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सोमवार, 19 फ़रवरी 2018

छत्रपति शिवाजी महाराज और ब्लॉग बुलेटिन

सभी हिन्दी ब्लॉगर्स को मेरा सादर नमस्कार।
शिवाजी
शिवाजी (अंग्रेज़ी:Shivaji, पूरा नाम: 'शिवाजी राजे भोंसले', जन्म: 19 फ़रवरी, 1630 ई.; मृत्यु: 3 अप्रैल, 1680 ई.) पश्चिमी भारत के मराठा साम्राज्य के संस्थापक थे। शिवाजी के पिता का नाम शाहजी भोंसले और माता का नाम जीजाबाई था। सेनानायक के रूप में शिवाजी की महानता निर्विवाद रही है। शिवाजी ने अनेक क़िलों का निर्माण और पुनरुद्धार करवाया। उनके निर्देशानुसार सन 1679 ई. में अन्नाजी दत्तों ने एक विस्तृत भू-सर्वेक्षण करवाया, जिसके परिणामस्वरूप एक नया राजस्व निर्धारण हुआ।



~ आज की बुलेटिन कड़ियाँ ~












आज की बुलेटिन में बस इतना ही कल फिर मिलेंगे तब तक के लिए शुभरात्रि। सादर ... अभिनन्दन।।

रविवार, 18 फ़रवरी 2018

नलिनी जयवंत और ब्लॉग बुलेटिन

सभी हिन्दी ब्लॉगर्स को नमस्कार। 
नलिनी जयवंत (अंग्रेज़ी: Nalini Jaywant; जन्म- 18 फ़रवरी, 1926, बम्बई, ब्रिटिश भारत; मृत्यु- 20 दिसम्बर, 2010, मुम्बई, भारत) भारतीय सिनेमा की उन सुन्दर अभिनेत्रियों में से एक थीं, जिन्होंने पचास और साठ के दशक में सिने प्रेमियों के दिलों पर राज किया। फ़िल्म 'काला पानी' का यह गीत 'नज़र लागी राजा तोरे बंगले पर', इस गीत पर नलिनी जयवंत द्वारा किये गए अभिनय को भला कौन भुला सकता है। नलिनी जयवंत ने अपने फ़िल्मी सफर की शुरुआत वर्ष 1941 में प्रदर्शित फ़िल्म 'राधिका' से की थी। अपने समय के मशहूर अभिनेता अशोक कुमार के साथ उनके प्रेम की अफवाहें भी उड़ी थीं। अभिनेता दिलीप कुमार, देव आनन्द और अशोक कुमार के साथ नलिनी जयवंत ने कई सफल फ़िल्में दी थीं।
नलिनी जयवंत
नलिनी जयवंत का जन्म 18 फ़रवरी, 1926 में ब्रिटिश भारत के बम्बई शहर (वर्तमान मुम्बई) में हुआ था। नलिनी के पिता और अभिनेत्री शोभना समर्थ (नूतन और तनुजा की माँ) की माँ रतन बाई रिश्ते में भाई-बहन थे, इसी नाते नलिनी, शोभना समर्थ की ममेरी बहन लगती थीं। वर्ष 1940 में नलिनी जयवंत ने निर्देशक वीरेन्द्र देसाई से विवाह किया। इस दौरान प्रसिद्ध अभिनेता अशोक कुमार के साथ नलिनी के प्यार की अफवाहें भी उड़ीं। बाद के समय में नलिनी जयवंत ने अभिनेता प्रभु दयाल के साथ दूसरा विवाह कर लिया। प्रभु दयाल के साथ उन्होंने कई फ़िल्मों में भी काम किया।



आज नलिनी जयवंत जी के 92वें जन्म दिवस पर हम सब उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं।


~ आज की बुलेटिन कड़ियाँ ~














आज की बुलेटिन में बस इतना ही कल फिर मिलेंगे तब तक के लिए शुभरात्रि। सादर ... अभिनन्दन।। 

शनिवार, 17 फ़रवरी 2018

बैंक की साख पर बट्टा है ये घोटाला : ब्लॉग बुलेटिन


नमस्कार साथियो,
जनता अपनी मेहनत की कमाई को बैंकों में जमाकर निश्चिन्त हो जाती है. अब जबकि पंजाब नेशनल बैंक का घोटाला सामने आया है तबसे बैंकों की साख पर प्रश्नचिन्ह लग गया है. पीएनबी का घोटाला हीरा कारोबारी की कंपनी और बैंक अधिकारी की मिलीभगत से 11 हज़ार करोड़ रुपए से अधिक का घोटाला सामने आया है. ये घोटाला मुंबई की एक ब्रांच में हुआ. इस घोटाले में हीरा कारोबारी नीरव मोदी और उसके साथी दोषी पाए गए हैं साथ ही पंजाब नेशनल बैंक के कुछ अधिकारियों की भी मिलीभगत सामने आई है. नीरव मोदी और उनके साथियों ने सन 2011 में बिना तराशे हुए हीरे आयात करने के लिए पंजाब नेशनल बैंक की मुंबई स्थित एक ब्रांच से संपर्क किया. सम्बंधित शाखा से गारंटी पत्र या लेटर ऑफ़ अंडरटेकिंग (LoU) जारी किये गए. 


कोई बैंक विदेश से आयात को लेकर होने वाले भुगतान के लिए गारंटी पत्र या लेटर ऑफ़ अंडरटेकिंग (LoU) जारी करता है. इसका ये मतलब होता है कि बैंक किसी कंपनी के विदेश में मौजूद सप्लायर को 90 दिन के लिए भुगतान करने को राज़ी हो जाता है और बाद में पैसा कंपनी को चुकाना होता है. पंजाब नेशनल बैंक के कुछ कर्मचारियों ने कथित तौर पर नीरव मोदी की कंपनियों को फ़र्ज़ी LoU जारी किए और ऐसा करते वक़्त उन्होंने बैंक मैनेजमेंट को अंधेरे में रखा. इन्हीं फ़र्ज़ी LoU के आधार पर भारतीय बैंकों की विदेशी शाखाओं ने पंजाब नेशनल बैंक को लोन देने का फ़ैसला किया. बैंक अधिकारियों ने जारी किये LoU की जानबूझकर कोर बैंकिंग सिस्टम में एंट्री नहीं की गई ताकि बैंक उच्च अधिकारियों को इसके बारे में जानकारी ही ना हो पाए.
इन लोगों ने एक क़दम आगे जाकर सोसाइटी फ़ॉर वर्ल्डवाइड इंटरबैंक फ़ाइनेंशियल टेलीकम्युनिकेशन या स्विफ़्ट (SWIFT) का नाजायज़ फ़ायदा उठाना शुरू किया. स्विफ्ट एक तरह का इंटर-बैंकिंग मैसेजिंग सिस्टम है जो विदेशी बैंक पैसा जारी करने से पहले लोन ब्योरा पता लगाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है. इसके इस्तेमाल से दोनों बैंक शाखाओं में आपस में विश्वास बना रहता है. जिससे वे बिना किसी अविश्वास के लेन-देन का कार्य करते रहते हैं. शाखा प्रबंधक द्वारा लेनदेन के लिए वैश्विक वित्तीय संदेश सेवा स्विफ्ट का इस्तेमाल किया. स्विफ्ट एकाउंट का उपयोग किये जाने के चलते भारतीय बैंकों की विदेशी शाखाओं को कोई शक़ नहीं हुआ और उन्होंने नीरव मोदी की कंपनियों को फ़ॉरेक्स क्रेडिट जारी कर दिया.
नीरव मोदी और उसके सहयोगियों की कम्पनियाँ बीती पांच जनवरी तक इसी विधि से पीएनबी के साथ लेनदेन करती रही. इस फर्जीवाड़े का खुलासा तब हुआ जब पीएनबी के शाखा प्रबंधक गोकुलना‌थ शेट्टी सात साल तक एक ही पद पर रहने के बाद रिटायर हुए. यह बैंकिग गाइडलाइन सीवीसी का उल्लंघन करता है क्योंकि नियमानुसार बैंकों को नियमित रूप से दो या तीन साल पर तबादला करना होता है. जबकि पीएनबी की यह कोर ब्रांच और संवदेनशील ब्रांच होने के बाद भी यहां के मैनेजर का ट्रांसफर होने के बाद भी रोका जाता रहा.
इसी वर्ष 16 जनवरी को नीरव मोदी से जुड़ी कंपनियों ने बैंक को संपर्क कर बायर्स क्रेडिट की मांग की जिससे वे अपने विदेश के कारोबारियों को भुगतान कर सकें. नये ब्रांच मैनेजर ने इसके उनसे उतनी ही नकदी की मांग की तो कंपनियों के अधिकारियों ने जवाब दिया कि वे सन 2010 से इस तरह की सुविधा पाते आये हैं. उन्होंने इसके लिए कभी नकद भुगतान नहीं किए. इसके बाद ही सारा मामला पकड़ में आया. नए अधिकारियों ने ये ग़लती पकड़ ली और स्कैम से पर्दा हटाने के लिए आंतरिक जांच शुरू कर दी. पंजाब नेशनल बैंक ने खुलासा किया कि उसने 1.77 अरब डॉलर (करीब 11,400 करोड़ रुपये) के घोटाले को पकड़ा है. इस मामले में अरबपति हीरा कारोबारी नीरव मोदी ने कथित रूप से बैंक की मुंबई शाखा से फ़र्ज़ी गारंटी पत्र (LoU) हासिल कर अन्य भारतीय ऋणदाताओं से विदेशी ऋण हासिल किया. इस संबंध में बैंक ने अपने 10 कर्मचारियों को निलंबित कर दिया है और इस मामले की शिकायत केंद्रीय जांच एजेंसी (सीबीआई) से की है.
हाल फ़िलहाल तो कहा जा रहा है कि इस घोटाले का प्रभाव अन्य बैंकों पर नहीं पड़ेगा किन्तु अभी कुछ भी कहना अंतिम रूप से सही नहीं लगता है. इस बारे में सरकार को, जान एजेंसी को पर्याप्त जाँच करनी चाहिए ताकि जनता का बैंकों पर विश्वास बना रहे.  

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शुक्रवार, 16 फ़रवरी 2018

दादा साहेब फाल्के और ब्लॉग बुलेटिन

सभी हिन्दी ब्लॉगर्स को मेरा सादर नमस्कार।
दादा साहब फाल्के
दादा साहेब फाल्के (अंग्रेज़ी: Dada Saheb Phalke, जन्म: 30 अप्रैल, 1870; मृत्यु: 16 फ़रवरी, 1944) प्रसिद्ध फ़िल्म निर्माता-निर्देशक एवं पटकथा लेखक थे जो भारतीय सिनेमा के पितामह की तरह माने जाते हैं। दादा साहब फाल्के की सौंवीं जयंती के अवसर पर दादा साहेब फाल्के पुरस्कार की स्थापना वर्ष 1969 में की गई थी। दादा साहेब फाल्के पुरस्कार भारतीय सिनेमा का सबसे बड़ा पुरस्कार है, जो आजीवन योगदान के लिए भारत की केंद्र सरकार की ओर से दिया जाता है।



आज दादा साहेब फाल्के जी की 74वीं पुण्यतिथि पर हम सब उन्हें शत शत नमन करते हैं।


~ आज की बुलेटिन कड़ियाँ ~












आज की बुलेटिन में बस इतना ही कल फिर मिलेंगे तब तक के लिए शुभरात्रि। सादर ... अभिनन्दन।।

गुरुवार, 15 फ़रवरी 2018

हम भारतियों की अंध श्रद्धा

प्रिय ब्लॉगर मित्रों,
प्रणाम |
हमारे देश की सबसे बड़ी अंध श्रद्धा... शादी कर दो लड़का सुधर जायगा। और दूसरी अंध श्रद्धा... लड़का शादी के पहले बहुत अच्छा था, शादी के बाद ही बिगड़ा है। और तीसरी अंध श्रद्धा... जिसे सुनकर लड़के के नीचे धरती और आसमान फट जाता है ...
"हमारी बेटी तो गाय है।"
😮😯😲😮😯😲


सादर आपका 
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बुधवार, 14 फ़रवरी 2018

मधुबाला और ब्लॉग बुलेटिन

सभी हिन्दी ब्लॉगर्स को सादर नमस्कार। 
मधुबाला
मधुबाला (अंग्रेज़ी: Madhubala, उर्दू: مدھو بال, पूरा नाम- मुमताज़ जहाँ बेगम देहलवी, जन्म- 14 फ़रवरी 1933 दिल्ली, मृत्यु- 23 फ़रवरी 1969 मुम्बई, महाराष्ट्र) एक प्रसिद्ध भारतीय फ़िल्म अभिनेत्री हैं। मधुबाला भारतीय फ़िल्म इतिहास की सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्रियों में से एक हैं। मुग़ल-ए-आज़म', 'हावडा ब्रिज', 'काला पानी' तथा 'चलती का नाम गाडी जैसी फ़िल्में आज भी सिनेप्रेमियों के दिल के काफ़ी क़रीब है।


आज मधुबाला जी के 85वें जन्म दिवस पर हम सब श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं।


~ आज की बुलेटिन कड़ियाँ ~













आज की बुलेटिन में बस इतना ही कल फिर मिलेंगे तब तक के लिए शुभरात्रि। सादर ... अभिनन्दन।।

मंगलवार, 13 फ़रवरी 2018

ब्लॉग की भागीरथी : विशेष ब्लॉग-बुलेटिन

ज़माना चाहे केतनो एडभांस हो जाए, अन्धबिस्वास खतम नहीं होता है अऊर लोग अजीब अजीब तरह का अन्धबिस्वास पालने लगता है. अब ई अन्धबिस्वास का न गोड़ होता है न हाथ, मगर चलता त है. अब बताइये कि दही खाकर जाने से काम सफल होता है, त इसमें दही का कमाल है कि ऊ आदमी का, जो मेहनत किया! करिया बिलाई के रास्ता काटने से खतरा. सोचिये कि कहीं गलती से बिलाई का एक्सीडेंट हो गया त ऊ बिलाई का सोचेगी. लेकिन हम त बिलाई रास्ता काट जाए त जानकर पार कर लेते हैं कि रास्ता में आने-जाने वाला मुसाफिर लोग को दिक्कत न हो.

अन्धबिस्वास का सम्बन्ध खाली आदमी, जानवर या छींकने-खांसने भर से नहीं है, बल्कि आँकड़ा यानि नंबर से भी है. हस्पताल में तेरह नंबर का बेड नहीं होता है अऊर अभी जब हम फ़्लैट खरीदने गए त देखे कि उसमें भी १३वां फ्लोर नहीं होता है. बहुत सा लोग ई सब चक्कर में पडता है.

अब हमसे कोई कहे त हमको १३ नम्बर से कोई सिकायत नहीं है. अऊर होना भी नहीं चाहिए. बचपन में मास्टर लोग सजा देने के लिये तेरह का पहाड़ा पूछते थे. मगर हमको मुँहजबानी याद था, त काहे घबराएं हम. अब आज तेरह तारीख है, त सब लोग छुट्टी लेकर घरे बइठ त नहीं जाएगा.

ई सब छोड़ दीजिए, अऊर सोचिये कि हम आपको अगर बताएँ कि आज फरवरी महीना का तेरह तारीख है त आप का सोचेंगे?? अब ई मत कहियेगा कि आज हम एक दिन के हो गए थे. चलिए हम बता देते हैं – 


आज के दिन हमारे ब्लॉग-बुलेटिन की बरिष्ठ सदस्य, हम सब की दीदी अऊर आप लोगों को ब्लॉग के जादुई दुनिया का सैर करवाने वाली रश्मि प्रभा जी का जनमदिन है.

दीदी के बेक्तित्व के बारे में कहने के लिये एक पोस्ट पूरा नहीं पडेगा, एतना बिस्तृत है इनका बेक्तित्व. दादी-नानी का दायित्व निभाते हुए भी साहित्त के प्रति अपना दायित्व निभाना नहीं भूलती हैं. एगो लगातार बहते रहने वाला नदी के धारा के तरह बिना रुके अपना सिरजन संसार में मगन रहती हैं. कभी पौराणिक पात्र के अस्थान पर अपने आप को रखकर इतिहास से सवाल पूछती हैं, कभी अपने जवाब से पूरा इतिहास को चुनौती देती हैं. अपना जीवन का बिसाल अनुभव छोटा छोटा बक्तव्य में सारा दुनिया के साथ बांटती हैं.

रश्मि दीदी का जीवन एतना उतार चढ़ाव से भरा रहा है कि अगर कोनो उपन्यासकार को मौक़ा मिलता त ऊ अइसा उपन्यास लिख देता कि जिसको न जाने केतना सम्मान, पुरस्कार अऊर का कहते हैं बेस्ट-सेलर का दर्जा मिल जाता. का मालूम कोई लिखकर पुरस्कार भी पा चुका होगा. मगर दुनिया का एही रीत है कि सफलता के सीढी पर चढता हुआ अदमी नीचे वाला सीढी को पैर से दबाता है अऊर ऊपरवाला को चूमता जाता है. उपन्यास सफल हो जाए त नाम लेखक का, किसको याद रहता है कि उसमें कऊन चरित्र था, का कहानी था, घटना का था.

खैर रश्मि दी का सादगी उनका सबसे सरल परिचय है. अपना बहुत सा कबिता ऊ हमको भेजती हैं, उसपर हमरा बिचार पूछती हैं, हमसे बिमर्स करती हैं अऊर हमारा सुझाया हुआ सुधार चाहे परिबर्तन करते हुये तनिक्को संकोच नहीं करती हैं. नहीं त इहाँ लोग के अहंकार का बैलून एतना भरा हुआ होता है कि आपके आलोचना का सुई उसमें बिस्फोट करने के लिये काफी होता है, अऊर त अऊर, जिन्नगी भर के लिये बोलचाल बन्द हो जाता है सो अलग.

खैर जाने दीजिये, आज के दिन जस्न का दिन है. इसलिये ब्लॉग-बुलेटिन के टीम के साथ-साथ सब पाठक लोग मिलकर सुभकामना का सोर मचाएँ उस भागीरथी के लिये जिसका एक-एक लहर कबिता के छन्द से बना है!



हैप्पी बर्थ-डे, रश्मि दी !!!

                                      सलिल वर्मा


मेरी भावनायें...: इससे ऊपर कोई परिचय क्या ?



सोमवार, 12 फ़रवरी 2018

जियो ... खूब जियो ... सलिल भाई



ब्लॉग से फेसबुक, फेसबुक से मोबाइल, मोबाइल से वाट्सएप्प ... मिले मुझे सलिल भाई . विनम्रता, स्पष्टता, शालीनता से सामना होता रहा और दिल से दुआएँ निकलती रहीं . अब जब आज जन्मदिन है तब तो सर पर हाथ रखना ही है और कहना है ... खुदा दिलजलों की नज़र से बचाए, फिर भी दिलजले आ ही जाएँ राह में तो मुझसे बचाए .
हाल में सलिल भाई ने एक लिंक भेजा, और मैं हेमंत कुमार की आवाज़ में खो गई , आप इतना सोचिये मत, सुन ही लीजिये




सलिल भाई के लेखन के कायल तो हम रहे ही, अभिनय और गायन में भी वे मंजे हुए हैं  ... जिन्होंने नहीं देखा हो, उनको देखना चाहिए




गीतों, रचनाओं, और बेजोड़ कलाकारी की जन्मदिन पार्टी है , आज सबलोग इस बिहारी के रंग में रंग जाइये , बिल्कुल होली के रंगों की तरह , आइये बढ़ते जाइये





अब इनकी कलम 

चलते चलते कुछ बातें अपने लिए स्वयं सलिल भाई की कलम से -

मेरी फ़ोटो
हमरा नामः सलिल वर्मा,वल्दः शम्भु नाथ वर्मा,साकिनः कदम कुँआ, पटना,हाल साकिनः भावनगर, गुजरात हम तीन माँ के बेटा हैं,बृज कुमारी हमको जनम देने वाली,पुष्पा अर्याणी हमरे अंदर के कलाकार को जन्म देने वाली,अऊर गंगा माँ जिसके गोदी में बचपन बीता अऊर कॉलेज (साइंस कॉलेज/पटना विश्वविद्यालय) की पढाई किए.बस ई तीन को निकाल लिया तो हम ही नहीं रहेंगे...

रविवार, 11 फ़रवरी 2018

भूखा बुद्धिजीवी और बेइमान नेता

प्रिय ब्लॉगर मित्रों,
प्रणाम |
आज का ज्ञान :-

एक भूखा बुद्धिजीवी किसी बेइमान नेता की तुलना में देश को ज्यादा क्षति पहुँचाता है ।

सादर आपका

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अब आज्ञा दीजिये ...

जय हिन्द !!!

शनिवार, 10 फ़रवरी 2018

रिवाइंड करके सुनना





ईश्वर की पीठ पर लिखो
या लिखो मेरी हथेली पर
या ... बोलो किसी बन्द कमरे में
जब्त कर दो दीवारों पे अपनी आवाज़
रिवाइंड करके सुनना
... 

टेडी बियर

अपराधियों का विचारधाराकरण -------mangopeople

जीवन में दुःख क्यों है?" - ओशो | OshoDhara


स्त्री द्वारा किया गया प्रेम और पुरूष द्वारा किया गया प्रेम,
दोनों में एक बुनियादी अंतर है.
पुरूष अक्सर अपने आत्म-सम्मान के मामले में डटे रहते हैं,
उससे समझौता किसी हाल में नहीं करते.
स्त्री अपनी जो चीज़ सबसे पहले सौंप देती है, वो है आत्मसम्मान.
फिर स्त्री चाहे कितनी ही काबिल हो, गुणी हो !
हालांकि इस बात का जनरलाइजेशन नहीं किया जा सकता कि सभी केसेस ऐसे ही हों, क्‍योंकि सभी पुरूष भी कभी एक जैसे नहीं होते.
कुछ तो अपने पार्टनर को उठाने के लिए स्वयं को भी हार जाते हैं.
लेकिन अधिकांश झुकना, टूटना, अपना वजूद ख़त्म कर देना आदि सजाएं स्त्री का ही मुकद्दर हैं.
सभी अमृताओं की किस्मत में इमरोज़ नहीं होते...
मेरी किस्मत में है 💜
आकार में मत ढूंढना मुझे
------------------------------
फकीर प्रेम में था
गुथी हुई मिट्टी को देखता रहा
आकार नहीं, मिट्टी पर भरोसा था उसे
मिट्टी कुछ भी नहीं है इसलिए कुछ भी हो जाती है
अंधेरे में दीया बन जाएगी और प्‍यास में घड़ा
बच्‍चे को देखकर खिलौना हो जाती है मिट्टी...
फकीर प्रेम में है
बहते हुए पानी को देखता है
किस आकार में ढल जाएगा, कौन जाने
आकार में होकर भी आकार नहीं लेगा, बस ढलेगा
जब भी आकार टूटेगा, बहेगा, पानी है यह
पानी होना आकार में हो सकना है, आकार हो जाना नहीं...
फकीर प्रेम में होगा तब भी
ढलते सूरज को देखेगा देर तक
जब जाते हुए सब आकार समेट लेती है रोशनी
रोशनी का आकार तय नहीं करते दृश्‍य
दृश्‍यों को आकार देती है पर
रोशनी के आकार पर कोई दावा नहीं है किसी का
जान गया है, रोशनी ही तो है,
जो हर आकार में है बिना आकार के...
फकीर होना ही प्रेम में होना है
ना फ़कीरी को कोई आकार, ना प्रेम का
प्रेम आकार तोड़कर नहीं आता, आकारों से मुक्‍त होकर आता है
उम्र के हवा होते जाने के साथ शुरु होता जाता है जीवन
हवा का आकार तुमने सोच भर लिया, हुआ नहीं...
फ़कीर प्रेम में रह जाएगा शेष
जबकि तय है कि अशेष नहीं है कुछ भी
रहते रहने का दावा आकार तक है,
शेष होना, आकार से मुक्‍त हो जाना है, शेष रहेंगे
जरा सी मिट्टी, जरा सा जल, जरा सी रोशनी और जरा सी हवा
यही तो प्रेम है... जोर से ठहाका लगाता है फ़कीर
तुम आवाज सुनना...आवाज़ का आकार मत ढूंढना बस

लेखागार