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शुक्रवार, 11 अगस्त 2017

देश के तेरहवें उपराष्ट्रपति बने एम वेंकैया नायडू

प्रिय ब्लॉगर मित्रों,
प्रणाम |

चित्र गूगल से साभार
एम वेंकैया नायडू आज देश के तेरहवें उपराष्ट्रपति बन गए। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने राष्ट्रपति भवन के दरबार हाल में गरिमापूर्ण समारोह में उन्हें उपराष्ट्रपति पद की शपथ दिलाई। नायडू ने हिन्दी में शपथ ग्रहण की। इस अवसर पर निवर्तमान उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह, वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी, राज्यसभा में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद, कई केन्द्रीय मंत्री, विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता और कई अन्य गणमान्य व्यक्ति मौजूद थे।

शपथ ग्रहण से पहले अड़सठ वर्षीय नायडू ने राजघाट जाकर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की समाधि पर श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने भारतीय जनसंघ के संस्थापकों में से एक पंडित दीनदयाल उपाध्याय तथा महान स्वतंत्रता सेनानी एवं देश के पहले गृहमंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। उपराष्ट्रपति के नाते नायडू राज्यसभा के नए सभापति भी बन गए हैं। शपथ ग्रहण के कुछ ही देर बाद वह संसद भवन पहुंचे, जहां उन्होंने  राज्यसभा के उपसभापति पी जे कुरियन, संसदीय कार्यमंत्री अनन्त कुमार, सदन में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के नेता डी राजा, द्रविड़ मुनेत्र कषगम के नेता त्रिची शिवा तथा कुछ अन्य दलों के नेताओं ने उनकी अगवानी की।

कुरियन और अनंत कुमार ने उन्हें गुलदस्ता भेंटकर उनका स्वागत किया। उसके बाद सभी नेता उन्हें ससम्मान सभापति के कक्ष में ले गये। बाद में नायडू ने राज्यसभा की कार्यवाही का संचालन भी किया। नायडू भारतीय जनता पार्टी के ऐसे दूसरे नेता हैं, जो उपराष्ट्रपति पद पर पहुंचे। उनसे पहले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन सरकार के पहले कार्यकाल के दौरान भाजना नेता भैरों सिंह शेखावत इस पद के लिए चुने गये थे। नायडू के उपराष्ट्रपति बनने के साथ ही देश के चार सर्वोच्च पदों पर बीजेपी से जुड़े नेता आसीन हो गए हैं। 

देश के नए उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू की राजनीतिक यात्रा छात्र जीवन से ही शुरू हो गई थी और वह सियासत के कई सोपान तय करते हुए आज इस मुकाम तक पहुंचे हैं। एक जुलाई 1949 को आंध्रप्रदेश के नेल्लोर जिले के छवतपलम में जन्मे वेंकैया नायडू की पहचान हमेशा एक 'आंदोलनकारी' के रूप में रही है। वह 1972 में 'जय आंध्र आंदोलन' के दौरान पहली बार सुर्खियों में आए। 

आपातकाल के दौरान जेल गए
1974 में आंध्रप्रदेश में जयप्रकाश नारायण छात्र संघर्ष समिति की भ्रष्टाचार निरोधक इकाई के संयोजक रहे। उन्होंने लोकनायक जयप्रकाश नारायण की विचारधारा से प्रभावित होकर आपातकाल के विरुद्ध संघर्ष में हिस्सा लिया और उन्हें जेल भी जाना पड़ा। आपातकाल के बाद वे 1977 से 198० तक जनता पार्टी की युवा शाखा के अध्यक्ष रहे।

दो बार भाजपा के अध्यक्ष रहे        
नायडू भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष रहने के अलावा अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार में ग्रामीण विकास मंत्री रहे। उन्होंने मोदी सरकार में शहरी विकास मंत्रालय के अलावा संसदीय कार्य मंत्री और सूचना प्रसारण मंत्रालय का भी कामकाज संभाला।राजनीतिक सक्रियता और कुशल वक्तृत्व की बदौलत वेंकैया नायडू 1978 और 1983 में नेल्लोर जिले के उदयगिरि विधानसभा क्षेत्र से विधायक चुने गए और कुछ ही समय में आंध्रप्रदेश में भाजपा का चेहरा बन गए। वह 1996 से 2000 तक भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता रहे। जना कृष्णमूर्ति के बाद वह 2002 में भाजपा के अध्यक्ष बने। 
                         
चार बार राज्यसभा के लिए चुने गए
28 जनवरी 2004 को वह फिर इस पद के लिए निर्विरोध चुने गए लेकिन उसी वर्ष लोकसभा चुनाव में भाजपा नित राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की हार के बाद उन्होंने 18 अक्टूबर 2004 को अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था। नायडू कनार्टक से 1998 में राज्यसभा के सदस्य रहने के बाद 2004 और 2009 में फिर संसद के उच्च सदन के लिए चुने गए। वह 29 मई 2016 को राजस्थान से राज्यसभा के लिए चुने गए।

ग्रामीण विकास मंत्री के रूप में उल्लेखनीय कार्य
ग्रामीण विकास मंत्री के रूप में उन्होंने ग्रामीण क्षेत्र के विकास में सुधारों को तेजी से लागू किया तथा प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना समेत कई अन्य योजनाएं भी शुरू कीं। नायडू का संबंध हालांकि दक्षिण भारत से है लेकिन वह हिन्दी में भी धाराप्रवाह भाषण देने की क्षमता रखते हैं। उन्हें इस साल 17 जुलाई को राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन का उपराष्ट्रपति पद का उम्मीदवार घोषित किया गया था।

ब्लॉग बुलेटिन टीम और हिन्दी ब्लॉग जगत की ओर से हम महामहिम उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू जी को हार्दिक शुभकामनाएं देते हैं |
सादर आपका
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अंसारी साहब…शहर के कुछ बुत ख़फ़ा हैं इसलिये, चाहते हैं हम उन्हें सज़दा करें

खाली हसरतें

एक शेर

इस नये इतिहास में हमारा स्थान कहाँ होगा

नेताओं की पेंशन तो बनती है

जो विशाल है वही विकास है

लालच की सजा

हामिद अंसारी का दुर्भाग्यपूर्ण बयान

मुण्डन

फलफूल रही है नफरत की राजनीति

अमर शहीद खुदीराम बोस जी की १०९ वीं पुण्यतिथि

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अब आज्ञा दीजिये ...

जय हिन्द !!!

4 टिप्पणियाँ:

सुशील कुमार जोशी ने कहा…

बहुत सुन्दर प्रस्तुति शिवम जी।

yashoda Agrawal ने कहा…

काफी दिनों के बाद आई हूँ यहाँ
लाजवाब प्रस्तुति
सादर

Alaknanda Singh ने कहा…

धन्‍यवाद शिवम मिश्रा साहब मेरे ब्‍लॉगपोस्‍ट को इस बुलेटिन में शामिल करने के लिए

शिवम् मिश्रा ने कहा…

आप सब का बहुत बहुत आभार |

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