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शनिवार, 2 जून 2018

भारतीय महिला तीरंदाज़ खिलाड़ी - डोला बनर्जी और ब्लॉग बुलेटिन

सभी हिंदी ब्लॉगर्स को नमस्कार। 
डोला बनर्जी
डोला बनर्जी (अंग्रेज़ी: Dola Banerjee, जन्म-2 जून, 1980, झारखंड) भारत की प्रथम तीरंदाज़ महिला खिलाड़ी हैं, जिन्हें ओलंपिक के लिए क्वालीफाई किया गया था। उन्होंने 18वां ‘गोल्डन एरो ग्रैंड प्रिक्स टूर्नामेंट’ जीता। डोला को वर्ष 2005 में 'अर्जुन पुरस्कार' से सम्मानित किया गया हैं।

परिचय

डोला बनर्जी का जन्म 2 जून, 1980 को झारखंड में हुआ था। भारत की पहली महिला खिलाड़ी हैं, जिन्हें तीरंदाज़ी में राष्ट्रीय स्तर पर ख्याति पाने वाली प्रथम महिला खिलाड़ी होने का श्रेय जाता है। भारत में तीरंदाज़ी को मुख्य रूप से पुरुषों का खेल समझा जाता है, लेकिन डोला बनर्जी ने इस खेल में न सिर्फ भाग लिया, बल्कि अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर सफलता भी अर्जित की। 

डोला बनर्जी ने तीर से निशानेबाजी की शिक्षा टाटा आर्चरी अकादमी, जमशेदपुर से प्राप्त की। उन्होंने तीरंदाज़ी के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर एकमात्र सफल खिलाड़ी होने का नाम कमाया है। न्यूयार्क में हुई 42वीं ‘विश्व आउटडोर टार्गेट आर्चरी चैंपियनशिप’ में अपने कुशल प्रयास से वह सफल रहीं और भारत की प्रथम तीरंदाज़ महिला बन गईं तथा ओलंपिक खेलों में भाग लेने के लिए क्वालीफाई कर लिया।

पुरस्कार

उनकी उपलब्धियों को देखते हुए भारत सरकार ने उन्हें 2005 में ‘अर्जुन पुरस्कार’ देकर सम्मानित किया गया।

टूर्नामेंट 

वर्ष 2005 में टर्की के अंतल्य में हुआ 18वां गोल्डन एरो ग्रैंड पिक्स टूर्नामेंट जीतकर डोला ने इतिहास रच डाला। वहाँ उन्होंने उक्रेनिया की तीसरी सीड खिलाड़ी तात्याना डोरोखोवा को हरा दिया। 

2006 में कोलंबो में हुए सैफ खेलों में डोला बनर्जी ने अपनी प्रतिद्वन्दी रीना कुमारी को हराकर महिला तीरंदाज़ी का स्वर्ण पदक जीत लिया।

उपलब्धियां 


  1. डोला बनर्जी भारत की ऐसी महिला तीरंदाज़ हैं, जिन्होंने ओलंपिक में भाग लेने के लिए क्वालीफाई किया था।
  2. वर्ष 2005 में उन्हें ‘अर्जुन पुरस्कार’ प्रदान किया गया।
  3. 2006 में टर्की के अंतल्य में हुए सैफ खेलों में डोला ने स्वर्ण पदक जीता।
  4. 2006 में कोलंबो में हुए सैफ खेलों में डोला बनर्जी ने अपनी प्रतिद्वन्दी रीना कुमारी को हराकर महिला तीरंदाज़ी का स्वर्ण पदक जीत लिया।



आज महिला तीरंदाज़ खिलाड़ी डोला बनर्जी जी के जन्म दिवस पर हम सब उन्हें बहुत बहुत बधाई और हार्दिक शुभकामनाएं।

~ आज की बुलेटिन कड़ियाँ ~














आज की बुलेटिन में बस इतना ही कल फिर मिलेंगे तब तक के लिए शुभरात्रि। सादर ... अभिनन्दन।। 

शुक्रवार, 1 जून 2018

कमजोर याददाश्त - ब्लॉग बुलेटिन

प्रिय ब्लॉगर मित्रों,
प्रणाम |

एक बार एक वृद्ध दंपति को लगने लगता है कि उनकी याददाश्त कमजोर हो चली है! यह सुनिश्चित करने के लिये कि उन्हें कुछ नहीं हुआ है, वे डॉक्टर के पास जाते हैं! डॉक्टर उनका बारीकी से परीक्षण करने के बाद उन्हें बताता है की उन्हें कोई बीमारी नहीं है और बुढ़ापे में इस तरह के लक्षण स्वाभाविक हैं! उसके पश्चात डॉक्टर उन्हें महत्वपूर्ण कार्यों को लिखकर रखने की सलाह देता है ताकि वे कोई काम भूलें ना! वृद्ध दंपति डॉक्टर का धन्यवाद कर के अपने घर चले जाते हैं!

उसी रात टीवी देखते समय जब पति उठकर कहीं जाने लगता है तो पत्‍‌नी पूछती है, "कहां जा रहे हो?"

पति जवाब देता है, "रसोईघर में!"

यह सुन पत्नी कहती है, "ठीक है मेरे लिये एक कप चाय ले आना!"

पति जवाब देता है,"ठीक है, ले आऊंगा!"

तभी अचानक पत्नी अपने पति से कहती है, "मेरे ख्याल से तुम इसे नोट कर लो नहीं तो भूल जाओगे!"

पति जवाब देता है, "नहीं भूलूंगा!"

यह सुन पत्नी कहती है, " ठीक है, फिर मेरे लिए खाने को आलू चिप्स भी ले आना!"

पति जवाब देता है," ठीक है, ले आऊंगा!"

पत्‍‌नी पति से एक बार फिर आग्रह करती है, "मुझे लगता है तुम अगर लिख लो तो ठीक रहेगा!"

पति जवाब देता है, "नहीं भूलूंगा प्रिये मुझे याद है तुम्हारे लिये एक कप चाय और आलू चिप्स लाना है!"

लगभग आधे घंटे बाद पति महोदय एक कटोरी में आइसक्रीम और एक प्लेट में आमलेट लेकर वापिस आते हैं तो यह देख पत्नी चिल्लाते हुए कहती है, "देखा मैंने कहा था ना, तुम लिख लो वर्ना भूल जाओगे अब बताओ मेरा इडली साम्भर कहाँ है!"

सादर आपका
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राशिफल 

शांतिपूर्ण ढंग से सम्पन्न हो आंदोलन

श्रृंगार

मेवालाल और उसका प्याज

ज्यादा मूल्यवान क्या हैं, जिंदगी या समय?

सच को संवेदनशीलता से उकेरती कहानियाँ

किला गोबिंद गढ़ , अमृतसर

एक क्लास की कहानी

आज भी है बंधुआ मजदूर

हो जाये तो अच्छा

What is there in a (nick) name .....

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अब आज्ञा दीजिये ...

जय हिन्द !!! 

लेखागार