए. उन्हीं में कुछ लोग ऐसे होते हैं जो सदियों के लिए अपना नाम अमर करवा जाते हैं. आज, २८ सितम्बर को भी बहुत से लोगों का जन्मदिवस होता है. उन्हीं में से कुछ नाम ऐसे हैं जो सदियों तक देशवासियों के दिल-दिमाग में अपनी उपस्थिति बनाये रहेंगे.

ऐसे लोगों में एक नाम ऐसा है जो अब हमारे बीच नहीं है मगर समूचे युवाओं के लिए आज भी प्रेरणास्त्रोत है. ये नाम है अमर शहीद सरदार भगत सिंह का. जो बहुत कम उम्र में देश की आज़ादी के लिए अपने आपको बलिदान कर गए. सरदार भगत सिंह का जन्म 28 सितंबर 1907 को पंजाब के ज़िला लायलपुर में बंगा गाँव में हुआ था. देशभक्त परिवार में जन्म होने के कारण उन पर भी इसका अनुकूल प्रभाव पड़ा.
दूसरा नाम है भारत रत्न से सम्मानित मशहूर पार्श्वगायिका लता मंगेशकर. उन्होंने विगत कई वर्षों से संगीत की दुनिया को अपनी सुमधुर आवाज़ से रसमय बनाया हुआ है. स्‍वर कोकिला के नाम से प्रसिद्द लता मंगेशकर ने बीस भाषाओं में तीस हजार से अधिक गाने गाये हैं. लता मंगेशकर का जन्म इंदौर मध्यप्रदेश में 28 सितम्बर 1929 को हुआ था. उन पर भी अपने परिवार का प्रभाव पड़ा था. उनके पिता दीनानाथ मंगेशकर एक कुशल रंगमंचीय गायक थे. उन्होंने लता मंगेशकर को तब से संगीत सिखाना शुरू किया जब वे पाँच साल की थी.



यह संयोग ही है कि जिस समय युवा भगत सिंह देश की आज़ादी के लिए अपना सर्वस्व बलिदान करने को तत्पर थे, हँसते-हँसते फाँसी का फंदा चूमने को चल पड़े थे तब आज की स्वर कोकिला महज दो वर्ष की थीं. देश की दोनों प्रतिभाओं पर अपने-अपने परिवार का बहुत गहरा प्रभाव पड़ा. उन दोनों ने अपने-अपने को अपने मनपसंद जिस क्षेत्र में अर्पित किया उसमें अपने को पूरी तत्परता से झोंक सा दिया था. यही कारण है कि दोनों लोग जो सन्देश समाज को देना चाहते थे, स्पष्ट रूप से दे गए.

सरदार भगत सिंह का असेम्बली में बम फेंकने के बाद स्वयं को गिरफ्तार करवाने का मंतव्य भी यही था कि वे अदालती कार्यवाही में देश के सामने तथ्यात्मकता पेश कर सकें. इसमें वे पूरी तरह सफल हुए और अंग्रेजी सरकार के कुत्सित निर्णयों को जनता के सामने अदालत के माध्यम से प्रस्तुत कर सके. इसी तरह लता मंगेशकर के नाजुक कन्धों पर परिवार की जिम्मेवारी आ गई. उन्होंने अपने सुखों, अपने जीवन को अपने छोटे भाई-बहिनों के लिए समर्पित कर दिया.


सरदार भगत सिंह की क्रांति ने आज भी युवाओं को प्रभावित कर रखा है. उसी तरह लता मंगेशकर की मधुरतम गायकी ने सभी उम्र के लोगों को अपना प्रशंसक बनाया हुआ है.

आज जन्मदिन के अवसर पर सरदार भगत सिंह को सादर श्रद्धांजलि और लता मंगेशकर को शुभकामनायें कि वे स्वस्थ रहें और भारतीय संगीत को कुछ न कुछ नया सुर प्रदान करती रहें.


लीजिये, आज की बुलेटिन आपके लिए...

++++++++++















बुधवार, 27 सितंबर 2017

महान समाज सुधारक राजा राममोहन राय जी और ब्लॉग बुलेटिन

सभी हिन्दी ब्लॉगर्स को मेरा सादर नमस्कार।
राजा राममोहन राय (अंग्रेज़ी: Raja Ram Mohan Roy, जन्म: 22 मई, 1772 - मृत्यु: 27 सितम्बर, 1833) को 'आधुनिक भारतीय समाज' का जन्मदाता कहा जाता है। वे ब्रह्म समाज के संस्थापक, भारतीय भाषायी प्रेस के प्रवर्तक, जनजागरण और सामाजिक सुधार आंदोलन के प्रणेता तथा बंगाल में नव-जागरण युग के पितामह थे। धार्मिक और सामाजिक विकास के क्षेत्र में राजा राममोहन राय का नाम सबसे अग्रणी है। राजा राम मोहन राय ने तत्कालीन भारतीय समाज की कट्टरता, रूढ़िवादिता एवं अंध विश्वासों को दूर करके उसे आधुनिक बनाने का प्रयास किया। पूरा पढ़ने के लिए क्लिक करें....


महान समाज सुधारक राजा राममोहन राय जी 184वीं पुण्यतिथि पर हम सब उन्हें शत शत नमन करते हैं। सादर।।


~ आज की बुलेटिन कड़ियाँ ~














आज की बुलेटिन में बस इतना ही कल फिर मिलेंगे तब तक के लिए शुभरात्रि। सादर ... अभिनन्दन।।  

मंगलवार, 26 सितंबर 2017

जिन खोजा तिन पाइया




इधर से उधर भागते हुए 
प्रश्नों के उत्तर तलाशते हुए 
मैं खोज लेती हूँ वह कलम 
जिनके अपने विशिष्ट मायने होते हैं 
अपनी लगन होती है 
जो इंसान को कुछ न कुछ दे ही जाती है 
... 

गोपाल मिश्रा 

हर उद्देश्य की सफलता ध्यान में है, जितनी सच्चाई ध्यान में होगी, उतनी सफलता रंग लाएगी !
बाधाएँ आती हैं, लेकिन निष्ठा के आगे वह एक दिन घुटने टेक ही देती है 
ऐसी छवि अपने साथ कइयों को अर्थ दे जाती है  ... 

सोमवार, 25 सितंबर 2017

101वीं जयंती : पंडित दीनदयाल उपाध्याय और ब्लॉग बुलेटिन

सभी हिंदी ब्लॉगर्स को मेरा सादर नमस्कार।
पंडित दीनदयाल उपाध्याय (जन्म:25 सितंबर, 1916 - मृत्यु: 11 फ़रवरी 1968) भारतीय जनसंघ के नेता थे। पंडित दीनदयाल उपाध्याय एक प्रखर विचारक, उत्कृष्ट संगठनकर्ता तथा एक ऐसे नेता थे जिन्होंने जीवनपर्यंन्त अपनी व्यक्तिगत ईमानदारी व सत्यनिष्ठा को महत्त्व दिया। वे भारतीय जनता पार्टी के लिए वैचारिक मार्गदर्शन और नैतिक प्रेरणा के स्रोत रहे हैं। पंडित दीनदयाल उपाध्याय मज़हब और संप्रदाय के आधार पर भारतीय संस्कृति का विभाजन करने वालों को देश के विभाजन का ज़िम्मेदार मानते थे। वह हिन्दू राष्ट्रवादी तो थे ही, इसके साथ ही साथ भारतीय राजनीति के पुरोधा भी थे। दीनदयाल की मान्यता थी कि हिन्दू कोई धर्म या संप्रदाय नहीं, बल्कि भारत की राष्ट्रीय संस्कृति हैं। दीनदयाल उपाध्याय की पुस्तक एकात्म मानववाद (इंटीगरल ह्यूमेनिज्म) है जिसमें साम्यवाद और पूंजीवाद, दोनों की समालोचना की गई है। एकात्म मानववाद में मानव जाति की मूलभूत आवश्यकताओं और सृजित क़ानूनों के अनुरुप राजनीतिक कार्रवाई हेतु एक वैकल्पिक सन्दर्भ दिया गया है।

दीनदयाल उपाध्याय का जन्म 25 सितंबर, 1916 को ब्रज के पवित्र क्षेत्र मथुरा ज़िले के छोटे से गाँव 'नगला चंद्रभान' में हुआ था। दीनदयाल के पिता का नाम 'भगवती प्रसाद उपाध्याय' था। इनकी माता का नाम 'रामप्यारी' था जो धार्मिक प्रवृत्ति की थीं। रेल की नौकरी होने के कारण उनके पिता का अधिक समय बाहर बीतता था। उनके पिता कभी-कभी छुट्टी मिलने पर ही घर आते थे। थोड़े समय बाद ही दीनदयाल के भाई ने जन्म लिया जिसका नाम 'शिवदयाल' रखा गया। पिता भगवती प्रसाद ने अपनी पत्नी व बच्चों को मायके भेज दिया। उस समय दीनदयाल के नाना चुन्नीलाल शुक्ल धनकिया में स्टेशन मास्टर थे। मामा का परिवार बहुत बड़ा था। दीनदयाल अपने ममेरे भाइयों के साथ खाते-खेलते बड़े हुए। वे दोनों ही रामप्यारी और दोनों बच्चों का ख़ास ध्यान रखते थे।

3 वर्ष की मासूम उम्र में दीनदयाल पिता के प्यार से वंचित हो गये। पति की मृत्यु से माँ रामप्यारी को अपना जीवन अंधकारमय लगने लगा। वे अत्यधिक बीमार रहने लगीं। उन्हें क्षय रोग हो गया। 8 अगस्त सन् 1924 को रामप्यारी बच्चों को अकेला छोड़ ईश्वर को प्यारी हो गयीं। 7 वर्ष की कोमल अवस्था में दीनदयाल माता-पिता के प्यार से वंचित हो गये। सन् 1934 में बीमारी के कारण दीनदयाल के भाई का देहान्त हो गया।


आज भारत माँ के महान सपूत पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी की 101वीं जयंती पर हम सब उन्हें शत शत नमन करते हैं। 


~ आज की बुलेटिन कड़ियाँ ~













आज की बुलेटिन में बस इतना ही कल फिर मिलेंगे तब तक के लिए शुभरात्रि। सादर ... अभिनन्दन।।

रविवार, 24 सितंबर 2017

सौ सुनार की एक लौहार की

प्रिय ब्लॉगर मित्रों,
प्रणाम |

एक महिला घर पर अकेली थी, तभी दरवाजे पर दस्तक हुई। जब उसने दरवाजा खोला तो एक अनजान आदमी खड़ा था और उस महिला को देखते ही बोला, "अरे आप तो बहुत ही खूबसूरत हैं।"

महिला ने घबरा कर दरवाजा बंद कर दिया। अगले तीन-चार दिन तक ऐसा ही चलता रहता है, वो आदमी आता, दरवाज़ा खटखटाता और जब महिला दरवाज़ा खोलती तो वह यही बोलता कि आप तो बहुत ही खूबसूरत हैं और महिला घबरा कर दरवाज़ा बंद कर देती।

एक दिन जब उस महिला का पति घर आया तो उसने अपने पति को सारी बात बताई।

पति बोला, "तुम चिंता मत करो, कल जब वो आदमी आएगा तो मैं घर पर ही रहुंगा और दरवाजे के पीछे खड़ा रहूँगा। तुम उससे पूछना कि हाँ मैं सुन्दर हूँ, तुम्हे क्या? फिर मैं उसको मज़ा चखाता हूँ।

अगले दिन जैसे ही वो आदमी आया तो पति ने जैसे तय किया था वह दरवाजे के पीछे छिप गया। महिला ने दरवाज़ा खोला तो आदमी बोला, "अरे आप तो बेहद खूबसूरत हैं।"

महिला: हाँ मैं खूबसूरत हूँ, लेकिन तुम्हें इससे क्या?

आदमी बड़ी विनम्रता के साथ हाथ जोड़ कर बोला, "बहन जी, यही विश्वास और एहसास आप अपने पति के अंदर भी जगा दीजिये न, ताकि वो मेरी बीवी का पीछा करना छोड़ दे।"⁠⁠⁠⁠

सादर आपका

~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~

नूतन का नू बना न्यू और तन बना टन हो गया न्यूटन

बेटी फरियादी नहीं हो सकती .....

चंदा ऊगे बड़े भिन्सारे…..

दीवारें ........

निम्नतर मानसिकता का विरोध

ट्रोल-नाके से गुज़रने का अनुभव !

कृष्ण सखी - एक प्रतिक्रया

सुनो,समझो,करो!-एक संदेश बच्चों के लिए

पूज्य कर्म पर मौन

गुड बाय 'पापा'

रंभ पुत्र महिषासुर

 ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
अब आज्ञा दीजिये ...

जय हिन्द !!!

शनिवार, 23 सितंबर 2017

मैं हूँ लेकिन मैं कौन हूँ




मैं हूँ 
लेकिन मैं कौन हूँ
मैं बहुत कुछ हूँ
लेकिन क्या !!!
मैं भोर का संगीत हूँ 
लेकिन बोल इसके क्या हैं !
मैं एक पूरा दिन हूँ 
पर  ... 
जेठ की दुपहरी से सन्नाटे के मायने क्या हैं !
वह जो मेरे मन की शाखों पर चिड़िया चहकती है 
वह उड़ती क्यूँ नहीं !
यह जो मेरी परिक्रमा है 
इस शरीर से उस शरीर की 
यह मेरी रूह 
खानाबदोशी से उबती क्यूँ नहीं !


शुक्रवार, 22 सितंबर 2017

पुण्यतिथि : मंसूर अली खान पटौदी और ब्लॉग बुलेटिन

सभी हिन्दी ब्लॉगर्स को मेरा सादर नमस्कार।
Mansur Ali Khan Pataudi.jpg
मंसूर अली ख़ान पटौदी अथवा 'नवाब पटौदी' (अंग्रेज़ी: Mansoor Ali Khan Pataudi, जन्म- 5 जनवरी, 1941, भोपाल, मध्य प्रदेश; मृत्यु- 22 सितंबर, 2011 दिल्ली) भारतीय क्रिकेट टीम के भूतपूर्व कप्तान और महान् खिलाड़ी थे। अपनी कलात्मक बल्लेबाजी से अधिक कप्तानी के कारण क्रिकेट जगत् में अमिट छाप छोडऩे वाले मंसूर अली ख़ान पटौदी ने भारतीय क्रिकेट में नेतृत्व कौशल की नई मिसाल और नए आयाम जोड़े थे।



आज मंसूर अली खान पटौदी जी के 6वीं पुण्यतिथि पर हम सब उन्हें शत शत नमन करते हैं। 


~ आज की बुलेटिन कड़ियाँ ~














आज की बुलेटिन में बस इतना ही कल फिर मिलेंगे तब तक के लिए शुभरात्रि। सादर ... अभिनन्दन।। 

गुरुवार, 21 सितंबर 2017

नवरात्र का पावन पर्व और ब्लॉग बुलेटिन

नमस्कार साथियो,
आज से शारदीय नवरात्र का पावन पर्व आरम्भ हो रहा है. आप सभी को मांगलिक शुभकामनायें.

नवरात्र हिंदू धर्म में मनाया जाने वाला प्रमुख त्योहार है. इसे मुख्यतः वर्ष में दो बार मनाया जाता है. पहला चैत्र माह में, इसी दिन हिन्दू पंचाग के अनुसार नववर्ष होता है. इसके पश्चात् आश्विन माह की पहली तिथि से शारदीय नवरात्र का शुभारम्भ होता है. आज से घरों में नौ दिनों तक देवी के नौ रूपों की पूजा की जाती है. बेहद भक्तिभाव से मनाए जाने वाले इस पर्व में नौ दिनों तक उपवास रखने की परंपरा है. नवरात्र में माँ आदिशक्ति के नौ रूपों का पूजन किया जाता है. हर दिन शक्ति के अलग रूप की पूजा होती है. इसे नवदुर्गा के नाम से भी जाना जाता है. हिन्दू धर्म में माता दुर्गा अथवा पार्वती के नौ रूपों को एक साथ स्वीकार किया गया है. नवरूप में पूज्य प्रत्येक देवी के अलग-अलग वाहन हैं, अस्त्र-शस्त्र भी अलग हैं परंतु मूलरूप में ये सब एक ही हैं.

इस श्लोक में नवदुर्गा के नाम क्रमश: दिनों के आधार पर दिये गए हैं-
प्रथमं शैलपुत्री च द्वितीयं ब्रह्मचारिणी।
तृतीयं चन्द्रघण्टेति कूष्माण्डेति. चतुर्थकम्।।
पंचमं स्कन्दमातेति षष्ठं कात्यायनीति च।
सप्तमं कालरात्रीति.महागौरीति चाष्टमम्।।
नवमं सिद्धिदात्री च नवदुर्गा: प्रकीर्तिता:।
उक्तान्येतानि नामानि ब्रह्मणैव महात्मना:।।


नवरात्र की मंगलकामनाओं सहित आज की बुलेटिन आपके समक्ष है.

++++++++++













बुधवार, 20 सितंबर 2017

विश्व अल्जाइमर दिवस : एल्जाइमर्स डिमेंशिया और ब्लॉग बुलेटिन

सभी हिन्दी ब्लॉगर्स को मेरा सादर नमस्कार।
विश्व अल्जाइमर दिवस का लोगो
विश्व अल्जाइमर दिवस (अंग्रेज़ी: World Alzheimer's Day) प्रतिवर्ष 21 सितम्बर को मनाया जाता है। यह दिवस अल्जाइमर रोग और डिमेंशिया के बारे में जागरूकता प्रसारित करने के लिए मनाया जाता है। वर्ष 2016 में विश्व अल्जाइमर दिवस अभियान का विषय था- "मुझे याद रखें"। इस दिन का उद्देश्य विश्व भर के लोगों को डिमेंशिया के लक्षणों का पता लगाने के लिए प्रोत्साहित करना ही नहीं है, अपितु इसका उद्देश्य डिमेंशिया से पीड़ित रोगियों अथवा इस बीमारी के कारण मृत्यु को प्राप्त होने वाले रोगियों को भी न भूलना है।


एल्जाइमर्स डिमेंशिया अधेड़ावस्था व बुजुर्गावस्था में होने वाला एक ऐसा रोग है, जिसमें रोगी की स्मरण शक्ति गंभीर रूप से कमजोर हो जाती है। जैसे-जैसे उम्र बढ़ती जाती है, वैसे-वैसे यह रोग भी बढ़ता जाता है। याददाश्त क्षीण होने के अलावा रोगी की सूझबूझ, भाषा, व्यवहार और उसके व्यक्तित्व पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
 [लक्षण] 
* जरूरत का सामान जैसे चाभी, बटुआ या कपड़े इधर-उधर रखकर भूल जाना।
* लोगों के नाम, पता या नंबर भूल जाना।
* रोग की चरम अवस्था में रोगी खाना खाने के बाद भी भूल जाता है कि उसने खाना खाया है या नहीं। कई बार इस रोग से पीड़ित व्यक्ति अपने ही घर के सामने भटकते रहते हैं, लेकिन वे घर नहीं ढूंढ़ पाते।
 [दैनिक कार्यो को करने में असमर्थता] 
* दैनिक कार्य जैसे खाना बनाना, रिमोट या मोबाइल जैसे घरेलू उपकरणों को चलाने में असमर्थता महसूस करना।
* बैंक के कार्य जैसे पैसे निकालने या जमा करने में गलतियां होना।
* गंभीर रूप से ग्रस्त रोगी नित्य क्रिया के कार्य जैसे- कमीज का बटन लगाना या नाड़ा भी नहीं बांध पाते है।
 [व्यवहार व व्यक्तित्व में परिवर्तन आना] 
* अत्यधिक चिड़चिड़ापन, वेवजह शक करना, अचानक रोने लगना या बेचैनी महसूस करना।
* एक ही काम को अनेक बार करना या एक ही बात को बार-बार पूछते रहना।
 [भाषा व बातचीत प्रभावित होना] 
बात करते समय रोगी को सही शब्द, विषय व नाम ध्यान में नहीं रहते। ऐसे में रोगी की भाषा अत्यंत अटपटी व अधूरी लगती है।
 

[इलाज] 
कुछ दवाएं उपलब्ध है, जिनके सेवन से ऐसे रोगियों की याददाश्त और उनकी सूझ-बूझ में सुधार होता है। इन दवाओं को जितना जल्दी शुरू करे उतना ही फायदेमंद होता है क्योंकि ये दवाइयां रोग को आगे बढ़ने से रोकती है। अक्सर परिजन इस रोग के लक्षणों को वृद्धावस्था की स्वाभाविक खामियां मानकर इलाज नहीं करवाते। इस कारण रोग असाध्य हो जाता है।
दवाओं से अधिक कई बार रोगियों और उनके परिजनों को काउंसलिंग की आवश्यकता होती है। काउंसलिंग के तहत रोगी के अलावा उसके परिजनों को मरीज के लक्षणों की सही पहचान कर उनसे निपटने की सटीक व्यावहारिक विधियां बतायी जाती हैं। 
- डॉ. उन्नति कुमार


~ आज की बुलेटिन कड़ियाँ ~















आज की बुलेटिन में बस इतना ही कल फिर मिलेंगे तब तक के लिए शुभरात्रि। सादर ... अभिनन्दन।। 

मंगलवार, 19 सितंबर 2017

फड़फड़ाते पन्नोँ जैसे ख्याल





लिखना मेरी आदत है
या तुमसे कुछ कहना
जान पाना थोड़ा मुश्किल है …
क्योंकि मैं तो आज भी लिखती हूँ
इधर-उधर पोस्ट भी करती हूँ
पढ़नेवाले पढ़ जाते हैं
लेकिन मैं संतुष्ट नहीं होती
मेरी तलाश तुम्हारी होती है …
आत्मा अमर है
तो तुम हो
दिल को बहलाने के लिए सही है बोलना
पर ....
वो जो अपनी चमकती आँखों से तुम कहती थी
'अरे वाह !"
और मेरी मुस्कान लम्बी सी हो जाती थी
वह नहीं होती !!!
एक-दो अपने ऐसे हैं
जिनके शब्द, जिनकी तारीफ मेरे लिए अहमियत रखती है
पर .... मुस्कान नहीं फैलती
'तुम नहीं हो कहीं' यह ख्याल
फड़फड़ाते पन्नों सा होता हैं
....
समझ रही हो न फड़फड़ाते पन्नोँ जैसे ख्याल को ?
बोलो ना


Search Results

सोमवार, 18 सितंबर 2017

जन्म दिवस : काका हाथरसी, श्रीकांत शर्मा और ब्लॉग बुलेटिन

सभी हिन्दी ब्लॉगर्स को मेरा सादर नमस्कार। 
काका हाथरसी
काका हाथरसी (अंग्रेज़ी:Kaka Hathrasi) (वास्तविक नाम- प्रभुलाल गर्ग, जन्म- 18 सितंबर, 1906, हाथरस, उत्तर प्रदेश; मृत्यु- 18 सितंबर, 1995) भारत के प्रसिद्ध हिन्दी हास्य कवि थे। उन्हें हिन्दी हास्य व्यंग्य कविताओं का पर्याय माना जाता है। काका हाथरसी की शैली की छाप उनकी पीढ़ी के अन्य कवियों पर तो पड़ी ही थी, वर्तमान में भी अनेक लेखक और व्यंग्य कवि काका की रचनाओं की शैली अपनाकर लाखों श्रोताओं और पाठकों का मनोरंजन कर रहे हैं। उनकी रचनाएँ समाज में व्याप्त दोषों, कुरीतियों, भ्रष्टाचार और राजनीतिक कुशासन की ओर सबका ध्यान आकृष्ट करती हैं। भले ही काका हाथरसी आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी हास्य कविताए, जिन्हें वे 'फुलझडियाँ' कहा करते थे, सदैव हमे गुदगुदाती रहेंगी।


श्रीकांत वर्मा
श्रीकांत वर्मा (अंग्रेज़ी: Shrikant Varma; जन्म- 18 सितम्बर, 1931, बिलासपुर, छत्तीसगढ़; मृत्यु- 26 मई, 1986, न्यूयार्क) हिन्दी साहित्य में कथाकार, गीतकार और एक समीक्षक के रूप में विशेष तौर पर जाने जाते हैं। राजनीति से भी ये जुड़े हुए थे और 1976 में राज्य सभा में निर्वाचित हुए थे। श्रीकांत वर्मा दिल्ली में पत्रकारिता से भी जुड़ गये थे। वर्ष 1965 से 1977 तक उन्होंने 'टाइम्स ऑफ़ इण्डिया' से निकलने वाली पत्रिका 'दिनमान' में संवाददाता की हैसियत से कार्य किया। श्रीकांत वर्मा भूतपूर्व प्रधानमंत्री श्रीमती इन्दिरा गाँधी के काफ़ी क़रीब थे। श्रीकांत वर्मा को कई पुरस्कारों से भी सम्मानित किया गया था।



आज काका हाथरसी जी और श्रीकांत शर्मा जी के जन्म दिवस पर हम सब उन्हें स्मरण करते हुए शत शत नमन करते हैं।  


~ आज की बुलेटिन कड़ियाँ ~



















आज की बुलेटिन में बस इतना ही कल फिर मिलेंगे तब तक के लिए शुभरात्रि। सादर ... अभिनन्दन।। 

रविवार, 17 सितंबर 2017

जन्म दिवस : अनंत पई और ब्लॉग बुलेटिन

सभी हिन्दी ब्लॉगर्स को मेरा सादर नमस्कार।

अनंत पई (17 सितम्बर 1929, कार्कल, कर्नाटक — 24 फरवरी 2011, मुंबई), जो अंकल पई के नाम से लोकप्रिय थे, भारतीय शिक्षाशास्री और कॉमिक्स, ख़ासकर अमर चित्र कथा श्रृंखला, के रचयिता थे । इंडिया बुक हाउज़ प्रकाशकों के साथ 1967 में शुरू की गई इस कॉमिक्स श्रृंखला के ज़रिए बच्चों को परंपरागत भारतीय लोक कथाएँ, पौराणिक कहानियाँ और ऐतिहासिक पात्रों की जीवनियाँ बताई गईं । 1980 में टिंकल नामक बच्चों के लिए पत्रिका उन्होंने रंग रेखा फ़ीचर्स, भारत का पहला कॉमिक और कार्टून सिंडिकेट, के नीचे शुरू की. 1998 तक यह सिंडिकेट चला, जिसके वो आख़िर तक निदेशक रहे ।

दिल का दौरा पड़ने से 24 फरवरी 2011 को शाम के 5 बजे अनंत पई का निधन हो गया ।

आज अमर चित्र कथा सालाना लगभग तीस लाख कॉमिक किताबें बेचता है, न सिर्फ़ अंग्रेजी में बल्कि 20 से अधिक भारतीय भाषाओं में । 1967 में अपनी शुरुआत से लेकर आज तक अमर चित्र कथा ने 10 करोड़ से भी ज़्यादा प्रतियाँ बेची हैं । 2007 में अमर चित्र कथा ACK Media द्वारा ख़रीदा गया ।




आज अनंत पई जी के 88वीं जयंती पर हम सब उन्हें शत शत नमन करते हैं। 


~ आज की बुलेटिन कड़ियाँ ~














आज की बुलेटिन में बस इतना ही कल फिर मिलेंगे तब तक के लिए शुभरात्रि। सादर ... अभिनन्दन।।