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सोमवार, 27 मार्च 2017

विश्व रंगमंच दिवस और ब्लॉग बुलेटिन

सभी ब्लॉगर मित्रों को मेरा सादर नमस्कार।
विश्व रंगमंच दिवस
विश्व रंगमंच दिवस की स्थापना 1961 में इंटरनेशनल थियेटर इंस्टीट्यूट (International Theatre Institute) द्वारा की गई थी। रंगमंच से संबंधित अनेक संस्थाओं और समूहों द्वारा भी इस दिन को विशेष दिवस के रूप में आयोजित किया जाता है। इस दिवस का एक महत्त्वपूर्ण आयोजन अंतर्राष्ट्रीय रंगमंच संदेश है, जो विश्व के किसी जाने माने रंगकर्मी द्वारा रंगमंच तथा शांति की संस्कृति विषय पर उसके विचारों को व्यक्त करता है। 1962 में पहला अंतर्राष्ट्रीय रंगमंच संदेश फ्रांस की जीन काक्टे ने दिया था। वर्ष 2002 में यह संदेश भारत के प्रसिद्ध रंगकर्मी गिरीश कर्नाड द्वारा दिया गया था।

जीवन के रंगमंच पर रंगमंच की मूल विधाओं का सीधा नाता है ,वे आईने की रूप में समाज की अभिवायाकतियो को व्यक्त करती है, सभ्यता के विकास से रंगमंच की मूल विधाओ में परिवर्तन स्वभाविक है। किन्तु लोकरंग व लोकजीवन की वास्तविकता से दूर इन दिनों आधुनिक माध्यमों यथा टेलीविज़न, सिनेमा और वेबमंच ने सांस्कृतिक गिरावट व व्यसायिकता को मूल मंत्र बना लिया है जिससे मूल विधाएँ और उनके प्रस्तुतिकारों को वह प्रतिसाद नहीं मिल पाया है जिसके वो हक़दार हैं। मानवता की सेवा में रंगमंच की असीम क्षमता समाज का सच्चा प्रतिबिम्बन है। रंगमंच शान्ति और सामंजस्य की स्थापना में एक ताकतवर औज़ार है। लोगों की आत्म-छवि की पुर्नरचना अनुभव प्रस्तुत करता है, सामूहिक विचारों की प्रसरण में, समाज की शान्ति और सामंजस्य का माध्यम है, यह स्वतः स्फूर्त मानवीय, कम खर्चीला और अधिक सशक्त विकल्प है व समाज का वह आईना है जिसमें सच कहने का साहस है। वह मनोरंजन के साथ शिक्षा भी देता है। भारत में भारतेन्दु हरिश्चन्द्र के नाटकों व मंडली से देश प्रेम तथा नवजागरण की चेतना ने तत्कालीन समाज में उद्भूत की, जो आज भी अविरल है। 'अन्धेर नगरी' जैसा नाटक कई बार मंचित होने के बाद भी उतना ही उत्साह देता है। कालिदास रचित अभिज्ञान शाकुंतलम्, मोहन राकेश का आषाढ़ का एक दिन, मोलियर का माइजर, धर्मवीर भारती का 'अंधायुग', विजय तेंदुलकर का 'घासीराम कोतवाल' श्रेष्ठ नाटकों की श्रेणी में हैं। भारत में नाटकों की शुरूआत नील दर्पण, चाकर दर्पण, गायकवाड और गजानंद एण्ड द प्रिंस नाटकों के साथ इस विधा ने रंग पकड़ा।



अब चलते हैं आज की बुलेटिन की ओर...














आज की बुलेटिन में सिर्फ इतना ही कल फिर मिलेंगे, तब तक के लिए शुभरात्रि। सादर ... अभिनन्दन।।

रविवार, 26 मार्च 2017

महादेवी वर्मा और ब्लॉग बुलेटिन

सभी ब्लॉगर मित्रों को मेरा सादर नमस्कार।
महादेवी वर्मा (अंग्रेज़ी:Mahadevi Verma, जन्म: 26 मार्च, 1907, फ़र्रुख़ाबाद - मृत्यु: 11 सितम्बर, 1987, प्रयाग) हिन्दी भाषा की प्रख्यात कवयित्री हैं। महादेवी वर्मा की गिनती हिन्दी कविता के छायावादी युग के चार प्रमुख स्तंभ सुमित्रानन्दन पन्त, जयशंकर प्रसाद और सूर्यकान्त त्रिपाठी निराला के साथ की जाती है। आधुनिक हिन्दी कविता में महादेवी वर्मा एक महत्त्वपूर्ण शक्ति के रूप में उभरीं। महादेवी वर्मा ने खड़ी बोली हिन्दी को कोमलता और मधुरता से संसिक्त कर सहज मानवीय संवेदनाओं की अभिव्यक्ति का द्वार खोला, विरह को दीपशिखा का गौरव दिया, व्यष्टिमूलक मानवतावादी काव्य के चिंतन को प्रतिष्ठापित किया। महादेवी वर्मा के गीतों का नाद-सौंदर्य, पैनी उक्तियों की व्यंजना शैली अन्यत्र दुर्लभ है।

(साभार : http://bharatdiscovery.org/india/महादेवी_वर्मा)

आज महान कवियित्री महादेवी वर्मा जी की 110वीं जयंती पर हम सब उन्हें शत शत नमन करते है। सादर।।

अब चलते हैं आज की बुलेटिन की ओर...

मुख्य मंत्री योगी की प्राथमिकताएं

गरमी की गरमाहट

EVM का पहली बार कब इस्तेमाल हुआ?

सोसल मीडिया की मजदूरी

नीला आकाश सफेद बादल

दृष्टिगत प्रेम' प्रेम नहीं था

प्राकृतिक अभियंता

किसान का पैगाम


आज की बुलेटिन में सिर्फ इतना ही कल फिर मिलेंगे, तब तक के लिए शुभरात्रि। सादर ... अभिनन्दन।।

शनिवार, 25 मार्च 2017

खुफिया रेडियो चलाने वाली गांधीवादी क्रांतिकारी - उषा मेहता

प्रिय ब्लॉगर मित्रों,
प्रणाम |

भारत छोड़ो आंदोलन के समय खुफिया कांग्रेस रेडियो चलाने के कारण पूरे देश में विख्यात हुई उषा मेहता ने आजादी के आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई थी और आजादी के बाद वह गांधीवादी दर्शन के अनुरूप महिलाओं के उत्थान के लिए प्रयासरत रही। 
उषा ने भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान अपने सहयोगियों के साथ 14 अगस्त 1942 को सीक्रेट कांग्रेस रेडियो की शुरूआत की थी। इस रेडियो से पहला प्रसारण भी उषा की आवाज में हुआ था। यह रेडियो लगभग हर दिन अपनी जगह बदलता था, ताकि अंग्रेज अधिकारी उसे पकड़ न सकें। इस खुफिया रेडियो को डा. राममनोहर लोहिया, अच्युत पटवर्धन सहित कई प्रमुख नेताओं ने सहयोग दिया। रेडियो पर महात्मा गांधी सहित देश के प्रमुख नेताओं के रिकार्ड किए गए संदेश बजाए जाते थे।
तीन माह तक प्रसारण के बाद अंतत: अंग्रेज सरकार ने उषा और उनके सहयोगियों को पकड़ा लिया और उन्हें जेल की सजा दी गई। गांधी शांति प्रतिष्ठान के सचिव सुरेन्द्र कुमार के अनुसार उषा एक जुझारु स्वतंत्रता सेनानी थी जिन्होंने आजादी के आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई। वह बचपन से ही गांधीवादी विचारों से प्रभावित थी और उन्होंने महात्मा गांधी द्वारा चलाए गए कई कार्यक्रमों में बेहद रुचि से कार्य किया।
आजादी के बाद उषा मेहता गांधीवादी विचारों को आगे बढ़ाने विशेषकर महिलाओं से जुडे़ कार्यक्रमों में काफी सक्रिय रही। उन्हें गांधी स्मारक निधि की अध्यक्ष चुना गया और वह गांधी शांति प्रतिष्ठान की सदस्य भी थीं। 25 मार्च 1920 को सूरत के एक गांव में जन्मी उषा का महात्मा गांधी से परिचय मात्र पांच वर्ष की उम्र में ही हो गया था। कुछ समय बाद राष्ट्रपिता ने उनके गांव के समीप एक शिविर का आयोजन किया जिससे उन्हें बापू को समझने का और मौका मिला। इसके बाद उन्होंने खादी पहनने और आजादी के आंदोलन में भाग लेने का प्रण किया।
उन्होंने बंबई विश्वविद्यालय से दर्शनशास्त्र में स्नातक डिग्री ली और कानून की पढ़ाई के दौरान वह भारत छोड़ो आंदोलन में पूरी तरह से सामाजिक जीवन में उतर गई। सीक्रेट कांग्रेस रेडियो चलाने के कारण उन्हें चार साल की जेल हुई। जेल में उनका स्वास्थ्य बहुत खराब हो गया और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। बाद में 1946 में रिहा किया गया।
आजादी के बाद उन्होंने गांधी के सामाजिक एवं राजनीतिक विचारों पर पीएचडी की और बंबई विश्वविद्यालय में अध्यापन शुरू किया। बाद में वह नागरिक शास्त्र एवं राजनीति विभाग की प्रमुख बनी। इसी के साथ वह विभिन्न गांधीवादी संस्थाओं से जुड़ी रही। भारत सरकार ने उन्हें पद्मविभूषण से सम्मानित किया। उषा मेहता का निधन 11 अगस्त 2000 को हुआ।

आज उषा मेहता जी की ९७ वीं जयंती के अवसर पर ब्लॉग बुलेटिन टीम और हिन्दी ब्लॉग जगत की ओर से हम सब उन्हें शत शत नमन करते हैं | 

सादर आपका
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हाय रे..मुझसे रोटियां नहीं फुलती हैं....

पेड़ों के नीचे "पवित्र कूड़े" का ढेर

शब्द से ख़ामोशी तक – अनकहा मन का (९)

तुम्हारी भौजाई ने घुघुरी बनाया है, आ जाना

मेरी १० वीं वर्षगांठ 

निजता को जो पा जाये

जिन्दगी कितनी ही जाने इक कहानी हो गयीं

हिन्दी सिनेमा में होली के रंग

क्या करें सर ....पढ़ने का मूड नही हैं.....

मन के पंछी कहीं दूर चल

तालीस पत्र के गुण फायदे उपयोग 

~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
अब आज्ञा दीजिये ... 

जय हिन्द !!! 

शुक्रवार, 24 मार्च 2017

पेन्सिल,रबर और ज़िन्दगी

प्रिय ब्लॉगर मित्रों,
प्रणाम |

कभी आप ने गौर किया कि ... 


हम गलतियाँ करना तो उस दिन से शुरू कर देते है जिस दिन से पेन्सिल के साथ "रबर" भी दे दी जाती है !!

पर काश कि जीवन की हर गलती को इस रबर से मिटा कर सुधारा जा सकता ... काश !!

ज़रा सोचिएगा !!

सादर आपका
शिवम् मिश्रा  

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हिन्दी भाषा में रोमियो शब्द के तीन आशय होते हैं-हिन्दी व्यंग्य चिंत्तन

मसख़रों का ज़माना ...

न जाने कौन सी तकलीफ लेकर दौड़ता होगा -सतीश सक्सेना

{३३८} डगर जीवन की

परिप्रेक्ष्य : महाश्वेता देवी : गरिमा श्रीवास्तव

हारे हुए नेताजी से एक्सक्लूसिव बातचीत !

जागो, हथेली के बाहर एक दुनिया और भी है!!!

हमारे सहजीवन की पहली सब से बड़ी खुशी

प्यार किया है, जिन्दगी भर निभायेंगे !!!

" प्यार की प्रकृति ........."

दुनियावालों...मैंने चोरी की है....

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अब आज्ञा दीजिये ...

जय हिन्द !!! 

गुरुवार, 23 मार्च 2017

क्या वीरों की आज कूच करने की तैयारी है? ब्लॉग बुलेटिन

नमस्कार साथियो,
आज 23 मार्च, शहीद दिवस. देश की आज़ादी के लिए तीन युवा बेटे भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को आज ही के दिन अंग्रेजी हुकूमत ने फाँसी दे दी थी. तीनों वीर पुत्रों को श्रद्धा-सुमन अर्पित हैं.


इन तीन शहीदों के बारे में शायद ही ऐसा कुछ हो जो कोई न जानता हो. उनकी शहादत, उनकी वीरता, देश के प्रति उनका ज़ज्बा, आज़ादी के प्रति उनकी लगन, उनकी वैचारिकता आदि-आदि आज सबके सामने है, सबके बीच है.

बहुत कुछ न कहते हुए श्रीकृष्ण सरल द्वारा रचित ग्रन्थ क्रांति गंगा से उनकी रचना के चंद पद आपके समक्ष प्रस्तुत हैं. यह कविता उन्होंने भगत सिंह, सुखदेव, राजगुरु को श्रद्धांजलिस्वरूप लिखी थी.

आज लग रहा कैसा जी को कैसी आज घुटन है
दिल बैठा सा जाता है, हर साँस आज उन्मन है
बुझे बुझे मन पर ये कैसी बोझिलता भारी है
क्या वीरों की आज कूच करने की तैयारी है?

हाँ सचमुच ही तैयारी यह, आज कूच की बेला
माँ के तीन लाल जाएँगे, भगत न एक अकेला
मातृभूमि पर अर्पित होंगे, तीन फूल ये पावन,
यह उनका त्योहार सुहावन, यह दिन उन्हें सुहावन।

फाँसी की कोठरी बनी अब इन्हें रंगशाला है
झूम झूम सहगान हो रहा, मन क्या मतवाला है।
भगत गा रहा आज चले हम पहन वसंती चोला
जिसे पहन कर वीर शिवा ने माँ का बंधन खोला।

झन झन झन बज रहीं बेड़ियाँ, ताल दे रहीं स्वर में
झूम रहे सुखदेव राजगुरु भी हैं आज लहर में।
नाच नाच उठते ऊपर दोनों हाथ उठाकर,
स्वर में ताल मिलाते, पैरों की बेड़ी खनकाकर।

पुनः वही आलाप, रंगें हम आज वसंती चोला
जिसे पहन राणा प्रताप वीरों की वाणी बोला।
वही वसंती चोला हम भी आज खुशी से पहने,
लपटें बन जातीं जिसके हित भारत की माँ बहनें।

उसी रंग में अपने मन को रँग रँग कर हम झूमें,
हम परवाने बलिदानों की अमर शिखाएँ चूमें।
हमें वसंती चोला माँ तू स्वयं आज पहना दे,
तू अपने हाथों से हमको रण के लिए सजा दे।

अंत में शहीद भगत सिंह द्वारा अकसर गुनगुनाये जाने वाले शेर के साथ आज की बुलेटिन प्रस्तुत है.....
जबसे सुना है मरने का नाम जिन्दगी है
सर से कफन लपेटे कातिल को ढूँढ़ते हैं।।

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बुधवार, 22 मार्च 2017

विश्व जल दिवस और ब्लॉग बुलेटिन

सभी ब्लॉगर मित्रों को मेरा सादर नमस्कार।
विश्व जल दिवस प्रत्येक वर्ष 22 मार्च को मनाया जाता है। आज विश्व में जल का संकट कोने-कोने में व्याप्त है। लगभग हर क्षेत्र में विकास हो रहा है। दुनिया औद्योगीकरण की राह पर चल रही है, किंतु स्वच्छ और रोग रहित जल मिल पाना कठिन हो रहा है। विश्व भर में साफ़ जल की अनुपलब्धता के चलते ही जल जनित रोग महामारी का रूप ले रहे हैं। कहीं-कहीं तो यह भी सुनने में आता है कि अगला विश्व युद्ध जल को लेकर होगा। इंसान जल की महत्ता को लगातार भूलता गया और उसे बर्बाद करता रहा, जिसके फलस्वरूप आज जल संकट सबके सामने है। विश्व के हर नागरिक को पानी की महत्ता से अवगत कराने के लिए ही संयुक्त राष्ट्र ने "विश्व जल दिवस" मनाने की शुरुआत की थी।

विश्व जल दिवस का प्रारम्भ

'विश्व जल दिवस' मनाने की शुरुआत संयुक्त राष्ट्र ने वर्ष 1992 के अपने अधिवेशन में 22 मार्च को की थी। 'विश्व जल दिवस' की अंतरराष्ट्रीय पहल 'रियो डि जेनेरियो' में 1992 में आयोजित 'पर्यावरण तथा विकास का संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन' (यूएनसीईडी) में की गई थी, जिस पर सर्वप्रथम 1993 को पहली बार 22 मार्च के दिन पूरे विश्व में 'जल दिवस' के मौके पर जल के संरक्षण और रख-रखाव पर जागरुकता फैलाने का कार्य किया गया।

संकल्प का दिन

'22 मार्च' यानी कि 'विश्व जल दिवस', पानी बचाने के संकल्प का दिन है। यह दिन जल के महत्व को जानने का और पानी के संरक्षण के विषय में समय रहते सचेत होने का दिन है। आँकड़े बताते हैं कि विश्व के 1.5 अरब लोगों को पीने का शुद्ध पानी नहीं मिल रहा है। प्रकृति इंसान को जीवनदायी संपदा जल एक चक्र के रूप में प्रदान करती है, इंसान भी इस चक्र का एक महत्त्वपूर्ण हिस्सा हैं। चक्र को गतिमान रखना प्रत्येक व्यक्ति की ज़िम्मेदारी है। इस चक्र के थमने का अर्थ है, जीवन का थम जाना। प्रकृति के ख़ज़ाने से जितना पानी हम लेते हैं, उसे वापस भी हमें ही लौटाना है। हम स्वयं पानी का निर्माण नहीं कर सकते। अतः प्राकृतिक संसाधनों को दूषित नहीं होने देना चाहिए और पानी को व्यर्थ होने से भी बचाना चाहिए। 22 मार्च का दिन यह प्रण लेने का दिन है कि हर व्यक्ति को पानी बचाना है।

( साभार : http://bharatdiscovery.org/india/विश्व_जल_दिवस )


अब चलते हैं आज की बुलेटिन की ओर.....

मोबाइल पर निर्भर ज़िंदगी

नेट न्युट्र्लटी के लिए खतरा बनकर आया ऐड ब्लॉकिंग

आपकी आत्मा में किसी कला के लिए स्थान नहीं है, तो आप अपाहिज हैं : जीवन सिंह

गंगा-यमुना बचाने आया फैसला एक आदिवासी सोच से उपजा हुआ

ब्रह्मांड मे कितने आयाम ?

इसे बनाते मुसलमान हैं और स्वर फूंकते हैं हिन्दू

मोदी नहीं योगी मॉडल चाहिये ?

विकास की राह चलने से बदलेगी छवि

उधार लेने वाले..

बड़गूजर बनाम राघव द्वंद्व

"मास्टर दा" सूर्य सेन की १२३ वीं जयंती

ओ रे मन !

खुशी का मन्त्र

बेशरम होता है इसीलिये बेशर्मी से कह भी रहा होता है

यूपी में रहना है तो...


आज की बुलेटिन में बस इतना ही कल फिर मिलेंगे तब तक के लिए शुभरात्रि। सादर ... अभिनन्दन।।

मंगलवार, 21 मार्च 2017

रोना क्यूँ ?




शारीरिक संरचना की स्थिति किसी शिक्षा से नहीं बदल सकती 
अपने अंतस को दृढ करना है 
कि - गिरने से हार नहीं होती 
बिना गिरे संकल्प नहीं उभरता 
स्थापित होने से पहले खौफनाक तूफानों से जूझना होता है 
मन की मजबूती नए दरवाज़े खोलती है
तो रोना क्यूँ ? 

सोमवार, 20 मार्च 2017

विश्व गौरैया दिवस और ब्लॉग बुलेटिन

सभी ब्लॉगर मित्रों को मेरा सादर नमस्कार।
आज विश्व गौरैया दिवस है। विश्व गौरैया दिवस पहली बार वर्ष 2010 ई. में मनाया गया था। यह दिवस प्रत्येक वर्ष 20 मार्च को पूरी दुनिया में गौरैया पक्षी के संरक्षण के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए मनाया जाता है।

जैसा कि आप सबको विदित है की गौरैया आजकल अपने अस्तित्व के लिए हम मनुष्यों और अपने आस पास के वातावरण से काफी जद्दोजहद कर रही है। ऐसे समय में हमें इन पक्षियों के लिए वातावरण को इनके प्रति अनुकूल बनाने में सहायता प्रदान करनी चाहिए। तभी ये हमारे बीच चह चहायेंगे। गौरैया की घटती संख्या के कुछ मुख्य कारण है - भोजन और जल की कमी, घोसलों के लिए उचित स्थानों की कमी तथा तेज़ी से कटते पेड़ - पौधे। गौरैया के बच्चों का भोजन शुरूआती दस - पन्द्रह दिनों में सिर्फ कीड़े - मकोड़े ही होते है। लेकिन आजकल हम लोग खेतों से लेकर अपने गमले के पेड़ - पौधों में भी रासायनिक पदार्थों का उपयोग करते है जिससे ना तो पौधों को कीड़े लगते है और ना ही इस पक्षी का समुचित भोजन पनप पाता है। इसलिए गौरैया समेत दुनिया भर के हजारों पक्षी हमसे रूठ चुके है और शायद वो लगभग विलुप्त हो चुके है या फिर किसी कोने में अपनी अन्तिम सांसे गिन रहे है।

हम मनुष्यों को गौरैया के लिए कुछ ना कुछ तो करना ही होगा वरना यह भी मॉरीशस के डोडो पक्षी और गिद्ध की तरह पूरी तरह से विलुप्त हो जायेंगे। इसलिए हम सबको मिलकर गौरैया का संरक्षण करना चाहिए।


अब चलते हैं आज की बुलेटिन की ओर.....

साथी थी गौरैया...

बच्चों से चर्चा

अब राष्ट्रपति-चुनाव की रस्साकशी

लालसा बढ़ी, ज्यों-ज्यों स्थापित हुए

मणिशंकर अय्यर के महागठबंधन की कल्पना और योगी सरकार में मंत्री मोहसिन रजा

मुख्य मंत्री योगी आदित्यनाथ (योग से राजयोग)

राधानगर बीच @ हैवलॉक द्वीप

कौन यहाँ किसकी खातिर है

आज और बस आज ...

मौसम चुनावी


आज की बुलेटिन में बस इतना ही कल फिर तब तक के लिए शुभरात्रि। सादर ... अभिनन्दन।।

रविवार, 19 मार्च 2017

राजनीति का ये पक्ष गायब क्यों : ब्लॉग बुलेटिन

नमस्कार मित्रो,
आख़िरकार उत्तर प्रदेश में सरकार बन गई. आज शपथ ग्रहण कार्यक्रम भी संपन्न हो गया. हिन्दुत्वादी छवि रखने वाले योगी आदित्यनाथ प्रदेश के मुख्यमंत्री बनाये गए. उनके साथ दो उप-मुख्यमंत्री भी बनाये गए. इसका सभी लोग अपने-अपने स्तर पर अपना-अपना आकलन कर रहे हैं. नए मुख्यमंत्री के लिए आने वाला समय काफी कठिन साबित होने वाला है, जो यकीनन उनकी परीक्षा लेगा. एक तरफ जहाँ राम मंदिर निर्माण मुद्दा सामने आएगा वहीं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सबका साथ, सबका विकास को व्यावहारिक रूप से लागू करना भी होगा. ये तो आने वाला समय बताएगा कि योगी और उनका मंत्रिमंडल इसके अलावा अन्य मुद्दों पर कितना खरा उतरता है किन्तु आज शपथ ग्रहण पश्चात् मंच पर जो दृश्य उभर कर सामने आया वो व्यापक सन्देश देता है बशर्ते उस सन्देश को पूर्वाग्रह-रहित होकर देखा-समझा जाये.

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (मध्य में) बाँए उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और दांए उपमुख्यमंत्री दिनेश शर्मा 

लखनऊ में स्मृति उपवन में संपन्न शपथ ग्रहण समारोह के बाद मंच पर एक दूसरे से अभिवादन की श्रंखला में समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह यादव जी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी से बड़ी ही गर्मजोशी से मिले. मिलने के साथ-साथ उन्होने मोदी जी के कान में कुछ कहा. इसके बाद भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह द्वारा इशारा करके उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को बुलाकर नरेन्द्र मोदी जी से मिलने का इशारा किया. अखिलेश ने मुस्कुराकर मोदी जी से हाथ मिलाया साथ ही मोदी जी ने भी पूरे स्नेह से अखिलेश जी के कंधे को देर तक थपथपाया. इसी दौरान मुलायम सिंह ने भी हँसकर अखिलेश की ओर इशारा करते हुए कुछ कहा. पूरे चुनाव भर एक दूसरे के लिए अत्यधिक कटु शब्दों, वाक्यों, बयानों का इस्तेमाल करने वाले ये नेता आपस में किस तरह बिना किसी मनमुटाव के मिले ये सीखने वाली बात है. 


ये बातें ख़ास तौर से उन लोगों को सीखनी चाहिए जो राजनीति में दूर तक जाना चाहते हैं; जो जिला, तहसील, ब्लॉक, नगर की राजनीति करने में लगे हैं. ऐसे लोग जरा-जरा सी बात पर आपसी रंजिश निभाने लगते हैं. आपसी कटुता इस कदर बढ़ जाती है कि हत्याएँ तक हो जाती हैं. स्पष्ट है कि ये राजनीति नहीं है. समझना-सोचना-सीखना होगा कि जबकि राष्ट्रीय स्तर पर इन बड़े नेताओं में ऐसी कटुता नहीं दिखाई देती तो जरा-जरा से पद के लिए, छोटे-छोटे लाभ के लिए आपस में छोटे नेताओं में वैर-भाव क्यों पनप जाता है?

बहरहाल, उत्तर प्रदेश की नई सरकार को बधाई. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उनके मंत्रिमंडल को बधाई, शुभकामनायें कि उत्तर प्रदेश उत्तम प्रदेश के रूप में अपनी पहचान बनाये.

लीजिये, आज की बुलेटिन आपके समक्ष प्रस्तुत है.

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शनिवार, 18 मार्च 2017

यूपी का माफ़िया राज और नए मुख्यमंत्री

सुनने में आया कि उत्तर प्रदेश में लाखों विद्यार्थी परीक्षा नहीं देंगे क्योंकि उन्होंने परीक्षा की तैयारी ही नहीं की और नक़ल कॉन्ट्रैक्टर के जरिए परीक्षा पास होने का सपना पाल रखा था। अब सरकार बदलते ही सरकारी मशीनरी के केंद्र के हाथ में है सो सीधे जेल जाने का डर भी सताता होगा। इस मुद्दे को मैं सामाजिक मानता हूँ और बानवे में सरकार गिरने के बाद के चुनाव में राम लहर पर सवार भाजपा की सरकार सिर्फ इसी शिगूफे के कारण दुबारा सत्ता में नहीं आ पाई। मुलायम सिंह का चुनावी पैंतरा और मुस्लिम यादव समीकरण के कारण पूरी सोशल इंजीनियरिंग बिगड़ गयी। इस बार उत्तर प्रदेश ने चुनाव के बाद जब यह साफ़ किया कि वह आखिर बिहार से बेहतर और अलग क्यों है - इससे बेहतर क्या होगा कि जनता स्वयं को जातिवादी राजनीति से ऊपर निकलते हुए विकास के नाम पर वोट दे! 

बहरहाल नक़ल विरोधी अध्यादेश की बात करते हैं तो अब इसे क़ानून बनाने में कोई अड़चन न होगी। विधान परिषद में भाजपा ही नहीं किसी भी दल को बहुमत नहीं है सो देखते हैं कैसी स्थिति बनती है। यकीनी तौर पर पढ़ाई, शिक्षा को माफिया से निकालना होगा, नक़ल माफिया हैं... पूरा तंत्र है जो नेता मंत्री तक फल-फूल गया है। सरकार ही नहीं बाबूओं की पूरी फ़ौज बदलनी होगी। व्यापम को लेकर छाती पीटने वाले लोगों को अब "यादव भर्ती" घोटाले के लिए तैयार रहना चाहिए - अब सवाल किए जाएंगे कि आखिर हर थाने में यादव, अस्सी में छप्पन एसडीएम यादव कैसे। टोल माफिया, रेत माफिया, नक़ल माफिया, दारु माफिया.... लिस्ट बड़ी लंबी है। 

बहरहाल जो भी हो लेकिन उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बनने जा रहे योगी आदित्यनाथ के लिए चुनौती गंभीर होगी। हमारी तरफ से मोदी और उनकी पूरी टीम को शुभकामनाएं, यह लोकतंत्र का एक नया दौर है, मोदी का दौर है.....  

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शुक्रवार, 17 मार्च 2017

भारत के दो नायाब नगीनों की जयंती का दिन और ब्लॉग बुलेटिन

सभी ब्लॉगर मित्रों को मेरा सादर नमस्कार।
आज १७ मार्च है ... आज का दिन जुड़ा हुआ है भारत के दो नायाब नगीनों से ... एक हैं ... भारतीय बॉडी बिल्डिंग जगत में 'फादर ऑफ इंडियन बॉडी बिल्डिंग' के नाम से पहचाने जाने वाले स्वतंत्र भारत के पहले मिस्टर यूनिवर्स ख़िताब के विजेता मनोहर आइच और दूसरी हैं ... कल्पना चावला , पहली महिला भारतीय अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री और अंतरिक्ष शटल मिशन विशेषज्ञ।

आज इन दोनों की ही जयंती है। आइये थोड़ा जानते हैं इन दोनों ही के बारे में ...

भारत के इन दो नायाब नगीनों की जयंती के दिन हम सब उन्हें शत शत नमन करते हैं।


अब चलते हैं आज की बुलेटिन की ओर...

स्मृतियों में गाँव और गणगौर

आकाशीय बिजली क्या होती है?

जीवन में सबसे महत्वपूर्ण क्या है? – 2

विभिन्न देशो की मुद्राओं वैज्ञानिकों के या विज्ञान संबधित चित्र

रूढ़ियाँ-समाज और युवाओं की जिम्मेवारी...4

परमारों का विस्तार और आजादी के बाद परमार वंश

लोकतंत्र के भीतर गुंजाइश है लोकतंत्र पर हमले की...

काँग्रेस में हार की जिम्मेदारी लेने के लिए मचा घमसान

शांत खामोश शाम...

रखा तो है शमशान भी है कब्रगाह भी है और बहुत है दो गज जमीन है सुकून से जाने के लिये

आज की बुलेटिन में बस इतना ही कल फिर मिलेंगे तब तक के लिए शुभरात्रि। सादर ... अभिनन्दन।।

गुरुवार, 16 मार्च 2017

फागुनी बहार होली में - ब्लॉग बुलेटिन

नमस्कार साथियो,
सभी को होली की भंगाभंग अरररे, मेरा मतलब है कि होली की रंगारंग शुभकामनायें. जुबान तो बिना भांग के ही फिसल गई. असल में होली का हुडदंग और उस पर चुनावी चक्कर तो जुबान भी चक्कर खा गई. अरे भाई, इसमें हंसने वाली बात नहीं है. एक अच्छा भला आदमी गीली जगह पर जरा सी लापरवाही पर फिसल जाता है, ये बेचारी जुबान तो चौबीसों घंटे गीली रहती है, अब फिसल गई तो फिसल गई. हाँ तो जी, होली तो हो ली, अब? अब क्या, अब चुनावी चकल्लस खेली जा रही है. कहीं बहुमत है तो नेता नहीं, कहीं नेता है तो बहुमत नहीं. कहीं सीट ही नहीं है तो कहीं सीट पर बैठने वाले लोग नहीं हैं. कुछ इधर से भागकर उधर आये हैं, कुछ उधर से भागकर इधर आये हैं. कोई किसी व्यक्ति को दोष दे रहा है तो कोई मशीन को. जीतने वाले भी, हारने वाले भी सबके सब ऐसी हरकतें कर रहे हैं जैसे बौरा गए हों. और ऐसा सही भी हो सकता है क्योंकि होली का ये पर्व, फागुन का ये मौसम ऐसा मतवाला होता ही है कि अच्छे-अच्छों को बौरा देता है. कहते हैं न कि इस मौसम में बहुएँ भी भौजाई दिखाई देती हैं, बूढ़े भी जवान हो जाते हैं. इसी बौराएपन में सभी की होली मस्ती से गुजरी होगी, जिनकी चुनावी परिणामों के चक्कर में नहीं गुजर पाई उनकी भी मस्ती बनी रहे, ऐसी अपेक्षा है. 


ऐसे ही हुल्लड़ भरे माहौल में एक मजाकिया स्वरचित अनुभव आप सबके साथ शेयर करते हुए आज की बुलेटिन आपके समक्ष प्रस्तुत है, लीजिये.
++
प्रकृति में छाई रही फागुनी बहार होली में।
हम निठल्लों से पड़े रहे बेकार होली में।।
     संग के हमारे साथी रंगीन हो गये।
     हम तो बस ढूँड़ते रहे अपना यार होली में।।
करने को गाल लाल नया चेहरा मिले कोई।
एक भाभी को रंगेंगे कितनी-कितनी बार होली में।।
     निकल पड़े साइकिल से गलियों की खाक छानने।
     हो गया एक हसीन मुखड़े का दीदार होली में।।
नई थी मंजिल साथी भी नया-नया था।
रंगने को उसे कई तरीके बनाये जोरदार होली में।।
     कहीं गुलाल था उड़ता कहीं अबीर था घुला।
     हो रही थी हर ओर रंगों की बौछार होली में।।
बड़े धड़कते दिल से हाथों में रंग लिए हम।
पहुँचे नये साथी को रंगने उसके द्वार होली में।।
     दिल में डर का पुलिंदा बाँधे जोश में आगे बढ़े।
     हो गया उसकी अम्मा से सामना जारदार होली में।।
बँध गई घिग्घी डर से गुड़गोबर सब हो गया।
बनने लगे उसी बेरुखे चेहरे पर चित्रकार होली में।।
     होली के रंग में सराबोर तब तारे नजर आने लगे।
     पड़ी जब उसके बाप से जूतों की मार होली में।।
चमड़ा पदक प्राप्त करते देख मुस्कराकर निहारा उसने।
कहा हो मानो न बुरा किसी बात का यार होली में।।
     रोते, पड़ते, फटेहाल घर को वापस हो लिए।
     सोचा पकड़ कान भाभी है अपनी सदाबहार होली में।।

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बुधवार, 15 मार्च 2017

140 साल का हुआ टेस्ट क्रिकेट मैच और ब्लॉग बुलेटिन

सभी ब्लॉगर मित्रों को मेरा सादर नमस्कार।
टेस्ट क्रिकेट आज 140 साल का सफर पूरा कर चुका है और पहले टेस्ट से अब तक यह बदलाव के लंबे दौर से गुजरा है, न केवल नियम के मामले में बल्कि खिलाड़ियों के आचरण के संदर्भ में भी। खास अवसरों को अपने ही अंदाज में बयां करने वाले गूगल ने टेस्ट क्रिकेट के इस 'जन्मदिन' को अपने ही अंदाज में डूडल के माध्यम से याद किया है। आज हम आपको इतिहास के इस पहले टेस्ट मैच के बारे में बताने जा रहे हैं-

ऑस्ट्रेलिया ने जीता था पहला टेस्ट मैच
वैसे इंटरनेशनल क्रिकेट की बात करें, तो पहला मैच 1844 में संयुक्त राज्य अमरीका और कनाडा के बीच खेला गया था, जो एलिसियन फील्ड्स, हॉबोकन, न्यू जर्सी में खेला गया था, लेकिन क्रिकेट के लंबे फॉर्मेट यानी टेस्ट क्रिकेट की आधिकारिक शुरुआत 15 मार्च 1877 में ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड के बीच खेला गया था। ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड (एमसीजी) में खेले गए इस मैच में इंग्लैंड को 45 रनों से हार का सामना करना पड़ा था। इंग्लैंड ने अगला टेस्ट मैच जीतकर सीरीज को 1-1 से बराबर कर लिया था। यह मैच चार दिन तक चला था।

किसने बनाया पहला रन और पहला शतक
पहले टेस्ट मैच का टॉस ऑस्ट्रेलियाई टीम ने जीता और पहले बल्लेबाजी का फैसला किया। लगभग 1500 दर्शकों की उपस्थिति में कंगारू टीम के लिए पारी की शुरुआत दाएं हाथ के बल्लेबाज चार्ल्स बैनरमैन और दाएं हाथ के विकेटकीपर बल्लेबाज नैट थॉमसन ने की। जहां थॉमसन के लिए पहला ही आधिकारिक मैच बुरा रहा, वहीं बैनरमैन हीरो बनकर उभरे। उन्होंने पारी के पहले ओवर की दूसरी गेंद पर इतिहास का पहला रन लिया। इसके बाद तो वह रुके नहीं और पहले दिन का खेल खत्म होने तक 126 रन बनाकर नाबाद लौटे। इस प्रकार उन्होंने पहले ही टेस्ट मैच में शतक लगाने का गौरव हासिल कर लिया और क्रिकेट इतिहास में अपना नाम दर्ज करवा लिया।

पहला रिटायर्ट हर्ट होने वाला बल्लेबाज
चार्ल्स बैनरमैन ने दूसरे दिन भी शानदार बल्लेबाजी जारी रखी और 165 रन (18 चौके) तक पहुंच गए थे, लेकिन दुर्भाग्य से उनके दाएं हाथ की अंगुली में जॉर्ज यूलिएट की एक गेंद लग गई, जिससे उसमें फ्रैक्चर हो गया और उन्हें रिटायर्ड हर्ट होना पड़ा। इस प्रकार वह इतिहास के पहले रिटायर्ड हर्ट होने वाले बल्लेबाज भी बन गए। ऑस्ट्रेलिया ने पहली पारी में 245 रन बनाए। खास बात यह कि जहां बैनरमैन ने शतक लगाया, वहीं उनकी टीम का अन्य कोई भी बल्लेबाज 18 रन के आंकड़े को भी पार नहीं कर सका।

किसने लिया पहला विकेट
जहां पहले टेस्ट का पहला रन दूसरी गेंद पर बना था, वहीं टेस्ट इतिहास का पहला विकेट इंग्लैंड के गेंदबाज एलन हिल ने चौथे ओवर में लिया था। उन्होंने कंगारू बल्लेबाज नैट थॉमसन को बोल्ड किया था, जो महज एक रन ही बना पाए थे। ऑस्ट्रलिया के एडवर्ड ग्रेगरी शून्य (डक) पर आउट होने वाले पहले बल्लेबाज बने। साथ ही वह रनआउट होने वाले पहले बल्लेबाज भी बन गए।

मिडविंटर ने पहली बार लिए पारी में 5 विकेट
इस ऐतिहासिक टेस्ट मैच में कंगारू टीम ने 45 रन से जीत हासिल की। इंग्लैंड की टीम पहली पारी में 196 रन ही बना पाई। ऑस्ट्रेलिया के बिली मिडविंटर ने पहली बार पांच पारी में पांच विकेट झटके। दूसरी पारी में ऑस्ट्रेलियाई टीम 104 नर पर सिमट गई और इंग्लैंड को जीत के लिए 154 रन का लक्ष्य मिला, लेकिन वह भी संघर्ष नहीं कर पाई और 108 रन पर ही पूरी टीम लौट गई। कंगारू गेंदबाज टॉम केंडल ने 55 रन देकर सात विकेट चटकाए।

पहली सीरीज रही बराबर
भले भी इंग्लैंड की टीम पहले टेस्ट में हार गई, लेकिन उसने दूसरे टेस्ट में शानदार वापसी करते हुए ऑस्ट्रेलिया को चार विकेट से हराकर सीरीज 1-1 से बराबर कर ली। इस प्रकार टेस्ट इतिहास की पहली सीरीज बराबर रही। इसके अगले ही वर्ष, ऑस्ट्रेलिया ने पहली बार इंग्लैंड का दौरा किया।हालांकि इस दौरे में कोई टेस्ट मैच नहीं हुआ। फिर 1882 में सबसे प्रसिद्ध मैच ओवल पर खेला गया, जिससे एशेज सीरीज की शुरुआत हुई।

भारत ने 1932 में खेल पहला टेस्ट मैच
भारत ने 1932 में टेस्ट क्रिकेट खेलना शुरू किया। भारत ने अभी तक 510 टेस्ट मैच खेले हैं। इसमें से 138 में जीत हासिल की है और 158 में उसे हार मिली है। 213 मुकाबले ड्रॉ रहे हैं। एक मैच टाई रहा है। सबसे अधिक टेस्ट मैच खेलने का रिकॉर्ड इंग्लैंड टीम के नाम है।

इंग्लिश टीम ने खेले सबसे ज्यादा टेस्ट
इंग्लिश टीम ने 983 टेस्ट मैच खेले हैं। 351 में उसे जीत मिली है तो 289 में हार का सामना करना पड़ा। 343 मैच डॉ रहे। ऑस्ट्रेलिया ने 799 टेस्ट मैच खेले हैं, जिसमें से उसे 377 में जीत मिली है। कंगारू टीम महज 214 टेस्ट में हारी है और 2016 मैच ड्रॉ रहे।

बांग्लादेश ने खेले सबसे कम टेस्ट 
सबसे कम टेस्ट मैच की बात करें यह बांग्लादेश के नाम है। इस टीम ने अभी तक 99 टेस्ट मैच खेले हैं। बांग्लादेश 8 टेस्ट मैच जीत पाया है, जबकि 76 में उसे हार का सामना करना पड़ा और 15 मैच ड्रॉ रहे। दुनिया की कुल 10 टीमें टेस्ट क्रिकेट खेल रही हैं। इनमें ऑस्ट्रेलिया, बांग्लादेश, इंग्लैंड, इंडिया, न्यू जीलैंड, पाकिस्तान, साउथ अफ्रीका, श्रीलंका, वेस्ट इंडीज और जिम्बाब्वे शामिल हैं।

( साभार : http://www.samacharjagat.com/news/sports/first-test-match-google-celebrates-140th-anniversary-131307 )

अब चलते हैं आज की बुलेटिन की ओर....


अमर शहीद संदीप उन्नीकृष्णन की ४० वीं जयंती

फूलों में खुशबू कहाँ से आती है?

हंस और कौवा, प्रसांगिकता....

प्रश्न पूछो दिवस

नाक पै आफत

होली पर भंगेड़ियों के लिए जनहित में जारी वैधानिक चेतावनी

जीवन में सबसे महत्वपूर्ण क्या है?

इस शहर के लोग

भरोसा

मेरा एकांत

किस लिए


आज की बुलेटिन में बस इतना ही कल फिर मिलेंगे तब तक के लिए शुभरात्रि। सादर ... अभिनन्दन।।

मंगलवार, 14 मार्च 2017

ब्लॉगर होली मिलन ब्लॉग बुलेटिन पर

प्रिय ब्लॉगर मित्रों ,
प्रणाम |
 
आज हिन्दी ब्लॉगर मित्रों का एक होली मिलन समारोह आयोजित किया गया ... मजे की बात यह की इस आयोजन कोई कहीं भी आया गया नहीं ... फिर भी होली मिलन हो ही गया | देश - विदेश के लगभग ३३ ब्लॉगर मित्रों ने इस मे अपने अपने बंधु - बांधव और परिवार के साथ शिरकत की |

अब आप सोचे रहे होंगे कि कैसे !!??

तो देखिये यह चमत्कार कैसे हुआ !!
चित्र पर क्लिक कर बड़ा करें 
 ब्लॉग बुलेटिन की पूरी टीम की ओर से आप सभी को होली की हार्दिक मंगलकामनाएँ|
 

हैप्पी होली ... ;)
सादर आपका 
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कान्हा संग मनाये होली

ठाकुर जी को भोग

अतीत की होली के रंगीन आंचल की तलाश

यहाँ रंग कही गहराया है

538. जागा फागुन (होली के 10 हाइकु)

हमारी नव वर्ष आई है।

बुरा न मानो, होली है!

होली ठैरी होला ठैरा ठैरा तो ठैरा ठैरा ठैरा ठैरी छोड़ ठर्रा ठर्री क्यों कहना ठैरा

होली मुबारक.....

झमकोइया मोरे लाल !!

जोगीरा सारारारारा - जोगीरा सारारारारा....

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अब आज्ञा दीजिये ...

जय हिन्द !!!

सोमवार, 13 मार्च 2017

फागुन को फागुन बना जायेंगे !!!




थोड़े लाल अबीर आज भी बचे हैं 
कागज़ की छोटी सी पुड़िया में 
प्यार दुलार सम्मान के अबरखों के साथ ...
जब हम छोटे थे 
युवा हुए ... 
तब तक आमों पर आये मंजर की खुशबू
हवा में फागुनी सनसनाहट बरकरार थी
असली रंग तो हवाएं ही लगा जाती थीं !
फागुन के गीत
ढोलक की थाप पर
जब दरवाज़े पर बजते थे
तो खाने का स्वाद
प्यार की भांग से
नशीला हो उठता था
रिश्ते पड़ोस के भी
अपने से अधिक अपने होते थे
रंग लगे प्लेट में खाना
प्रगाढ़ता की मिसाल थी !!
जब धीरे धीरे रिश्ते परदेस गए
तो कागज़ में अबीर भेजकर होली मन जाती थी
फिर अचानक .... बिल्कुल अचानक ही
ये सारे रीति-रिवाज़ बेकार हो गए
पुआ,दहीबड़ा बनाना पहाड़ हो गया
बड़े शहरों में होलिका जली ही नहीं
लोगों का एक-दूजे संग मिलना बंद हो गया
बदले की भावना इस सीख से परे प्रबल हो गई
कि - होली में दुश्मन भी अपने रंग में आ जाते हैं
............. अब !!!
ये अबरखी अबीर उस दिन के इंतज़ार में हैं
कोई तो पहल करेगा लौटने की
फिर खेलेंगे होली
गायेंगे होली
नए नए कपड़ों में बसंत की तरह निकलेंगे
मीठे मीठे रस में भंग के नशे की तरह
शोर मचाएंगे
असली रंग में फिर से रंग जायेंगे
फागुन को फागुन बना जायेंगे !!!



रविवार, 12 मार्च 2017

होली के रंगों में सराबोर ब्लॉग बुलेटिन

नमस्कार साथियो
आप सभी को रंगोत्सव होली की हार्दिक शुभकामनायें.


होली के ठीक पहले देश के पाँच राज्यों के चुनाव परिणामों ने होली के साथ दीपावली मनाने का अवसर विजयी दलों के समर्थकों को उपलब्ध करवा दिया है. वर्तमान चुनाव परिणामों ने आश्चर्यजनक स्थितियों को जन्म दिया है. मतदाताओं ने उत्तर प्रदेश में इस बार प्रचंड बहुमत दिया, ये अपने आपमें आश्चर्य का विषय है. इसके अलावा प्रदेश के अन्य दो दल, जो कि जातिगत, धर्मगत आधार पर राजनीति करने के लिए जाने जाते हैं, वे आशा के अनुरूप प्रदर्शन नहीं कर सके. भले ही यही अंतिम निष्कर्ष न कहा जाये किन्तु इतना तो दिखाई दे रहा है कि प्रदेश के मतदाताओं ने इस बार जाति, मजहब को नाकारा ही है.


इसके अलावा यदि मणिपुर के चुनावों पर निगाह डालें तो वहाँ एक आश्चर्यजनक घटना ये हुई की विगत सोलह वर्षों से चले आ रहे अनशन को समाप्त करके राजनीति में उतरने वाली इरोम शर्मिला को महज नब्बे मत प्राप्त हुए. क्या समझा जाये इसे? क्या मणिपुर के मतदाताओं ने इरोम को नकार दिया? क्या वहाँ की जनता उस कानून के पक्ष में है जिसका विरोध इरोम करती रही हैं? क्या नक्सलियों का कोई खौफ इन चुनावों में इरोम को इतने कम मत दिलाने का कारक बना?


बहरहाल, चुनावों के सबके अपने-अपने आकलन होते हैं. अपने-अपने तर्क होते हैं. इस तर्क-वितर्क से इतर आकर रंगोत्सव का आनंद लिया जाये. रंग-बिरंगी होली के इस पर्व पर कोई प्रवचन नहीं, कोई समाज-सुधार जैसी बात नहीं. बस, खूब आनंद उठायें होली का, रंगों का, गुझिया का, रिश्तों का, संबंधों का. कमी आजकल बस आनंद की हो रही है.

तो पुनः होली की शुभकामनाओं के साथ आज की बुलेटिन आपके समक्ष प्रस्तुत है.

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